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  • ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव

    ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव


    मास्को।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव रखा है। इस सम्मेलन में यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य एक ऐसा शांति समझौता करना है जो मॉस्को के पक्ष में हो। यह जानकारी ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बेहतर होते संबंधों का फायदा उठाने की पुतिन की कोशिश को दिखाता है। इस कदम ने यूक्रेन और वाशिंगटन के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें यूक्रेन का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।


    पुतिन ने बातचीत का प्रस्ताव कब रखा?

    इस मामले की जानकारी रखने वाले रूस के एक पूर्व खुफिया अधिकारी का हवाला देते हुए, डब्लूएसजे ने बताया कि पुतिन ने सबसे पहले 9 अक्तूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एक त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। इसी बातचीत के दौरान एक समझौता भी हुआ, जिसके तहत अमेरिका को रूस से डीजल खरीदने और उसे वैश्विक बाजारों में वितरित करने की अनुमति मिल गई।


    क्रेमलिन के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने डब्लूएसजे को पुष्टि की कि एक संभावित बैठक को लेकर बातचीत चल रही है। पेस्कोव ने डब्लूएसजे से कहा, ‘बैठक या इसके संभावित एजेंडे को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है, हालांकि तीनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि ऐसी बैठक होने की एक संभावना हो सकती है।’


    अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्या कहा?

    वहीं, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि ट्रंप ने इस शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से सहमति नहीं दी है, लेकिन अधिकारी ने संकेत दिया कि युद्ध को सुलझाने की अपनी कोशिशों को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं।


    कब हो सकती है बैठक?

    बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि क्रेमलिन ने सुझाव दिया है कि यह त्रिपक्षीय वार्ता आगामी ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (APEC) शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित की जा सकती है। यह सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को दक्षिणी चीन के टेक हब, शेन्जेन में होने वाला है।

    मॉस्को और बीजिंग के बीच हाल ही में हुई बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि रूसी राजनयिकों ने चीनी अधिकारियों के सामने एक प्रस्ताव रखा। चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर ट्रंप इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।


    ट्रंप ने जेलेंस्की पर क्या आरोप लगाया?

    रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में काफी प्रगति हो रही है। उन्होंने मॉस्को के प्रति अपने प्रशासन के राजनयिक रुख का बचाव किया और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि वे दो साल पहले एक बेहतर समझौता करने में विफल रहे थे।

    इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।

  • रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी

    रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी


    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए कथित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। इस फैसले के तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने की बात कही गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इससे रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    ट्रंप ने दावा किया कि रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति और इसके बाद मात्रा बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी वैश्विक बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तत्परता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल की बिक्री के लिए अस्थायी छूट जारी की है। इससे अप्रैल 2027 तक आपूर्ति का रास्ता खुलने की बात कही गई है। हालांकि, समझौते की शर्तों और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

    अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमत में 46 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 67 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का दावा किया गया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप ने कहा कि किसानों, ट्रक चालकों और आम अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकता है।

    जेलेंस्की ने रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, अतिरिक्त आय से पुतिन युद्ध को लंबा खींचने और यूक्रेन पर अधिक आक्रामक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस फैसले से अधिक लोगों की जान जा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान बढ़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूसी ईंधन की बिक्री को राहत देने का फैसला अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते से ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सावधानी जताई है। विशेषज्ञ क्लेटन सीगल के अनुसार, इस फैसले से कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित है, जबकि रूस और पुतिन को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञ माइकल लिंच ने भी कीमतों पर इसके असर को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि यदि अमेरिका रूस से डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक अन्य देशों से ईंधन खरीदने लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में आपूर्ति का वितरण बदल सकता है, लेकिन कीमतों में उल्लेखनीय कमी होना निश्चित नहीं है।

    इस बीच, क्रेमलिन ने कहा कि ट्रंप ईरान से जुड़े संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिशों में रूस की भूमिका का स्वागत करते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक चुनावी रैली के दौरान यह बात कही। रूस से डीजल आपूर्ति पर राहत देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब ऊर्जा की कीमतें और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

  • Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील

    Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील


    कीव।
    रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच हवाई हमले तेज हो गए हैं। शनिवार को यूक्रेन में रूसी हमलों में चार लोगों की मौत हुई, जबकि रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र (Krasnodar Krai) में यूक्रेनी ड्रोन हमले (Ukrainian drone attacks) में तीन लोगों की जान गई। रूसी कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र में भी यूक्रेनी हमलों में तीन लोगों की मौत की सूचना है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) के साथ समझौता करने की अपील की।


    यूक्रेन में रूसी हमलों से चार लोगों की मौत

    यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने शनिवार को कीव, जापोरिज्जिया, सूमी और खारकीव समेत कई इलाकों को निशाना बनाया। जापोरिज्जिया में एक घर के मलबे में दबने से दो महिलाओं की मौत हो गई। सूमी शहर में भी रूसी हमले में दो लोगों की जान गई। कीव क्षेत्र के बोरीस्पिल जिले में रूसी ड्रोन हमले के बाद एक गोदाम में आग लग गई, जिसमें दो लोग घायल हुए। राजधानी कीव के कई इलाकों में भी ड्रोन हमलों की सूचना है। अधिकारियों के अनुसार, यहां चार लोग घायल हुए और आवासीय तथा कार्यालय इमारतों को नुकसान पहुंचा।


    रूस का दावा- डेटा सेंटर को हुआ नुकसान

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कीव पर किए गए हमले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़े एक डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस रोजाना हमलों को और तेज कर रहा है। उन्होंने कीव और जापोरिज्जिया के रिहायशी इलाकों समेत कई स्थानों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया की अपील की।


    ट्रंप ने जेलेंस्की से पुतिन के साथ समझौते की अपील की

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जेलेंस्की के साथ हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि यूक्रेनी राष्ट्रपति पुतिन के साथ समझौता करें। ट्रंप ने कहा, “मैं चाहता हूं कि वह समझौता करें। मैं चाहता हूं कि वह पुतिन के साथ समझौता करें और मैं चाहता हूं कि पुतिन भी उनके साथ समझौता करें।” उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में, संभवतः सर्दियों के भारी होने से पहले, किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं।

  • रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    नई दिल्ली । रूस में 2026 के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में पार्टी ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के साथ यूनाइटेड रशिया ने संसद में अपना मजबूत बहुमत बरकरार रखा है।

    यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद पहला संसदीय चुनाव था। ऐसे समय में हुए इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रही। चुनाव के दौरान यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। यूनाइटेड रशिया ने पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें हासिल की हैं।

    रूस की 450 सदस्यीय संसद में 225 सीटों के लिए पार्टी-लिस्ट प्रणाली के तहत मतदान होता है, जबकि बाकी 225 सीटों पर सीधे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। उपलब्ध नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों में से 208 पर आगे रहे। पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में भी 58 प्रतिशत के आसपास वोट मिले हैं।

    2021 में हुए पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार 355 सीटों का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले काफी अधिक है। इससे संसद में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।

    चुनाव में मतदान प्रतिशत भी चर्चा में रहा। रूस में कुल मतदान करीब 57 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। मॉस्को में भी मतदान को लेकर लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। चुनाव के दौरान कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।

    इस बार युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी-लिस्ट चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि उसके कुछ नेताओं को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों के चुनाव में हिस्सा लेने पर भी रोक रही।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। हालांकि वह वर्ष 2008 से 2012 तक पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस समय भी पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए औपचारिक सदस्यता जरूरी नहीं थी। वर्ष 2012 में पुतिन ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने पार्टी की कमान संभाली।

    चुनाव के अंतिम चरण में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर भी दिखाई दिया। मतदान के आखिरी दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई। मॉस्को को निशाना बनाकर सैकड़ों ड्रोन भेजे जाने का दावा किया गया, जबकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन की कुल संख्या 1,600 से अधिक बताई गई।

    युद्ध के बीच हुए इस संसदीय चुनाव के नतीजों में यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत ने रूस की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पार्टी की मजबूत स्थिति को फिर सामने ला दिया है।

  • Russia: पुतिन की पार्टी फिर बहुमत की ओर…! ससदीय चुनाव में मिले 57.54% से अधिक वोट

    Russia: पुतिन की पार्टी फिर बहुमत की ओर…! ससदीय चुनाव में मिले 57.54% से अधिक वोट


    मास्को।
    रूस (Russia) में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) की पार्टी को एक बार फिर से स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार हैं। पुतिन लंबे समय से रूस की सत्ता पर काबिज हैं। इस वर्ष कराए गए चुनाव में भी पार्टी के समर्थकों ने बंपर वोटिंग (Massive Voter turnout) की है। केंद्रीय चुनाव आयोग (Central Election Commission) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक पुतिन की पार्टी- यूनाइटेड रूस (Putin’s Party – United Russia) को 57 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। अंतिम आंकड़े आने पर वोट प्रतिशत में बदलाव संभव है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों का विरोध लगभग नदारद रहा। क्रेमलिन का वर्चस्व मजबूत होने की उम्मीद है। मतदान में धांधली और इलेक्ट्रॉनिक मतदान में समस्याओं की रिपोर्ट्स भी सामने आईं।


    चुनाव नतीजों में क्या खास, किस दल का कैसा प्रदर्शन?

    रूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने रविवार देर रात (रूसी समय) जारी एक बयान में कहा, चुनाव के शुरुआती परिणाम आ गए हैं। सत्तारूढ़ दल- यूनाइटेड रूस को 57.54% से अधिक वोट मिले हैं। इन प्रारंभिक नतीजों के आधार पर माना जा रहा है कि पुतिन की सत्ता पर पकड़ और मजबूत होगी। खास बात ये भी है कि यूक्रेन के साथ वर्ष 2022 में शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए हैं।

    रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान शुक्रवार को 11 करोड़ 10 लाख पात्र मतदाताओं के लिए शुरू हुआ था। इसमें यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासी भी शामिल थे, जिन्हें मॉस्को ने युद्ध के बाद अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था, पर अभी भी उन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है। क्रीमिया के निवासी भी मतदान में शामिल थे, जिसे रूस ने 2014 में अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था। कीव और यूरोपीय संघ ने रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में हुए मतदान को अवैध बताया। उन्होंने विदेशी सरकारों से परिणामों को मान्यता न देने का आग्रह किया। रूस और यूक्रेन के रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में मतदान समाप्त होने के बाद भी, पश्चिमी समय क्षेत्रों में दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में मतदान जारी रहा। क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने और अपनी कार्रवाई को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।


    क्रेमलिन की मुख्य पार्टी को भारी बहुमत

    प्रारंभिक परिणामों से पता चला है कि चार अन्य पार्टियां जो लगभग हमेशा क्रेमलिन के पक्ष में मतदान करती हैं, संसद के निचले सदन- स्टेट ड्यूमा में उनकी वापसी तय है। केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 58% मतदान केंद्रों की गिनती हो चुकी है। पार्टी सूचियों के आधार पर आवंटित 225 सांसदों में से यूनाइटेड रूस को लगभग 58% वोट मिले हैं।

    225 अन्य सांसदों का चुनाव एकल-सीट चुनावों में होगा, यूनाइटेड रूस उनमें भी अधिकांश सीटें जीतने की स्थिति में है। इस चुनाव में अधिकांश विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, और यह चुनाव सोवियत काल के बाद से रूस में सबसे कठोर राजनीतिक दमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के माहौल में हुआ।

    क्रेमलिन ने असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाताओं ने दो अलग-अलग मतपत्र डाले, जिससे डूमा की आधी सीटें भरी गईं। बाकी सीटों पर एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में व्यक्तिगत उम्मीदवारों को चुना गया। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। ‘सिस्टेमिक विपक्ष’ की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।


    क्या क्रेमलिन का नियंत्रण मजबूत होगा?

    क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने का माध्यम मानता है, जो 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद पहला चुनाव है। यह अपनी कार्रवाई को वैध बनाने का भी प्रयास कर रहा है। उसने किसी भी असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण है। यह क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाता डूमा की 450 सीटों के लिए दो अलग-अलग मतपत्र डालते हैं; आधे सीटों के लिए राजनीतिक दल चुने जाते हैं, जबकि बाकी के लिए व्यक्तिगत उम्मीदवार। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। ‘सिस्टेमिक विपक्ष’ की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।


    मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान में क्या समस्याएं आईं?

    रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा ने रविवार को बताया कि मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली को साइबर हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने इसके लिए ‘सिस्टेमिक पार्टियों’ में से एक को दोषी ठहराया, पर किसी का नाम नहीं लिया। एक स्वतंत्र रूसी समाचार आउटलेट- सोता विजन, ने रविवार को मॉस्को के मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली में तकनीकी खराबी की सूचना दी। आउटलेट ने टेलीग्राम पर बताया कि लोगों को कागजी मतपत्र नहीं दिए गए, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक टर्मिनल से मतदान करने को कहा गया। दिवंगत रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी के करीबी सहयोगी लियोनिद वोल्कोव ने सुझाव दिया कि कागजी मतपत्र प्रणाली का खराब होना जानबूझकर किया गया हो सकता है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक मतदान की ओर धकेलना था। उन्होंने रविवार को एक्स पर ‘कागजी मतपत्र की मांग करें!’ लिखा। कई मतदाताओं ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान से इनकार कर दिया, जिससे मतदान केंद्रों के बाहर कतारें लग गईं। यबलोको पार्टी के नेता निकोलाई राइबाकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक मतपत्र डाला, जिस पर ‘स्वतंत्रता के लिए,’ ‘शांति के लिए,’ और ‘यबलोको’ लिखा देखा गया।


    विदेशों में रूसी विपक्ष ने कैसे विरोध किया?

    एलेक्सी नवालनी की विधवा यूलिया नवालनाया सहित रूस के निर्वासित विपक्ष ने युद्ध-विरोधी रूसियों से रविवार दोपहर मतदान करने का आह्वान किया। आर्मेनिया में रहने वाले हजारों रूसियों ने मतदान में भाग लिया। वे राजधानी येरेवन में रूसी दूतावास के बाहर कतार में खड़े थे। उनमें से कुछ ‘शांतिपूर्ण रूस के लिए दोपहर’ नामक युद्ध-विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने युद्ध-विरोधी और पुतिन-विरोधी पोस्टर पकड़े हुए थे। पत्रकार मार्क पोडबेरेज़िन ने कहा कि येरेवन में चुनाव आयोग के सदस्यों ने ऐसी टिप्पणियां कीं जो ‘खुले तौर पर डराने-धमकाने’ वाली थीं। उन्होंने सुना था कि ‘आपको देर-सबेर रूस लौटना होगा, इसे ध्यान में रखें।’ लिडिया क्लिमेंको ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके वोट का कोई वास्तविक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सबसे उपयोगी काम ‘अन्य लोगों को देखना था जो युद्ध के खिलाफ हैं, एक साझा उद्देश्य में एक साथ होना।’ जर्मनी में, मतदाताओं ने बर्लिन में रूसी दूतावास में अपने मतपत्र डाले। असंतुष्ट और ओपन रूस समूह के पूर्व प्रमुख आंद्रेई पिवोवारोव ने इमारत के बाहर एकत्रित विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया।

  • मोदी के डिनर में क्यों नहीं पहुंचे शी जिनपिंग? पुतिन ने चखा भारतीय जायका, देखें पूरा मेन्यू

    मोदी के डिनर में क्यों नहीं पहुंचे शी जिनपिंग? पुतिन ने चखा भारतीय जायका, देखें पूरा मेन्यू


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया। इस डिनर में भारत की विविध पाक परंपराओं और शाकाहारी व्यंजनों को खास तौर पर मेन्यू में शामिल किया गया था। रात्रिभोज के दौरान ‘नवरस : द यूनिवर्स ऑफ शेयर्ड इमोशन्स’ नाम से विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।

    हालांकि, इस खास आयोजन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। सूत्रों के मुताबिक, शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए। उनके डिनर में शामिल न होने की तत्काल कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई। एक सूत्र के अनुसार, शी आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे।

    दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स के अन्य नेताओं ने रात्रिभोज में हिस्सा लिया और भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखा। अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद भी डिनर में शामिल नहीं हुए।

    स्टार्टर में खंडवी और खुंब गलौटी

    रात्रिभोज की शुरुआत भारतीय स्वाद वाले खास स्टार्टर से हुई। मेहमानों को खंडवी मिलेफॉय परोसी गई। इसमें बेसन से तैयार स्टीम्ड खंडवी को सरसों, नारियल और करी पत्ते के तड़के के साथ परोसा गया। इसके साथ केसर आम, माइक्रोग्रीन्स और योगर्ट ड्रेसिंग का संयोजन रखा गया।

    इसके अलावा मेन्यू में खुंब गलौटी भी शामिल थी। इसमें तवे पर हल्के से ग्रिल किए गए मशरूम कबाब को मिंट पर्ल्स और शीरमल ब्रेड के साथ परोसा गया।

    डेजर्ट में पुरानी दिल्ली का स्वाद

    डेजर्ट को भी भारतीय परंपरागत स्वाद से जोड़ा गया। मेहमानों के लिए ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी परोसी गई। इसमें मौसमी फलों और हल्की व्हिप्ड क्रीम के साथ कुरकुरी जलेबी को शामिल किया गया था।

    इसके साथ शहतूत फिरनी भी डेजर्ट का हिस्सा रही, जिसने पारंपरिक भारतीय मिठास का स्वाद मेन्यू में जोड़ा।

    मेन कोर्स में पनीर लबाबदार और हिमालयी गुच्छी

    मुख्य भोजन में कई तरह के भारतीय शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए। इनमें पनीर लबाबदार के साथ हिमालयी गुच्छी मशरूम और शतावरी से तैयार गुच्छी मार्मिक प्रमुख रहे। इस व्यंजन में केसर, किशमिश और ममरा बादाम का इस्तेमाल किया गया।

    इसके अलावा मेन कोर्स में कैरट बीन पोरियाल, अरहर दाल और टमाटर से तैयार दक्षिण भारतीय शैली का हल्का सूप ढक्काली बेले सारू भी परोसा गया।

    मेहमानों के लिए मिवेट पुलाव, बीटरूट रायता और कई तरह की भारतीय रोटियां भी मेन्यू में शामिल थीं। इस पूरे शाकाहारी मेन्यू के जरिए भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय पाक परंपराओं और विविध स्वादों को एक ही टेबल पर पेश करने की कोशिश की गई।

  • मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम बैठक हो रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत जारी है। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। बातचीत का दायरा रक्षा सौदों के अलावा व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों तक रहने की संभावना है।

    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा क्षेत्र में Su-57 फाइटर जेट, S-400 की बाकी खेप और एडवांस ब्रह्मोस-NG जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

    रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी समझौते की उम्मीद है। Su-57 को एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया गया है। इस विमान की क्षमताओं को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की संभावना है।

    भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है। इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी बैठक के संभावित एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, कुशल कामगारों और उर्वरक से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है। खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने तथा नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा संभव है।

    व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की संभावना है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच भारत मंडपम में बैठक हो रही है।

    बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत पर नजर है। Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG जैसे रक्षा विषयों के अलावा उद्योग, रेलवे, स्टील, टनलिंग, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों से जुड़े संभावित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

  • पुतिन की भारत यात्रा में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम, बख्तरबंद ऑरस सीनेट कार और विशेष सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में

    पुतिन की भारत यात्रा में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम, बख्तरबंद ऑरस सीनेट कार और विशेष सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में

    नई दिल्ली ।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके भारत दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुतिन के जमीनी सफर के लिए रूस की खास बख्तरबंद ऑरस सीनेट लिमोजीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसे बेहद सुरक्षित वाहन के तौर पर तैयार किया गया है और इसे अक्सर चलते-फिरते बंकर के रूप में बताया जाता है।

    पुतिन की यह खास कार सीधे मॉस्को से लाई जाती है। इसकी सुरक्षा विशेषताओं में रन-फ्लैट टायर और आपात स्थिति के लिए अलग ऑक्सीजन सप्लाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, यह वाहन स्नाइपर की गोलीबारी, बारूदी सुरंगों और रासायनिक हमलों जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।

    पुतिन की हवाई यात्रा के लिए खास तौर पर संशोधित इल्यूशिन आईएल-96-300पीयू विमान का इस्तेमाल किया जाता है। इसे फ्लाइंग क्रेमलिन के नाम से जाना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था में उनके साथ डिकॉय जेट, सुरक्षित कमांड सिस्टम और उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।

    भारत में पुतिन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस यानी एफएसओ और भारत के आतंकवाद-रोधी बलों के बीच समन्वय से संभाली जा रही है। जमीन पर राष्ट्रपति की सुरक्षा के सबसे अंदरूनी घेरे में रूसी प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस के विशेष अधिकारी तैनात रहते हैं। इन अधिकारियों को एफएसओ की एडवांस्ड टीमें सहयोग देती हैं।

    रूसी सुरक्षा दल उन सभी स्थानों की जांच करता है, जहां पुतिन के जाने का कार्यक्रम होता है। इसके साथ ही रूसी प्रतिनिधिमंडल अपने लॉजिस्टिक्स पर भी नियंत्रण बनाए रखता है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुतिन के साथ निजी शेफ और खाने-पीने की चीजों की जांच के लिए पोर्टेबल लैब जैसी सुविधाएं भी रखी जाती हैं।

    ऑपरेशनल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चुनिंदा होटलों में डमी वीआईपी यानी नकली वीआईपी की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जैविक कचरे के निपटारे से जुड़े प्रोटोकॉल भी सुरक्षा इंतजाम का हिस्सा बताए गए हैं।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली, एयरोसिटी और गुरुग्राम के चुने गए होटलों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रत्येक होटल को अलग सुरक्षित क्षेत्र के रूप में व्यवस्थित किया गया है। इन स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और खुफिया एजेंसियों की भूमिका है।

    हर होटल में डीसीपी रैंक के अधिकारी को वेन्यू कमांडर बनाया गया है, जबकि बड़े क्षेत्रों की निगरानी स्पेशल कमिश्नर रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। होटल के भीतर दो कमरों को ऑपरेशनल कमांड हब में बदला गया है। ये दिल्ली पुलिस के सेंट्रल सी4आई कमांड नोड से जुड़े हैं और आपात स्थिति के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

    होटलों की बाहरी दीवारों और हॉलवे पर एडवांस्ड एआई कैमरे लगाए गए हैं। इनमें घुसपैठ का पता लगाने और लोगों की गतिविधियों को पहचानने वाला सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जाता है। दीवार फांदने या रेंगने जैसी असामान्य गतिविधियों की पहचान भी इन कैमरों के जरिए की जा सकती है।

    होटल कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच भी की गई है। उन्हें डिजिटल की-कार्ड के जरिए केवल निर्धारित मंजिलों तक पहुंच की अनुमति दी गई है। इस तरह पुतिन की भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था विमान, वाहन, होटल और उनके निर्धारित कार्यक्रम वाले स्थानों तक कई स्तरों में व्यवस्थित की गई है।

  • BRICS Summit 2026: फ्लाइंग क्रेमलिन से रोलिंग बंकर तक, पुतिन की सुरक्षा के लिए दिल्ली में अभेद्य किले जैसा इंतजाम

    BRICS Summit 2026: फ्लाइंग क्रेमलिन से रोलिंग बंकर तक, पुतिन की सुरक्षा के लिए दिल्ली में अभेद्य किले जैसा इंतजाम


    नई दिल्ली।
    भारत की अध्यक्षता में इस सप्ताहांत होने वाली ब्रिक्स शिखर बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के शीर्ष नेता नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन से पहले राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों में मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 के जी-20 सम्मेलन के बाद दिल्ली में इतनी व्यापक सुरक्षा तैयारियां पहली बार देखने को मिल रही हैं।

    विदेशी नेताओं के साथ उनकी विशेष सुरक्षा व्यवस्था भी राजधानी पहुंचेगी। इनमें अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस विमान, बख्तरबंद वाहन, निजी खाद्य सुरक्षा इंतजाम और अन्य विशेष उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं। खासतौर पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा के लिए रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सुरक्षा घेरा तैयार कर रही हैं।

    छतों पर AI तकनीक से निगरानी, ड्रोन पर भी नजर

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत ऊंची इमारतों की छतों पर स्नाइपर तैनात किए जाने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर AI-गाइडेड स्नाइपर सिस्टम और जेस्चर-रिकग्निशन कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। ये कैमरे लोगों की गतिविधियों में असामान्य बदलाव पहचानने में मदद करेंगे।

    आपात स्थिति के लिए कमांडो को हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे उतारने की व्यवस्था भी तैयार रखी जाएगी। इसके अलावा सड़कों पर चौबीसों घंटे एंटी-ग्राफिटी टीमें तैनात रहेंगी।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए बिना पायलट वाले हवाई वाहन यानी UAV और ड्रोन भी प्रमुख खतरा माने जा रहे हैं। इसके लिए कई स्थानों पर ड्रोन के सिग्नल को जाम करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करने वाले सिस्टम लगाए जाने की बात सामने आई है।

    संभावित विरोध-प्रदर्शन पर भी खुफिया निगरानी

    रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कुछ विदेशी नेताओं को निशाना बनाकर आयोजन स्थलों के आसपास अचानक विरोध-प्रदर्शन किए जा सकते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भड़काऊ संदेश स्प्रे-पेंट किए जाने की आशंका को देखते हुए एंटी-ग्राफिटी टीमें लगातार निगरानी करेंगी।

    हर महत्वपूर्ण अतिथि, उनके होटल और काफिले के लिए अलग-अलग कोड नेम या कॉल साइन तय किए गए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा और आवाजाही के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान को व्यवस्थित रखना है।

    पुतिन के लिए ‘रोलिंग बंकर’

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जमीनी आवाजाही के लिए रूस से उनकी विशेष ऑरस सेनेट बख्तरबंद कार लाई गई है। इसे सुरक्षा कारणों से ‘रोलिंग बंकर’ के नाम से भी जाना जाता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह वाहन स्नाइपर फायर, बारूदी सुरंग और रासायनिक हमले जैसे खतरों से सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें रन-फ्लैट टायर और आपातकालीन ऑक्सीजन सिस्टम जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं।

    ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ से सफर करते हैं रूसी राष्ट्रपति

    पुतिन के हवाई सफर के लिए विशेष रूप से तैयार Ilyushin IL-96-300PU विमान का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे अक्सर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है। विमान में सुरक्षित कमांड सिस्टम और मिसाइल डिफेंस से जुड़े सुरक्षा उपाय मौजूद होने की जानकारी दी जाती है।

    रिपोर्ट के अनुसार, विमान की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए जरूरत पड़ने पर डिकॉय विमानों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    पुतिन के खाने की भी होगी कड़ी जांच

    रूसी प्रतिनिधिमंडल अपनी सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। पुतिन के साथ निजी शेफ और खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पोर्टेबल टेस्टिंग लैब जैसी व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई है।

    सुरक्षा व्यवस्था में जैविक कचरे को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने और उसके निस्तारण तक के इंतजाम शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ होटलों में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए डमी डिग्निटरीज यानी नेताओं के हमशक्ल या प्रतिनिधियों की तैनाती की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।

    होटलों को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया

    विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने के लिए दिल्ली के मध्य क्षेत्र, एयरोसिटी और गुरुग्राम के चुनिंदा होटलों को अलग-अलग सिक्योरिटी जोन में बांटा गया है।

    प्रत्येक होटल की सुरक्षा के लिए डीसीपी स्तर के अधिकारी को वेन्यू कमांडर बनाया गया है, जबकि बड़े क्षेत्रों की निगरानी स्पेशल कमिश्नर स्तर के अधिकारी करेंगे।

    हर होटल में दो कमरों को ऑपरेशनल कमांड पोस्ट में बदलने की तैयारी है। इनमें से एक दिल्ली पुलिस के केंद्रीय C4i कमांड सिस्टम से जुड़ा रहेगा, जबकि दूसरे का इस्तेमाल आपात स्थिति में बैकअप कंट्रोल रूम के तौर पर किया जाएगा।

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ भारतीय एजेंसियों की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था राजधानी में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहेगी।

  • नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी देखने को मिलेगा। पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को की। उन्होंने कहा कि पुतिन कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा शुरू करेंगे। पेसकोव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लंबे समय से करीबी और व्यावहारिक संबंध रहे हैं। दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने में सक्षम हैं।

    रूस की ओर से पुतिन की इस यात्रा को भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

    18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित व्यापक प्राथमिकताएं तय की हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    ब्रिक्स सहयोग को रूस मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग शामिल हैं। रूस समूह के विस्तार और अलग-अलग प्रारूपों में नए देशों की भागीदारी को भी समर्थन देता रहा है। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका से जुड़े मुद्दे भी अहम रह सकते हैं।

    पुतिन और मोदी की इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे। उस बातचीत के दौरान रूस और भारत के संबंधों को लगातार मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

    बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया था। उन्होंने शत्रुता समाप्त करने और शांति की दिशा में प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

    इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।