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  • राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को फटकार लगाई। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या याचिका दाखिल करने का उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता और दलील में पर्याप्त दम भी नहीं है।

    सुनवाई के दौरान वकील ने राहुल गांधी के एक हालिया बयान का हवाला दिया। उनका दावा था कि राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसी बयान के आधार पर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की।

    इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल से सलाह ली गई है। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को उठाने का उद्देश्य मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि वह मामले की सुनवाई की मांग के पीछे प्रस्तुत आधार की पर्याप्तता को लेकर संतुष्ट नहीं थी।

    यह विवाद राहुल गांधी की संपत्ति की जांच से संबंधित उस मामले से जुड़ा है, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मई 2026 में सीबीआई और ईडी को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग भी की थी।

    अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता, सीबीआई और ईडी से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश भी दिया था। इस रोक के कारण हाई कोर्ट के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई पर अंतरिम स्थिति बनी हुई है।

    मामले की शुरुआत कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। उन्होंने राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर कई आरोप लगाए थे। शिकायत में लगाए गए आरोपों और संपत्ति की जांच से संबंधित मांगों के आधार पर यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा।

    राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। अब सुनवाई के दौरान याचिका को सूचीबद्ध कराने की मांग और उसके समर्थन में दिए गए तर्क चर्चा में रहे।

    संपत्ति से जुड़े आरोपों के मामले में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

  • पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में पूर्व ट्रैफिक डीएसपी हरिवंश कन्हौआ के परिवार से जुड़ा विवाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। उनकी पुत्रवधु प्रियांशु शर्मा ने ससुराल पक्ष के छह सदस्यों के खिलाफ शिकायत देकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, संपत्ति हड़पने की कोशिश तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। प्रियांशु ने पुलिस से मामले में कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रियांशु शर्मा ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी शादी जनवरी 2022 में आकाश कन्हौआ के साथ हुई थी। शिकायत के मुताबिक, 23 दिसंबर 2025 को आकाश 14 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए घर से निकले थे। इसके अगले दिन प्रियांशु को जबलपुर में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना मिली। पति की मौत के हालात को लेकर शिकायत में चिंता जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत के कारणों और उससे संबंधित जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    प्रियांशु का आरोप है कि पति की मौत के लगभग सवा महीने बाद भोपाल स्थित मकान से 23 लाख रुपये की चोरी के मामले में उन पर आरोप लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पुलिस जांच और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस मामले में जांच से संबंधित दस्तावेजों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सास-ससुर और जेठ की ओर से उन पर दूसरी शादी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, बेटी सान्वी को अपने पास से छोड़ने के लिए भी दबाव बनाया गया। प्रियांशु ने दावा किया कि पति के नाम पर मौजूद संपत्ति अपने नाम कराने के लिए भी उनसे लगातार दबावपूर्वक बातचीत की जाती रही। इन आरोपों के संबंध में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है।

    प्रियांशु ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें इंदौर में नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2026 में अपने पिता के साथ बातचीत के दौरान उनसे जबरन समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकालने की बात कही गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और अब उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है।

    प्रियांशु शर्मा ने जिन छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें उनके ससुर हरिवंश कन्हौआ, सास सरोज कन्हौआ, जेठ विकास कन्हौआ, जेठानी भावना कन्हौआ, ननद ऋतु अवस्थी और नंदोई सौरभ अवस्थी के नाम शामिल हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने, संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। पति की संदिग्ध मौत, चोरी के आरोप, संपत्ति को लेकर विवाद और कथित प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमित शाह के वेतन, सरकारी सुविधाओं, निवेश और जमीन-जायदाद को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर सीट से नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण चुनावी हलफनामे में दिया था। इसके अनुसार, अमित शाह और उनकी पत्नी सोनल शाह की संयुक्त घोषित संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। इसमें अमित शाह की व्यक्तिगत संपत्ति करीब 36.55 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अमित शाह की आय में सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उनके चुनावी हलफनामे में किराये से होने वाली आय, कृषि से प्राप्त आमदनी और शेयरों से मिलने वाले लाभांश का भी उल्लेख है। उनकी कुल संपत्ति को समझने के लिए वेतन के साथ-साथ निवेश और अचल संपत्तियों के विवरण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, अमित शाह का मूल मासिक वेतन 1 लाख 24 हजार रुपये बताया गया है। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 87 हजार रुपये और अन्य भत्ता 2 हजार रुपये प्रति माह दर्ज किया गया है। दैनिक भत्ते के रूप में 75 हजार रुपये का आंकड़ा भी दिया गया है, लेकिन इसे नियमित मासिक वेतन के साथ जोड़कर निश्चित मासिक आय मानना सही नहीं होगा। दैनिक भत्ता निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार मिलता है।

    गृह मंत्री के पद पर रहते हुए उन्हें सरकारी कामकाज के लिए आवास, आधिकारिक वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और पात्रता के अनुसार चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। ये सुविधाएं पद से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए होती हैं। इन्हें उनकी निजी संपत्ति या व्यक्तिगत वेतन का हिस्सा नहीं माना जाता।

    वर्ष 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अमित शाह की चल संपत्ति लगभग 20.23 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति करीब 16.32 करोड़ रुपये थी। इस तरह उनकी कुल व्यक्तिगत घोषित संपत्ति लगभग 36.55 करोड़ रुपये बैठती है। चल संपत्ति में बैंक जमा, शेयर, निवेश, नकदी और आभूषण जैसी चीजें शामिल हैं, जबकि अचल संपत्ति में जमीन, भूखंड और मकान जैसी संपत्तियां आती हैं।

    हलफनामे में अमित शाह के पास लगभग 17.46 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर होने का उल्लेख था। इसके अलावा, करीब 72.87 लाख रुपये के कीमती धातुओं और आभूषणों का विवरण दर्ज किया गया था। उनके पास नकद राशि लगभग 24,164 रुपये बताई गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि उनकी घोषित चल संपत्ति में शेयर निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उनकी पत्नी सोनल शाह की संपत्ति को जोड़ने पर दंपति की संयुक्त संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। सोनल शाह की चल संपत्ति करीब 22.46 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति लगभग 6.55 करोड़ रुपये बताई गई थी। दोनों की कुल घोषित देनदारियां लगभग 42.10 लाख रुपये थीं। ये आंकड़े 2024 में दाखिल हलफनामे पर आधारित हैं, इन्हें वर्तमान बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।

    अमित शाह की घोषित संपत्ति में पिछले वर्षों के दौरान बदलाव भी दर्ज हुआ है। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के हलफनामे में उनकी संपत्ति लगभग 11.78 करोड़ रुपये बताई गई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह और उनकी पत्नी की संयुक्त संपत्ति करीब 40.33 करोड़ रुपये दर्ज हुई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 65.67 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग वर्षों में व्यक्तिगत और संयुक्त संपत्ति के विवरण का आधार अलग हो सकता है।

    संपत्ति में वृद्धि का अर्थ केवल वेतन से हुई कमाई नहीं है। शेयरों के मूल्य में बदलाव, कृषि और किराये से होने वाली आय, विरासत तथा अन्य निवेश भी कुल संपत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

    अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता अनिलचंद्र शाह प्लास्टिक पाइप के कारोबार से जुड़े थे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले अमित शाह पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहे और शेयर बाजार में भी काम किया। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े तथा भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति के जरिए आगे बढ़े। गुजरात विधानसभा में उनका चुनावी सफर 1997 में शुरू हुआ। उस समय संपत्ति संबंधी हलफनामों का आज जैसा व्यवस्थित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, इसलिए राजनीति में प्रवेश के समय उनकी कुल संपत्ति का सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है।

  • पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    नई दिल्ली ।अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े एक मामले में पितृ पक्ष के दौरान संपत्ति की रजिस्ट्री रुकने का जिक्र सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके वकील ने अदालत में बताया कि जिस संपत्ति को बेचकर रकम जुटाई जानी है, उसकी रजिस्ट्री पितृ पक्ष के कारण रुकी हुई है और नवरात्र की शुरुआत में सौदा पूरा होने की उम्मीद है। इस बात के बाद पितृ पक्ष के दौरान जमीन, मकान या दूसरी बड़ी संपत्ति की खरीद और रजिस्ट्री को टालने की धार्मिक परंपरा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कई हिंदू परिवार इस अवधि में नई संपत्ति खरीदने या बड़े शुभ कार्य शुरू करने से बचते हैं।

    हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इन दिनों ध्यान नए उत्सव या सांसारिक शुभ कार्यों की बजाय पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मों पर रखा जाता है। इसी वजह से कई परिवार नई जमीन या मकान खरीदने, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने और बड़े निवेश की शुरुआत जैसे कामों को आगे के शुभ समय तक टालना पसंद करते हैं।

    पितृ पक्ष में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रोकने की मान्यता मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक विश्वास से जुड़ी है। इस अवधि को आमतौर पर मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय नहीं माना जाता। इसलिए कुछ परिवार नई शुरुआत से जुड़े काम नवरात्र, दीपावली या किसी अन्य शुभ मुहूर्त तक स्थगित कर देते हैं। हालांकि, केवल पितृ पक्ष होने के कारण संपत्ति की खरीद या रजिस्ट्री पर कोई कानूनी रोक नहीं होती। कोई व्यक्ति अपने कानूनी, व्यावहारिक या आर्थिक कारणों के आधार पर इस अवधि में संपत्ति खरीद या रजिस्ट्री करा सकता है। यह फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परंपरा से जुड़ा विषय है।

    पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी को अशुभ नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। भोजन, कपड़े, दवाएं, घर की जरूरी सामग्री और कामकाज से संबंधित सामान की खरीद पर सामान्य रूप से ऐसी रोक नहीं मानी जाती, जो सभी लोगों पर लागू हो। श्राद्ध और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए अनाज, फल, सब्जियां, घी, दूध और भोजन सामग्री खरीदना भी इसी अवधि की जरूरतों का हिस्सा हो सकता है। कई परिवार इस दौरान ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को दान और पितरों की पसंद की वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वहीं नई जमीन या मकान खरीदने, नई प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को कई परिवार पितृ पक्ष में करने से बचते हैं। कुछ लोग नया वाहन खरीदने, महंगे आभूषण लेने या बड़े निवेश की शुरुआत को भी इस अवधि के बाद करना पसंद करते हैं। इसके पीछे मुख्य आधार धार्मिक मान्यता है, न कि कोई कानूनी नियम। इसलिए अलग-अलग परिवार अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार निर्णय लेते हैं।

    पहले से तय संपत्ति की रजिस्ट्री के मामले में भी परिवारों की प्राथमिकता अलग हो सकती है। यदि संपत्ति का सौदा पहले ही तय हो चुका है और रजिस्ट्री की तारीख पितृ पक्ष में पड़ती है, तो धार्मिक मान्यता मानने वाले लोग तारीख आगे बढ़ाना पसंद कर सकते हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया, समय या आर्थिक कारण महत्वपूर्ण हैं, वे तय तारीख पर रजिस्ट्री करा सकते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

  • ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब

    ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब


    नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी करीब ₹1400 करोड़ की संपत्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों पर जवाब दिया है। शिवकुमार ने कहा कि उनके पास इतनी संपत्ति है, लेकिन उन्होंने इसे कानून के दायरे में रहते हुए हासिल किया है। 2023 के चुनावी हलफनामे में शिवकुमार और उनके आश्रितों ने कुल करीब ₹1,413.8 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।

    दिल्ली में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि उनकी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी इनकम टैक्स विभाग के पास है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों को भी कानून के तहत कारोबार करने और संपत्ति खरीदने का अधिकार है। शिवकुमार ने सवाल किया कि क्या एचडी कुमारस्वामी इनकम टैक्स अधिकारी हैं।

    कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट को लेकर लगाए आरोप

    दरअसल, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC), जिसे NICE प्रोजेक्ट भी कहा जाता है, को लेकर शिवकुमार पर आरोप लगाए हैं। कुमारस्वामी ने दावा किया कि प्रोजेक्ट के मूल स्वरूप में बाद में बदलाव किए गए और जमीन आवंटन तथा विकास योजना में कथित अनियमितताओं से निजी पक्षों को फायदा पहुंचा।

    कुमारस्वामी ने शिवकुमार की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिवकुमार की घोषित संपत्ति करीब ₹4 करोड़ से बढ़कर 2023 में ₹1,413 करोड़ से ज्यादा हो गई। उन्होंने NICE प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन सौदों में शिवकुमार और उनके परिवार को कथित लाभ मिलने का आरोप लगाया है। होसकरेहल्ली की जमीन और शोभा डेवलपर्स से जुड़े ज्वाइंट वेंचर का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    हालांकि, ये आरोप कुमारस्वामी की ओर से लगाए गए हैं। शिवकुमार ने इन्हें खारिज करते हुए अपनी संपत्ति को वैध बताया है।

    ‘क्या मैंने रिश्वत ली या किसी घोटाले में पकड़ा गया?’

    शिवकुमार ने कहा कि वह किसान और कारोबारी परिवार से आते हैं। उनके मुताबिक, कारोबार और संपत्ति रखना कानून के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी संपत्ति घोषित की है और उनके बच्चों को भी कारोबार करने तथा संपत्ति खरीदने का अधिकार है।

    ₹5 करोड़ के निवेश से जुड़े कुमारस्वामी के आरोप पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने न कोई रिश्वत ली है और न किसी घोटाले में पकड़े गए हैं। उनके मुताबिक, समय के साथ संपत्तियों की कीमत बढ़ना अपने आप में गलत नहीं है।

    शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उस समय करीब ₹99 हजार में एक साइट खरीदी थी, जिसकी मौजूदा कीमत करीब ₹20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि संपत्ति की बाजार कीमत बढ़ने को अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता।

    शिवकुमार ने कहा कि वह हर साल अपनी संपत्ति घोषित करते हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनकी संपत्तियों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरी एजेंसी भी जांच करना चाहती है तो वह कर सकती है।

    ‘कुमारस्वामी विधानसभा में आकर बहस करें’

    कुमारस्वामी की बहस की चुनौती पर शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा की सीढ़ियों पर बहस करने की जरूरत नहीं है। अगर कुमारस्वामी बहस करना चाहते हैं तो विधानसभा के अंदर आकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।

    फोन टैपिंग और ब्लैकमेल जैसे आरोपों को लेकर भी शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी इस तरह की राजनीति का सामना करना पड़ा है और वह किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं।

    शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान का भी आरोप लगाया और कहा कि इसी वजह से कुमारस्वामी इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कुमारस्वामी के परिवार और पुराने प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि वह कुमारस्वामी की संपत्तियों पर अभी कोई आरोप नहीं लगाना चाहते और केवल मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे हैं।

    दिल्ली में शिक्षा नीति को लेकर बैठक

    शिवकुमार ने अपने दिल्ली दौरे की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की शिक्षा नीति और परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने को लेकर बैठक हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री शामिल हुए।

    उन्होंने कहा कि बैठक में परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक रोकने पर चर्चा हुई। शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में KPSC जैसी परीक्षाओं में भी सुधार किए जाएंगे।

    ठेकेदारों के ₹38 हजार करोड़ के बकाये पर भी बोले

    ठेकेदारों की ओर से सरकार पर करीब ₹38 हजार करोड़ के बकाये का दावा किए जाने पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने कई कामों को मंजूरी दी थी, जिसके चलते मौजूदा सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने माना कि वर्तमान वित्तीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने और बकाये से जुड़े मामलों का समाधान निकालने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।

  • दिल्ली में असम की महिला वकील से कथित मारपीट, संपत्ति विवाद में ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाने का आरोप

    दिल्ली में असम की महिला वकील से कथित मारपीट, संपत्ति विवाद में ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाने का आरोप

    नई दिल्ली । दिल्ली के प्रसाद नगर इलाके में संपत्ति विवाद के दौरान असम की एक महिला वकील के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। महिला वकील ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान उन्हें दिल्ली में ‘बाहरी’ होने के कारण निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां की गईं और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई।

    घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला वकील रोती और परेशान दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह फोन पर किसी व्यक्ति से घटना के बारे में बात करती नजर आती हैं। महिला के मुताबिक, वह संपत्ति विवाद से जुड़े एक पक्ष की ओर से वकील के तौर पर वहां मौजूद थीं।

    महिला वकील ने आरोप लगाया कि उनके क्लाइंट के विरोधी पक्ष ने उन्हें इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह दिल्ली की स्थानीय निवासी नहीं हैं। उनका दावा है कि विवाद के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से उन्हें ‘बाहरी’ कहकर निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने उनके साथ मारपीट हुई, लेकिन हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।

    महिला के अनुसार, उनके क्लाइंट का अगले दिन एक कार्यक्रम होना था। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष उस कार्यक्रम को खराब करना चाहता था और इसी वजह से विवाद बढ़ा। महिला ने दावा किया कि दूसरे पक्ष के लोग स्थानीय प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों के साथ थे और इसी कारण स्थिति उनके खिलाफ हो गई।

    झड़प के दौरान महिला ने नस्लीय टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, उनसे और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े लोगों को लेकर आपत्तिजनक सवाल किए गए। आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से यह सवाल भी किया गया कि पूर्वोत्तर के लोग काम करने के लिए दिल्ली क्यों आते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के जरिए होना बाकी है।

    वीडियो में महिला वकील दिल्ली की मुख्यमंत्री से भी मदद की अपील करती नजर आती हैं। उन्होंने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि एक महिला वकील के साथ इस तरह की घटना हो सकती है तो सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जिक्र करते हुए भी अपनी बात रखी।

    पुलिस के अनुसार, महिला वकील जिस संपत्ति विवाद में शामिल थीं, उसमें वह ‘डॉलर बाबा’ नाम के व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। प्रसाद नगर इलाके की एक संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान घटना सामने आई।

    महिला वकील ने अपनी शिकायत में मारपीट के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है। मामले की जांच के दौरान घटना से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।

    इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दी गई है। इसमें मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दूसरी शिकायत के आधार पर भी क्रॉस-एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों पक्षों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    फिलहाल महिला वकील की ओर से लगाए गए मारपीट, छेड़छाड़ और नस्लीय टिप्पणी के आरोप जांच का विषय हैं। घटना से जुड़े वीडियो और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस मामले के तथ्यों की जांच कर रही है।

  • 15 करोड़ की अयोध्या प्रॉपर्टी में धर्मशाला बनाएंगे अमिताभ बच्चन, पिता हरिवंश राय बच्चन को करेंगे समर्पित

    15 करोड़ की अयोध्या प्रॉपर्टी में धर्मशाला बनाएंगे अमिताभ बच्चन, पिता हरिवंश राय बच्चन को करेंगे समर्पित


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को लेकर खबर है कि वह अयोध्या में खरीदी गई अपनी प्रॉपर्टी पर धर्मशाला का निर्माण कराने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि यह धर्मशाला उनके पिता और प्रसिद्ध हिंदी कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति को समर्पित होगी। इसके लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण में भवन के नक्शे की मंजूरी को लेकर आवेदन भी दिया गया है।

    अमिताभ बच्चन ने कुछ समय पहले अयोध्या में करीब 15 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी थी। अब इसी संपत्ति पर प्रस्तावित धर्मशाला को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुराग जैन के मुताबिक देशभर की कई जानी-मानी हस्तियां अयोध्या के विकास में योगदान दे रही हैं। उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन से जुड़ा यह मामला फिलहाल आम लोगों की आपत्तियों के लिए खुला है।

    पिता की याद में होगा निर्माण

    अमिताभ बच्चन के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के चर्चित कवि और अनुवादक थे। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मधुशाला’ शामिल है। अमिताभ बच्चन कई मौकों पर अपने पिता को याद करते रहे हैं और उनकी कविताओं की पंक्तियां सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं।

    अमिताभ की मां तेजी बच्चन सामाजिक कार्यों से जुड़ी थीं और थिएटर में भी सक्रिय रहीं। ऐसे में पिता की स्मृति में धर्मशाला का निर्माण उनके परिवार से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को कर रहे हैं होस्ट

    अमिताभ बच्चन के काम की बात करें तो वह फिलहाल टीवी के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को होस्ट कर रहे हैं। शो में वह प्रतियोगियों के साथ सवाल-जवाब करने के अलावा अपनी जिंदगी से जुड़े किस्से और अनुभव भी साझा करते हैं।

    फिल्मों की बात करें तो अमिताभ बच्चन पिछली बार 2024 में रिलीज हुई रजनीकांत स्टारर ‘वेट्टैयन’ में नजर आए थे। इसके अलावा वह ‘कल्कि 2898 एडी’ और ‘सेक्शन 84’ जैसे प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े हैं। ‘कल्कि 2898 एडी’ में उनके साथ प्रभास और कमल हासन नजर आएंगे, जबकि ‘सेक्शन 84’ में अभिषेक बनर्जी और निमरत कौर प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

  • बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली महाराज के फिरोजाबाद स्थित अकबरपुर गांव के पैतृक घर को लेकर विवाद बढ़ गया है। उनकी पोतियों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत देकर एक ट्रस्ट पर संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अरविंद कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में टूंडला उपजिलाधिकारी दिव्या सिंह और जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव को भी शामिल किया गया है।

    विवाद अकबरपुर गांव में स्थित मकान नंबर 154 और आसपास की संरचनाओं से जुड़ा है। यही स्थान संत के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में इस स्थल को पर्यटक आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां संत का ध्यान कक्ष, भोजन क्षेत्र, अतिथि क्वार्टर और शयनकक्ष जैसी संरचनाएं मौजूद हैं।

    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, विवाद 24 अगस्त को हुए एक पारिवारिक कार्यक्रम के बाद सामने आया। आरोप है कि संत के दिवंगत बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों को घर के कमरों में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई। यह मकान एक डुप्लेक्स है और करीब 4000 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले भूखंड पर बना हुआ है।

    मामले को लेकर छह पोतियों सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और ऋचा रावत ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पैतृक निवास को ट्रस्ट के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की है। भावना रावत के पति मनोज रावत ने बताया कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जांच समिति को सौंपे जा चुके हैं।

    श्री नीम करौली महाराज ट्रस्ट की अध्यक्ष वर्तमान में संत की बेटी गिरिजा देवी भटेले हैं। उनकी दिवंगत पत्नी रामबेटी पहले ट्रस्ट की अध्यक्ष रह चुकी हैं। शिकायत के बाद अब संपत्ति से जुड़े दावों और दस्तावेजों की जांच प्रशासनिक समिति करेगी।

    हालांकि, परिवार के एक अन्य सदस्य धनंजय शर्मा ने इन आरोपों से दूरी बनाई है। वह संत के दूसरे दिवंगत बेटे अनेक सिंह शर्मा के बेटे हैं। उनका कहना है कि संपत्ति बाबा नीम करौली की इच्छा के अनुसार ट्रस्ट को सौंपी गई थी। उन्होंने परिवार के बीच पैदा हुए विवाद पर चिंता जताते हुए मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की अपील की है।

    वहीं ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता ने किसी भी अवैध कब्जे या ट्रस्ट के भीतर विवाद से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें धर्म नारायण शर्मा ने नियुक्त किया था और वह संस्था की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

    पैतृक घर से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बाबा नीम करौली महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ रिलीज होने के बाद चर्चा में है। सात अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने एक महीने के भीतर दुनिया भर में 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।

    अब पैतृक संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच तीन सदस्यीय समिति करेगी। जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, ट्रस्ट के नियंत्रण और परिवार की ओर से किए गए दावों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद इस विवाद के आगे की दिशा समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

  • प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा और दिवंगत फिल्मकार कमाल अमरोही के परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा आर्थिक और संपत्ति विवाद एक बार फिर चर्चा में है। यह मामला मुख्य रूप से प्रीति जिंटा द्वारा कमाल अमरोही के बेटे शानदार अमरोही को दिए गए कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज और बाद में उसकी वापसी को लेकर है।

    प्रीति जिंटा का दावा रहा है कि उन्होंने शानदार अमरोही को आर्थिक मुश्किलों के दौर में 2 करोड़ रुपये उधार दिए थे। उनके अनुसार यह रकम किसी उपहार, चैरिटी या मदद के तौर पर नहीं बल्कि वापस किए जाने वाले कर्ज के रूप में दी गई थी। उनका कहना रहा कि शानदार ने आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद रकम लौटाने की बात कही थी।

    शानदार अमरोही का निधन अगस्त 2011 में हुआ था। प्रीति के मुताबिक उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने ब्याज समेत रकम की वापसी की मांग की। उन्होंने 2 करोड़ रुपये की मूल राशि के साथ करीब 80 लाख रुपये ब्याज का दावा भी किया था।

    प्रीति ने वर्ष 2013 में इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि रकम लंबे समय से बकाया थी और उसे वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ा। इस मामले में उनके दावे और अमरोही परिवार की ओर से रखी गई दलीलों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

    अब कमाल अमरोही के दूसरे बेटे ताजदार अमरोही ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रीति ने वास्तव में शानदार को 2 करोड़ रुपये दिए थे तो उस लेनदेन का प्रमाण, रसीद या अन्य दस्तावेज सामने होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शानदार के जीवित रहते रकम की वापसी को लेकर विवाद क्यों नहीं उठा और उनकी मृत्यु के बाद ही यह मामला सामने क्यों आया।

    ताजदार ने प्रीति और शानदार के संबंधों को लेकर सामने आए कुछ अन्य दावों को भी चुनौती दी है। लंबे समय तक यह चर्चा रही कि शानदार अमरोही ने प्रीति जिंटा को अपनी गोद ली हुई बेटी माना था और अपनी संपत्ति में उनके लिए हिस्सा रखने की योजना बनाई थी। ताजदार ने इस दावे से भी इनकार किया है।

    विवाद का एक हिस्सा करीब 600 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति से भी जुड़ा रहा है। ताजदार के अनुसार कमाल स्टूडियो से संबंधित चर्चाओं के दौरान शानदार के हिस्से की कीमत 600 करोड़ रुपये बताए जाने की बातें सामने आई थीं, लेकिन उनके मुताबिक इतनी बड़ी संपत्ति का दावा ही सही नहीं था। इसलिए प्रीति को उस संपत्ति का हिस्सा दिए जाने की बात भी उन्होंने खारिज की।

    ताजदार के मुताबिक शानदार अमरोही प्रीति जिंटा के प्रशंसक थे और उन्हें महंगे सामान उपहार में दिया करते थे। हालांकि, उनके अनुसार इन उपहारों और कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज को अलग-अलग संदर्भों में देखा जाना चाहिए।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रीति जिंटा का दावा है कि रकम कर्ज के रूप में दी गई थी और उसे वापस किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी तरफ अमरोही परिवार की ओर से लेनदेन के प्रमाण और दावे के समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

  • माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    नई दिल्ली ।देश की सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास यह पूरा अधिकार है कि वह बुजुर्गों की संपत्ति से उनके बच्चों को बेदखल करने का आदेश जारी कर सके।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल को लगता है कि माता-पिता के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन के लिए बच्चों को बेदखल करना आवश्यक है, तो वह ऐसा आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि बढ़ती उम्र किसी भी स्थिति में असुरक्षा का कारण नहीं बननी चाहिए। सभ्य समाज का असली पैमाना यही है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, आदर और सुरक्षा प्रदान करता है।

    यह महत्वपूर्ण फैसला लखनऊ के विकासनगर निवासी रविकांत गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए दिया गया। अपीलकर्ता अपने रिहायशी मकान के मालिक हैं और उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने उनके बेटे और बहू के खिलाफ जारी बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि उच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के बेदखली के आदेश में हस्तक्षेप करके गलती की थी। अदालत ने माना कि यह एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बेदखली का निर्देश देने की पूरी शक्तियां प्राप्त हैं।

    पीठ ने अपने दूरगामी फैसले में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और सभ्यताओं में वरिष्ठ नागरिकों को ज्ञान, अनुभव और सामूहिक स्मृति के अमूल्य भंडार के रूप में देखा गया है। ऐसे में उनकी संपत्ति, भरण-पोषण और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों के साथ होने वाले संपत्ति संबंधी विवादों और पारिवारिक प्रताड़ना के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने ही बच्चों द्वारा अपनी ही संपत्ति में उपेक्षित या प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।