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  • आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और लागत संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2026 का समापन मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ किया है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई 500 कंपनियों के संयुक्त शुद्ध मुनाफे में चौथी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियां बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भी अपनी परिचालन क्षमता और लाभप्रदता बनाए रखने में सफल रही हैं।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत राजस्व वृद्धि, बेहतर नकदी प्रवाह, संतुलित बैलेंस शीट और विभिन्न क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी ने भारतीय कॉरपोरेट जगत को मजबूती प्रदान की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की आय वृद्धि की संभावनाएं और अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    विशेष रूप से गैर-वित्तीय कंपनियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों की कुल राजस्व वृद्धि बढ़कर 12.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.2 प्रतिशत थी। यह सुधार दर्शाता है कि मांग में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का लाभ कंपनियों को व्यापक स्तर पर मिला है। हालांकि परिचालन लाभ मार्जिन यानी ईबीआईटीडीए मार्जिन मामूली रूप से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गया, फिर भी कंपनियों की कमाई की गुणवत्ता मजबूत बनी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, चौथी तिमाही के दौरान लाभ वृद्धि केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक रूप से विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दिया। बीएसई 500 की लगभग 59 प्रतिशत कंपनियों ने अपने मुनाफे में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जबकि 39 प्रतिशत कंपनियों का लाभ 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में कमाई का सुधार व्यापक और टिकाऊ स्वरूप ले रहा है।

    कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहे। निफ्टी की लगभग 48 प्रतिशत कंपनियों ने विश्लेषकों की अपेक्षाओं से अधिक प्रदर्शन किया, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा केवल 32 प्रतिशत था। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और यह संकेत मिला है कि कंपनियों की बुनियादी स्थिति अनुमान से कहीं अधिक सुदृढ़ बनी हुई है।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र ने सबसे प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। इस क्षेत्र की आय में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसे बेहतर उपभोक्ता मांग और खर्च में वृद्धि का समर्थन मिला। वहीं उपभोक्ता आवश्यक वस्तु क्षेत्र ने भी 15 प्रतिशत से अधिक की आय वृद्धि दर्ज कर स्थिर मांग का संकेत दिया।

    वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में चुनौतियों के बावजूद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने 13.4 प्रतिशत की आय वृद्धि हासिल की। वित्तीय क्षेत्र ने भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए 13.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और बाजार की कुल कमाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर इस तिमाही के सबसे बड़े प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरे। ऊर्जा क्षेत्र की आय में 23.8 प्रतिशत और मटेरियल क्षेत्र की आय में 23.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि उत्पादन और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

    कंपनियों के आकार के आधार पर देखें तो मिडकैप कंपनियों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 34.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि लार्जकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का लाभ क्रमशः 10.3 प्रतिशत और 10.4 प्रतिशत बढ़ा। यह प्रदर्शन बताता है कि मध्यम आकार की कंपनियां वर्तमान कारोबारी माहौल में तेजी से अवसरों का लाभ उठाने में सफल रही हैं और निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

  • कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर

    कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र और दूरदर्शी विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लाभप्रद, टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित करना आवश्यक है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश राज्य किसानों के हित और समग्र कृषि विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ।

    उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

    मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।