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  • प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा और दिवंगत फिल्मकार कमाल अमरोही के परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा आर्थिक और संपत्ति विवाद एक बार फिर चर्चा में है। यह मामला मुख्य रूप से प्रीति जिंटा द्वारा कमाल अमरोही के बेटे शानदार अमरोही को दिए गए कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज और बाद में उसकी वापसी को लेकर है।

    प्रीति जिंटा का दावा रहा है कि उन्होंने शानदार अमरोही को आर्थिक मुश्किलों के दौर में 2 करोड़ रुपये उधार दिए थे। उनके अनुसार यह रकम किसी उपहार, चैरिटी या मदद के तौर पर नहीं बल्कि वापस किए जाने वाले कर्ज के रूप में दी गई थी। उनका कहना रहा कि शानदार ने आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद रकम लौटाने की बात कही थी।

    शानदार अमरोही का निधन अगस्त 2011 में हुआ था। प्रीति के मुताबिक उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने ब्याज समेत रकम की वापसी की मांग की। उन्होंने 2 करोड़ रुपये की मूल राशि के साथ करीब 80 लाख रुपये ब्याज का दावा भी किया था।

    प्रीति ने वर्ष 2013 में इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि रकम लंबे समय से बकाया थी और उसे वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ा। इस मामले में उनके दावे और अमरोही परिवार की ओर से रखी गई दलीलों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

    अब कमाल अमरोही के दूसरे बेटे ताजदार अमरोही ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रीति ने वास्तव में शानदार को 2 करोड़ रुपये दिए थे तो उस लेनदेन का प्रमाण, रसीद या अन्य दस्तावेज सामने होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शानदार के जीवित रहते रकम की वापसी को लेकर विवाद क्यों नहीं उठा और उनकी मृत्यु के बाद ही यह मामला सामने क्यों आया।

    ताजदार ने प्रीति और शानदार के संबंधों को लेकर सामने आए कुछ अन्य दावों को भी चुनौती दी है। लंबे समय तक यह चर्चा रही कि शानदार अमरोही ने प्रीति जिंटा को अपनी गोद ली हुई बेटी माना था और अपनी संपत्ति में उनके लिए हिस्सा रखने की योजना बनाई थी। ताजदार ने इस दावे से भी इनकार किया है।

    विवाद का एक हिस्सा करीब 600 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति से भी जुड़ा रहा है। ताजदार के अनुसार कमाल स्टूडियो से संबंधित चर्चाओं के दौरान शानदार के हिस्से की कीमत 600 करोड़ रुपये बताए जाने की बातें सामने आई थीं, लेकिन उनके मुताबिक इतनी बड़ी संपत्ति का दावा ही सही नहीं था। इसलिए प्रीति को उस संपत्ति का हिस्सा दिए जाने की बात भी उन्होंने खारिज की।

    ताजदार के मुताबिक शानदार अमरोही प्रीति जिंटा के प्रशंसक थे और उन्हें महंगे सामान उपहार में दिया करते थे। हालांकि, उनके अनुसार इन उपहारों और कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज को अलग-अलग संदर्भों में देखा जाना चाहिए।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रीति जिंटा का दावा है कि रकम कर्ज के रूप में दी गई थी और उसे वापस किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी तरफ अमरोही परिवार की ओर से लेनदेन के प्रमाण और दावे के समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

  • माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    नई दिल्ली ।देश की सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास यह पूरा अधिकार है कि वह बुजुर्गों की संपत्ति से उनके बच्चों को बेदखल करने का आदेश जारी कर सके।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल को लगता है कि माता-पिता के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन के लिए बच्चों को बेदखल करना आवश्यक है, तो वह ऐसा आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि बढ़ती उम्र किसी भी स्थिति में असुरक्षा का कारण नहीं बननी चाहिए। सभ्य समाज का असली पैमाना यही है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, आदर और सुरक्षा प्रदान करता है।

    यह महत्वपूर्ण फैसला लखनऊ के विकासनगर निवासी रविकांत गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए दिया गया। अपीलकर्ता अपने रिहायशी मकान के मालिक हैं और उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने उनके बेटे और बहू के खिलाफ जारी बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि उच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के बेदखली के आदेश में हस्तक्षेप करके गलती की थी। अदालत ने माना कि यह एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बेदखली का निर्देश देने की पूरी शक्तियां प्राप्त हैं।

    पीठ ने अपने दूरगामी फैसले में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और सभ्यताओं में वरिष्ठ नागरिकों को ज्ञान, अनुभव और सामूहिक स्मृति के अमूल्य भंडार के रूप में देखा गया है। ऐसे में उनकी संपत्ति, भरण-पोषण और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों के साथ होने वाले संपत्ति संबंधी विवादों और पारिवारिक प्रताड़ना के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने ही बच्चों द्वारा अपनी ही संपत्ति में उपेक्षित या प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

  • संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुलह की उम्मीद बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक बढ़ाई मध्यस्थता अवधि

    संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुलह की उम्मीद बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक बढ़ाई मध्यस्थता अवधि


    नई दिल्ली ।
    दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट से जुड़े पारिवारिक विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए इसकी अवधि 2 नवंबर तक बढ़ा दी है। अदालत ने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और यदि यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रही तो लंबे समय से चला आ रहा विवाद आपसी सहमति से समाप्त हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना सभी पक्षों के हित में होगा।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने मध्यस्थता से संबंधित रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि अब तक की प्रगति संतोषजनक रही है। न्यायालय ने विश्वास व्यक्त किया कि संबंधित पक्ष समाधान के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी आधार पर मध्यस्थता को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया गया। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस का भुगतान आरके फैमिली ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में सहमति नहीं बनती है तो सभी पक्ष कानून के अनुसार आगे की न्यायिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

    यह विवाद उद्योगपति संजय कपूर के निधन के बाद उनकी विशाल संपत्ति और व्यावसायिक हिस्सेदारी के अधिकारों को लेकर शुरू हुआ था। जून 2025 में उनके निधन के बाद परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच उत्तराधिकार और ट्रस्ट के संचालन को लेकर मतभेद सामने आए। मामले में संजय कपूर की मां रानी कपूर, पत्नी प्रिया कपूर तथा उनकी पहली पत्नी करिश्मा कपूर से हुए बच्चों समायरा और कियान कपूर के हितों और अधिकारों को लेकर भी कई कानूनी प्रश्न उठे। इसी कारण यह मामला पहले निचली अदालतों और बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।

    संजय कपूर और करिश्मा कपूर का विवाह वर्ष 2003 में हुआ था, जबकि दोनों वर्ष 2016 में अलग हो गए थे। उनके दो बच्चे हैं, जिनके भविष्य के लिए संजय कपूर ने विभिन्न आर्थिक प्रबंध किए थे। बाद में उन्होंने प्रिया कपूर से विवाह किया। उनके निधन के बाद परिवार के भीतर संपत्ति के प्रबंधन और लाभार्थियों के अधिकारों को लेकर विवाद गहराता चला गया। इसी पृष्ठभूमि में आरके फैमिली ट्रस्ट की भूमिका भी विवाद का प्रमुख कारण बनी।

    विवाद का केंद्र वर्ष 2017 में गठित आरके फैमिली ट्रस्ट है। रानी कपूर का आरोप है कि इस ट्रस्ट का गठन उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया तथा परिवार की संपत्तियों को इसमें शामिल कर दिया गया। उनका कहना है कि ट्रस्ट की वैधता पर गंभीर सवाल हैं और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रिया कपूर का पक्ष है कि ट्रस्ट सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए स्थापित किया गया था तथा इसका उद्देश्य लाभार्थियों के हितों की रक्षा करना है। उनका यह भी कहना है कि ट्रस्ट के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप से उसके संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही मध्यस्थता का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया था। अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। अब मध्यस्थता की अवधि बढ़ाए जाने से यह संकेत मिला है कि अदालत कानूनी संघर्ष के बजाय सहमति आधारित समाधान को प्राथमिकता देना चाहती है। यदि आने वाले महीनों में बातचीत सफल रहती है तो यह मामला लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो सकता है।

  • मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    नई दिल्ली । पालतू पशुओं की अनजानी और मासूम हरकतें कभी-कभी कितने बड़े और विनाशकारी हादसों का रूप ले सकती हैं, इसका एक अत्यंत हृदयविदारक उदाहरण अमेरिका से सामने आया है। मैरीलैंड राज्य के बेलकैंप इलाके में एक घर के भीतर उस समय भारी तबाही मच गई, जब परिवार की अनुपस्थिति में एक पालतू कुत्ते ने गलती से किचन में रखा टोस्टर ऑन कर दिया। देखते ही देखते इस छोटे से उपकरण से निकली चिंगारी ने विकराल आग का रूप ले लिया और पूरा मकान धुएं के गुबार से घिर गया। इस दर्दनाक हादसे में परिवार के तीन बेहद प्रिय पालतू जानवरों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि पड़ोसियों की तत्परता और अदम्य साहस के कारण दो अन्य कुत्तों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घर के भीतर स्थापित सुरक्षा कैमरे में कैद हो गई है।

    स्थानीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह भीषण हादसा उस समय घटित हुआ जब मकान के मालिक किसी घरेलू कार्य से बाहर गए हुए थे और घर में केवल उनके पालतू पशु ही मौजूद थे। सुरक्षा कैमरों की फुटेज का विश्लेषण करने पर अधिकारियों ने पाया कि आग लगने का कारण कोई तकनीकी शॉर्ट-सर्किट नहीं था। वीडियो साक्ष्यों में साफ दिखाई दे रहा है कि परिवार का एक पालतू कुत्ता खेलते-खेलते अचानक रसोईघर के काउंटर पर चढ़ जाता है। इसी दौरान उसका पैर या शरीर का कोई हिस्सा वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक टोस्टर से छू जाता है, जिससे वह उपकरण चालू हो जाता है। टोस्टर के अत्यधिक गर्म होने के कारण उसके अत्यंत निकट रखा अन्य घरेलू सामान सुलगने लगा और कुछ ही मिनटों में लपटें पूरी रसोई को अपनी चपेट में लेते हुए घर के अन्य हिस्सों में फैल गईं।

    आग की विभीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास रहने वाले नागरिकों ने जब बंद मकान की खिड़कियों और छतों से काला धुआं निकलते देखा, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। पड़ोसियों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों के बीच घर का दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया और दो कुत्तों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। हालांकि, अत्यधिक धुआं भर जाने के कारण एक अन्य कुत्ता और परिवार की दो बिल्लियां घर के भीतर ही फंसे रह गए, जिन्हें बचाया नहीं जा सका।

    घटना की आपातकालीन सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और लगभग तीस दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। बचाव दल ने करीब बीस मिनट की कड़ी मशक्कत और भारी जद्दोजहद के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। प्रशासनिक अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में मकान के ढांचे और भीतर रखी मूल्यवान संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका कुल मूल्य लगभग दो लाख डॉलर आंका गया है।

    अग्निशमन विशेषज्ञों और राष्ट्रीय सुरक्षा संघों का कहना है कि पालतू जानवरों की वजह से घरेलू उपकरणों के चालू होने और आग लगने की घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अमेरिका में ही प्रतिवर्ष लगभग एक हजार घरों में बेजुबान जानवरों की अनजानी हरकतों के कारण आग लगने के मामले दर्ज किए जाते हैं, जिससे लाखों पालतू जीव प्रभावित होते हैं। पूर्व में भी अन्य राज्यों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां स्मार्ट उपकरणों की समय पर चेतावनी न मिलने के कारण परिवारों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।

  • संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका

    संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका


    नई दिल्ली । दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर से जुड़े संपत्ति विवाद में एक बार फिर नया कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके रोजमर्रा के खर्चों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। इस याचिका के बाद संपत्ति विवाद की जटिलताएं और बढ़ती दिखाई दे रही हैं, हालांकि अदालत पहले से ही इस मामले में अंतरिम आदेशों के तहत स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

    प्रिया कपूर की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से जारी रहने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगी है, ताकि स्कूल फीस और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्च समय पर पूरे किए जा सकें। यह मामला मुख्य रूप से संजय कपूर की बेटी समायरा और बेटे कियान की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित बताया जा रहा है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ विदेशी संयुक्त खातों के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि बच्चों की विदेश में शिक्षा, रहने और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा किया जा सके। इस पहल को परिवार की ओर से बच्चों के हितों की सुरक्षा और उनकी शिक्षा को बाधित न होने देने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब संपत्ति से जुड़े कई पहलुओं पर पहले से ही कानूनी जांच और विवाद चल रहा है।

    इससे पहले अदालत ने इस मामले में संपत्ति के बड़े और स्थायी निर्णयों पर रोक लगाते हुए स्थिति को यथावत बनाए रखने के आदेश दिए थे। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के अधिकारों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि, बच्चों से जुड़े आवश्यक खर्चों को लेकर अदालत ने पहले भी संवेदनशील रुख अपनाया है और जरूरतों के आधार पर सीमित अनुमति देने पर विचार किया गया है।

    संजय कपूर के निधन के बाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी कथित वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद सामने आए। अलग-अलग पक्षों की ओर से संपत्ति के अधिकारों और प्रबंधन को लेकर दावे किए जाने लगे, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। समय के साथ यह विवाद और जटिल होता गया और इसमें कई कानूनी पहलू जुड़ते चले गए।

    अब प्रिया कपूर की नई याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस नए अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और बच्चों के हितों तथा संपत्ति विवाद के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और सभी पक्ष अदालत के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इस लंबे चल रहे विवाद की दिशा तय हो सकती है।

  • SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार

    SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार


    नई दिल्ली।
    विधवा महिलाओं (Widowed women) के हक में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 (Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956) के तहत ससुर की मौत के बाद विधवा बहू भी उनकी संपत्ति से मेंटिनेंस का दावा कर सकती है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने दीवानी अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस ऐक्ट की धारा 21 (VII) में विधवा बहू को भी शामिल किया गया है। पति की मौत ससुर की मौत से पहले हुई हो या बाद में, विधवा बहू उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है।


    क्या है पूरा मामला

    यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद के वारिसों के बीच का था जिनकी दिसंबर 2021 को मौत हो गई थी। डॉ. महेंद्र प्रसाद की बहू गीता शर्मा उनकी संपत्ति से भरण पोषण की मांग कर रही थी। उनके पति की मौत 2023 में हो गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए मेंटनिनेंस दिलाने से इनकार कर दिया था कि ससुर की मौत के समय उनके पति जीवित थे। हालांकि हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि उनकी जरूरत के हिसाब से मेंटिनेंस का निर्देश दे। हाई कोर्ट के आदेश को परिवार के बाकी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन सदस्यों में डॉ. प्रसाद के दूसरे बेटे की विधवा बहू और लंबे समय तक लिवइन पार्टनर के रूप में रहने का दावा करने वाली महिला भी शामिल है।

    इस कानून के सेक्शन 21 में डिपेंडेंट्स के बारे में बताया गया है। इसके सब सेक्शन VIII में कहा गया है कि किसी शख्स के बेटे की विधवा भी उसकी संपत्ति से मेंटिनें की हकदार है, जब तक कि वह दूसरा विवाह नहीं करती है। इसके लिए शर्त है कि वह पति की संपत्ति या अपने पुत्र या पुत्री की संपत्ति से भरण पोषण प्राप्त करने में असमर्थ होनी चाहिए।