Tag: Punjab

  • पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    नई दिल्ली । पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार दो दिनों में बड़ा झटका लगा है। पार्टी की ओर से 31 अक्टूबर को 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के अगले ही दिन उसके दो मौजूदा विधायकों ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले नेताओं में पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा शामिल हैं। दोनों के फैसले से चुनाव से पहले पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    दोनों विधायकों के इस्तीफे की जानकारी 1 नवंबर को सामने आई। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा है। वहीं चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। दोनों विधायकों के नाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई आम आदमी पार्टी की पहली सूची में शामिल नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    दोनों नेताओं ने चंडीगढ़ में रविवार शाम 4:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की जानकारी दी थी। इसमें उनके पार्टी छोड़ने के फैसले और इसके पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई। उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की भी चर्चा सामने आई, हालांकि इस्तीफे के समय तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    हरमीत सिंह पठानमाजरा और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ और उनके विधानसभा क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई के मुद्दे पर उन्होंने सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाए थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी थी। इसके बाद उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने का मामला भी चर्चा में आया था।

    चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी बदलाव हुए। पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को आम आदमी पार्टी में शामिल करने और उन्हें समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने के बाद जौड़ामाजरा की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।

    दूसरी ओर, हरमीत सिंह पठानमाजरा लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों को लेकर चर्चा में रहे हैं। सितंबर 2025 में बाढ़ की स्थिति और अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने सरकार के सामने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई और बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त कदम उठाने की जरूरत है। इस मुद्दे पर उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए थे। बाद के घटनाक्रम में उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने की बात भी सामने आई थी।

    पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने पहले ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 31 अक्टूबर को घोषित पहली सूची में 40 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए थे। पार्टी ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा करके अपनी तैयारियों को गति देने की कोशिश की है। हालांकि, सूची जारी होने के अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों के इस्तीफे ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और 2027 में होने वाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों का पार्टी छोड़ना चुनावी तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। पार्टी ने इस सूची में 40 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। सबसे प्रमुख नाम पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का है, जिन्हें धूरी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है। पार्टी की ओर से जारी सूची में माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों की विभिन्न विधानसभा सीटों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही कई महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।

    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज कुमार गुप्ता की ओर से 31 अक्टूबर को उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें प्रत्याशियों के नाम के साथ उनके विधानसभा क्षेत्र और निर्वाचन क्षेत्र की संख्या का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर चुनावी तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    माझा और दोआबा क्षेत्र में इन उम्मीदवारों को टिकट
    पार्टी की पहली सूची के अनुसार, बटाला विधानसभा सीट से अमनशेर सिंह (शेरी कलसी), अजनाला से कुलदीप सिंह धालीवाल और अमृतसर दक्षिण से डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर को उम्मीदवार बनाया गया है। तरनतारन सीट से हरमीत सिंह संधू और खेमकरण से सरवन सिंह धुन चुनाव लड़ेंगे।

    दोआबा क्षेत्र में नकोदर सीट से इंदरजीत कौर मान, करतारपुर से बलकार सिंह, दसूया से करमबीर सिंह घुम्मन और उर्मर से जसवीर सिंह राजा गिल को टिकट दिया गया है। होशियारपुर से ब्रह्म शंकर शर्मा जिंपा, चब्बेवाल से ईशांक कुमार चब्बेवाल, गढ़शंकर से जय किशन सिंह रौड़ी और बलाचौर से संतोष कटारिया को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

    रूपनगर और लुधियाना की सीटों पर भी नाम तय
    रूपनगर विधानसभा सीट से दिनेश चड्ढा और एसएएस नगर से कुलवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। फतेहगढ़ साहिब से लखबीर सिंह राय, अमलोह से गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग और समराला से जगतार सिंह दयालपुरा चुनाव मैदान में होंगे।

    लुधियाना क्षेत्र की कई सीटों पर भी पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। लुधियाना पूर्वी से दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला, आत्म नगर से कुलवंत सिंह सिद्धू और लुधियाना केंद्रीय से अशोक प्रशार पप्पी को टिकट दिया गया है। लुधियाना पश्चिम से संजीव अरोड़ा, लुधियाना उत्तर से चौधरी मदन लाल बग्गा और पायल से मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को उम्मीदवार बनाया गया है।

    मालवा क्षेत्र में भी उम्मीदवारों की घोषणा
    मालवा क्षेत्र की सीटों पर निहाल सिंह वाला से मनजीत सिंह बिलासपुर, बाघा पुराना से अमृतपाल सिंह सुखानंद और मोगा से अमनदीप कौर अरोड़ा को प्रत्याशी घोषित किया गया है। धर्मकोट से देविंदर जीत सिंह लाडी ढोस, जलालाबाद से जगदीप कंबोज गोल्डी और फाजिल्का से नरिंदरपाल सिंह सावना को टिकट मिला है।

    इसके अलावा मुक्तसर से जगदीप सिंह काका बराड़, कोटकपूरा से कुलतार सिंह संधवां और जैतो से अमोलक सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। तलवंडी साबो से बलजिंदर कौर, सरदूलगढ़ से गुरप्रीत सिंह बनावाली, भदौड़ से लभ सिंह उगोके और मेहल कलां से कुलवंत सिंह पंडोरी को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

    धूरी से भगवंत मान, पटियाला से अजीतपाल सिंह को टिकट
    सूची में अमरगढ़ विधानसभा सीट से जसवंत सिंह गज्जन माजरा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं धूरी से मुख्यमंत्री भगवंत मान चुनाव लड़ेंगे। पटियाला विधानसभा सीट से अजीतपाल सिंह को टिकट दिया गया है। सूची में इंदरजीत कौर मान, संतोष कटारिया, डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा और बलजिंदर कौर सहित महिला उम्मीदवारों को भी जगह दी गई है।

    इस तरह आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 40 विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी से उम्मीदवार बनाए जाने के साथ पार्टी ने अपनी पहली सूची में विभिन्न क्षेत्रों और विधानसभा सीटों को प्रतिनिधित्व दिया है।

  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया

    पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया


    नई दिल्ली ।पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्य में नशे के कारोबार, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही पंजाब में नशा फैलाने और राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।

    केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में अडानी पोर्ट के रास्ते पंजाब में नशा फैलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में नशे की समस्या उन राज्यों में भी गंभीर है, जहां लंबे समय से भाजपा की सरकारें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय पंजाब को लेकर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

    केजरीवाल ने अपने बयान में पंजाब में नशे के प्रसार और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच भी राज्य में नशे की समस्या को बढ़ावा मिला था। उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर पुराने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ाने का आरोप लगाया। ये आरोप केजरीवाल की ओर से लगाए गए हैं।

    अपने पलटवार में केजरीवाल ने पंजाब के पानी, पंजाब विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर राज्य के इन महत्वपूर्ण विषयों पर है। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि भाजपा दोबारा सत्ता में आने पर ऐसे कानूनों को फिर से ला सकती है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ऐसा नहीं होने देगा। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कृषि कानूनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है।

    दरअसल, अमित शाह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि राज्य नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। शाह ने सवाल किया कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से नशे के कारोबार और अपराध पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर भी सवाल किए।

    शाह ने अपने बयान में मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दिरबा में एक पिता की मौत से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। शाह के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा के पिता ने आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।

    शाह ने यह भी कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा हालात को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर पंजाब को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराया। शाह ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई, युवाओं के भविष्य की रक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही।

    दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि पंजाब में नशे का कारोबार, संगठित अपराध और कानून-व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। जहां भाजपा राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा के शासन और उसके पुराने राजनीतिक फैसलों को बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, धांधली और लेनदेन के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया गया था। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई चिट्ठी और उसमें लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और उनके सहयोगियों नितिन गोहल तथा बीर देविंदर के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताई थी और पंजाब पुलिस के रवैये से संतुष्ट नहीं होने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

    पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में इस मामले पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनाव से पहले लगाए जा रहे ऐसे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। विकास सिंह ने कहा कि ये आरोप राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित हैं और चुनाव से पहले ऐसे मामले गढ़े जा रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को इसी आधार पर चुनौती दी है।

    मामले की शुरुआत ईडी की गोपनीय जांच से जुड़ी है। ईडी ने अपनी जांच के दौरान आरोपों से संबंधित सामग्री जुटाई थी। इसमें अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग करवाने, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कामों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोपों का उल्लेख था। ईडी ने 30 जुलाई 2026 को यह सामग्री पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी थी और मामले में केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। इसके बाद इस मामले को लेकर जांच और कार्रवाई का मुद्दा अदालत तक पहुंचा।

    पंजाब हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएमओ से जुड़े लोगों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से पंजाब डीजीपी को भेजे गए पत्रों के आधार पर सीबीआई को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा था। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

    मामले में सरकार का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित तरीके से उठाया जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला किया था। अदालत ने जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

    अब सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती पर सुनवाई के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में ईडी की ओर से जुटाई गई सामग्री में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कार्यों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप शामिल हैं। पंजाब सरकार ने इन आरोपों और जांच की प्रक्रिया को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई को केस दर्ज कर जांच करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे चुका है।

  • पंजाब: LPU में बवाल के बाद 10 दिन बंद रहेगी यूनिवर्सिटी, मिडटर्म परीक्षा टली, पुलिस से झड़प में वाहन फूंके

    पंजाब: LPU में बवाल के बाद 10 दिन बंद रहेगी यूनिवर्सिटी, मिडटर्म परीक्षा टली, पुलिस से झड़प में वाहन फूंके


    जालंधर। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से कथित रेप और आत्महत्या की सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट खबर के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रों ने नेशनल हाईवे जाम किया, यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ की और पुलिस के साथ झड़प के दौरान वाहनों को नुकसान पहुंचाया। स्थिति को देखते हुए LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं, जबकि मिडटर्म परीक्षाएं अगली सूचना तक टाल दी गई हैं।

    पुलिस से झड़प, पत्थरबाजी और वाहनों में आग

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम एक पुलिस वाहन में आग लगाई गई और तीन वाहनों को नुकसान पहुंचा।

    इससे पहले छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को भी जाम कर दिया था। यूनिवर्सिटी परिसर में खिड़कियां और दूसरी संपत्तियां क्षतिग्रस्त की गईं तथा कुछ जगहों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।

    FIR दर्ज, SIT जांच में जुटी

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है। पुलिस के मुताबिक कथित घटना को लेकर FIR दर्ज की गई है और पूरे मामले के तथ्यों की जांच की जा रही है। छात्रों की मांगों और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बीच बातचीत की भी कोशिश की गई है।

    प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाब चाहते हैं। एक छात्र ने दावा किया कि शुरुआत में यूनिवर्सिटी के छात्र ही प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन बाद में कुछ बाहरी लोग पहुंचे और तोड़फोड़ हुई। छात्र ने इन बाहरी लोगों को संपत्ति के नुकसान के लिए जिम्मेदार बताया। यह दावा फिलहाल प्रदर्शनकारी छात्र का पक्ष है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

    LPU ने कथित रेप की खबर को बताया झूठी

    यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही खबरों को “झूठा, निराधार और मनगढ़ंत” बताया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व ऐसी सूचनाएं फैला रहे हैं, जिससे छात्रों में भ्रम पैदा हो रहा है और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

    LPU ने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करने और उसे आगे प्रसारित नहीं करने की अपील की है। यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक माध्यमों से जारी होने वाली जानकारी पर ही भरोसा करने को कहा है।

    डीन बोले- CCTV फुटेज दिखाने को तैयार

    छात्र विंग के डीन सौरभ लखनपाल ने कहा है कि यूनिवर्सिटी हर तरह की जांच के लिए तैयार है। उनका कहना है कि छात्र प्रतिनिधियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज दिखाए जाएंगे।

    यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि अफवाहों से जुड़े पूरे मामले की जांच की जाएगी। वहीं छात्र इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जांच पारदर्शी तरीके से हो और उन्हें भी प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।

    10 दिन तक कक्षाएं बंद, परीक्षा भी स्थगित

    हिंसक घटनाओं के बाद LPU ने छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए 28 सितंबर 2026 से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिडटर्म परीक्षाओं को भी अगली सूचना तक स्थगित किया गया है। संशोधित परीक्षा कार्यक्रम बाद में UMS (University Management System) के जरिए जारी किया जाएगा।

    यूनिवर्सिटी ने छात्रों को इन 10 दिनों के दौरान अपने अभिभावकों के पास जाने की अनुमति दी है। जो छात्र हॉस्टल में रुकना चाहते हैं, उन्हें वहीं रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।

    छात्रों और प्रबंधन के बीच बातचीत बेनतीजा

    हाईवे पर पुलिस ने छात्र प्रतिनिधियों और LPU प्रबंधन के साथ बातचीत की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन तत्काल खत्म नहीं हुआ। छात्रों के बीच अपनी मांगों को लेकर असंतोष बना रहा। पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के साथ मामले की जांच आगे बढ़ा रहे हैं।

    फिलहाल कथित रेप और आत्महत्या से जुड़ी सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी की स्वतंत्र जांच जारी है। एक तरफ यूनिवर्सिटी इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रही है, वहीं पुलिस ने FIR दर्ज कर SIT जांच शुरू की है। जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों में कितनी सच्चाई थी और पूरे विवाद की वास्तविक वजह क्या रही।

  • हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया

    हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया


    नई दिल्ली ।
    पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि यदि दोनों दल भविष्य में साथ आते हैं तो सीटों का बंटवारा बराबरी के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा अब पुराने गठबंधन के उस फॉर्मूले पर आगे नहीं बढ़ना चाहती, जिसमें उसे विधानसभा की सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ता था।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। हरदीप सिंह पुरी के बयान के मुताबिक भाजपा आधी सीटों पर दावेदारी चाहती है। उन्होंने पुराने 22 से 23 सीटों वाले फॉर्मूले को स्वीकार करने से इनकार किया और कहा कि भाजपा अब जूनियर पार्टनर की भूमिका में नहीं रहना चाहती। हालांकि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

    भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। पुराने समीकरण में अकाली दल अधिक सीटों पर चुनाव लड़ता था, जबकि भाजपा मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी के आधार पर सीमित सीटों पर मैदान में उतरती थी। वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।

    अब भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की गतिविधियों और नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि वह राज्य में अपने संगठनात्मक आधार को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाना चाहती है। हाल के समय में भाजपा ने अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को अपने साथ जोड़ा है।

    पंजाब की राजनीति में भाजपा की पारंपरिक पकड़ मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच रही है। पार्टी अब ग्रामीण क्षेत्रों और सिख समुदाय के बीच भी अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत कई प्रमुख सिख चेहरों के भाजपा से जुड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत और अटकलों के बीच भाजपा अपने हिस्से को लेकर स्पष्ट रुख अपनाती दिखाई दे रही है। पार्टी का जोर पुराने सहयोगी के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करने की स्थिति में बराबरी की भूमिका पर है।

    वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस चुनाव में अकाली दल को तीन सीटें और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। इसके बाद दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का सवाल महत्वपूर्ण बन गया है।

    हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा ने पंजाब में अपने संगठन और जनाधार के विस्तार पर भी जोर बढ़ाया है। पार्टी की ओर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने की बात सामने आई है। ऐसे में अकाली दल के साथ संभावित समझौते में सीटों की संख्या और भूमिका को लेकर बातचीत आसान नहीं होगी।

    फिलहाल भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हरदीप सिंह पुरी के बयान ने इतना स्पष्ट किया है कि यदि दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो भाजपा पुराने छोटे साझेदार वाले समीकरण के बजाय बराबरी की शर्त पर समझौता चाहती है। अब देखना होगा कि अकाली दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और दोनों दल आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए किस तरह का राजनीतिक समीकरण तैयार करते हैं।

  • Shubman Gill को अभिषेक शर्मा के पिता ने दिए 5000 रुपये, मैच के तुरंत बाद वायरल तस्वीर ने जीता फैन्स का ध्यान

    Shubman Gill को अभिषेक शर्मा के पिता ने दिए 5000 रुपये, मैच के तुरंत बाद वायरल तस्वीर ने जीता फैन्स का ध्यान

    नई दिल्ली । भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल इन दिनों शेर-ए-पंजाब टी20 लीग में बल्ले से दमखम दिखा रहे हैं। फाजिल्का फाल्कन्स की तरफ से सीजन का पहला मैच खेलने उतरे शुभमन गिल ने अपने खेल से फैन्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    मैच के बाद शेर-ए-पंजाब टी20 लीग में कुछ ऐसा हुआ, जिसने फैन्स का दिल जीत लिया। मैच खत्म होने के बाद शुभमन गिल को अभिषेक शर्मा के पापा राजकुमार शर्मा से 5000 रुपये का खास इनाम मिला।

    दरअसल, लुधियाना लायंस के खिलाफ खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में गिल ने महज 21 गेंदों में 40 रनों की तूफानी पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए और सबसे ज्यादा 7 शानदार चौके और 1 गगनचुंबी छक्का जड़ा।

    मैच में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले शुभमन गिल के प्रदर्शन से खुश होकर अभिषेक शर्मा के पिता ने गिल को शाबाशी के तौर पर 5000 रुपये का इनाम थमाया। ये पांच हजार रुपये टूर्नामेंट की तरफ से दिए गए हैं, लेकिन गिल को यह अभिषेक के पिता के हाथों से मिला है। शुभमन गिल के साथ अभिषेक शर्मा के पिता की तस्वीर भी तेजी से ध्यान खींच रही है।

    गिल की इस विस्फोटक शुरुआत की बदौलत फाजिल्का फाल्कन्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 170 रन बनाए। जवाब में अर्शदीप सिंह की कप्तानी वाली लुधियाना लायंस की टीम आखिरी गेंद तक लड़ी, लेकिन 169 रन ही बना सकी और फाल्कन्स ने यह मैच 1 रन के बेहद नजदीकी अंतर से जीत लिया।

    लुधियाना के गेंदबाज कार्तिक चड्ढा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 9 रन देकर 4 विकेट चटकाए, जिसमें शुभमन गिल का बड़ा विकेट भी शामिल था। गिल के आउट होने के बाद प्रेरित दत्ता ने 36 रन और जयवीर भिंडर ने 21 रन बनाकर टीम का स्कोर 170 तक पहुंचाया।

    लुधियाना को जीत के लिए आखिरी ओवर में 19 रन चाहिए थे। 16 गेंदों में 37 रन जड़ने वाले माधव पठानिया ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन आखिरी गेंद पर छक्के की जगह सिर्फ चौका ही मार सके। इस तरह शुभमन गिल की टीम फाजिल्का फाल्कन्स एक रन से मैच जीतने में सफल रही।

  • यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी से मार्च के बीच मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और यहां विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। इसके बावजूद चुनाव इससे काफी पहले कराए जा सकते हैं। यदि फरवरी या मार्च में मतदान होता है, तो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से करीब दो महीने पहले ही अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का मौका मिल जाएगा।

    मौजूदा समय में पांचों राज्यों के विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों पर नजर डालें तो सबसे पहले मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को पूरा होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को गोवा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होगा। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च और उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। उत्तर प्रदेश में सबसे बाद में 22 मई 2027 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा।

    ऐसे में चुनाव कार्यक्रम इस तरह तैयार किए जाने की संभावना है कि पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया 13 मार्च से पहले पूरी हो जाए। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त समय की जरूरत होगी। इसी वजह से फरवरी से मतदान शुरू होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चुनाव की तैयारियों में जनगणना और मतदाता सूची से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किए जाने की योजना है। चुनाव और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। खासतौर पर शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तैनाती दोनों प्रक्रियाओं में होने के कारण इनके बीच समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है।

    जनगणना की तारीखों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर संभावित टकराव कम होने की उम्मीद है। इससे चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के लिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

    मतदाता सूची को लेकर भी पांचों राज्यों में प्रक्रिया चल रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 13.4 करोड़ बताई गई है। गोवा में यह संख्या करीब 10.6 लाख और मणिपुर में करीब 19.3 लाख रह गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीटों के समीकरण, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की संभावनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है। खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    हालांकि मतदान की सटीक तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों और विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 का दौर पांचों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    नई दिल्ली ।पंजाब में संभावित आतंकी साजिश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स राज्य में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनपुट के सामने आने के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जा रहा है कि अमृतसर जिले में सैन्य ठिकानों से जुड़े दो स्थानों की कथित तौर पर रेकी की गई है। खुफिया जानकारी में इन ऑपरेटिव्स की पहचान राणा भाई और मलिक के नाम से किए जाने की बात सामने आई है। जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें खासा छावनी और उसके आसपास का बूढ़ा ठेह इलाका शामिल है।

    खासा छावनी का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ समय पहले छावनी की बाहरी दीवार के पास विस्फोट की घटना हुई थी। उस घटना में बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन अब नए खुफिया इनपुट के बाद पुराने घटनाक्रम की भी नए सिरे से समीक्षा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि, मौजूदा खुफिया इनपुट और पहले हुए विस्फोट के बीच किसी सीधी कड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों घटनाओं का कोई आपसी संबंध है या नहीं। सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के सामने फिलहाल प्राथमिकता संभावित खतरे का आकलन करने और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान में सक्रिय बताए जा रहे गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नेटवर्क भी जांच के दायरे में है। भारतीय एजेंसियां पहले से उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में हिंसक गतिविधियों और युवाओं की भर्ती के लिए किया जा रहा था।

    शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कार्रवाई भी की गई है। जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से कथित संपर्क और सीमा पार से संचालित गतिविधियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और स्थानीय संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करती हैं।

    पंजाब में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई जारी है। हाल में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अत्याधुनिक पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। प्रारंभिक जांच में उनके विदेशी संपर्कों और सीमा क्षेत्र के जरिए हथियारों की खेप हासिल करने की आशंका जताई गई।

    जांच में ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार पहुंचाने की आशंका भी सामने आई है। इससे पंजाब में सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौती और गंभीर हो जाती है। एजेंसियां अब हथियारों की आपूर्ति, विदेशी संचालकों और स्थानीय नेटवर्क के बीच संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

    पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, सामने आए इनपुट को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।