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  • उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला

    उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला


    नई दिल्ली। उज्जैन में NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार देर शाम युवक कांग्रेस ने शहर के व्यस्त टावर चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इसे देश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।
    युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अर्पित यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के 22 लाख से अधिक छात्रों के सपनों और मेहनत पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया, उन्हें अब अव्यवस्था और भ्रष्ट प्रणाली की कीमत चुकानी पड़ रही है।
    उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों ने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए भारी कर्ज लिया, जबकि कुछ ने अपने गहने तक बेच दिए, लेकिन परिणामस्वरूप उन्हें अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। यादव ने इसे शिक्षा व्यवस्था में संगठित भ्रष्टाचार का परिणाम बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ चुकी है। उनका आरोप था कि बार-बार पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
    प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस ने NTA अधिकारियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ सकती है।
    टावर चौक पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसमें चंद्रभान सिंह चंदेल, अजीत सिंह ठाकुर, रहीम लाल, ललित मीना, पोप सिंह, यश जैन, हिमांशु शुक्ला और योगेश दायमा सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
    पुलिस प्रशासन ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखा, जबकि प्रदर्शन कुछ समय बाद शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। हालांकि, छात्रों और संगठनों का आक्रोश अब भी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।
  • कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी

    कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत दे दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और इसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है।

    संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की समस्याएं वर्षों से लंबित हैं लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार नव नियुक्त कर्मचारियों के लिए 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन के बंधन को समाप्त नहीं कर रही है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

    बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। कर्मचारियों ने मांग की कि अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी का बंधन समाप्त किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वर्ष 2019 से कोर्ट के आदेश के अनुसार कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए और इसके लिए व्यापक बीमा योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही यह मांग भी उठी कि कर्मचारियों को बैंक खातों के माध्यम से बड़े स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे भी बैठक में छाए रहे। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके साथ भेदभाव खत्म हो सके। इसके अलावा शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई और इसे निरस्त करने की मांग उठाई गई।

    बैठक में महंगाई राहत को लेकर भी आवाज बुलंद हुई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई राहत देने की मांग की गई ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके। इसके साथ ही केंद्रीय दर और तिथि के अनुसार लाभ देने की भी मांग रखी गई।

    इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद कर्मचारी संघ ने आगामी दिनों में प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी भी शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने की सहमति जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी इससे जुड़े हुए हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का यह बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है जो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए अहम परीक्षा साबित होगा।