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  • सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे के निकट स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला इन दिनों अपनी गौरवशाली सैन्य विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज व पेशवाओं के शौर्य इतिहास के बजाय एक बेहद विचलित करने वाली वजह से देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में इस किले में घटित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि किले में पहुँचने वाले इन नए पर्यटकों की रुचि इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला या इसके समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को जानने में नहीं है, बल्कि वे उस विशिष्ट स्थान और गहरी खाई को देखने के लिए उत्सुक हैं जहाँ कथित तौर पर सिया गोयल ने अपने मंगेतर को धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया था। स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस त्रासदीपूर्ण स्थान को ‘सिया पॉइंट’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को चिंता में डाल दिया है।

    इस घटना के बाद से लोहगढ़ किले में सप्ताहांत पर पर्यटकों की इतनी भारी भीड़ जमा हो रही है कि किले के संकरे रास्तों पर कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से स्पष्ट है कि लोग उस खौफनाक मर्डर स्पॉट पर जाकर तस्वीरें खिंचवाने, सेल्फी लेने और रील बनाने की होड़ में लगे हैं। किसी अपराध स्थल या त्रासदी की जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने की इस बढ़ती प्रवृत्ति को समाजशास्त्री और विशेषज्ञ ‘डार्क टूरिज्म’ (Dark Tourism) का नाम दे रहे हैं। जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जिसका इतिहास या वर्तमान मृत्यु, विनाश, मानवीय त्रासदी या किसी जघन्य अपराध से जुड़ा हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले मेघालय के चेरापूंजी में भी एक ऐसी ही पारिवारिक हत्या के बाद उस पहाड़ी को ‘सोनम पॉइंट’ कहा जाने लगा था और दिल्ली का कुख्यात बुराड़ी घर भी इसी तरह की उत्सुकता का केंद्र बना था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डार्क टूरिज्म का एक ऐतिहासिक और गंभीर स्वरूप रहा है, जैसे पोलैंड का ऑशविट्ज़ प्रताड़ना शिविर या जलियांवाला बाग, जहाँ लोग इतिहास की त्रासदियों से सीख लेने, शोक संवेदना प्रकट करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। इसके विपरीत, वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण जो नया डार्क टूरिज्म उभर रहा है, वह बेहद सतही और केवल सनसनीखेज मामलों से प्रेरित है। लोग केवल अपनी जिज्ञासा शांत करने और इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री (रील्स और मीम्स) के माध्यम से व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए इन संवेदनशील और दर्दनाक स्थानों का रुख कर रहे हैं। किसी की असामयिक और क्रूर मौत को मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का जरिया बना लेना एक बेहद खतरनाक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।

    इस पूरे प्रकरण ने पुरातत्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और इतिहासकारों के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सदियों पुराना लोहगढ़ किला, जो कभी मराठा साम्राज्य की सामरिक शक्ति का प्रतीक था और जहाँ लोग इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करने आते थे, उसकी पहचान को एक आपराधिक घटना के नाम पर री-ब्रांड करने की कोशिश की जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को इस तरह कमतर करना और उसे एक नकारात्मक छवि के साथ जोड़ना हमारी आने वाली पीढ़ियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की अनियंत्रित और संवेदनहीन भीड़ को संभालना एक बड़ी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समस्या बनता जा रहा है।

    लोहगढ़ किले की इस बदलती तस्वीर ने अंततः सामूहिक सामाजिक चेतना पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चंद लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में इंसानी संवेदनाओं और किसी परिवार के गहरे दुख का मजाक उड़ाने का यह चलन यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक समाज के रूप में हम कितने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि न केवल प्रशासन ऐसे संवेदनशील स्थलों पर रील बनाने और अनुचित फोटोग्राफी पर कड़े प्रतिबंध लगाए, बल्कि नागरिक समाज भी यह आत्मनिरीक्षण करे कि मनोरंजन और उत्सुकता की सीमा कहाँ समाप्त होनी चाहिए। किसी भी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और मानवीय त्रासदियों के प्रति सम्मानजनक मौन बनाए रखना ही एक परिपक्व समाज की पहचान है।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा नया इतिहास, तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना सेक्टर; एआई और डेटा सेंटर निर्माण से मिलेगी नई रफ्तार

    इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा नया इतिहास, तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना सेक्टर; एआई और डेटा सेंटर निर्माण से मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब यह देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रगति को देश की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। एक समय था जब इस क्षेत्र का लक्ष्य केवल शीर्ष दस निर्यात श्रेणियों में शामिल होना था, लेकिन लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता, निवेश और वैश्विक मांग के कारण यह क्रमशः आगे बढ़ते हुए अब तीसरे स्थान तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

    इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगांव में एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र आधुनिक तकनीकों पर आधारित उपकरणों के निर्माण के लिए विकसित किया गया है और इसे देश की तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई इकाई घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी उत्पादन करेगी, जिससे भारत के निर्यात को अतिरिक्त बल मिलेगा।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है। दुनिया भर में एआई आधारित डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है और इनके संचालन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल उपभोक्ता बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि एआई और डेटा सेंटर उद्योग के लिए जरूरी प्रमुख तकनीकी उपकरणों का उत्पादन भी देश के भीतर ही करे।

    उन्होंने बताया कि नई विनिर्माण इकाई में एआई सिस्टम, डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उत्पाद, उच्च क्षमता वाले नेटवर्किंग समाधान, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल एवं उन्नत तकनीकी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे भारत की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उसकी भागीदारी और मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ोतरी केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों पर भी पड़ता है। नई परियोजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

    इस परियोजना के माध्यम से स्थानीयकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे कई इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और घटकों का उत्पादन देश के भीतर किया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। साथ ही भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी।

    उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगातार हो रही प्रगति भारत को वैश्विक तकनीकी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआई, डेटा सेंटर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।

  • भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित

    भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित


    नई दिल्ली । भारत के कौशल विकास और उद्यमिता के भविष्य को आकार देने के लिए पुणे में 19 जनवरी 2026 को पीएम-सेतु उद्योग परामर्श का आयोजन किया गया। यह परामर्श कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय  एमएसडीई महाराष्ट्र सरकार और यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी यशादा के सहयोग से आयोजित किया गया। पीएम-सेतुप्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप एक महत्वाकांक्षी योजना हैजिसका उद्देश्य देश में भविष्य के लिए तैयारवैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल का निर्माण करना है। कार्यशाला में निर्माणवस्त्रऑटोमोटिवएफएमसीजीइलेक्ट्रॉनिक्सतेल और गैसनवीकरणीय ऊर्जा समेत 50 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया। मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी और महाराष्ट्र सरकार की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने परामर्श की अध्यक्षता की और क्षेत्र के आईटीआई और उद्योगों का दौरा भी किया।

    पीएम-सेतु योजना का केंद्र बिंदु हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण है। इसके तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिकीकरण के तहत विकसित किया जाएगा। 200 हब आईटीआई में उन्नत बुनियादी ढांचा और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया जाएगाजबकि 800 स्पोक आईटीआई स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण का विस्तार करेंगे। योजना के तहत आईटीआई का स्वामित्व सरकार का होगालेकिन उद्योग इसका प्रबंधन करेंगे। इस तरह मांग-आधारित प्रशिक्षणशिक्षुता और उद्योगों के साथ क्लस्टर-आधारित साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि पीएम-सेतु उद्योग के लिए कौशल विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। उद्योग क्लस्टर मॉडल के जरिए वे प्रशिक्षणपाठ्यक्रम सुधारसंकाय प्रशिक्षणशिक्षुता और नियोजन प्रक्रियाओं में योगदान देंगे। इससे भर्ती लागत कम होगीउत्पादकता बढ़ेगी और उद्योग मानकों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएं तैयार होंगी।

    योजना के प्रारंभिक कार्य पहले ही 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुके हैं। 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों को अधिसूचित किया है। परामर्श के दौरान व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु औपचारिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। इनमें महाराष्ट्र के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय और फिएट इंडियाश्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया तथा अनुदीप फाउंडेशन के बीच साझेदारियां शामिल हैं। पीएम-सेतु योजना भारत में कौशल विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों का निर्माण करेगीपाठ्यक्रम को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालेगी और उभरते क्षेत्रों में मजबूत प्रतिभा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करेगी। उद्योग और सरकार के सहयोग से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का यह प्रयास भारत के कौशल विकास की यात्रा को नई दिशा देगा।

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।

  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टक्कर मिलेगा नया विजेता


    पुणे । सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 के फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टीमें आमने-सामने होंगी और इस बार यह टूर्नामेंट एक नया विजेता पैदा करने की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार को हरियाणा ने अपनी शानदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ हैदराबाद को 124 रनों से करारी शिकस्त दी और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। वहीं झारखंड ने भी अपनी शानदार प्रदर्शन से फाइनल में प्रवेश किया है। यह दोनों टीमें पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची हैं जो इस मैच को और भी रोमांचक बना देता है।

    हरियाणा की धमाकेदार जीत
    हरियाणा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 246 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज अंकित कुमार ने 27 गेंदों में 57 रन बनाये और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने अर्श रंगा  के साथ मिलकर 81 रनों की साझेदारी की। अंकित की आक्रामक बल्लेबाजी में छह छक्के और एक चौका शामिल था। इसके बाद सामंत जाखड़ ने 22 गेंदों में आठ छक्कों और एक चौके की मदद से 60 रन बनाकर टीम को और ऊंचाई तक पहुंचाया। अंत में पार्थ वत्स ने भी 19 गेंदों में चार चौके और तीन छक्के जड़ते हुए 45 रन बनाये।

    हैदराबाद के लिए लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था। हैदराबाद की टीम केवल 122 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। अमित राणा ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 रन पर तीन विकेट लिए वहीं सामंत जाखड़ इशांत भारद्वाज और अंशुल कंबोज ने भी दो-दो विकेट चटकाए।

    झारखंड की टीम भी फाइनल में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल भी रोमांचक होने की संभावना है क्योंकि झारखंड की टीम ने भी शानदार क्रिकेट खेला है। ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और अब वे हरियाणा के खिलाफ खिताबी भिड़ंत के लिए तैयार हैं।

    फाइनल का रोमांच

    फाइनल में हरियाणा और झारखंड दोनों ही टीमों ने इस सीजन में अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित किया है। हरियाणा की ओर से अंकित कुमार और सामंत जाखड़ की तूफानी बल्लेबाजी ने उन्हें सेमीफाइनल में हैदराबाद को हराने में मदद की जबकि झारखंड ने भी अपने सामूहिक प्रदर्शन से फाइनल में जगह बनाई। इस मुकाबले में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हरियाणा अपना पहला सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खिताब जीत पाती है या फिर झारखंड अपने पहले खिताब के साथ इतिहास रचने में सफल होता है।

    मुकाबला पुणे में

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच 18 दिसंबर को पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच दो शानदार टीमों के बीच होगा जो दोनों ही पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं और इस कारण इस मुकाबले का रोमांच काफी बढ़ चुका है। अब देखना यह है कि कौन सी टीम इस ऐतिहासिक खिताबी भिड़ंत में बाजी मारती है और नया विजेता बनता है!
  • मैच के बाद बिगड़ी यशस्वी जायसवाल की तबीयत, तेज पेट दर्द के चलते अस्पताल में भर्ती..

    मैच के बाद बिगड़ी यशस्वी जायसवाल की तबीयत, तेज पेट दर्द के चलते अस्पताल में भर्ती..

    नई दिल्ली/भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। टीम इंडिया के उभरते सितारे और विस्फोटक सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के सुपर लीग मुकाबले के तुरंत बाद की है, जब जायसवाल मैदान पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद अचानक तेज पेट दर्द से जूझने लगे।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुणे में खेले गए मुंबई बनाम राजस्थान के अहम मुकाबले के दौरान ही यशस्वी जायसवाल को पेट में ऐंठन की शिकायत महसूस होने लगी थी। हालांकि, टीम के लिए उनकी अहमियत को देखते हुए उन्होंने दर्द के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा और मैच में हिस्सा लिया। मुकाबला समाप्त होने के कुछ घंटों बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें तुरंत पिंपरी-चिंचवड़ स्थित आदित्य बिड़ला अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद बताया कि यशस्वी जायसवाल एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस से पीड़ित हैं। यह पेट से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें तेज दर्द, ऐंठन और कमजोरी जैसी शिकायतें होती हैं। डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर उनका अल्ट्रासाउंड USGऔर सीटी स्कैन कराया। इसके साथ ही उन्हें ड्रिप के जरिए जरूरी दवाइयां दी गईं और पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई।राहत की बात यह है कि फिलहाल जायसवाल की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह डॉक्टरों की निगरानी में हैं। मेडिकल टीम का कहना है कि यदि उनकी तबीयत में सुधार जारी रहा, तो कुछ ही दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। हालांकि, पूरी तरह फिट होने के लिए उन्हें पर्याप्त आराम की जरूरत होगी।

    बीमारी के बावजूद जायसवाल का मैदान पर उतरना उनके जज्बे और प्रोफेशनलिज्म को दर्शाता है। राजस्थान के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने 217 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 16 गेंदों में 15 रन बनाए। यह मैच मुंबई की टीम ने तीन विकेट से अपने नाम किया। कप्तान अजिंक्य रहाणे की नाबाद 72 रनों की शानदार पारी और सरफराज खान की 22 गेंदों में 73 रनों की तूफानी बल्लेबाजी ने टीम को जीत दिलाई। हालांकि, इस जीत के बावजूद मुंबई की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।यशस्वी जायसवाल की सेहत को लेकर फिलहाल BCCI की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञ अब बोर्ड के अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। हालिया फॉर्म की बात करें तो जायसवाल शानदार लय में चल रहे हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने तीन मैचों में 145 रन बनाए हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में भी उनका प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा था।

    अच्छी खबर यह है कि फिलहाल भारतीय टीम का कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय दौरा तुरंत नहीं है। यशस्वी जायसवाल इस समय T20I टीम का हिस्सा नहीं हैं, जिससे उन्हें पूरी तरह रिकवर होने का समय मिल सकता है। भारतीय टीम नए साल की शुरुआत 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि तब तक जायसवाल पूरी तरह फिट होकर एक बार फिर मैदान पर वापसी करेंगे और अपने बल्ले से फैंस को खुश करेंगे।