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  • ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला

    ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला


    मंदसौर । मंदसौर के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहा यानी बीपीएल चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार प्रशासन के यू-टर्न के साथ फिलहाल थम गया। लगातार विरोध और जनदबाव के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को चौराहे पर लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद यहां फिर से पुरानी यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई।

    बैरिकेड्स हटने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा था।

    प्रशासन ने कुछ महीनों पहले बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे के सर्कल को छोटा कर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत चौराहे पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। नई व्यवस्था के कारण अफीम गोदाम रोड, नई आबादी और संजीत नाका की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सीधे मार्ग की बजाय सिटी क्राउन होटल या महाराणा प्रताप चौराहा होकर निकलना पड़ रहा था। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी और दूसरे मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनने लगी थी।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप था कि बिना पर्याप्त योजना और जनसुनवाई के लागू की गई इस व्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। इसी के विरोध में कुछ दिन पहले जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर एक महीने के भीतर व्यवस्था की समीक्षा करने और बैरिकेड्स हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने तय समय से पहले ही बैरिकेड्स हटाने का फैसला कर लिया।

    दीपक सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि सर्कल छोटा करने और बैरिकेड्स लगाने से चौराहे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बैरिकेड्स हटाने का श्रेय आम जनता के संघर्ष को दिया।

    बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से बैरिकेड्स हटाने की मांग की थी। अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की है और चौराहे पर यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम दिखाई दे रहा है।

  • जल संकट से हाहाकार: इंदौर में विरोध, रतलाम में भी सड़क पर प्रदर्शन

    जल संकट से हाहाकार: इंदौर में विरोध, रतलाम में भी सड़क पर प्रदर्शन


    इंदौर। इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने लोगों का गुस्सा सड़क पर उतार दिया। रविवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में “पानी दो-पानी दो” के नारे गूंजते रहे, जब कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कई प्रमुख मार्गों पर घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही।

    सुबह से ही पालदा चौराहा और दीनदयाल उपाध्याय चौराहा (सुखलिया जोन-5) पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। वार्ड-75 और वार्ड-64 के रहवासी पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में सड़क पर बैठ गए, वहीं वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के साथ स्थानीय लोग भी विरोध में उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब चक्काजाम के कारण सिटी बसें और अन्य वाहन बीच रास्ते में फंस गए। तपती धूप में सैकड़ों यात्री, बुजुर्ग और बच्चे घंटों परेशान होते रहे। कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई।

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ गई है। महिलाओं और पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर विरोध जताया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इंदौर में जल संकट के पीछे कई कारण हैं। कई नई कॉलोनियों में नर्मदा जल की पाइपलाइन नहीं पहुंची है, टैंकरों की कमी के कारण नियमित आपूर्ति बाधित है और भीषण गर्मी के चलते भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है। इन सभी कारणों ने मिलकर हालात को और गंभीर बना दिया है।

    लंबे समय तक चले विरोध के बाद नगर निगम और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त टैंकर भेजे जाएंगे और जल आपूर्ति व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा।

    प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो शहरव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।