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  • सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप

    सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप


    शिवपुरी। जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के लाड़करन गांव में कृषि भूमि के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीमांकन के बाद दोबारा खेत जोतने का विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।

    संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।

    आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • जमीन के बंटवारे पर भाइयों में बवाल, हिस्सेदारी मांगने पर तीसरे भाई की पिटाई

    जमीन के बंटवारे पर भाइयों में बवाल, हिस्सेदारी मांगने पर तीसरे भाई की पिटाई


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के रातोर गांव में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद उस समय हिंसक हो गया जब दो भाइयों पर अपने ही तीसरे भाई के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। घटना में घायल युवक को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, रातोर गांव निवासी अतर सिंह जाटव अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में कुल छह भाई हैं और उनके पिता का कुछ समय पहले निधन हो चुका है। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की संपत्ति का औपचारिक बंटवारा नहीं हो पाया है। परिवार के पास मकान, वाहन और अन्य पैतृक संपत्तियां हैं, जिन्हें लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है।

    अतर सिंह का आरोप है कि उनके भाई नेपाल जाटव ने परिवार की अधिकांश संपत्ति पर कब्जा कर रखा है और अन्य भाइयों को उनका हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर शनिवार रात विवाद बढ़ गया। अतर सिंह के मुताबिक वह मजदूरी कर घर लौटे थे और उन्होंने अपने भाई से संपत्ति के बंटवारे के संबंध में चर्चा की। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।

    घायल युवक का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर नेपाल जाटव ने उनके साथ गाली-गलौज की और फिर मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान उनके दूसरे भाई विनोद जाटव भी मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि दोनों भाइयों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। अतर सिंह का कहना है कि उन पर लाठी से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान चप्पलों से भी उन्हें पीटा गया।

    घटना के बाद अतर सिंह घायल अवस्था में घर के आंगन में पड़े रहे। उनकी पत्नी अनिता जाटव ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी उनकी बेटी ने दी थी। जब वह मौके पर पहुंचीं तो उनके पति अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। परिवार के अन्य सदस्यों की मदद से उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

    घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं और चिकित्सीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों में पैतृक संपत्ति और जमीन के बंटवारे को लेकर होने वाले विवाद अक्सर पारिवारिक रिश्तों में तनाव पैदा कर देते हैं। कई बार ऐसे मामले हिंसक झगड़ों में बदल जाते हैं, जिससे परिवारों में लंबे समय तक कटुता बनी रहती है। रातोर गांव की यह घटना भी इसी प्रकार के विवाद का उदाहरण बनकर सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं घायल युवक का जिला अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकों की नजर बनी हुई है।

  • TMC सांसद सायनी घोष ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े दावों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

    TMC सांसद सायनी घोष ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े दावों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी


    नई दिल्ली ।
    कोलकाता की राजनीति एक बार फिर संपत्ति विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में पहुंच गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष हैं, जिन्होंने अपने ऊपर और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी से कथित तौर पर जुड़ी संपत्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार और फर्जी बताते हुए कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर गलत सूचनाएं फैलाकर राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    यह विवाद तब और गहरा गया जब कोलकाता नगर निगम द्वारा कुछ संपत्तियों की जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई। यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब राजनीतिक हलकों में पहले से ही विभिन्न आरोपों को लेकर तनाव बना हुआ है। आरोपों में यह दावा किया जा रहा था कि कुछ संपत्तियों का संबंध अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी लोगों से हो सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर अब तक कोई ठोस आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    सायनी घोष ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बातें न केवल गलत हैं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह की अफवाह या झूठी खबर को फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाएगा। उनके अनुसार, यह प्रयास केवल उनकी और उनकी पार्टी की छवि को खराब करने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में इन दावों का कोई आधार नहीं है।

    इस पूरे मामले में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है क्योंकि विपक्षी दलों की ओर से पहले ही कई सवाल उठाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री से जुड़े राजनीतिक विरोधियों ने इन संपत्ति मामलों को लेकर पारदर्शिता की मांग की है और जांच को आगे बढ़ाने की बात कही है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह सभी आरोप केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए फैलाए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है।

    सायनी घोष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हाल के दिनों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने की घटना सामने आई थी और अब उनके खिलाफ झूठी खबरों का सहारा लेकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित अभियान बताया, जिसका मकसद उनकी आवाज को दबाना है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर जांच और आरोपों की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऐसे में यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित न रहकर राजनीतिक टकराव का एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

  • हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार

    हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार




    नई दिल्ली। हापुड़ में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक दर्दनाक वारदात सामने आई है, जहां सोमवार रात शादी समारोह से लौट रहे प्रॉपर्टी डीलर अतुल तोमर (32) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पिलखुआ थाना क्षेत्र के रिलायंस रोड इलाके में हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

    जानकारी के अनुसार अतुल तोमर गाजियाबाद के भोजपुर में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले कार का शीशा तोड़ने की कोशिश की और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली अतुल के सीने में लग गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    परिजनों का आरोप है कि पिछले तीन साल से एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें कुछ स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर शामिल थे। इसी रंजिश के चलते हत्या को अंजाम दिया गया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि धमकियों के बावजूद पुलिस ने पहले गंभीरता से कार्रवाई नहीं की।

    इस मामले में पुलिस ने बीजेपी जिला मंत्री नवीन तोमर समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपी मंजीत सहित अन्य फरार हैं। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है और सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    परिजनों में गुस्सा है और उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • संजय कपूर संपत्ति विवाद में नया मोड़: पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे मध्यस्थता, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    संजय कपूर संपत्ति विवाद में नया मोड़: पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे मध्यस्थता, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    नई दिल्ली। संजय कपूर की विशाल संपत्ति को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां कानूनी लड़ाई के साथ-साथ भरोसे और रिश्तों की जटिलता भी सामने आ रही है। लगभग 30 हजार करोड़ की संपत्ति से जुड़े इस मामले ने अब न्यायिक प्रक्रिया के साथ मध्यस्थता का रास्ता पकड़ लिया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से चल रहा यह विवाद किसी समाधान की ओर बढ़ सकेगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले को देखते हुए देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह एक पारिवारिक विवाद है और इसे बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाने की हर संभव कोशिश होनी चाहिए। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से बचें ताकि प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    यह विवाद तब और गंभीर हो गया जब परिवार के भीतर संपत्ति और ट्रस्ट को लेकर गंभीर आरोप सामने आए। एक पक्ष का कहना है कि कुछ दस्तावेजों पर बिना पूरी जानकारी के हस्ताक्षर कराए गए और इसी आधार पर संपत्ति को एक फैमिली ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं और इसे धोखाधड़ी से जुड़ा मामला बताया जा रहा है।

    वहीं दूसरी ओर, विरोधी पक्ष इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए ट्रस्ट को वैध और कानूनी रूप से स्थापित संस्था बता रहा है। दोनों पक्षों की दलीलों के बीच मामला और उलझता जा रहा है, जिससे अदालत में कई स्तरों पर सुनवाई चल रही है।

    स्थिति तब और जटिल हो गई जब संजय कपूर के निधन के बाद संपत्ति और कंपनियों के नियंत्रण को लेकर नए विवाद उभर आए। आरोप है कि उनके जाने के बाद कुछ लोगों ने तेजी से निर्णय लेते हुए प्रमुख संपत्तियों और कारोबारी इकाइयों पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जिससे परिवार में असंतोष और टकराव बढ़ गया।

    इस पूरे मामले में एक और कानूनी पहलू भी जुड़ा है, जिसमें बच्चों के अधिकारों और संपत्ति में उनके हिस्से को लेकर अलग से दावे किए जा रहे हैं। इससे यह विवाद केवल संपत्ति तक सीमित न रहकर कई कानूनी और पारिवारिक आयामों में बंट गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि भावनात्मक और पारिवारिक भी है, इसलिए इसका समाधान संवाद के माध्यम से निकलना अधिक उपयुक्त होगा। इसी सोच के तहत पूर्व CJI की मध्यस्थता को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर समाधान खोजने की कोशिश की जाएगी।

    अदालत ने यह भी कहा है कि मध्यस्थता प्रक्रिया की शुरुआती रिपोर्ट देखने के बाद ही आगे की कानूनी दिशा तय की जाएगी। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह प्रयास लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को किसी निष्कर्ष तक पहुंचा पाएगा या यह मामला आगे भी कानूनी लड़ाई के रूप में चलता रहेगा।

  • तानों से टूटा सब्र, कैंसर पीड़ित छोटे भाई ने दोस्त के साथ मिलकर सगे बड़े भाई को उतारा मौत के घाट!

    तानों से टूटा सब्र, कैंसर पीड़ित छोटे भाई ने दोस्त के साथ मिलकर सगे बड़े भाई को उतारा मौत के घाट!


    नई दिल्ली। रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। भिंड जिले में 11 मार्च को हुई किसान कृष्णकांत पाराशर की हत्या का राज फाश करते हुए पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अपने ही बड़े भाई के तानों से तंग आकर एक कैंसर पीड़ित नाबालिग ने अपने दोस्त के साथ मिलकर मौत की खौफनाक पटकथा लिखी।

    वारदात की जड़:60 लाख का इलाज और कड़वे बोल
    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नाबालिग लंबे समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है। उसके इलाज के लिए परिवार को अपनी पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी, जिसमें करीब 60 लाख रुपये खर्च हो गए। इसी आर्थिक तंगी और बीमारी के बोझ के चलते फरवरी में उनके पिता का भी निधन हो गया।

    बड़ा भाई कृष्णकांत अक्सर छोटे भाई को यह कहकर प्रताड़ित करता था कि “तेरी बीमारी की वजह से सब बिक गया और पिता भी चले गए।” इन्हीं तानों से आहत होकर छोटे भाई ने भाई को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।

    साजिश: मुंबई से कीमो कराकर लौटा और थाम लिया कट्टा
    नाबालिग 9 मार्च को मुंबई से कीमोथेरेपी कराकर लौटा और अपने दोस्त अरमान खान के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की। अरमान ने दो देसी कट्टे और कारतूसों का इंतजाम किया। 11 मार्च को साजिश के तहत नाबालिग ने कृष्णकांत को मौसी के घर मिलने के बहाने बुलाया। जामपुरा रेलवे लाइन के पास दोनों भाइयों में बहस हुई, हाथापाई के दौरान नाबालिग का निशाना चूक गया, लेकिन पीछे खड़े दोस्त अरमान ने भागते हुए कृष्णकांत पर फायरिंग कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस की कार्रवाई: 100 कैमरे और ‘मुंडन’ का खेल
    वारदात के बाद आरोपी मुरैना भाग गए और पहचान छिपाने के लिए अपने सिर मुंडवा लिए। पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के नेतृत्व में टीम ने 100 से अधिक CCTV कैमरों को खंगाला। जब नाबालिग घर से गायब मिला, तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया। रविवार को मुखबिर की सूचना पर फूप कस्बे के पास एक खाली कमरे से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    दोस्ती या पुरानी दुश्मनी?
    सह-आरोपी अरमान खान के पिता की हत्या 20 साल पहले हुई थी, जिसका आरोप कृष्णकांत के चाचा पर था। पुलिस पूछताछ में अरमान ने कहा कि उसने “दोस्ती निभाने” के लिए गोली चलाई, लेकिन पुलिस इसे पुराने पारिवारिक विवाद और बदले की भावना से भी जोड़कर देख रही है।

    एक और सनसनी: आष्टा में जमीन के लिए दो सगे भाई-बहनों का कत्ल
    अभी भिंड का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि सीहोर के आष्टा (धर्मपुरी) से एक और रूह कंपा देने वाली खबर आई। यहाँ जमीन विवाद में एक ताऊ (हरिसिंह मालवीय) ने अपने ही छोटे भाई के दो जवान बच्चों, शीतल (20) और कुलदीप (19) की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को हिरासत में ले लिया है।

  • दिनेशपुर में रिश्तों की बलि: जमीन के लालच और आपसी कलह में बहू ने मायके वालों के साथ मिलकर ली सास की जान

    दिनेशपुर में रिश्तों की बलि: जमीन के लालच और आपसी कलह में बहू ने मायके वालों के साथ मिलकर ली सास की जान


    नई दिल्ली । दिनेशपुर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित दिनेशपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक ७० वर्षीय बुजुर्ग महिला, संध्या शाह की उनकी अपनी ही बहू और उसके मायके वालों ने मिलकर निर्मम हत्या कर दी। संपत्ति के लालच और घरेलू क्लेश के चलते हुई इस खूनी वारदात ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बहू समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

    बच्ची की बीमारी बनी बहाना, जमीन पर था निशाना

    वारदात की जड़ें पिछले कई सालों से चल रहे पारिवारिक विवाद में दबी हुई थीं। घटना की रात मंगलवार को जब प्रसन्नजीत शाह की छोटी बेटी को बुखार आया, तो उसने अपनी पत्नी सुरभि पर बच्ची की देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। यह छोटी सी बहस जल्द ही उग्र हो गई। दरअसल, असली विवाद प्रसन्नजीत द्वारा खरीदे गए एक प्लॉट और पैतृक संपत्ति के पैसों को लेकर था। पत्नी सुरभि चाहती थी कि संपत्ति उसके नाम पर हो, और इसी बात को लेकर घर में पिछले तीन-चार वर्षों से युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी।
    कमरे में कैद कर दी दर्दनाक मौत
    बहस के दौरान सुरभि ने अपने मायके वालों को फोन कर मौके पर बुला लिया। आरोप है कि सुरभि की माँ सुजाता, बहन दिशा और भाई अमन अपने अन्य साथियों के साथ वहाँ पहुँचे और तांडव शुरू कर दिया। हमलावरों ने प्रसन्नजीत के साथ मारपीट की और ७० वर्षीय बुजुर्ग संध्या शाह को एक कमरे में बंद कर दिया। बंद कमरे के भीतर बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा गया। जब तक पड़ोसियों ने शोर सुनकर हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी, तब तक संध्या शाह मरणासन्न स्थिति में पहुँच चुकी थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    सख्त कार्रवाई की मांग और पुलिसिया जांच
    घटना के बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारी, एसएसपी अजय गणपति और एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने फॉरेंसिक टीम के साथ मौके का मुआयना किया। मृतका की बेटी रानी ने पुलिस के सामने बिलखते हुए आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। पुलिस ने प्रसन्नजीत की तहरीर पर बहू सुरभि, सास सुजाता, साली दिशा और साले अमन समेत कुल छह लोगों पर हत्या धारा ३०२ का मामला दर्ज किया है। फिलहाल कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पूरे वार्ड में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
    वारदात का संक्षिप्त विवरण:विवरणप्रमुख जानकारीस्थानवार्ड चार, दिनेशपुर, ऊधमसिंह नगर उत्तराखंड मृतकसंध्या शाह उम्र 70 वर्ष मुख्य आरोपीबहू सुरभि शाह और उसके मायके वाले कुल 6 नामजद विवाद की वजहसंपत्ति का लालच और बच्ची की बीमारी पर कहासुनीपुलिस कार्रवाईहत्या का केस दर्ज, फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित, आरोपी हिरासत में

  • संजय कपूर की संपत्ति विवाद मामले में कोर्ट ने करिश्मा कपूर से मांगे तलाक के दस्तावेज

    संजय कपूर की संपत्ति विवाद मामले में कोर्ट ने करिश्मा कपूर से मांगे तलाक के दस्तावेज


    मुम्बई।
    पिछले साल सितंबर में, करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) की दो संतान ने अपने दिवंगत पिता संजय कपूर (Sanjay Kapoor) की संपत्ति में हिस्सा पाने के लिए हाई कोर्ट (High Court) में याचिका दायर की और उनकी 21 मार्च 2025 की वसीयत को चुनौती दी। वसीयत में, संजय कपूर की कथित तौर पर पूरी संपत्ति प्रिया सचदेव कपूर (Priya Sachdev Kapoor) को कर दी गई है। जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने शुक्रवार को प्रिया सचदेव कपूर की याचिका पर अपने कक्ष में सुनवाई की और सूत्रों के अनुसार, करिश्मा कपूर से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

    सूत्रों ने बताया कि बॉलीवुड अभिनेत्री के वकील ने याचिका का विरोध किया और इसकी स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रिया सचदेव कपूर 2016 के समझौते में एक असंबद्ध तीसरी पक्षकार हैं और इस मामले में उनका कोई अधिकार नहीं बनता। करिश्मा कपूर की ओर से वकील रवि शर्मा और अपूर्व शुक्ला पेश हुए, जिन्होंने दलील दी कि सहमति की शर्तें और तलाकनामा पहले से ही प्रिया सचदेव कपूर के पास मौजूद हैं।

    प्रिया कपूर के वकील ने दलील दी कि ये दस्तावेज मौजूदा संपत्ति विवाद से सीधे तौर पर संबंधित हैं, जिसमें वित्तीय प्रावधान, बच्चों को सहायता और तलाक के बाद की जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दे दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष बार-बार उठाए जा चुके हैं। पिछले साल 12 जून को इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान गिरने के बाद संजय कपूर का निधन हो गया था। खबरों के अनुसार, उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा था।

  • भेड़ाघाट में नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे पर चाकू हमला, प्रॉपर्टी विवाद से बढ़ा तनाव, पुलिस ने शुरू की तलाश

    भेड़ाघाट में नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे पर चाकू हमला, प्रॉपर्टी विवाद से बढ़ा तनाव, पुलिस ने शुरू की तलाश



    नई दिल्ली। भेड़ाघाट नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे नीलेश लोधी पर देर रात आरोपियों ने चाकू से हमला कर दिया। घटना के तुरंत बाद घायल को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष चतुर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

    घटना तिलवारा थाना क्षेत्र के विशाल मेगा मार्ट के पास हुई। जानकारी के अनुसार, नीलेश लोधी अपने घर भेड़ाघाट लौट रहे थे, तभी तीन बदमाशों ने उन्हें रोककर ताबड़तोड़ चाकू मार दिया। हमलावरों में जीतू पटेल, अंकित और सचिन शामिल थे,

     उन्होंने कहा कि जीतू पटेल आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ अवैध वसूली और मारपीट के कई मामले पहले भी दर्ज हैं। हाल ही में जेल से छूटने के बाद वह अपने साथियों के साथ फिर से प्रॉपर्टी का काम करने लगा था।

    पुलिस की तीन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।

    जीतू पटेल चौकी लाल का निवासी है और उसके घर एवं आस-पास भी पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    स्थानीय लोगों ने बताया कि नीलेश लोधी प्रॉपर्टी के काम में सक्रिय थे और उनके घायल होने की खबर से इलाके में तनाव है। पुलिस ने मौके पर सघन गश्त और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

    यह मामला भेड़ाघाट में प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा हुआ माना जा रहा है और प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है। नीलेश की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि पुलिस आरोपियों की सूत्रों और तफ्तीश के आधार पर तलाश में जुटी हुई है।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय


    ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में अब राजीनामा दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इसके समाधान के लिए दोनों पक्ष समझौते की प्रक्रिया में हैं। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है।
    बुआओं की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पहले से तय 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर अतिरिक्त 30 दिन दिया जाए, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष बिना किसी बाधा के विवाद का समाधान कर सकें और समझौते को विधिक रूप से अंतिम रूप दिया जा सके।

    यह संपत्ति विवाद मूल रूप से 2010 में जिला न्यायालय, ग्वालियर में दर्ज हुआ था। तब से लेकर अब तक यह मामला लंबित है और 2017 में इसे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। विवाद मुख्य रूप से सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। बुआओं और भतीजे दोनों पक्ष चाहते हैं कि यह विवाद समझौते के माध्यम से समाप्त हो जाए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ खत्म हो सके।

    सितंबर 2025 में जिला न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों में समझौता पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह समय पूरा नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय मिलेगा।

    इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी औपचारिकताएं और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों और किसी भी तरह का विवाद भविष्य में न उभरे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पारिवारिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए अहम है। अक्सर लंबित कानूनी मामले सालों तक अटके रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के मामले में भी यह समय वृद्धि पारिवारिक समझौते को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    इसमें संपत्ति के बंटवारे, कानूनी अधिकारों की पुष्टि और किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक बाधा का समाधान शामिल है। अतिरिक्त 30 दिन की अवधि दोनों पक्षों को ये सुनिश्चित करने का अवसर देती है कि समझौते में सभी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार किए जाएं।

    कुल मिलाकर, यह कदम ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबित संपत्ति विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी ढंग से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के समझौता अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे परिवार के बीच तनाव कम होगा और लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का बोझ भी घटेगा।

    इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी, जिसके बाद अतिरिक्त 30 दिनों में समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद का स्थायी समाधान निकलने की संभावना है।