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  • भारत ने सितंबर डिलीवरी के लिए 23 डॉलर से अधिक में LNG खरीदी, यूरोप की मांग से बढ़ी बाजार चुनौती

    भारत ने सितंबर डिलीवरी के लिए 23 डॉलर से अधिक में LNG खरीदी, यूरोप की मांग से बढ़ी बाजार चुनौती

    नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बीच वैश्विक गैस आपूर्ति व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का असर अब भारत की LNG खरीद पर भी दिखाई देने लगा है। भारतीय कंपनियों को प्राकृतिक गैस की जरूरत पूरी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से अपेक्षाकृत ऊंची कीमत पर LNG खरीदनी पड़ रही है। सितंबर में डिलीवरी के लिए किए गए कुछ सौदों में कीमत 23 डॉलर प्रति MMBtu से अधिक बताई गई है। यह स्तर वर्ष 2022 के बाद भारत की महंगी LNG खरीद में शामिल है।

    सरकारी गैस कंपनी GAIL India ने सितंबर में डिलीवरी के लिए LNG की एक खेप स्पॉट मार्केट से खरीदी है। इसके लिए कंपनी ने 23 डॉलर प्रति MMBtu से ज्यादा कीमत चुकाई है। गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन यानी GSPC ने भी सितंबर में मिलने वाली LNG के लिए करीब 23 डॉलर प्रति MMBtu की कीमत पर खरीदारी की है। इन सौदों से संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता और कीमत दोनों ही भारत के लिए चुनौती बन रहे हैं।

    भारत में महंगी LNG खरीदने की जरूरत कई कारणों से बढ़ी है। देश की गैस और बिजली कंपनियां घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त LNG खरीद रही हैं। विशेष रूप से उर्वरक क्षेत्र में गैस की लगातार आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राकृतिक गैस उर्वरक उत्पादन की प्रमुख जरूरतों में शामिल है। ऐसे में कंपनियों को ऊंची कीमतों के बावजूद खरीदारी करनी पड़ रही है।

    भारत लंबे समय से LNG की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक समझौतों के माध्यम से पूरा करता रहा है। कतर भारत के प्रमुख LNG आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ऊर्जा ढांचे पर असर पड़ने से समुद्री मार्गों और LNG आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली आवाजाही में बाधा की आशंका ने भी वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    कतर के LNG निर्यात ढांचे पर संघर्ष से जुड़े प्रभावों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण एशियाई खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों से गैस जुटाने की कोशिश करनी पड़ रही है। इसका असर कीमतों पर पड़ रहा है और भारत जैसे आयात पर निर्भर बाजारों के लिए खरीद लागत बढ़ रही है।

    भारत को LNG खरीद के लिए यूरोपीय खरीदारों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। यूरोप में गैस की कीमतों में तेजी आने से वहां LNG की मांग बढ़ी है। ऐसे में उपलब्ध कार्गो के लिए एशियाई और यूरोपीय खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होने की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा असर स्पॉट मार्केट की कीमतों पर पड़ सकता है।

    सरकारी ऊर्जा कंपनी BPCL ने भी इस सप्ताह स्पॉट मार्केट से LNG की एक खेप खरीदने का समझौता किया है। हालांकि इस सौदे की कीमत सार्वजनिक नहीं हुई है। लगातार महंगी LNG खरीदने की स्थिति बनी रहती है तो गैस आधारित बिजली, उर्वरक और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    LPG की कीमतों पर इसका असर तुरंत और सीधे पड़ना तय नहीं माना जा सकता, क्योंकि घरेलू रसोई गैस की कीमतें कई नीतिगत और बाजार संबंधी कारकों पर निर्भर करती हैं। हालांकि आयातित गैस और ऊर्जा लागत में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने पर पेट्रोलियम क्षेत्र की लागत संरचना पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में LPG की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

    फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक LNG आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता है। पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री परिवहन की स्थिति और यूरोप की बढ़ती मांग के बीच भारत के लिए सस्ती गैस की उपलब्धता महत्वपूर्ण रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों की खरीद लागत और ऊर्जा क्षेत्र पर उसका प्रभाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकता है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।

  • कतर दौरे में भारत-कतर रिश्तों को नई मजबूती, एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री अल थानी के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर की व्यापक चर्चा

    कतर दौरे में भारत-कतर रिश्तों को नई मजबूती, एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री अल थानी के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर की व्यापक चर्चा


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कतर की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत की। दौरे के दौरान उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।

    यह यात्रा विदेश मंत्री के बहु-देशीय पश्चिम एशिया दौरे का पहला चरण थी। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करना तथा साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना है। कतर के बाद उनका कार्यक्रम बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्राओं का भी है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक सहयोग, निवेश बढ़ाने की संभावनाओं और आपसी संपर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के कई मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी चर्चा के प्रमुख केंद्र रहे।

    विदेश मंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संवाद में कतर की सक्रिय मध्यस्थता भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों में कतर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। दोनों नेताओं ने साझा हितों वाले बहुपक्षीय विषयों पर भी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    दोहा प्रवास के दौरान डॉ. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कतर के विकास और समाज में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी भारतीय नागरिकों ने अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय समुदाय के अनुभव, सुझाव और सहभागिता भारत-कतर संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत होते संबंधों को द्विपक्षीय साझेदारी की बड़ी ताकत बताया और भविष्य में इसे और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    उन्होंने कतर नेतृत्व का भारत के नागरिकों की सुरक्षा और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए आभार भी व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मानवीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने से रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।

    विदेश मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच भारत क्षेत्र के देशों के साथ अपने सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सक्रिय कूटनीतिक पहल कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से भारत और कतर के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश तथा क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में भविष्य की साझेदारी को नया विस्तार मिलने की संभावना मजबूत हुई है।

  • Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय

    Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय


    दोहा।
    कतर (Qatar) के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स (Ras Laffan LNG complex) में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने भी इस घटना पर चिंता जताई है. ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था।

    कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।

    दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया।

    ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।

    सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।

  • कतर के पास जहाज पर हमला: होर्मुज स्ट्रेट में आग से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा

    कतर के पास जहाज पर हमला: होर्मुज स्ट्रेट में आग से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा



    नई दिल्ली। कतर के तट के पास स्थित संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल टकराने से आग लग गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है।

    क्या है पूरा मामला?
    ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार एक बल्क कैरियर जहाज दोहा से लगभग 23 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में जा रहा था

    अचानक जहाज किसी अज्ञात वस्तु से टकराया,टक्कर के बाद जहाज में आग लग गई। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह हमला था, तकनीकी खराबी या कोई बाहरी टक्कर।

    क्यों बढ़ी चिंता?
    यह घटना होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग में हुई है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।हाल के समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैंईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर समुद्री मार्गों पर दिख रहा हैसुरक्षा कारणों से शिपिंग कंपनियों में चिंता बढ़ी है

    ऊर्जा बाजार पर असर का खतरा
    विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तनाव का सीधा असर तेल कीमतों पर पड़ता हैवैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता हैबीमा और शिपिंग लागत में भी तेजी आने की संभावना रहती हैईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से टकराव। क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां बढ़ीं।हाल के महीनों में समुद्री सुरक्षा घटनाएं अधिक हुईं। खाड़ी क्षेत्र पहले से हाई अलर्ट पर है

    कतर के पास हुआ यह हादसा केवल एक जहाज दुर्घटना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराते खतरे का संकेत है। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • ईरान के हमले से कतर की LNG निर्यात क्षमता 17% खत्म… 20 अरब डॉलर का नुकसान

    ईरान के हमले से कतर की LNG निर्यात क्षमता 17% खत्म… 20 अरब डॉलर का नुकसान


    दोहा।
    कतर के गैस प्लांट (Qatar’s Gas Plant) पर हुए हालिया ईरानी हमलों (Iranian attacks) ने देश की तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG निर्यात क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस हमले के कारण कतर की 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता (LNG Export Capacity) तबाह हो गई है, जिससे उत्पादन अगले पांच वर्षों तक ठप रहने की आशंका है। देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के अनुसार, इन हमलों से सालाना लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।


    वैश्विक गैस संकट बढ़ेगा

    इस नुकसान ने यूरोप और एशिया भर में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। यह हमला खाड़ी देशों के तेल और गैस संयंत्रों पर हमलों की एक अभूतपूर्व श्रृंखला का हिस्सा है। ईरान ने यह कदम तब उठाया जब इजरायल ने उसके (ईरान के) गैस बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था।


    बुनियादी ढांचे को हुआ भारी नुकसान

    हमलों में कतर की प्रमुख गैस सुविधाओं को सटीक रूप से निशाना बनाया गया। कतर की 14 ‘एलएनजी ट्रेनों’ में से दो पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसकी दो गैस-टू-लिक्विड (GTL) सुविधाओं में से एक को निशाना बनाया गया है। अल-काबी ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे को हुए इस भारी नुकसान की मरम्मत करने और प्रति वर्ष 12.8 मिलियन टन एलएनजी क्षमता को फिर से बहाल करने में कम से कम तीन से पांच साल का समय लगेगा।

    साद अल-काबी ने हमले के समय और इसके स्रोत (ईरान) पर गहरी निराशा और अविश्वास व्यक्त किया। उन्होंने इस हमले के क्षेत्रीय निहितार्थों की ओर इशारा करते हुए कहा: मैंने अपने सबसे बुरे सपनों में भी नहीं सोचा था कि कतर और इस क्षेत्र पर इस तरह का हमला होगा, खासकर रमजान के पवित्र महीने में एक भाईचारे वाले मुस्लिम देश द्वारा हम पर इस तरह से हमला किया जाएगा।


    सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पर ‘फोर्स मेजर’ का संकट

    इस भारी व्यवधान ने सरकारी स्वामित्व वाली कतरएनर्जी को इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन को होने वाली एलएनजी आपूर्ति के दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट पर ‘फोर्स मेजर’ घोषित करने पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। यहां ‘फोर्स मेजर’ का मतलब अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण अनुबंध पूरा न कर पाने से है। अल-काबी ने बताया कि छोटी अवधि के लिए ‘फोर्स मेजर’ पहले ही घोषित किए जा चुके थे, लेकिन बुनियादी ढांचे के नुकसान की गंभीरता को देखते हुए अब इसे लंबी अवधि के लिए लागू करना पड़ेगा।


    साझेदारों और अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव

    इस हमले का असर केवल कतर तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी निवेशकों और गैस के अन्य उप-उत्पादों पर भी पड़ा है।

    एक्सॉनमोबिल का नुकसान: अमेरिकी तेल दिग्गज कंपनी एक्सॉनमोबिल प्रभावित बुनियादी ढांचे में एक प्रमुख भागीदार है। इसकी एलएनजी ट्रेन S4 में 34 प्रतिशत और ट्रेन S6 में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    अन्य निर्यातों में भारी गिरावट: एलएनजी क्षेत्र के अलावा, कतर के कंडेनसेट निर्यात में 24 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। वहीं, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन में 13 प्रतिशत, हीलियम के उत्पादन में 14 प्रतिशत, और नेफ्था व सल्फर दोनों के उत्पादन में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

    क्षतिग्रस्त इकाइयों के निर्माण की लागत पर बात करते हुए अल-काबी ने अनुमान लगाया कि इन्हें बनाने में लगभग 26 बिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरम्मत और उत्पादन का काम तभी फिर से शुरू हो सकता है जब यह युद्ध और संघर्ष पूरी तरह से समाप्त हो जाए।


    प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल; ब्रेंट क्रूड 116.38 डॉलर

    ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया। कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस की आपूर्ति करती है। इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 116.38 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी। प्राकृतिक गैस की कीमतों के यूरोपीय टीटीएफ मानक में बृहस्पतिवार को 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील

    ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील


    लंदन/मस्कट।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मदद की पेशकश की है। इन देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में शामिल होने को तैयार हैं।

    साथ ही बयान में इन देशों ने ईरान के हालिया हमलों की निंदा की और उसे तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने वाले देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि जरूरत पड़ने पर अन्य कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि तेल सप्लाई पर असर कम किया जा सके।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है और तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी युद्ध तुरंत खत्म करने की अपील की। उन्होंने ईरान से अनुरोध किया कि वह अपने हमले रोके और संघर्ष को और न बढ़ाए।

    अल थानी ने विशेष रूप से रास लफ्फान गैस प्लांट पर हुए हमले का जिक्र किया और कहा कि इससे स्पष्ट है कि ईरान अब ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, जो न केवल कतर बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का असर दुनियाभर के लाखों लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होगी।

    उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संयुक्त बयान और कतर की चेतावनी इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत बढ़ गई है।

    इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि बड़े देशों की मदद और कतर की चेतावनी मिलकर क्षेत्रीय तनाव को कम कर सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में योगदान दे सकती है।

  • इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति

    इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति


    नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इसी बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है।

    सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में इन देशों ने ईरान की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की। बयान जारी करने वाले देशों में अजरबैजान बहरीन मिस्र जॉर्डन कुवैत लेबनान पाकिस्तान कतर सऊदी अरब सीरिया तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

    विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने रिहायशी इलाकों तेल सुविधाओं एयरपोर्ट डीसेलिनेशन प्लांट और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

    संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने कतर और यूएई के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया। कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाए जाने के बाद वहां आग लगने की खबरें सामने आईं जबकि सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।

    कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर दिया। उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। कतर ने कहा कि यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक था।

    संयुक्त बयान में यह भी चेतावनी दी गई कि ईरान के साथ भविष्य के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है या नहीं। विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और सैन्य दबाव की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी।

    इस बीच ईरानी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और गैस उत्पादन केंद्रों पर हमले का आरोप लगाया है जिससे हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। कुल मिलाकर मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव अब क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति और संयम की अपील कर रहा है।

  • कतर ने दिए ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को मुल्क छोड़ने के निर्देश

    कतर ने दिए ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को मुल्क छोड़ने के निर्देश


    तेहरान।
    ईरानी हमलों (Iranian attacks) के खिलाफ अब मिडिल ईस्ट (Middle East) के देश कार्रवाई शुरू कर चुके हैं। अब कतर (Qatar) ने ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को मुल्क छोड़ने के निर्देश दे दिए हैं। इसके लिए 24 घंटों का समय दिया गया है। अमेरिका और इजरायल (America and Israel) से युद्ध के बीच खाड़ी देशों में हमले करने को लेकर ईरान पहले ही कई मुल्कों के निशाने पर आ चुका है। खबर है कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मुस्लिम देशों की बड़ी बैठक भी होने वाली है।

    कतर के विदेश मंत्रालय ने लिखा, ‘कतर के विदेश मंत्रालय ने देश में स्थित इस्लामी गणराज्य ईरान के दूतावास को एक आधिकारिक नोट सौंपा है। इसमें कहा गया है कि कतर, दूतावास के सैन्य अताशे (Military Attache) और सुरक्षा अताशे (Security Attache) के साथ-साथ इन दोनों कार्यालयों के समस्त स्टाफ को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित करता है। कतर ने मांग की है कि ये सभी अधिकारी अधिकतम 24 घंटे के भीतर देश छोड़कर चले जाएं।’


    क्या होता है पर्सोना नॉन ग्राटा

    डिप्लोमेसी के लिहाज से जब कोई देश किसी विदेशी अधिकारी या अधिकारियों को अपने यहां रहने की अनुमति देने से मना कर देता है या उसे देश छोड़ने का आदेश देता है, तो उसे ‘persona non grata’ घोषित किया जाता है।

    हमले से नाराज होकर उठाया कदम
    मंत्रालय ने कहा कि ईरान की तरफ से बार-बार कतर को निशाना बनाने और कतर राज्य के खिलाफ किए गए खुले आक्रमण के जवाब में लिया गया है, जिसने कतर की संप्रभुता और सुरक्षा का उल्लंघन किया है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2817 और अच्छे पड़ोस के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।

    चेतावनी भी दे दी
    कतर ने साफ किया है कि ईरान अगर इस तरह का रवैया जारी रखता है, तो आगे और भी कड़े उपाय किए जाएंगे। साथ ही कहा, ‘कतर अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों के अनुसार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता है।’

    ईरान ने दी कतर समेत कई देशों को धमकी
    ईरान ने अपने ‘गैस फील्ड’ पर हमले के बाद धमकी दी है कि वह कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) में तेल और गैस के बुनियादी ढांचे पर हमला करेगा। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब ईरान ने धमकी जारी की हो। ईरान ने विशेष रूप से सऊदी अरब की ‘समरेफ रिफाइनरी’ और उसके ‘जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स’ को निशाना बनाने की धमकी दी है। उसने संयुक्त अरब अमीरात के ‘अल हसन गैस फील्ड’ और कतर में स्थित पेट्रोकेमिकल संयंत्रों तथा एक रिफाइनरी पर भी हमले की धमकी दी है।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।