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  • स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग

    स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग


    नई दिल्ली। देश में स्ट्रे डॉग्स को लेकर चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री सोनम बाजवा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए बेजुबान जानवरों के लिए उचित व्यवस्था और शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान केवल हटाने से नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।

    सोनम बाजवा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके अनुसार अदालत ने स्ट्रे डॉग्स को पूरी तरह हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल, वैक्सीनेशन और शेल्टरिंग जैसे उपायों के जरिए समस्या के समाधान की बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली सवाल यह है कि आखिर इन जानवरों के लिए पर्याप्त शेल्टर और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कहां है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ दया और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो मानव और पशु दोनों के हित में हो।

    उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर पशु कल्याण से जुड़े विशेषज्ञों, एनजीओ, पशु चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ बैठाकर एक व्यावहारिक योजना तैयार की जानी चाहिए। उनके अनुसार केवल सख्त कदम उठाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एक व्यवस्थित नीति और मजबूत ढांचे की जरूरत है।

    यह मुद्दा उस समय और अधिक चर्चा में आ गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों को एबीसी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि कई क्षेत्रों में इस कार्यक्रम के सही तरीके से लागू न होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कई राज्यों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है, जहां एक तरफ सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ पशु अधिकारों और उनके संरक्षण की मांग भी उठ रही है। सोनम बाजवा की यह अपील इसी बहस को एक नया दृष्टिकोण देती है, जिसमें समाधान को केवल नियंत्रण तक सीमित न रखकर एक संवेदनशील और व्यवस्थित नीति की जरूरत पर जोर दिया गया है।

  • राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार

    राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार


    नई दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी (AAP) से हाल ही में नाता तोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब अपनी पुरानी पार्टी और पंजाब सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। सांसद चड्ढा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे राष्ट्रपति भवन द्वारा मंजूर कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह अहम मुलाकात 5 मई को सुबह 10:40 बजे होगी। इस दौरान राघव चड्ढा के साथ तीन अन्य सांसद भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने हाल ही में AAP का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
    क्या है मुलाकात का मुख्य एजेंडा?

    समाचार एजेंसी के हवाले से लिखा है कि इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को पंजाब की भगवंत मान सरकार की कथित ‘बदले की राजनीति’ से अवगत कराना है। राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों का आरोप है कि पंजाब सरकार अपनी शक्तियों और सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग कर रही है। उनका दावा है कि जिन नेताओं ने हाल ही में AAP से इस्तीफा देकर BJP के साथ विलय किया है, पंजाब सरकार अब उन्हें जानबूझकर ‘टार्गेट’ कर रही है और उन पर अनुचित कार्रवाई कर रही है। इस मुलाकात में ये सांसद राष्ट्रपति से पंजाब सरकार की इन कथित दमनकारी नीतियों और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
    आप छोड़ भाजपा में गए राघव चड्ढा

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में राजनीतिक घमासान चरम पर है। 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत सात AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय का ऐलान किया था। इनमें छह पंजाब से चुने गए सांसद शामिल हैं। AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जबकि चड्ढा गुट ने पंजाब सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

    AAP छोड़ने वालों में राघव चड्ढा के अलावा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी तथा स्वाति मालीवाल शामिल हैं। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि AAP मूल सिद्धांतों से भटक गई है। दो-तिहाई बहुमत होने के कारण इन सांसदों का भाजपा में विलय राज्‍यसभा सभापति ने स्वीकार भी कर लिया है।
    संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा

    बता दें कि आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सूत्रों ने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

    हालांकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है।

    पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।

    दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी (आप) की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी।
  • हरभजन सिंह की सुरक्षा वापसी से बढ़ा विवाद, जालंधर आवास पर बदली व्यवस्था..

    हरभजन सिंह की सुरक्षा वापसी से बढ़ा विवाद, जालंधर आवास पर बदली व्यवस्था..


    नई दिल्ली।
    पंजाब में एक अहम प्रशासनिक निर्णय सामने आया है, जिसमें राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह की सुरक्षा व्यवस्था को वापस ले लिया गया है। इस फैसले के बाद जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मियों को हटा दिया गया, जिससे राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

    लंबे समय से उन्हें राज्य की ओर से उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की जा रही थी, जिसे अब अचानक समाप्त कर दिया गया है।
    जानकारी के अनुसार, यह बदलाव राज्य सरकार के निर्णय के तहत किया गया है। सुरक्षा हटने के बाद उनके आवास के बाहर का माहौल पूरी तरह बदल गया है और पहले मौजूद सुरक्षा व्यवस्था अब वहां दिखाई नहीं दे रही है। इस घटनाक्रम की पुष्टि उनके निजी सहायक द्वारा भी की गई है, जिसमें बताया गया कि सरकारी निर्देशों के बाद सुरक्षा कर्मियों को वापस बुला लिया गया है।

    इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में कुछ बदलाव और आरोप-प्रत्यारोप के माहौल के बीच यह निर्णय और अधिक चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न राजनीतिक हलकों में इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    हरभजन सिंह लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा में बदलाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि इस फैसले के पीछे के विस्तृत कारणों को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    इसी बीच राज्य में पहले से चल रही राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। कुछ जगहों पर हुए विरोध प्रदर्शनों और आरोपों के बाद यह मामला और भी चर्चा में आ गया है, जिससे स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर हरभजन सिंह की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उनकी चुप्पी के कारण भी इस निर्णय को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। आने वाले समय में यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।