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  • राधा अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलती पूजा से पारण तक जानिए राधारानी के व्रत की पूरी विधि

    राधा अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलती पूजा से पारण तक जानिए राधारानी के व्रत की पूरी विधि


    नई दिल्ली। राधा अष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन राधा कृष्ण की विशेष पूजा करने के साथ व्रत भजन कीर्तन और राधारानी का श्रृंगार किया जाता है। वर्ष 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर शनिवार को मनाया जाएगा। जो लोग पहली बार राधा अष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं उनके लिए पूजा की तैयारी से लेकर भोग और पारण तक की परंपरा को समझना जरूरी है।
    पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के समय के आधार पर अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर लगभग 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। राधारानी की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 19 सितंबर को पूजा का समय सुबह लगभग 11 बजकर 1 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। अलग अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    राधा अष्टमी के दिन व्रती को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद चौकी पर लाल पीला या गुलाबी कपड़ा बिछाकर राधा कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है। अगर घर में राधारानी की अलग प्रतिमा उपलब्ध नहीं है तो राधा कृष्ण की तस्वीर के सामने भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल फूल और अक्षत लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लेने की परंपरा है।

    इसके बाद कलश स्थापित कर राधा कृष्ण को जल चंदन रोली अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं। प्रतिमा उपलब्ध होने पर परंपरा के अनुसार जल या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। अगर तस्वीर के सामने पूजा कर रहे हैं तो उस पर जल चढ़ाने के बजाय फूल चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करना उचित माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा भी है। इसके बाद राधारानी का श्रृंगार कर धूप और दीप जलाएं। मध्याह्न काल में राधा अष्टमी की कथा का पाठ करें और राधा कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए अंत में आरती करें।

    भोग की बात करें तो राधा अष्टमी पर सात्विक और ताजा भोजन भगवान को अर्पित करने की परंपरा है। घर पर खीर मालपुआ रबड़ी माखन मिश्री फल पंचामृत या दूध से बनी मिठाई तैयार की जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भोग सात्विक होना चाहिए। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।

    व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल व्रत फलाहार या एक समय सात्विक भोजन का संकल्प ले सकते हैं। धार्मिक व्रत में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। बीमारी गर्भावस्था अधिक उम्र या नियमित दवा लेने की स्थिति में निर्जल व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। व्रत के दौरान क्रोध निंदा और कटु वचन से बचने तथा राधे राधे या ॐ राधिकायै नमः जैसे मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।

    राधा अष्टमी के पारण की परंपरा अलग अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग हो सकती है। कुछ लोग पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं जबकि कुछ परंपराओं में अगले दिन पारण किया जाता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय तय करना उचित रहेगा।

  • राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम

    राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम


    मथुरा। बरसाना में 19 सितंबर को होने वाली राधाष्टमी को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। मेला क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टर में बांटकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए 38 होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इसके अलावा 50 पार्किंग स्थल, छह वॉच टावर और 88 बैरियर लगाए जाएंगे।

    12 गोताखोर और नाव रहेगी तैनात
    जल संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए 12 गोताखोर और एक नाव तैनात की जाएगी। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। सफाई और सजावट के साथ घोषणा प्रणाली से लगातार अनाउंसमेंट कराने पर भी जोर दिया गया है।

    जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त दिशा-सूचक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। बाइक एंबुलेंस के साथ नियमित दूरी पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 35 पानी के टैंकर, 30 मोबाइल शौचालय और 100 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे। सात स्थानों पर जूता घर भी बनाए जाएंगे।

    50 स्थानों पर 155 कैमरों से नजर
    भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बरसाना में 50 स्थानों पर कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कस्बे में पहले से लगे 60 कैमरों और राधारानी मंदिर में मौजूद 32 कैमरों के अतिरिक्त नए कैमरे शामिल होंगे। इसके अलावा 27 स्थानों पर 63 अस्थायी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

    पीली कोठी, श्रीजी गेट और कटारा पार्क सहित सात स्थानों पर स्टैटिक सेट के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का जोर भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने पर रहेगा।

    राधाष्टमी पर 160 बसें चलेंगी
    राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 18 और 19 सितंबर को 160 बसों के संचालन की तैयारी है। इसके अलावा 40 अतिरिक्त बसों को रिजर्व रखा जाएगा।

    बसों के संचालन के लिए चालक-परिचालकों की व्यवस्था के साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचाने और वापस लाने के लिए प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक अहिरवार के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर बसों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं।

  • प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा

    प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा


    नई दिल्ली । प्रेमानंद महाराज का नाम आज के समय में किसी आध्यात्मिक चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। उनका जीवन आत्मसमर्पण, भक्ति और अडिग विश्वास का प्रतीक बन चुका है। जहां एक ओर चिकित्सकीय दृष्टिकोण से उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और वे डायलिसिस पर हैं वहीं दूसरी ओर प्रेमानंद महाराज हर रात 2 बजे उठकर वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और अपने भक्तों को ऊर्जा से भरपूर प्रवचन देते हैं। यह असाधारण साहस और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    अनिरुद्ध से प्रेमानंद महाराज तक का सफर

    प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गाँव सरसौल में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनका पालन-पोषण एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां भक्ति के संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे। उनके दादा एक सन्यासी थे और माता-पिता भी धार्मिक प्रवृत्तियों के अनुयायी थे। बचपन से ही अनिरुद्ध का झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था। वह बाकी बच्चों की तरह खेल-कूद में व्यस्त नहीं रहते थे बल्कि अक्सर ध्यान और मंत्र जाप में लीन रहते थे।13 वर्ष की उम्र में, जब अन्य बच्चे अपने भविष्य के सपनों में खोए रहते हैं, अनिरुद्ध ने घर छोड़कर संन्यास की राह पकड़ ली। इस समय से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई और उन्होंने नैमिषारण्य में गहरी तपस्या की। यहां उन्हें आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी के नाम से पहचाना गया।

    शिव भक्ति से कृष्ण प्रेम तक का सफर

    आध्यात्मिकता के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के कारण अनिरुद्ध ने भगवान शिव की उपासना की और मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन समर्पित कर दिया। लेकिन एक दिन उन्हें किसी संत के माध्यम से वृंदावन की महिमा और भगवान कृष्ण की रासलीला के बारे में ज्ञात हुआ। इसके बाद उन्होंने महादेव की आज्ञा लेकर वृंदावन की यात्रा की और वहां पहुंचते ही उनका दिल पूरी तरह से बदल गया। वृंदावन की रज में कदम रखते ही उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय को अपनाया और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति पद्धति से प्रभावित हुए। यहीं पर उनकी मुलाकात उनके गुरु गौरांगी शरण महाराज से हुई। गुरु के साथ बिताए गए समय में उन्होंने 10 वर्षों तक सेवा की, और राधा रानी के चरणों में अनन्य भक्ति के कारण उन्हें नया नाम मिला: प्रेमानंद गोविंद शरण, जिसे आज पूरी दुनिया प्रेमानंद महाराज के नाम से जानती है।

    किडनियां फेल, फिर भी भक्ति का पावर हाउस

    प्रेमानंद महाराज का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं और वे लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। ऐसी स्थिति में किसी सामान्य व्यक्ति के लिए बिस्तर से उठना भी मुश्किल होता, लेकिन प्रेमानंद महाराज की भक्ति और आत्मविश्वास की कोई सीमा नहीं। हर रात 2 बजे उठकर वे वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और घंटों तक अपने भक्तों को ऊर्जावान प्रवचन देते हैं। उनकी भक्ति की शक्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किडनियों का नाम राधा और कृष्ण रखा है। वे अक्सर कहते हैं कि यह शरीर केवल राधा रानी की सेवा का एक साधन है, और जब तक उनकी इच्छा है, यह शरीर कार्य करता रहेगा। प्रेमानंद महाराज की भक्ति का ये अद्वितीय रूप उनके भक्तों के लिए एक निरंतर प्रेरणा स्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि आत्मविश्वास, भक्ति और विश्वास के बल पर कोई भी कठिनाई अजेय नहीं होती।