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  • पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संभावित ट्रैकिंग, निगरानी और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए क्रेमलिन ने कई अतिरिक्त सावधानियां लागू की हैं। इन कदमों को वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य और हाईटेक खतरों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रूस की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वर्तमान समय में एआई आधारित विश्लेषण प्रणालियां विशाल मात्रा में उपलब्ध डिजिटल डेटा का बेहद कम समय में अध्ययन कर सकती हैं। सीसीटीवी फुटेज, सार्वजनिक गतिविधियों, यात्रा पैटर्न और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति की गतिविधियों का आकलन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी जोखिमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    जानकारों के अनुसार राष्ट्रपति से जुड़े कई संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी प्रणालियों की समीक्षा की गई है। कुछ स्थानों पर डिजिटल नेटवर्क को सीमित करने तथा सुरक्षा ढांचे को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाए गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की साइबर घुसपैठ या डेटा विश्लेषण के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच न बनाई जा सके।

    राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से उनके आवागमन, संचार माध्यमों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि किसी भी उच्च पदस्थ व्यक्ति की जानकारी तक पहुंच उसके आसपास मौजूद लोगों के माध्यम से भी संभव हो सकती है, इसलिए संपूर्ण सुरक्षा श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब केवल पारंपरिक खतरों तक सीमित नहीं रह गई हैं। पहले जहां सुरक्षा का केंद्र भौतिक हमलों, जासूसी गतिविधियों या सैन्य जोखिमों पर होता था, वहीं अब डेटा, एल्गोरिदम और डिजिटल विश्लेषण भी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। एआई आधारित प्रणालियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर व्यवहारिक पैटर्न और संभावित गतिविधियों का अनुमान लगाने में सक्षम होती जा रही हैं।

    हाल के वर्षों में दुनिया के कई देशों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया है। रूस भी इसी दिशा में अपने सुरक्षा ढांचे को लगातार अपडेट कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में उच्च पदस्थ नेताओं की सुरक्षा केवल हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों या सुरक्षित परिसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एआई, सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन तकनीक और साइबर इंटेलिजेंस ने सुरक्षा की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में विश्व की प्रमुख शक्तियां अपने नेतृत्व, सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील ढांचों की सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित कर रही हैं। रूस द्वारा उठाए गए हालिया कदम इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

  • ग्लोबल फाइनेंस में डॉलर की बादशाहत को झटका, पुतिन का दावा- ब्रिक्स देशों की बढ़ती ताकत के आगे पस्त हो रहा पश्चिमी देशों का दबदबा

    ग्लोबल फाइनेंस में डॉलर की बादशाहत को झटका, पुतिन का दावा- ब्रिक्स देशों की बढ़ती ताकत के आगे पस्त हो रहा पश्चिमी देशों का दबदबा

    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि दुनिया भर में अब डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक पश्चिमी मुद्राओं के प्रति अविश्वास तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे एकतरफा प्रतिबंधों, आर्थिक नाकेबंदी और अन्य देशों की वैध संपत्तियों को फ्रीज करने की नीतियों के कारण दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) गठबंधन के सदस्य देश अब अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की ओर रुख कर रहे हैं।

    इस महत्वपूर्ण आर्थिक सत्र के दौरान, जिसकी कमान भारतीय मीडिया जगत से जुड़ी वरिष्ठ पत्रकार के हाथों में थी, राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की बदलती दिशा का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की वित्तीय नीतियां बेहद अदूरदर्शी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, जो मध्य पूर्व से लेकर यूरोप तक अस्थिरता पैदा कर रही हैं। यूक्रेन विवाद के बाद रूस के राष्ट्रीय आरक्षित कोष (रिजर्व फंड) को फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को उन्होंने खुले तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय ‘चोरी’ करार दिया। पुतिन ने चेतावनी दी कि इस कदम ने वैश्विक बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों की निष्पक्षता पर एक ऐसा दाग लगा दिया है जिसे मिटाना अब मुमकिन नहीं है।

    रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया का हर संप्रभु राष्ट्र अब यह भली-भांति समझ चुका है कि यदि वे पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक हितों के आड़े आते हैं, तो पलक झपकते ही उनकी भी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं और उन्हें वैश्विक भुगतान नेटवर्क से बाहर किया जा सकता है। इसी डर और असुरक्षा के माहौल ने वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों के विकास को गति दी है। वर्तमान में विभिन्न देश आपस में व्यापारिक लेन-देन के लिए अपनी स्थानीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही सेंट्रल बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) और डिजिटल वित्तीय संपत्तियों की भूमिका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बनती जा रही है।

    रूस की अपनी आर्थिक स्थिति का उदाहरण देते हुए पुतिन ने बताया कि आज उनका देश अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ रूबल और अन्य राष्ट्रीय मुद्राओं में रिकॉर्ड स्तर पर व्यापार कर रहा है। रूस के कुल निर्यात व्यापार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा अब सीधे तौर पर उनकी अपनी मुद्रा रूबल में निष्पादित हो रहा है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया कि विकसित देशों का समूह यानी जी7 (G7) अब ब्रिक्स देशों के आर्थिक उभार के सामने लगातार अपनी चमक खोता जा रहा है।

    आर्थिक विकास के वैश्विक आंकड़ों को साझा करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान वैश्विक जीडीपी विकास में अकेले ब्रिक्स देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा है, जबकि इसके मुकाबले जी7 देशों की हिस्सेदारी मात्र 18 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर देखें तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की हिस्सेदारी अब बढ़कर 40 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि जी7 देश अब 20 प्रतिशत से भी नीचे खिसक गए हैं। पुतिन ने अनुमान जताया कि आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों की आर्थिक विकास दर चार प्रतिशत से अधिक रहेगी, जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं बमुश्किल एक प्रतिशत की दर से आगे बढ़ पाएंगी।

    अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के संबंध में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का केंद्र अब पूरी तरह से पूर्व और दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रहा है। ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’ और ‘ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट’ जैसे नए व्यापारिक रास्ते अब पश्चिमी नियंत्रण वाले पारंपरिक जलमार्गों और हब को पूरी तरह से दरकिनार कर रहे हैं। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर भी दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक पश्चिमी देशों को इन वैश्विक संस्थाओं से लाभ मिल रहा था, तब तक उन्होंने नियमों की दुहाई दी, लेकिन जैसे ही उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने लगी, वे खुद ही इन नियमों से पीछे हट गए हैं।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।”

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

    यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है।

    इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार

    रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार



    नई दिल्ली। Russia-Ukraine War को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक संकेत देते हुए रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy से किसी तीसरे देश में मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बैठक केवल अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए होगी।

    पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मुलाकात तभी संभव है जब दोनों देशों के बीच विशेषज्ञ स्तर पर पूरा और ठोस शांति समझौता पहले से तैयार हो जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत की बजाय यह बैठक सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया का अंतिम चरण होनी चाहिए।

    रूसी राष्ट्रपति ने पुराने Minsk agreements का हवाला देते हुए कहा कि पिछली शांति प्रक्रियाओं की तरह लंबी और असफल चर्चाओं से बचना जरूरी है। उनका कहना है कि इस बार पहले तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर पर सभी मुद्दों को पूरी तरह सुलझाया जाना चाहिए, ताकि बाद में नेताओं की मुलाकात सिर्फ हस्ताक्षर तक सीमित रहे।

    यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की दिशा में एक संभावित नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध

    ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध


    वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है तथा जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है।

    फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘द संडे ब्रीफिंग’ में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच हालात सामान्य करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बातचीत होती रही है, हालांकि आखिरी बातचीत कब हुई, इस पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।

    ‘नफरत से नहीं सुलझेगा विवाद’

    ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए कहा कि आपसी नफरत किसी भी समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने इसे “हास्यास्पद और पागलपन” बताया तथा कहा कि शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे जरूरी रास्ता है।

    गौरतलब है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने का वादा ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान किया था। हालांकि उनके दूसरे कार्यकाल में भी संघर्ष जारी है।

    जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण

    इधर युद्ध क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन के निप्रो शहर पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले में एक मकान पूरी तरह नष्ट हो गया।

    वहीं रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक महिला की मौत और एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। यह घटनाएं हाल ही में युद्धबंदियों की अदला-बदली के बाद सामने आई हैं।

    रूस का दावा

    रूस के विशेष दूत रोदियोन मिरोशनिक ने दावा किया कि फरवरी 2022 से अब तक यूक्रेनी हमलों में 8 हजार से अधिक रूसी नागरिक मारे गए हैं और करीब 20 हजार घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.

  • जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार

    जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार


    वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।

    रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।

    वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।

    जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।

    ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।

    दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।