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  • सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात से हटाई पाबंदी, बेहतर उत्पादन और स्टॉक के बीच बड़ा फैसला


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने गेहूं से बने कई प्रमुख उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं के आटे को प्रतिबंधित निर्यात श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। अब इन उत्पादों का निर्यात बिना पहले लगाए गए प्रतिबंधों के किया जा सकेगा।

    विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में निर्यात नीति में किए गए इस बदलाव की जानकारी दी गई। इस फैसले से गेहूं आधारित उत्पादों के कारोबार से जुड़े निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और वे मांग के अनुसार इन उत्पादों की विदेशी बाजारों में आपूर्ति कर सकेंगे।

    सरकार ने वर्ष 2022 में घरेलू खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गेहूं तथा गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। 13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त श्रेणी से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया था।

    इसके बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू किया गया था। उस समय वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ था। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग में बढ़ोतरी हुई और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी थी।

    सरकार ने उस समय देश की बड़ी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की कीमतों को नियंत्रित रखने को प्राथमिकता दी थी। हालांकि, प्रतिबंधों के दौरान कुछ विशेष परिस्थितियों में गेहूं से बने चुनिंदा उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी जाती रही।

    अब परिस्थितियों में बदलाव के बाद सरकार ने निर्यात नीति में ढील देने का फैसला किया है। इस वर्ष फरवरी में बेहतर स्टॉक उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त पांच लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि में देश में गेहूं और कुल खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 35.7732 करोड़ टन था।

    फसलवार आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 15.0184 करोड़ टन के मुकाबले अधिक है। इसी तरह गेहूं का उत्पादन भी बढ़ने का अनुमान है।

    वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 11.7945 करोड़ टन था। उत्पादन में इस बढ़ोतरी और बेहतर स्टॉक उपलब्धता ने सरकार को गेहूं आधारित उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में बदलाव की गुंजाइश दी है।

    नीति में बदलाव से आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ाने का अवसर भी बनेगा। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता पर सरकार की निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

  • चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    नई दिल्ली । देश में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी को लेकर एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच कृषि और चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने अलग तस्वीर पेश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि गन्ने के उत्पादन, गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में आई कमी है। उनका कहना है कि सरकार चीनी की घरेलू जरूरत, एथेनॉल उत्पादन और निर्यात के बीच लगातार संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।

    नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कानपुर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन के अनुसार देश में हर वर्ष घरेलू खपत के लिए करीब 280 लाख टन चीनी की आवश्यकता होती है। इसके बाद उपलब्ध अतिरिक्त मात्रा में से ही एथेनॉल उत्पादन या निर्यात के लिए चीनी के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है। चालू वर्ष में करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर मात्रा एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई, जबकि लगभग सात लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है।

    विशेषज्ञ के मुताबिक चालू वर्ष में देश का चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहा है और इसके साथ पिछले वर्ष का कैरी-ओवर स्टॉक भी उपलब्ध था। सामान्य परिस्थितियों में देश में पर्याप्त बफर स्टॉक रखा जाता है, ताकि उत्पादन या आपूर्ति में अचानक कमी आने की स्थिति में घरेलू बाजार प्रभावित न हो। इसलिए केवल एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन को मौजूदा कीमत वृद्धि का सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने एथेनॉल को चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बदलाव वाला क्षेत्र बताया। पहले जब देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग से काफी अधिक हो जाता था, तब अतिरिक्त चीनी की वजह से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ता था। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी और किसानों को गन्ने का भुगतान मिलने में भी परेशानी पैदा होती थी। निर्यात एक विकल्प जरूर था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और प्रतिस्पर्धा के कारण यह हमेशा लाभदायक नहीं रहता था।

    ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने की नीति ने उद्योग को एक वैकल्पिक बाजार दिया। इससे चीनी की अधिकता को नियंत्रित करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिला और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिली। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार उत्पादन के अनुमान और घरेलू जरूरतों को देखते हुए समय-समय पर एथेनॉल डायवर्जन तथा चीनी निर्यात से जुड़े फैसले ले सकती है।

    बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के गन्ना शोध विभाग के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने मौजूदा स्थिति में गुणवत्तापूर्ण गन्ने के उत्पादन और चीनी रिकवरी को महत्वपूर्ण कारक बताया। उनके अनुसार उत्तर भारत में इस समय गन्ना पेराई का अपेक्षाकृत कमजोर दौर चल रहा है। मुख्य पेराई सीजन शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

    गन्ने की फसल अवधि और रिकवरी में राज्यों के बीच अंतर भी चीनी उत्पादन को प्रभावित करता है। उत्तर भारत में किसान सामान्यतः करीब 10 से 11 महीने में तैयार होने वाली फसल लेते हैं, जबकि महाराष्ट्र में गन्ना लगभग 13 से 14 महीने और तमिलनाडु में कुछ परिस्थितियों में 18 महीने तक खेत में रहता है। लंबी अवधि से गन्ने में चीनी संचय और रिकवरी बेहतर हो सकती है।

    डॉ. हरिओम के अनुसार उत्तर भारत में किसान धान की कटाई के बाद अक्टूबर-नवंबर में गन्ने की खेती शुरू करने के साथ गेहूं, सरसों, मसूर, चना और सब्जियों जैसी अंतरवर्ती फसलों का विकल्प अपना सकते हैं। इससे अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ सकते हैं और गन्ने की खेती की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार की संभावना बन सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी की कीमतों को समझने के लिए केवल एथेनॉल डायवर्जन पर ध्यान देने के बजाय गन्ने के उत्पादन, रिकवरी, पेराई चक्र और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को भी समान रूप से देखना जरूरी है।

  • मखाने की खेती को मिल रहा तकनीक और निर्यात का सहारा, उत्पादन बढ़ने से बिहार सहित किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    मखाने की खेती को मिल रहा तकनीक और निर्यात का सहारा, उत्पादन बढ़ने से बिहार सहित किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    नई दिल्ली ।भारत का मखाना क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की दिशा में बढ़ रहा है। बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर बाजार कीमत, उत्पादन में वृद्धि और निर्यात के विस्तार के कारण वर्ष 2029-30 तक देश का मखाना बाजार 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मखाना अब केवल पारंपरिक खाद्य उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और प्रीमियम स्नैक के रूप में घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहा है।

    वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इसी अवधि में इसकी औसत कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। कीमतों में यह वृद्धि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग, प्रीमियम उत्पादों की लोकप्रियता और सीमित आपूर्ति जैसे कारणों से जुड़ी है।

    मखाने को कम वसा और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थ के रूप में देखा जाता है। पौध-आधारित भोजन और क्लीन-लेबल उत्पादों की ओर बढ़ते वैश्विक रुझान ने भी इसकी मांग को मजबूत किया है। घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी भारतीय मखाने की खपत बढ़ रही है, जिससे किसानों और प्रसंस्करण से जुड़े कारोबार के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    वर्ष 2024-25 में देश में मखाने का कुल उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा था। इस दौरान औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान में उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन और उत्पादकता 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर पहुंचने की संभावना है। उत्पादन और उत्पादकता में यह बढ़ोतरी खेती के आधुनिक तरीकों के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है।

    मखाना उत्पादन में बिहार देश का प्रमुख राज्य है। वर्ष 2025-26 में बिहार का उत्पादन लगभग 60 हजार मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। राज्य में औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे बड़ी होने के कारण मखाना क्षेत्र के विस्तार का सीधा लाभ राज्य के किसानों को मिलने की संभावना है।

    पारंपरिक तौर पर मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब फील्ड सिस्टम खेती और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों से पैदावार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे खेती के दायरे का विस्तार करने और उत्पादन से जुड़े जोखिम कम करने में भी मदद मिल रही है।

    भारत हर साल 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है। इसमें करीब 40 प्रतिशत हिस्सा निर्यात होता है, जो लगभग 23 हजार से 25 हजार मीट्रिक टन के बराबर है। शेष उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में होती है। घरेलू मखाना बाजार ने 2021-22 से 2024-25 के बीच करीब 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है।

    सरकार ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके अलावा 2025-26 से 2030-31 के लिए 476.03 करोड़ रुपये की मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज, किसानों का कौशल विकास, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।

    मखाना क्षेत्र में उत्पादन और बाजार दोनों के विस्तार से किसानों को बेहतर कीमत और नए बाजार मिलने की संभावना है। यदि उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रसंस्करण क्षमता में लगातार सुधार होता है, तो भारतीय मखाना वैश्विक प्रीमियम स्नैक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • रिकॉर्ड प्रोडक्शन के बावजूद मारुति की 1.6 लाख कारों की बुकिंग लंबित, मांग के आगे सीमित डीलर इन्वेंट्री

    रिकॉर्ड प्रोडक्शन के बावजूद मारुति की 1.6 लाख कारों की बुकिंग लंबित, मांग के आगे सीमित डीलर इन्वेंट्री

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने जुलाई महीने में उत्पादन और बिक्री के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने एक ही महीने में अब तक का सर्वाधिक वाहन उत्पादन दर्ज करते हुए घरेलू बाजार में रिकॉर्ड स्तर की बिक्री भी हासिल की। इसके बावजूद ग्राहकों की मजबूत मांग के कारण डीलर नेटवर्क में उपलब्ध वाहनों का स्टॉक सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है। कंपनी के अनुसार बड़ी संख्या में ग्राहकों की बुकिंग अभी भी लंबित है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

    कंपनी ने जुलाई के दौरान कुल 2,48,845 वाहनों का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष इसी महीने के 1,87,073 वाहनों की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले कंपनी का सर्वोच्च मासिक उत्पादन मार्च 2026 में दर्ज किया गया था, जब 2,31,933 इकाइयों का निर्माण हुआ था। नए आंकड़ों ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है और कंपनी की उत्पादन क्षमता में हालिया विस्तार का प्रभाव साफ दिखाई दिया है।

    जुलाई में मारुति सुजुकी ने घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की अब तक की सबसे अधिक थोक बिक्री दर्ज की। कंपनी ने 1,96,203 यात्री वाहन डीलरों तक पहुंचाए, जो पिछले वर्ष जुलाई के मुकाबले करीब 43 प्रतिशत अधिक है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों को शामिल करने पर कुल घरेलू बिक्री 2,00,123 इकाइयों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। लगातार बढ़ती मांग ने कंपनी की बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।

    रिकॉर्ड उत्पादन और बिक्री के बावजूद कंपनी के डीलर नेटवर्क में उपलब्ध वाहनों का स्टॉक सामान्य स्तर से काफी कम बना हुआ है। वर्तमान में डीलरों के पास औसतन केवल 16 दिनों की इन्वेंट्री उपलब्ध है, जबकि ऑटो उद्योग में सामान्य रूप से लगभग 30 दिनों का स्टॉक पर्याप्त माना जाता है। इसका अर्थ है कि बाजार में मांग की गति उत्पादन और आपूर्ति की तुलना में अधिक बनी हुई है। कंपनी के पास लगभग 1.6 लाख वाहनों की बुकिंग लंबित है, जिन्हें आने वाले समय में ग्राहकों तक पहुंचाया जाएगा।

    मॉडलवार उत्पादन पर नजर डालें तो कॉम्पैक्ट कारों और यूटिलिटी वाहनों दोनों श्रेणियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। ऑल्टो और एस-प्रेसो जैसे एंट्री-लेवल मॉडलों का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा। वहीं बलेनो, सेलेरियो और स्विफ्ट जैसे लोकप्रिय कॉम्पैक्ट मॉडलों का उत्पादन एक लाख से अधिक इकाइयों तक पहुंच गया। ब्रेजा, अर्टिगा और फ्रॉन्क्स जैसे यूटिलिटी वाहनों की मांग भी मजबूत बनी रही और इनके उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा ईको वैन और सुपर कैरी जैसे वाणिज्यिक मॉडलों के उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिली।

    कंपनी की उत्पादन क्षमता में हाल ही में और विस्तार हुआ है। गुजरात के हंसलपुर स्थित चौथे संयंत्र में उत्पादन शुरू होने के बाद हरियाणा और गुजरात में मौजूद सभी विनिर्माण इकाइयों की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 29 लाख वाहन हो गई है। इस विस्तार से भविष्य में बढ़ती मांग को पूरा करने और ग्राहकों की प्रतीक्षा अवधि कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जुलाई का प्रदर्शन सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उत्पादन, बिक्री और लंबित बुकिंग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है। आने वाले महीनों में यदि उत्पादन इसी गति से जारी रहता है तो डीलर इन्वेंट्री में सुधार आने के साथ ग्राहकों की प्रतीक्षा अवधि भी कम हो सकती है। फिलहाल कंपनी का रिकॉर्ड प्रदर्शन भारतीय यात्री वाहन बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ करता है।

  • डॉ. हेडगेवार के जीवन पर केंद्रित महानाट्य का भोपाल के रविंद्र भवन में मंचन

    डॉ. हेडगेवार के जीवन पर केंद्रित महानाट्य का भोपाल के रविंद्र भवन में मंचन


    डॉ. हेडगेवार ने देशभक्ति के साथ दिया समानता का विचार : मोहन यादव

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रवादी विचारधारा के संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देशभक्ति के साथ समानता का दर्शन दिया था। वे देश को मिलने जा रही स्वतंत्रता को कायम रखने के महत्व को पहले ही जान चुके थे, इस नाते उन्होंने राष्ट्र हित में अपनी भूमिका का निर्वाह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम भोपाल के रवींद्र भवन में संस्कार भारती द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष होने के अवसर पर हुए महानाट्य “युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार” के मंचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार दूरदर्शी सोच के साथ रचनात्मक प्रकल्प संचालित करते थे। उनके समता के भाव को आज राष्ट्र भी अंगीकार कर रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल भी इस भाव को दृष्टिगत रखते हुए की गई है।

    उन्होंने कहा कि भारत की पहचान एक विधान है। हमारा मूल दर्शन समानता का है। डॉ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता के पहले चुनौती भरे दौर में राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र सर्वोपरि के भाव का प्रकटीकरण ही नहीं किया, बल्कि लाखों लाख नागरिकों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा भी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कार भारती को डॉ. हेडगेवार के योगदान को नाटक के माध्यम से मंचित किये जाने के लिए बधाई दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित होने का उल्लेख करते हुए बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।

    कार्यक्रम को राष्ट्रीय सेवक संघ के पदाधिकारी हेमंत मुक्तिबोध ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्र को वैभव की ओर ले जाने के भरसक प्रयास किए। यह नाटक उनके जीवन के समर्पण,राष्ट्र निष्ठा और कर्म आधारित जीवन के स्वरूप को सामने लाने का माध्यम है।

    इस अवसर पर मंच पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक पांडे, फिल्म अभिनेता और रंगमंच निर्देशक राजीव वर्मा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में शशि भाई सेठ, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, संस्कृति संचालक एनपी नामदेव और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया। आभार प्रदर्शन रविंद्र सहस्त्रबुद्धे ने किया।

    कार्यक्रम में नागपुर की संस्था नादब्रह्म के कलाकारों द्वारा डॉ. हेडगेवार के जीवन और कार्यों पर केंद्रित महानाट्य प्रस्तुत किया गया। नागपुर की नादब्रम्ह संस्था द्वारा तैयार इस नाटक का निर्देशन सुबोध सुरजीकर ने किया। नाटक के लेखक डॉ. अजय प्रधान हैं। संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से हुए नाटक में दक्ष कलाकारों ने प्रभावी अभिनय कर नाट्य प्रस्तुति को सफल बनाया। देश के अनेक नगरों में नाटक का मंचन हुआ है।

  • 7 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेंगे गोविंदा, नई फिल्म 'रूपा' से करेंगे दमदार कमबैक; बोले- लोगों ने खत्म मान लिया था,

    7 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेंगे गोविंदा, नई फिल्म 'रूपा' से करेंगे दमदार कमबैक; बोले- लोगों ने खत्म मान लिया था,

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता गोविंदा ने लंबे अंतराल के बाद अपने प्रशंसकों को बड़ी खुशखबरी दी है। करीब सात वर्षों तक फिल्मों से दूर रहने के बाद उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘रूपा’ का ऐलान कर दिया है। इस फिल्म के जरिए वह एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे। खास बात यह है कि गोविंदा इस परियोजना में केवल अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि निर्माता के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिल्म की घोषणा के दौरान उन्होंने अपने करियर, संघर्ष और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

    फिल्म की घोषणा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गोविंदा ने कहा कि समय-समय पर लोगों ने यह मान लिया था कि अब उनकी फिल्मी यात्रा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। अभिनेता ने विश्वास जताया कि ‘रूपा’ उनके करियर में एक नई शुरुआत साबित होगी और दर्शकों को एक अलग अनुभव देने में सफल रहेगी। उन्होंने कहा कि हर कलाकार के जीवन में चुनौतीपूर्ण दौर आता है, लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वापसी हमेशा संभव होती है।

    गोविंदा ने बताया कि ‘रूपा’ केवल मनोरंजन तक सीमित फिल्म नहीं होगी, बल्कि इसमें ऐसा संदेश भी होगा जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा। उनके अनुसार फिल्म की कहानी सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास के इर्द-गिर्द बुनी गई है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखें और लगातार प्रयास करें तो सफलता अवश्य मिलती है। इसी सोच को फिल्म के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    फिल्म की एक और खास बात नई अभिनेत्री रानी स्वर्णकार का बॉलीवुड में पदार्पण है। गोविंदा ने उन्हें फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि नए कलाकारों को अवसर देना भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि रानी अपने अभिनय से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाने में सफल होंगी। फिल्म के जरिए एक अनुभवी अभिनेता और एक नई प्रतिभा की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आएगी।

    कार्यक्रम के दौरान गोविंदा ने अपनी जिंदगी में अंक 14 के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह संख्या उनके जीवन में कई बार शुभ साबित हुई है। अभिनेता के अनुसार कम उम्र से ही उनका इस अंक पर विश्वास रहा है और करियर के कई महत्वपूर्ण पड़ाव इससे जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और संघर्ष दोनों का दौर आया, लेकिन हर अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अब वह नए उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ अपने फिल्मी सफर की नई शुरुआत कर रहे हैं।

    गोविंदा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में की थी और इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार अभिनय और बेहतरीन डांस शैली के कारण उन्होंने लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। 1990 के दशक में वह हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाते थे और उनकी कई फिल्में व्यावसायिक रूप से बड़ी सफल रहीं। हालांकि, बाद के वर्षों में उनकी फिल्मों की संख्या कम होती गई और वह लंबे समय तक बड़े पर्दे से दूर रहे।

    अब ‘रूपा’ के साथ गोविंदा की वापसी को उनके प्रशंसकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अभिनेता को उम्मीद है कि यह फिल्म न केवल उनके करियर को नई दिशा देगी, बल्कि दर्शकों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश छोड़ने में सफल होगी। लंबे अंतराल के बाद उनकी वापसी को लेकर फिल्म प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ गई है और अब सभी की निगाहें इस नई परियोजना की रिलीज पर टिकी हैं।

  • रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे फिल्म उद्योग और प्रशंसकों के बीच हलचल मचा दी है। अभिनेता रणवीर सिंह के साथ चल रहे ‘डॉन 3’ विवाद की सुर्खियों के बीच, मशहूर निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर अब बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के साथ एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना बना रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दिग्गज एक बड़े बजट की पीरियोडिक ड्रामा फिल्म के लिए हाथ मिला सकते हैं, जो यदि धरातल पर उतरती है, तो सिनेमाई इतिहास में पहली बार होगा जब सलमान खान और फरहान अख्तर किसी प्रोजेक्ट में एक साथ नजर आएंगे।

    ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सुपरस्टार सलमान खान और एक्सेल एंटरटेनमेंट के कर्ता-धर्ता फरहान अख्तर पिछले एक महीने से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और उनके बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि सलमान खान को फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्ट और इसकी मूल अवधारणा काफी पसंद आई है और उन्होंने इस ऐतिहासिक कहानी में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बताया जा रहा है कि फरहान जिस फिल्म को लेकर सलमान के साथ चर्चा कर रहे हैं, वह एक विशाल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित दो भागों (टू-पार्ट्स) में रिलीज होने वाली फिल्म होगी।

    हालांकि, दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत अभी अपने बेहद शुरुआती चरण में है और अभी तक किसी भी तरह का कानूनी या लिखित पेपर वर्क शुरू नहीं किया गया है। शुरुआती सहमति बनने के बाद दोनों ही पार्टियां इस अनूठे सहयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ी आधिकारिक घोषणा और विस्तृत जानकारी इस साल के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फिल्म के निर्देशक का नाम तय नहीं किया गया है, क्योंकि फरहान अख्तर इस प्रोजेक्ट को केवल प्रोड्यूस (निर्माण) करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस फिल्म की शूटिंग अगले साल यानी 2027 के शुरुआती महीनों में शुरू की जा सकती है।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फरहान अख्तर और रणवीर सिंह के बीच ‘डॉन 3’ को छोड़ने को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। दरअसल, रणवीर सिंह द्वारा अचानक इस बहुप्रतीक्षित फिल्म से कदम पीछे खींचने के बाद फरहान ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज (FWICE) में अभिनेता की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद संगठन ने असहयोग का निर्देश भी जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस बीच उद्योग में ऐसी अफवाहें भी उड़ी थीं कि सलमान खान ने दोनों के बीच सुलह कराने की मध्यस्थता की है, लेकिन बाद में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

    दूसरी ओर, सलमान खान इन दिनों अपने अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। वह जल्द ही निर्देशक अपूर्व लाखिया की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (जिसका पूर्व नाम बैटल ऑफ गलवान था) में कर्नल बी संतोष बाबू की मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम किरदार में हैं। ऐसे में फरहान अख्तर के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनने वाली इस नई पीरियोडिक फिल्म से जुड़ने की खबर ने इंडस्ट्री का पारा बढ़ा दिया है, हालांकि इस संबंध में अभी तक सलमान खान या फरहान अख्तर की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि साझा नहीं की गई है।

  • साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

    साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सर्वकालिक महान विभूतियों में शुमार और भारत रत्न से सम्मानित कर्नाटक संगीत की दिग्गज गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गौरवशाली जीवन यात्रा जल्द ही बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है। इस ऐतिहासिक और संगीत से ओतप्रोत बायोपिक फिल्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमाई गलियारों और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य किरदार अर्थात एमएस सुब्बुलक्ष्मी की प्रतिष्ठित भूमिका को पर्दे पर जीवंत करने के लिए दक्षिण भारतीय और हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    इस बहुप्रतीक्षित बायोपिक फिल्म के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं की जिम्मेदारी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक गौतम तिन्ननुरी संभाल रहे हैं। गौतम तिन्ननुरी को समीक्षकों द्वारा प्रशंसित और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही फिल्म ‘जर्सी’ के निर्देशन के लिए विशेष पहचान हासिल है। प्राप्त विवरण के अनुसार, निर्देशक पिछले एक लंबे समय से महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, उनके संगीत के सफर और उनके ऐतिहासिक योगदान पर गहन शोध (रिसर्च) कर रहे हैं, ताकि कहानी को पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

    फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के चयन को लेकर वर्तमान में फिल्म उद्योग के भीतर गहरा सस्पेंस बना हुआ है, जिसके कारण विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। तेलुगु सिनेमाई मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार, रश्मिका मंदाना को इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए लगभग तय माना जा रहा है और हाल ही में उनके आवास पर इस किरदार से जुड़े पहनावे और स्वरूप को लेकर एक गुप्त लुक टेस्ट भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। रश्मिका के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की खबर ने उनके प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है।

    हालांकि, इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए रश्मिका मंदाना के अलावा इंडस्ट्री की कुछ अन्य प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के नाम भी पूर्व में सामने आते रहे हैं। कुछ समय पहले तक यह चर्चा बेहद गर्म थी कि अपनी संजीदा अदाकारी के लिए मशहूर साई पल्लवी इस बायोपिक का हिस्सा होंगी और उन्होंने इस किरदार की तैयारी के लिए बकायदा कर्नाटक संगीत की बुनियादी बारीकियां सीखना भी शुरू कर दिया था। इसके बाद बीच में उभरती हुई अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत को भी इस रोल के लिए साइन किए जाने की खबरें आईं। चूंकि फिल्म के निर्माताओं ने अभी तक कास्टिंग को लेकर कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    दूसरी ओर, रश्मिका मंदाना वर्तमान में अपनी एक अन्य बड़ी और आधुनिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं। हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए ‘कॉकटेल 2’ के आधिकारिक ट्रेलर को दर्शकों और नेटिजन्स की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिसके लिए रश्मिका ने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म आगामी 19 जून 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें रश्मिका के साथ शाहिद कपूर और कृति सेनन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस व्यावसायिक फिल्म के तुरंत बाद एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत की बायोपिक रश्मिका के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।