Tag: purification

  • सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग में सावन का महीना अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माह भगवान शिव की आराधना, आध्यात्मिक साधना और आत्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु सावन के दौरान व्रत, पूजा-पाठ, जलाभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव की उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के आगमन से पहले घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ तथा व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि साफ-सुथरा और सकारात्मक वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है।

    धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार सावन की शुरुआत से पहले घर में मौजूद कुछ अनुपयोगी या क्षतिग्रस्त वस्तुओं को हटाने की परंपरा रही है। इन वस्तुओं को नकारात्मक ऊर्जा, अव्यवस्था और मानसिक तनाव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन स्वच्छता और व्यवस्थित जीवनशैली के दृष्टिकोण से इन्हें उपयोगी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार घर में रखे सूखे या मुरझाए पौधे सबसे पहले हटाने योग्य वस्तुओं में शामिल होते हैं। हरियाली को जीवन, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यदि घर में तुलसी या अन्य पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक हटाकर नए पौधे लगाने की सलाह दी जाती है। सावन प्रकृति और हरियाली से जुड़ा महीना माना जाता है, इसलिए घर के आसपास का वातावरण भी जीवंत और स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

    इसी प्रकार टूटे हुए बर्तन, चटके हुए कांच और क्षतिग्रस्त शीशों को भी घर में लंबे समय तक रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं में इन्हें अव्यवस्था और नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। साथ ही ऐसे सामान घर की सुंदरता को भी प्रभावित करते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए सावन से पहले घर की सफाई के दौरान इन्हें हटाना उचित माना जाता है।

    पुराने और अत्यधिक खराब हो चुके झाड़ू को भी बदलने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। ऐसे में टूटी या अनुपयोगी झाड़ू को बदलकर नई झाड़ू रखना शुभ माना जाता है। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य घर में स्वच्छता बनाए रखना और साफ-सफाई को प्राथमिकता देना भी है।

    घर में लंबे समय से रखे खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी हटाने या मरम्मत कराने की सलाह दी जाती है। बंद पड़े मिक्सर, पंखे, प्रेस, टेलीविजन या अन्य उपकरण न केवल जगह घेरते हैं बल्कि अव्यवस्था भी बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्थित और साफ वातावरण मानसिक शांति तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इसी कारण ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    पूजा स्थल की स्वच्छता को भी सावन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा में उपयोग किए गए पुराने दीपक, राख, आधी जली अगरबत्तियां या अन्य अवशेषों को उचित तरीके से हटाकर पूजा स्थान को साफ रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ पूजा स्थल में आराधना अधिक एकाग्रता और श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी अवसर माना जाता है। इसी कारण कई लोग इस अवधि से पहले घर की सफाई, अनुपयोगी वस्तुओं की छंटनी और वातावरण को व्यवस्थित करने का कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह प्रक्रिया मानसिक और सामाजिक दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण व्यक्ति के दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर कार्यक्षमता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।

  • नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के फलक पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी नए राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का प्रयोग नहीं करेगी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में जो गठबंधन (इंडिया अलायंस) अस्तित्व में है, वही 2027 की चुनावी जंग में भी पार्टी का आधार बनेगा। अखिलेश के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें छोटे दलों के साथ नए तालमेल की संभावना जताई जा रही थी।

    अनुभवों से ली सीख, पुराने साथियों पर भरोसा
    अखिलेश यादव ने गठबंधन के अपने पुराने और खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग समय में कई प्रयोग किए हैं। हमारे पास गठबंधन का लंबा अनुभव है और इसी आधार पर हमने तय किया है कि जो साथी वर्तमान में हमारे साथ खड़े हैं, हम उन्हीं के साथ मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भाजपा का मुकाबला केवल किसी राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि एक ‘समुदाय’ से होगा। यह समुदाय ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) है, जो भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा की नजर फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश पर है और राजस्थान में चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।

    वोटर लिस्ट में ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा वाकयुद्ध
    मतदाता सूची में धांधली के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वोट काटने की साजिश रची थी, क्योंकि वहां उसे हार का डर सता रहा था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके ‘पीडीए प्रहरियों’ ने हर बूथ पर पैनी नजर रखी, जिससे सत्ता पक्ष की गणित फेल हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में उनकी सरकार का ही पूर्ण शुद्धिकरण कर देगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर मतदाता सूची का सूक्ष्म विश्लेषण जारी रखें।

    ‘नकली संतों’ की राजनीति पर प्रहार
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उन ‘नकली संतों’ से संघर्ष कर रहे हैं जिन्होंने धर्म का चोला पहनकर राजनीति को दूषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण मांग रहे हैं, उनके पास खुद कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। समाजवादी पार्टी वास्तविक संतों का सम्मान करती है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद पार्टी के साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इन ‘नकली संतों’ की वास्तविकता पर भी कोई वेब सीरीज सामने आ सकती है।

    सिनेमाई एजेंडे और पड़ोसी राज्यों पर कटाक्ष
    हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए काल्पनिक बातों को फिल्मों के जरिए वास्तविकता बनाकर पेश कर रही है। हालांकि, जनता ने ‘धुरंधर’ का जवाब ‘धुआंधार’ तरीके से देकर यह बता दिया है कि वह अब बहकावे में आने वाली नहीं है। पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘डिमोशन’ करते हुए उन्हें धीरे-धीरे रिटायरमेंट की राह दिखा दी है। अखिलेश के इन तेवरों से साफ है कि वे आने वाले समय में केवल चुनावी मैदान में ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक मोर्चे पर भी भाजपा की घेराबंदी करने के लिए तैयार हैं।

  • उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

    उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

     उज्जैनउज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे।

    महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए।

    सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी।

    ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा।

    सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए।

    मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।

  • भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी

    भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के तहत 116925 वोटर्स की पहचान की जा चुकी है जिनका डिजिटल नक्शे में कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका मतलब है कि ये मतदाता निर्वाचन आयोग के मानचित्र पर लापता हैं। सोमवार से इन वोटरों की नागरिकता और मतदान अधिकारों की सुनवाई शुरू हो रही है जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने से वंचित न रहे।

    भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सोमवार से इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। अब तक जिला निर्वाचन कार्यालय 50000 से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस भेज चुका है और बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर भी नोटिस वितरित कर रहे हैं।

    इस प्रक्रिया के अंतर्गत 4.38 लाख फर्जी या अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा चुके हैं और अब ये वोटर अपनी सुनवाई में भाग न लेने पर चुनाव के दिन पोलिंग बूथ पर अपना नाम नहीं पाएंगे। इस बीच दो लाख नए मतदाताओं को जोड़ने का अनुमान है और फार्म-6 का वितरण जारी है।

    सुनवाई में जाने के लिए जरूरी दस्तावेज

    यदि आपको नोटिस मिला है तो अपनी नागरिकता और उम्र प्रमाणित करने के लिए आपको कुछ दस्तावेज साथ लाने होंगे जैसे,आधार कार्ड या पासपोर्ट,निवास प्रमाण पत्र बिजली बिल या राशन कार्ड,आयु प्रमाण पत्र,जारी किया गया नोटिस ।

    नो-मैपिंग की समस्या का कारण

    वोटर आईडी अपडेट न कराने के कारण कई लोग नो-मैपिंग समस्या का सामना कर रहे हैं खासकर वे लोग जिनका घर बदल चुका है। उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने कहा “यह सुनवाई आपके डिजिटल रूप से सुरक्षित होने का एक मौका है और यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। अगर आप नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई में नहीं जाते तो आप मतदान से बाहर हो सकते हैं। मतदान के दिन अपनी पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।