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  • बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    मध्यप्रदेश: के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में निर्माणाधीन ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और आसपास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में सामने आई लापरवाही को लेकर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान विधायक रामेश्वर शर्मा भी मंत्री के साथ मौजूद रहे। मंत्री ने निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास की सड़क व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है और स्ट्रीट लाइट भी बंद हैं। निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल और आसपास की सभी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों की समयसीमा दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मंत्री ने निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित कंपनी पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए अधिकारियों को कहा गया।

    बैरागढ़ में निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास यातायात और आम लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया। मंत्री ने कहा कि निर्माण स्थल पर काम के दौरान जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन होना चाहिए। सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान सिविल अस्पताल के पास फैली अव्यवस्था का मुद्दा भी सामने आया। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को अस्पताल के आसपास की व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में लोगों को होने वाली असुविधाओं को देखते हुए आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

    मंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली। जिन कार्यों को अक्टूबर तक पूरा किए जाने की उम्मीद थी, उनके अब तक अधूरे रहने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों के लिए समयसीमा निर्धारित है, उन्हें तय अवधि में पूरा करने के लिए प्रभावी निगरानी की जाए।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित कंपनी और अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा कराने पर जोर दिया गया।

    बैरागढ़ ब्रिज का निर्माण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माण की गति के साथ-साथ सड़क, रोशनी और सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निरीक्षण में सामने आई कमियों का समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित करें।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए जाने के बाद मामला प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति करने का आरोप लगाया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा के बाद मिलने वाले रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है तो अन्य संस्थानों और इमारतों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

    जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने परिसर में मौजूद कई भवनों को नियमों के अनुरूप स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला देते हुए कार्रवाई का आदेश जारी किया। यह यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में जानी जाती है और लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं में रही है।

    इस बीच यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली सड़क को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि यह सड़क आम जनता के उपयोग के लिए है। विभाग का कहना है कि यह सड़क सरकारी धन से बनाई गई है और इसे किसी भी नागरिक के आवागमन के लिए रोका नहीं जा सकता।

    PWD अधिकारियों के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 के दौरान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से परिसर के अंदर तक लगभग 3.30 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना की लागत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई थी। विभाग का कहना है कि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है और इसका उपयोग आम लोगों के लिए होना चाहिए।

    PWD अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 में यूनिवर्सिटी की ओर से मुख्य गेट बंद कर दिया गया था, जिसके बाद आम लोगों और विभागीय अधिकारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चली। पहले हाईकोर्ट और फिर निचली अदालत में सुनवाई हुई। विभाग के अनुसार, अदालतों में अलग-अलग स्तर पर मामले की सुनवाई के बाद अब सार्वजनिक मार्ग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बोर्ड लगाया गया है।

    वहीं, जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन और उससे जुड़े पक्षों की ओर से भी अपनी दलीलें रखी जा रही हैं। यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया गया है।

    फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी मामला प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक विवाद दोनों का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश और सड़क को लेकर सरकारी विभाग सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और प्रशासन की आगे की कार्रवाई से इस मामले की दिशा तय होगी।

  • इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी

    इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी


    इंदौर । इंदौर का बहुप्रतीक्षित रेती मंडी ब्रिज अब तकनीकी लापरवाही और खराब प्लानिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। भोपाल के चर्चित 90 डिग्री ब्रिज विवाद के बाद अब यह प्रोजेक्ट भी इंजीनियरिंग की गंभीर चूक का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद चार साल से निर्माणाधीन यह ब्रिज अब तक पूरा नहीं हो पाया है और नई तकनीकी खामी सामने आने के बाद इसका काम फिर से करीब छह महीने आगे बढ़ गया है।

    सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि समय रहते इस गलती को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल रेती मंडी ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी। जब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MANIT की विशेषज्ञ टीम ने प्रूफ चेक किया तो इसे गंभीर तकनीकी खामी बताया गया।

    विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग को पूरे डिजाइन में बदलाव करना पड़ा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर की जा रही है।

    नई चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए दो अतिरिक्त पिलर भी लगाए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआती प्लानिंग में होना चाहिए था, उसे अब निर्माण के बीच में बदलना पड़ रहा है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी बल्कि काम पूरा होने में भी और देरी होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस खामी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उनके अनुसार किसी भी बड़े टर्निंग पॉइंट पर इतनी कम चौड़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। अगर समय रहते सुधार नहीं किया जाता तो भविष्य में यह ब्रिज गंभीर हादसों का कारण बन सकता था।

    मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने लोक निर्माण विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर को प्रयोगशाला बनाकर बिना उचित प्लानिंग के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी 90 डिग्री ब्रिज बनाया जाता है, कभी पिलर गायब हो जाते हैं और अब रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी खामी सामने आ रही है।

    रेती मंडी ब्रिज अब केवल अधूरा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और इंजीनियरिंग की कमजोरियों पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।