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  • मुनाफा घटा लेकिन कारोबार में जबरदस्त तेजी, Hind Rectifiers की ऑर्डर बुक ₹845 करोड़ के पार

    मुनाफा घटा लेकिन कारोबार में जबरदस्त तेजी, Hind Rectifiers की ऑर्डर बुक ₹845 करोड़ के पार

    नई दिल्ली ।  शेयर बाजार में निवेशकों के बीच चर्चित कंपनी Hind Rectifiers एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी वाली इस कंपनी ने अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा भले ही कमजोर रहा हो, लेकिन कारोबार की रफ्तार ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसकी ऑर्डर बुक भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्र में इस शेयर की चाल पर बनी हुई है।

    ताजा वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत घटकर 4.51 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने करीब 9.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। हालांकि मुनाफे में यह गिरावट बाजार के लिए चिंता का विषय बनी, लेकिन दूसरी ओर कंपनी के कारोबार में आई तेज वृद्धि ने स्थिति को संतुलित किया। चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 279.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 185.1 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।

    कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला। EBITDA में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 8.42 करोड़ रुपये रह गया। इसके साथ ही EBITDA मार्जिन भी घटकर 3 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 10.8 प्रतिशत था। विशेषज्ञ मानते हैं कि लागत बढ़ने और कुछ परिचालन दबावों के कारण कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई है, लेकिन मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार से भविष्य की संभावनाएं अभी भी सकारात्मक दिखाई दे रही हैं।

    Hind Rectifiers ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसकी ऑर्डर बुक बढ़कर 845.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा उपलब्धि स्तर माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि रेलवे सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार ने ऑर्डर बुक को मजबूती दी है। इसके अलावा सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश का भी कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि बाजार में भविष्य को लेकर कंपनी के प्रति सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं।

    कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का भी ऐलान किया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 1.40 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह फैसला निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि कमजोर मुनाफे के बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों को रिटर्न देने का भरोसा बनाए रखा है।

    बाजार में इस कंपनी को लेकर एक और बड़ी वजह चर्चा में है और वह है दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक उनके पास कंपनी में 1.45 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो लगभग 5 लाख शेयरों के बराबर है। निवेशकों का मानना है कि किसी अनुभवी निवेशक की मौजूदगी अक्सर कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ाती है। अब आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार के दम पर कंपनी अपने मुनाफे को फिर से मजबूत कर पाती है या नहीं।

  • अर्बन कंपनी के नतीजों में भारी गिरावट: 161 करोड़ के घाटे ने जीवों को चौंकाया, बढ़ने के बावजूद बढ़ी चिंता

    अर्बन कंपनी के नतीजों में भारी गिरावट: 161 करोड़ के घाटे ने जीवों को चौंकाया, बढ़ने के बावजूद बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली
    घर-घर में ब्यूटी, मेंटेनेंस और प्रोफेशनल सर्विसेज उपलब्ध कराने वाली प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी Urban Company ने मार्च 2026 तिमाही में जहां मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, वहीं भारी घाटे ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी के ताजा वित्तीय नतीजों के बाद शेयर बाजार में इसका सीधा असर देखने को मिला और इसके शेयरों में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब बाजार पहले से ही कंपनी के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए था, लेकिन बढ़ते नुकसान ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    कंपनी के मुताबिक मार्च तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर 161 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 2.8 करोड़ रुपये था। यह बढ़ोतरी निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हुई क्योंकि घाटा कई गुना बढ़ चुका है। इतना ही नहीं, पिछली तिमाही की तुलना में भी नुकसान में तेज उछाल देखा गया, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या कंपनी का तेज विस्तार मॉडल लंबे समय में टिकाऊ साबित हो पाएगा या नहीं।

    हालांकि दूसरी ओर कंपनी के बिजनेस ग्रोथ के आंकड़े मजबूत दिखाई दे रहे हैं। मार्च तिमाही में ऑपरेशंस से रेवेन्यू 43 प्रतिशत बढ़कर 426 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 298 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी का ग्राहक आधार लगातार बढ़ रहा है और सेवाओं की मांग मजबूत बनी हुई है। नेट ट्रांजैक्टिंग वैल्यू में भी 42 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो 1,148 करोड़ रुपये तक पहुंच गई और पिछले कई तिमाहियों में सबसे उच्च स्तर पर रही।

    इसके बावजूद खर्चों में तेज बढ़ोतरी ने लाभ की राह को प्रभावित किया है। तकनीकी विस्तार, नए बाजारों में प्रवेश, मार्केटिंग और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट पर भारी निवेश के कारण लागत लगातार बढ़ती जा रही है। इसी वजह से कंपनी का एडजस्टेड EBITDA लॉस 98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि कंपनी ने यह भी बताया कि यदि InstaHelp बिजनेस को अलग रखा जाए तो एडजस्टेड EBITDA सकारात्मक क्षेत्र में दिखाई देता है, जो कुछ हद तक राहत की बात मानी जा सकती है।

    InstaHelp सेगमेंट ने इस तिमाही में तेज रफ्तार ग्रोथ दिखाई है, जहां ऑर्डर और रेवेन्यू दोनों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी UAE और सिंगापुर जैसे बाजारों में मजबूत प्रदर्शन कर रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाओं को बल मिलता है।

    पूरे वित्त वर्ष 2026 में भी कंपनी ने 31 प्रतिशत की NTV ग्रोथ और 36 प्रतिशत की रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की है, जो यह संकेत देता है कि बिजनेस विस्तार जारी है। हालांकि बाजार की सबसे बड़ी चिंता अभी भी यही बनी हुई है कि क्या यह तेज ग्रोथ आने वाले समय में मुनाफे में बदल पाएगी या बढ़ते खर्च और घाटे के बीच निवेशकों का भरोसा और कमजोर होगा।