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  • US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर

    US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपनी ही संसद (Parliament) में बड़े झटके का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

    डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध पर रोक लगाना था. इस दौरान वोटिंग से साफ हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध की आशंका को लेकर अमेरिकी सांसदों में चिंता काफी बढ़ गई है. खास बात ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी ईरान जंग पर पाला बदल लिया।


    7 वोटों से पास हुआ प्रस्ताव

    सदन में ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया. हालांकि दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस प्रस्ताव को रोकने में नाकाम रहे. इस वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट डाला. कांग्रेस में ट्रंप के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं है।


    अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?

    संसद के जानकारों का कहना है कि ये वोटिंग फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है. इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से भी पास कराना होगा. इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है।

    हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे. लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भी एक प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था. सीनेट में भी ये सात बार की नाकाम कोशिशों के बाद कामयाब हुई थी।

  • TVK के प्रस्‍ताव पर कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’

    TVK के प्रस्‍ताव पर कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’

    चैन्‍नई। दक्षिण के चुनावी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दरअसल, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की ओर से कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव मिला है। यह पेशकश विजय के पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने की है। तिरुवारूर जिले में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रही है और विजय उसे फिर से ‘पुरानी शान’ दिलाने को तैयार हैं।

    उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और विरासत रही है। अब वह ढलान पर है लेकिन विजय कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। यह मौका कांग्रेस को गंवाना नहीं चाहिए।” हालांकि, अभी तक न तो विजय और न ही उनकी पार्टी TVK ने इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया है।

    कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’
    विजय के पिता के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।

    तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने इस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं को किसी बाहरी बूस्ट की जरूरत नहीं है। हमारे नेता राहुल गांधी ही हमें ‘बूस्ट, हॉर्लिक्स और बॉर्नविटा’ दे रहे हैं।” बावजूद इसके चंद्रशेखर के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज कर दी है।
    DMK से बढ़ती दूरी?
    कांग्रेस का यह बयान सख़्त जरूर है, लेकिन सियासी अटकलें थमी नहीं हैं। कांग्रेस फिलहाल सत्तारूढ़ DMK की सहयोगी है और 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में दोनों ने साथ मिलकर जीत हासिल की थी। लेकिन अब कांग्रेस DMK से सत्ता में हिस्सेदारी चाहती है। सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस कम से कम छह मंत्री पद मांग रही है, जिस पर DMK अभी तक सहमत नहीं हुई है।
    सीट बंटवारे पर भी फंसा पेच
    इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर भी दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 35 सीटें मिलें लेकिन DMK 19 से ज़्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में DMK गठबंधन के साथ 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों में 25 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

    TVK का ऑफर क्यों लुभावना?
    सूत्रों के अनुसार, TVK ने कांग्रेस को 60 से अधिक सीटें और सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों का भी संकेत दिया है। यही कारण है कि भले ही सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस इनकार कर रही हो, लेकिन अंदरखाने इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में कांग्रेस और विजय की पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि कांग्रेस DMK के साथ बनी रहती है या किसी नए सियासी रास्ते की ओर बढ़ती है।