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  • क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी

    क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम अपने साथ राहत लेकर आता है लेकिन इसी दौरान डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। हर वर्ष लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं और कई मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसे समय में भारत के लिए बड़ी राहत की खबर यह है कि देश में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए QDENGA वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। विशेषज्ञ इसे डेंगू के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं क्योंकि यह बीमारी के गंभीर रूप और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखती है।

    QDENGA जापान की दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित एक लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसमें डेंगू वायरस के कमजोर स्वरूप का उपयोग किया जाता है ताकि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ सुरक्षा विकसित कर सके। बाद में यदि वास्तविक डेंगू वायरस शरीर पर हमला करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र तेजी से सक्रिय होकर गंभीर संक्रमण की आशंका को कम करने में मदद करता है।

    इस वैक्सीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकारों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विकसित की गई है। पहले उपलब्ध कुछ वैक्सीन में टीकाकरण से पहले यह जांच जरूरी होती थी कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं। लेकिन QDENGA के लिए ऐसी जांच आवश्यक नहीं है जिससे बड़े स्तर पर टीकाकरण करना अधिक आसान हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन 6 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए उपयुक्त मानी गई है। इसे दो डोज में लगाया जाता है और दोनों डोज के बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाता है। पहली डोज शरीर में प्रारंभिक प्रतिरक्षा तैयार करती है जबकि दूसरी डोज लंबे समय तक सुरक्षा को मजबूत बनाती है।

    क्लिनिकल परीक्षणों में इस वैक्सीन के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अध्ययनों के अनुसार इससे डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 84 प्रतिशत तक कम देखा गया जबकि संक्रमण का जोखिम भी काफी हद तक घटा। हालांकि यह वैक्सीन संक्रमण की पूरी तरह गारंटी नहीं देती लेकिन गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    भारत में इसकी कीमत का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है लेकिन शुरुआती अनुमान के अनुसार इसकी एक डोज की कीमत लगभग चार से पांच हजार रुपये के बीच हो सकती है। शुरुआत में यह निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध होने की संभावना है। भविष्य में इसे सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर निर्णय बाद में लिया जाएगा।

    अच्छी बात यह भी है कि भारत की दवा कंपनी जायडस लाइफसाइंसेज के साथ हुए समझौते के तहत भविष्य में इस वैक्सीन का निर्माण भारत में भी किया जाएगा। इससे इसकी उपलब्धता बढ़ने और कीमत कम होने की संभावना जताई जा रही है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि केवल वैक्सीन ही डेंगू की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। मच्छरों की रोकथाम साफ सफाई घर और आसपास पानी जमा न होने देना पूरी बाजू के कपड़े पहनना मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना तथा बुखार आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आज भी उतना ही जरूरी है।

    डेंगू के खिलाफ यह वैक्सीन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जरूर है लेकिन इसके साथ जागरूकता और बचाव के उपाय अपनाना भी आवश्यक है। यदि टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में डेंगू से होने वाले गंभीर मामलों और मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

  • डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा

    डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा


    नई दिल्ली । 
    भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने जापानी दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है, जिसे 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश में डेंगू संक्रमण की रोकथाम और गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हर वर्ष मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। हजारों लोग इस मच्छरजनित बीमारी से प्रभावित होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण के कारण कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    QDENGA की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यह वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जो कभी इस संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। यही विशेषता इसे डेंगू नियंत्रण के लिए अधिक उपयोगी बनाती है।

    स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जाएगी। टीकाकरण के लिए कुल दो डोज निर्धारित की गई हैं, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे लगाया जाएगा और दोनों डोज समय पर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना बताई गई है।

    भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले दो दशकों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में एक लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मामलों का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हो पाता।

    डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं और एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दूसरे प्रकार के वायरस की चपेट में आ सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी प्रमुख प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करे। इसी कारण इसे व्यापक सुरक्षा प्रदान करने वाली वैक्सीन माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन और क्लीनिकल परीक्षण किए गए हैं। हजारों स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के लगभग एक वर्ष बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वहीं गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी उल्लेखनीय रूप से कम करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसकी प्रभावशीलता बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही डेंगू प्रभावित देशों के लिए इस वैक्सीन की उपयोगिता को स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग शुरू हो चुका है और कुछ देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों की रोकथाम और व्यक्तिगत सावधानी भी जरूरी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना तथा डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।