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  • World Vegan Day 2026: क्या है वीगन डाइट, दूध-दही से दूरी के बावजूद सेहत को मिल सकते हैं ये फायदे…

    World Vegan Day 2026: क्या है वीगन डाइट, दूध-दही से दूरी के बावजूद सेहत को मिल सकते हैं ये फायदे…

    नई दिल्ली । हर साल 1 नवंबर को विश्व वीगन दिवस यानी World Vegan Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह पौधों पर आधारित भोजन का चलन बढ़ा है। हालांकि, वीगन डाइट को लेकर अब भी कई लोगों के मन में सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वीगन भोजन सामान्य शाकाहारी खानपान से कैसे अलग है और इसमें दूध, दही तथा पनीर जैसे खाद्य पदार्थों के बिना शरीर को जरूरी पोषण कैसे मिल सकता है।

    वीगन डाइट पूरी तरह पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों पर आधारित होती है। इसमें मांस, मछली, अंडे और दूध से बने उत्पादों का सेवन नहीं किया जाता। सामान्य शाकाहारी भोजन में मांस और मछली से परहेज किया जाता है, लेकिन दूध, दही, घी, मक्खन और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद शामिल हो सकते हैं। इसके विपरीत, वीगन आहार अपनाने वाले लोग इन सभी पशु-आधारित खाद्य पदार्थों से दूरी रखते हैं। इसमें शहद का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता, क्योंकि यह मधुमक्खियों से प्राप्त होता है। वीगन जीवनशैली अपनाने वाले कुछ लोग कपड़ों और अन्य वस्तुओं में चमड़े, ऊन तथा रेशम से बने उत्पादों से भी परहेज करते हैं।

    वीगन डाइट में खाने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। गेहूं, चावल, ओट्स, बाजरा और मक्का जैसे अनाज इसका हिस्सा हो सकते हैं। इसके अलावा अरहर, मूंग, मसूर, चना और राजमा जैसी दालें शरीर को प्रोटीन देने में मदद करती हैं। सेब, केला, संतरा और पपीता जैसे फल तथा पालक, ब्रोकोली और अन्य मौसमी सब्जियां भी इस आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली और विभिन्न बीजों से भी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।

    प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन, टोफू, दालें, चना और बीन्स उपयोगी विकल्प हैं। दूध की जगह सोया मिल्क, बादाम मिल्क और ओट्स मिल्क जैसे पौधों से बने पेय इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सामान्य पनीर के स्थान पर टोफू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, सभी विकल्पों की पोषण संबंधी गुणवत्ता समान नहीं होती। इसलिए खाद्य पदार्थ चुनते समय उनमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

    संतुलित तरीके से अपनाई गई वीगन डाइट सेहत के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकती है। फल, सब्जियों, दालों और साबुत अनाज में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन को बेहतर रखने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद कर सकती है। फाइबर से भरपूर भोजन खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है।

    पौधों पर आधारित संतुलित आहार हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकता है। इसमें संतृप्त वसा कम रखने और साबुत अनाज, फल तथा सब्जियों को प्राथमिकता देने से खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, ये फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि भोजन कितना संतुलित है और उसमें तले हुए, अधिक चीनी वाले तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में शामिल हैं।

    वीगन डाइट अपनाते समय कुछ पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। दूध और डेयरी उत्पाद नहीं लेने के कारण कैल्शियम तथा विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विटामिन बी12 भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी कमी से शरीर में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा आयरन, जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन सुनिश्चित करना जरूरी है।

    इन जरूरतों को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ, दालें, बीन्स, नट्स और बीजों को नियमित भोजन में शामिल किया जा सकता है। विटामिन बी12 के लिए फोर्टिफाइड उत्पाद या चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य पोषण विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इस तरह सही योजना और पोषक तत्वों पर ध्यान देकर वीगन डाइट को संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना जरूरी माना जाता है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी दें। रोजाना के भोजन में शामिल दाल इस लिहाज से एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। खास तौर पर मूंग दाल को हल्के और संतुलित भोजन के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    मूंग दाल में प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, जबकि फाइबर युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इससे बार बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने और भोजन के बीच अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायता मिल सकती है।

    वजन घटाने के लिए मूंग दाल को बनाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। यदि दाल में बहुत अधिक तेल, घी या क्रीम का इस्तेमाल किया जाए तो भोजन की कुल कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए इसे हल्के मसालों और सीमित मात्रा में तेल के साथ तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    मूंग दाल की आसान रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले दाल को अच्छी तरह साफ करके धो लें। इसे करीब 15 से 20 मिनट के लिए पानी में भिगोया जा सकता है। इसके बाद दाल को कुकर में पानी, हल्दी, नमक और कटे हुए टमाटर के साथ डालकर पकाएं। दाल के अच्छी तरह नरम होने के बाद इसमें जीरा, हींग और लहसुन का हल्का तड़का लगाया जा सकता है।

    वेट लॉस डाइट के दौरान तड़के में तेल या घी की मात्रा कम रखना बेहतर रहता है। स्वाद बढ़ाने के लिए धनिया, हरी मिर्च और दूसरे हल्के मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे दाल स्वादिष्ट भी रहेगी और भोजन को अनावश्यक रूप से भारी बनाने से भी बचा जा सकेगा।

    मूंग दाल को और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए इसमें अलग अलग सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं। पालक, लौकी, गाजर, टमाटर और तोरई जैसी सब्जियों को दाल के साथ पकाने से भोजन में पोषक तत्व और फाइबर की मात्रा बढ़ सकती है। इस तरह तैयार दाल दोपहर या रात के भोजन का हिस्सा बन सकती है।

    हालांकि वजन कम करने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। दाल के साथ भोजन में हरी सब्जियां और सलाद शामिल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार रोटी या चावल की संतुलित मात्रा भी ली जा सकती है। भोजन की मात्रा और पूरे दिन की कुल कैलोरी का ध्यान रखना भी वजन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

    इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन की आदत वजन घटाने की कोशिश में मददगार हो सकती है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या लंबे समय से चल रही समस्या में व्यक्तिगत डाइट के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    मूंग दाल को इसलिए वजन घटाने की कोई जादुई चीज नहीं माना जाना चाहिए। यह प्रोटीन और फाइबर वाले संतुलित भोजन का एक हिस्सा हो सकती है। सही मात्रा, कम तेल में तैयारी और सब्जियों के साथ इसका सेवन रोजाना की डाइट को अधिक संतुलित और पौष्टिक बनाने में मदद कर सकता है।

  • जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत उपलब्ध न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद देशभर के परिवारों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पोषण सप्लीमेंट को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आवश्यक पोषण उत्पादों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर आम लोगों के स्वास्थ्य संबंधी खर्च को कम करना और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना है।

    सरकार के मुताबिक, जन औषधि केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें प्रोटीन बार, इम्यूनिटी बार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट आधारित पोषण आहार तथा प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को बच्चों, कामकाजी लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जन औषधि प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार 35 ग्राम के चॉकलेट पैक में उपलब्ध हैं। वहीं महिलाओं के लिए तैयार किए गए विशेष प्रोटीन बूस्ट को चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में 250 ग्राम पैक के रूप में उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों का उद्देश्य रोजमर्रा के आहार में अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है ताकि विभिन्न वर्गों की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जन औषधि योजना के अंतर्गत पोषण रेंज में माल्ट आधारित न्यूट्रिशनल फूड भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उत्पाद आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और पूरे परिवार के लिए दैनिक पोषण का एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। 500 ग्राम के सामान्य माल्ट पैक के साथ कोको फ्लेवर वाला विकल्प भी उपलब्ध है। इसके अलावा कम मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे सैशे पैक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कम बजट वाले परिवारों को भी इन उत्पादों तक आसान पहुंच मिल सके।

    सरकार का कहना है कि विभिन्न पैक आकार उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं। इन पोषण उत्पादों को तैयार करना भी आसान है और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है। इससे परिवारों को कम लागत में अतिरिक्त पोषण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    फिटनेस और प्रोटीन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना के तहत 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर और जन औषधि प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, ये उत्पाद दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी में भी सहायक माने जाते हैं। विशेष रूप से व्यायाम करने वाले लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्हें उपयोगी विकल्प बताया गया है।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों को योजना में शामिल करने से अब लोगों को केवल सस्ती दवाएं ही नहीं, बल्कि कम कीमत पर पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध इन उत्पादों से परिवारों का स्वास्थ्य व्यय कम करने, संतुलित पोषण को प्रोत्साहित करने और विभिन्न आय वर्ग के लोगों तक आवश्यक पोषण उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में भी इस श्रेणी में नए उत्पाद शामिल किए जाने की संभावना पर काम जारी है।

  • 5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    नई दिल्ली । पांच से बारह वर्ष की आयु बच्चों के संपूर्ण विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इसी उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं तथा मस्तिष्क नई चीजों को सीखने और समझने की क्षमता विकसित करता है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य की सेहत की भी मजबूत नींव तैयार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दैनिक डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना चाहिए। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और उनकी ताकत भी बढ़ती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी भी बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेज गति से होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से कुछ समय धूप में बिताने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं।

    फल और हरी सब्जियां बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें मौजूद विटामिन, खनिज और फाइबर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियां खाने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है और उनका मानसिक विकास भी बेहतर माना जाता है।

    ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना लाभदायक होता है। गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई या अन्य गतिविधियों के दौरान उनकी एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत अत्यधिक रिफाइंड आटे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    दिमाग के स्वस्थ विकास के लिए हेल्दी फैट भी जरूरी है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों में मौजूद पोषक तत्व याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में नियमित रूप से आहार में शामिल किया जा सकता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी बच्चों के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वहीं अत्यधिक मीठे पेय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इनके अधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। यही आदतें आगे चलकर उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।