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  • विजयवर्गीय ने देवड़ा को कहा ‘छोटे कद का वित्त मंत्री’, इंदौर में महापौर को महिला ने सुनाई खरी-खोटी, धीरेंद्र शास्त्री ने ड्रोन

    विजयवर्गीय ने देवड़ा को कहा ‘छोटे कद का वित्त मंत्री’, इंदौर में महापौर को महिला ने सुनाई खरी-खोटी, धीरेंद्र शास्त्री ने ड्रोन


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं में रंग-बिरंगे किस्से लगातार सामने आ रहे हैं। विधानसभा में बजट पेश होने के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने सहयोगी मंत्री जगदीश देवड़ा को छोटे कद का वित्त मंत्री कहकर संबोधित किया। उन्होंने देवड़ा जी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से करते हुए कहा कि ये छठी बार सदन में बजट पेश कर रहे हैं और उनका सम्मान करना चाहिए। विजयवर्गीय की इस टिप्पणी ने सदन में मौजूद लोगों को हैरान कर दिया, लेकिन माहौल को हल्का और खुशनुमा बना दिया। इसके बाद वित्त मंत्री ने मुस्कान के साथ अपना बजट भाषण शुरू किया।

    इंदौर में संकल्प से समाधान कार्यक्रम के दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव को एक महिला ने सीधे माइक पर खरी-खोटी सुनाई। महिला ने गड्ढों और स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनता परेशान है और प्रशासन सक्रिय नहीं है। महापौर ने जवाब दिया कि दौरे का असर होता है, लेकिन महिला ने कहा कि नाम ही काफी होना चाहिए और जनता के सामने रूबरू होकर समस्याओं को सुनना चाहिए। महिला की तटस्थ और सटीक बातों पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन किया, जबकि महापौर असहज नजर आए।

    शिव बारात के दौरान श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल की हर्ष फायरिंग मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर दी है। विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ दबाव बनाया। उन्होंने बताया कि फायरिंग के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार केवल आवाज करने वाला था। कांग्रेस पार्टी अब FIR को निरस्त करने की मांग पर अड़ी हुई है और मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।

    वहीं, पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम में कन्या विवाह समारोह के दौरान मंच पर फूल बरसाने वाले ड्रोन को देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने मंच से फटकार लगाते हुए कहा कि ड्रोन को बंद किया जाए, नहीं तो वह स्वयं इसे पकड़ लेंगे। उनके इस अंदाज ने समारोह स्थल पर हल्का-फुल्का माहौल बना दिया।

    इस बीच, पूर्व मंत्री राघव जी भाई ने विदिशा में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक किया और कहा कि पार्टी अब पहले जैसी व्यवस्थित नहीं रही। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की नसीहत दी।

    मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल, सार्वजनिक चेतावनी और धार्मिक आयोजनों में सक्रियता एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। विधानसभा, जनता और पंडितों के मंच पर उठ रहे विभिन्न रंगीन मुद्दे राज्य में घटनाओं के विविध आयाम को दर्शा रहे हैं।

  • पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा

    पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा


    इंदौर। नर्मदा लाइन के पानी के आगमन के बाद भी नगर निगम के पुराने बिलों की उलझन और जल व्यवस्था की समस्याएं जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शनिवार को वार्ड 41 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा आयोजित जनता चौपाल में नागरिकों ने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलेआम रखीं। चौपाल में शहरवासियों ने बताया कि नर्मदा लाइन के पानी के बावजूद नगर निगम लगातार तीन साल से पेयजल बिल भेज रहा है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा है। कुछ निवासियों ने कहा कि उन्होंने समय पर बिल भरे, लेकिन निगम की लापरवाही और पुराने रिकॉर्डों की गलतियों के कारण परेशानी अभी भी बनी हुई है।

    इस अवसर पर जनता ने महापौर के सामने ड्रेनेज और सड़कों की समस्याओं को भी उठाया। कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं और बारिश या पानी के रिसाव से वहां की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भागीरथपुरा कांड के डेढ़ महीने बाद भी शहर में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। गणराज नगर के एक स्कूली छात्र ने महापौर से सीधे कहा कि नर्मदा लाइन के पानी में अब भी गंदगी मिल रही है। इस पर महापौर ने सुधार के निर्देश देने का आश्वासन दिया।

    जनता चौपाल के दौरान महापौर ने जनता से संवाद करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का गुस्सा निगम की लगातार लापरवाही और पुराने बिलों के कारण बढ़ा हुआ था। कई निवासी इस बात पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे कि पानी तो अब उपलब्ध है, लेकिन पिछले तीन साल के बिल अभी भी लोगों के घरों में आ रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को तकनीकी सुधार और डेटा अपडेट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को तेज करने की आवश्यकता है।

    इस चौपाल ने यह भी दिखा दिया कि शहर में सुधार की दिशा में कदम उठाने के बावजूद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वासन दिया कि जल आपूर्ति, बिल प्रणाली और सड़क-ड्रेनेज जैसी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शहरवासियों की चिंता और नाराजगी यह संकेत देती है कि इंदौर निगम को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, तेजी और जवाबदेही लाने की आवश्यकता है। जनता चौपाल ने नागरिकों को अपनी बात सीधे महापौर तक पहुँचाने का अवसर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।