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शर्मिला टैगोर और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच क्या है रिश्ता? बेटी सोहा अली खान ने बताया पूरा सच
नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का सरनेम हमेशा चर्चा का विषय रहा है। कई लोग अक्सर यह सवाल करते रहे हैं कि क्या उनका सीधा संबंध महान साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है। इस जिज्ञासा पर अब उनकी बेटी और अभिनेत्री सोहा अली खान ने विस्तार से जानकारी दी है।सोहा अली खान ने बताया कि टैगोर परिवार का रिश्ता रवींद्रनाथ टैगोर के विस्तृत वंश से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह कोई सीधा पिता-पुत्र या नजदीकी रक्त संबंध नहीं है। दरअसल, शर्मिला टैगोर का संबंध टैगोर परिवार की उस शाखा से है, जो ऐतिहासिक रूप से बंगाल के प्रतिष्ठित टैगोर वंश का हिस्सा रही है। इस वंश में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े कई महान व्यक्तित्व शामिल रहे हैं।सोहा ने यह भी बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार की कई पीढ़ियों में अलग-अलग शाखाएं विकसित हुईं, जिनमें से कुछ कला और संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ीं। शर्मिला टैगोर का सरनेम उसी व्यापक सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है, न कि रवींद्रनाथ टैगोर के सीधे वंश का।रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य के सबसे महान नामों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल ‘गीतांजलि’ जैसी अमर रचनाएं दीं, बल्कि भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान भी लिखे। ऐसे में उनके नाम से जुड़ी किसी भी विरासत को लेकर लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है। इसी वजह से शर्मिला टैगोर के नाम को लेकर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं।सोहा अली खान ने यह भी कहा कि उनके परिवार में सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत बहुत मजबूत रही है, लेकिन हर पीढ़ी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। शर्मिला टैगोर ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग मुकाम हासिल किया, जबकि उनका सरनेम ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा भर है।गौरतलब है कि शर्मिला टैगोर भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने अपने दौर में ग्लैमर और क्लासिक सिनेमा दोनों में संतुलन बनाए रखा। वहीं सोहा अली खान भी अपने इंटरव्यू और पॉडकास्ट के जरिए परिवार, रिश्तों और विरासत पर खुलकर बात करती रही हैं।इस खुलासे के बाद यह साफ हो जाता है कि टैगोर सरनेम एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, न कि किसी सीधे पारिवारिक रिश्ते का प्रमाण। -

बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।
अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।