Tag: Pushkar Singh Dhami

  • खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण

    खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण यज्ञ का विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए इस पूरे मामले को अलग नजरिए से सामने रखा है। धामी ने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें शुद्धिकरण यज्ञ को जातीय भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री का कहना है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति या जाति के शुद्धिकरण के लिए यज्ञ नहीं कराया गया बल्कि रैली के दौरान लगाए गए कथित धार्मिक नारों से आहत भावनाओं के बाद हिंदू सामाजिक संगठनों की ओर से यह आयोजन किया गया था।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खड़गे के नाम पर जातीय शुद्धिकरण की बात करना ही गलत है। उनका तर्क है कि उत्तराखंड में बहुत कम लोग मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के बारे में जानते हैं। ऐसे में इस आयोजन को जातीय नजरिए से देखना उचित नहीं है। धामी ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस स्थान का किया गया था जहां कांग्रेस की रैली आयोजित हुई थी। उनके मुताबिक रैली के दौरान एक धर्म विशेष से जुड़े कथित नारे लगाए गए थे जिनसे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुईं और इसी के बाद धार्मिक संगठनों ने यज्ञ का आयोजन किया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आयोजन में बीजेपी के पदाधिकारी या कार्यकर्ता शामिल नहीं थे। उनके अनुसार हिंदू सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर रामलीला मैदान में यज्ञ कराया। मुख्यमंत्री की इस सफाई के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक रूप से और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इस घटना को सामाजिक समानता और जातीय भेदभाव के सवाल से जोड़ रही है जबकि बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।

    राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और उनकी सरकार के सख्त फैसलों से पार्टी असहज है। धामी ने समान नागरिक संहिता धर्मांतरण विरोधी कानून दंगा विरोधी कानून और जिहाद के खिलाफ सख्त कानून जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और सामाजिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।

    हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक यज्ञ या राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसके जरिए कांग्रेस और बीजेपी अपने अपने राजनीतिक मुद्दों को धार दे रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव का प्रतीक बता रही है वहीं बीजेपी कथित धार्मिक नारों और आहत भावनाओं का मुद्दा उठा रही है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही ऐसे विवादों का राजनीतिक असर बढ़ना तय माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को लेकर एक दूसरे पर और तीखे हमले कर सकते हैं।

  • देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड

    देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं लेकिन इसी बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। पंत ने देर रात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए अपने लिए जमीन खरीदने में मदद की अपील की। क्रिकेटर ने बताया कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में अपना घर बनाने और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि जमीन की तलाश में उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंत के मुताबिक वह करीब तीन साल से जमीन का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने का अनुरोध किया है।

    ऋषभ पंत ने शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजकर 46 मिनट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया और कहा कि वह अपने राज्य में वापस लौटना चाहते हैं। पंत ने बताया कि वह उत्तराखंड में ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां सुविधाओं के साथ अपना घर बनाया जा सके और अपना बेस दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट किया जा सके। लेकिन जमीन खरीदने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं रही है।

    पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीदने की प्रक्रिया को स्पष्ट कराने और इसमें मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड से जुड़े हुए हैं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं। क्रिकेटर ने यह भी इच्छा जताई कि वह अपने राज्य के विकास और निर्माण में योगदान देना चाहते हैं। इसी वजह से वह उत्तराखंड में स्थायी रूप से अपना घर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    ऋषभ पंत ने अपनी अपील में जमीन को लेकर एक विकल्प भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें जमीन उपलब्ध कराने की अनुमति देती है तो वह उसे निर्धारित सरकारी दर पर खरीदने के लिए तैयार हैं। पंत के लिए यह केवल जमीन खरीदने का मामला नहीं है बल्कि उत्तराखंड में अपना पहला घर बनाने से जुड़ा सपना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और उन्हें सही प्रक्रिया बताने की अपील की।

    पंत का उत्तराखंड से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। उनका परिवार राज्य से जुड़ा हुआ है और वह कई मौकों पर उत्तराखंड के प्रति अपना लगाव जाहिर कर चुके हैं। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री से मदद मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने गृह राज्य में वापस लौटकर यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं।

    पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेटर को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि पंत ने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश और दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की भावना की सराहना की और जरूरी सहयोग का भरोसा दिया।

    ऋषभ पंत इस समय भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं और टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। अब उनकी जमीन से जुड़ी अपील के बाद निगाहें उत्तराखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। अगर सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो पंत का अपने पहाड़ में पहला घर बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकता है।

  • दिल्ली में पुष्कर सिंह धामी और नितिन नवीन की अहम मुलाकात, संगठन और समसामयिक मुद्दों पर हुआ मंथन

    दिल्ली में पुष्कर सिंह धामी और नितिन नवीन की अहम मुलाकात, संगठन और समसामयिक मुद्दों पर हुआ मंथन


    नई दिल्ली
    में रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुलाकात ने संगठन और नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल के संकेत दिए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen से मुलाकात कर विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट भी मौजूद रहे।

    यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें संगठन की मजबूती, राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न समकालीन मुद्दों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आगामी रणनीतियों और संगठनात्मक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को उत्तराखंड का शहद भेंट किया। यह उपहार राज्य की प्राकृतिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना गया। इस छोटे लेकिन विशेष भाव ने बैठक के माहौल को और आत्मीय बना दिया। राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच इस तरह के सांस्कृतिक प्रतीक अक्सर राज्यों की पहचान और परंपराओं को सामने लाने का माध्यम बनते हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने मुलाकात के बाद कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हुई चर्चा बेहद सकारात्मक रही और उन्हें संगठन तथा शासन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य के विकास और संगठन की मजबूती के लिए केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय लगातार जारी रहेगा।

    हाल के वर्षों में भाजपा लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर देती रही है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच होने वाली बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती हैं। उत्तराखंड जैसे रणनीतिक और संवेदनशील राज्य में विकास, पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिन पर सरकार आगे बढ़ रही है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री धामी ने असम के राजनीतिक नेतृत्व को भी नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने अपने संदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और मजबूत प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई थी। उनके संदेश में राज्यों के बीच राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति विश्वास की झलक दिखाई दी।

    इसके अलावा मातृ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मां के महत्व को भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मां जीवन का पहला संस्कार, पहली सीख और सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत होती हैं। उनके अनुसार समाज और परिवार की मजबूती में मातृत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

    नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में विभिन्न राज्यों में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। इस तरह की बैठकों को केवल राजनीतिक संवाद नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोग के रूप में भी देखा जा रहा है, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

  • देहरादून में जनसुनवाई के दौरान सीएम धामी ने सुनी जनता की फरियाद, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    देहरादून में जनसुनवाई के दौरान सीएम धामी ने सुनी जनता की फरियाद, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


    नई दिल्ली। देहरादून में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान प्रदेशभर से आए लोगों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिनमें कई मामलों का मौके पर ही समाधान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता से जुड़े कई मामलों पर तत्काल संज्ञान लिया गया और समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई।

    सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को तेज, पारदर्शी और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी शिकायत के निपटारे में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी और हर मामले की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल समस्याओं का समाधान तेजी से होता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सुधार आता है।

    कार्यक्रम के दौरान कई लोगों को मौके पर ही राहत मिलने से उनके चेहरों पर संतोष देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंचे।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी मामलों को गंभीरता से लिया जाए और उनकी प्रगति पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाना है।

    इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। राज्य में लागू नई नीतियों और विकास कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। उनका कहना था कि नई पहल से राज्य में रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी भी देखने को मिली, जहां उन्होंने सरकारी योजनाओं पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां युवाओं में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाती हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और युवा विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।

  • उत्तराखंड में अगले चुनाव में पुष्कर सिंह धामी ही होंगे CM का चेहरा- BJP अध्यक्ष ने किया ऐलान

    उत्तराखंड में अगले चुनाव में पुष्कर सिंह धामी ही होंगे CM का चेहरा- BJP अध्यक्ष ने किया ऐलान


    देहरादून।
    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP National President Nitin Naveen) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उत्तराखंड (Uttarakhand) में अगले होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ही पार्टी का चेहरा होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भाजपा, मौजूदा नेतृत्व के साथ ही विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

    भाजपा अध्यक्ष ने दिल्ली में दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पुष्कर सिंह धामी और योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। निश्चित रूप से वे ही हमारे चेहरे होंगे। उन्हीं के नेतृत्व में भाजपा आगामी चुनाव में जाएगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस बयान के बाद उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के संबंध में सभी किंतु-परंतु पर विराम लग गया है। हालांकि, बीती 20 मार्च को मंत्रिमंडल विस्तार कर धामी ने नेतृत्व को लेकर लग रही अटकलों का पटाक्षेप कर दिया था, पर अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्पष्ट बयान के बाद तस्वीर बिलकुल साफ हो गई है।


    धामी सरकार की तारीफ

    नवीन ने धामी सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतियों के बावजूद राज्य में विकास कार्यों पर प्रभावी ढंग से काम किया गया है। उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियां होती हैं। कई चुनौतियां होती हैं। प्रदेश ट्रैक रिकार्ड देखा जाता है। विकास की समीक्षा की जाती है। आमजन के जीवन में क्या बदलाव हुए, उन्हें भी जांचा परखा जाता है। विकास के लिहाज से गुड गवर्नेंस सरकार की यूएसपी होती है। इनमें धामी सरकार बेहतर रूप में आगे बढ़ी है। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में निश्चित तौर पर और बेहतर परिणाम आएंगे।

    सियासी जानकारों की मानें तो सीएम धामी अपनी कार्यप्रणाली से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं। हाल में उत्तराखंड के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सभी ने धामी सरकार के कामकाज की सराहना की।

  • अंकिता भंडारी मर्डर केस: VIP एंगल की CBI जांच शुरू, अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ केस

    अंकिता भंडारी मर्डर केस: VIP एंगल की CBI जांच शुरू, अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ केस


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संस्तुति पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच की शाखा दो ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ दिल्ली में मुकदमा दर्ज कर लिया है और सोमवार को जांच टीम उत्तराखंड पहुंच गई है. इसे राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वह न्याय के हर पहलू को सामने लाने के पक्ष में है.

    दरअसल, यह मामला एक बार फिर उस समय चर्चा में आया जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के बीच वायरल ऑडियो और सोशल मीडिया पर जारी वीडियो सामने आए. उर्मिला सनावर ने फेसबुक लाइव के जरिए अंकिता हत्याकांड में एक वीआईपी की भूमिका का जिक्र किया था. इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा गया और विपक्षी दलों व विभिन्न संगठनों की ओर से सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई.

    सरकार खुलासे को लेकर गंभीर

    सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए किसी भी तरह की शंका या संदेह को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाया. नौ जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी. सरकार का स्पष्ट कहना है कि वह किसी को बचाने के बजाय सच्चाई सामने लाने में विश्वास रखती है और यदि मामले में कोई भी दोषी है, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा.

    तीन आरोपियों को हो चुकी जेल

    गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में पहले ही न्यायिक प्रक्रिया के तहत बड़ी कार्रवाई हो चुकी है. वनंत्रा रिजॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी और उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था. एक सप्ताह बाद शव बरामद हुआ और एसआईटी की विस्तृत जांच के बाद करीब 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 97 गवाह बनाए गए, जिनमें से 47 गवाहों की अदालत में गवाही कराई गई.

    मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, जो वनंत्रा रिजॉर्ट का मालिक था, समेत तीनों आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई. पुलकित आर्य पर हत्या, साक्ष्य छुपाने, छेड़खानी और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में दोष सिद्ध हुआ. उसके साथ ही सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी उम्रकैद की सजा दी गई. यह फैसला अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती.

    वीआईपी को लेकर उठे थे सवाल

    हालांकि, घटना की रात रिजॉर्ट में पहुंचे कथित वीआईपी को लेकर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं. अंकिता ने घटना से पहले अपने मित्र पुष्पदीप को फोन कर बताया था कि पुलकित आर्य उस पर एक बड़े वीआईपी को अतिरिक्त सेवा देने का दबाव बना रहा है. यही वह बिंदु है, जिस पर अब सीबीआई की जांच केंद्रित होगी.सरकार का कहना है कि पहले चरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से सजा दिलाई गई और अब जो नए तथ्य या आरोप सामने आए हैं, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा. सीबीआई जांच की संस्तुति इसी सोच को दर्शाती है कि सरकार मामले की तह तक जाना चाहती है.

    राज्य सरकार सीबीआई को देगी पूरा सहयोग

    राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई को हर तरह का सहयोग दिया जाएगा. जांच एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करेगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. सरकार का मानना है कि सीबीआई जांच से न केवल वीआईपी को लेकर फैले संदेह दूर होंगे, बल्कि पीड़ित परिवार और प्रदेश की जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा. कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच का शुरू होना राज्य सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति को दर्शाता है, जहां न्याय सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर सच्चाई को दबने नहीं दिया जाएगा.