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  • भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।भारत के खिलाफ भ्रामक सूचनाओं और झूठे प्रचार के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिशें लगातार सामने आती रही हैं। एक बार फिर ऐसा मामला चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के नाम से एक कथित बयान को वायरल कर भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई। दावा किया गया कि रक्षा मंत्री ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को लेकर भारत के समर्थन से जुड़ा बयान दिया है। यह खबर तेजी से प्रसारित होने लगी और इसे कई लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि जांच पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह दावा पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे था। इसके बाद पूरे मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

    जांच के दौरान यह सामने आया कि रक्षा मंत्री द्वारा ऐसा कोई बयान कभी दिया ही नहीं गया था। वायरल सामग्री को तथ्यों से जोड़कर देखने पर उसमें कई विसंगतियां दिखाई दीं, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि इसके पीछे भ्रम पैदा करने और लोगों को गुमराह करने की मंशा थी। अधिकारियों ने भी साफ कर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही जानकारी का वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की गतिविधियां केवल अफवाह फैलाने और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का काम करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों पर गलत सूचनाओं का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है।

    हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े विषयों को लेकर कई बार इस तरह की फर्जी जानकारियां सामने आई हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो में बदलाव कर उन्हें वास्तविक जैसा दिखाना पहले से अधिक आसान हो गया है। यही कारण है कि कई बार सामान्य लोग ऐसी सामग्री को सच मान लेते हैं और बिना जांच किए आगे साझा कर देते हैं। ऐसे मामलों में झूठी सूचनाएं कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर देती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास करना सही नहीं है। किसी भी संवेदनशील विषय, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी मामलों से जुड़ी खबरों की पुष्टि करना बेहद आवश्यक हो गया है। गलत सूचना केवल समाज में भ्रम नहीं फैलाती बल्कि कई बार राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर प्रभाव छोड़ सकती है। इसलिए लोगों को जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करने की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में सूचना जितनी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है, उतनी ही तेजी से झूठ और भ्रम भी फैल रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदार नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सतर्कता, जागरूकता और तथ्यों की जांच ही फर्जी खबरों के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकती है।

  • अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा का विवादित बयान, ‘धुरंधर’ को बताया प्रोपेगेंडा, ट्रोलिंग के बाद अकाउंट डिलीट

    अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा का विवादित बयान, ‘धुरंधर’ को बताया प्रोपेगेंडा, ट्रोलिंग के बाद अकाउंट डिलीट

    नई दिल्ली:   पिछले साल फिल्म सैयारा से बॉलीवुड में कदम रखने वाली एक्ट्रेस अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा इन दिनों चर्चा में हैं। हाल ही में रीत ने आदित्य धर की फिल्मधुरंधर की आलोचना करते हुए इसे प्रोपेगेंडा फिल्म करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह फिल्म पूरी तरह से सरकार के पक्ष में नैरेटिव पेश करती है और राजनीतिक भाषणों के जरिए छोटे मुद्दों को सही ठहराती है। रीत ने सवाल उठाया कि क्या इसे प्रोपेगेंडा कहा जाए या नहीं, और इसे लेकर खुलकर अपनी राय रखी।

    रीत पड्डा नेधुरंधर के अलावाद कश्मीर फाइल्स औरद केरल स्टोरी जैसी फिल्मों की भी आलोचना की। उनका कहना था कि इन फिल्मों में आंकड़ों और तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और यह पूरे समुदाय के खिलाफ नैरेटिव तैयार करने का तरीका है। रीत ने बताया कि ऐसे मामलों में फिल्में सत्ताधारी पार्टी की लाइन के अनुसार जनता की सोच पर असर डालती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसी तरह राजनीतिक मुद्दों पर अलग राय वाली फिल्में बनाई जातीं, जैसे किपंजाब 95, तो उन्हें रिलीज नहीं होने दिया जाता।

    रीत पड्डा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ट्रोलिंग शुरू हो गई। कई नेटिज़न्स ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाया और लगातार आलोचना की। इस ट्रोलिंग के दबाव के चलते रीत ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया और इसके साथ ही अपना लिंक्डइन अकाउंट भी हटा दिया।

    इस विवाद ने दर्शकों के बीचधुरंधर को लेकर बहस को और तेज कर दिया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन राजनीतिक संदेश और नैरेटिव को लेकर दर्शकों में मतभेद नजर आए। आदित्य धर के निर्देशन वाली इस फिल्म ने दर्शकों को दो हिस्सों में बाँट दिया और फिल्म के राजनीतिक संदर्भों को लेकर सोशल मीडिया पर गर्म बहस छिड़ गई।

    इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी राय साझा करना कभी-कभी व्यक्तिगत हमलों और ट्रोलिंग का कारण बन सकता है। रीत पड्डा ने अपनी राय स्पष्ट रूप से रखी, लेकिन प्रतिक्रिया इतनी तीव्र हुई कि उन्हें अपनी ऑनलाइन उपस्थिति पूरी तरह से बंद करनी पड़ी।