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  • भारत ने Su-57 से बनाई दूरी, राफेल पर बढ़ा भरोसा, रूस के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा फैसला

    भारत ने Su-57 से बनाई दूरी, राफेल पर बढ़ा भरोसा, रूस के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा फैसला

    नई दिल्ली । भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 को लेकर फिलहाल भारत की ओर से कोई खरीद योजना आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है। इसके बजाय भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण, अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद और स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस फैसले को रूस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि मॉस्को लंबे समय से भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश करता रहा है।

    रूस ने भारत को Su-57 विमान खरीदने के लिए कई आकर्षक प्रस्ताव दिए थे। इनमें विमान निर्माण में सहयोग, तकनीक हस्तांतरण और भारतीय जरूरतों के अनुसार बदलाव की पेशकश भी शामिल थी। रूस की कोशिश थी कि भारत पांचवीं पीढ़ी के इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को अपने बेड़े में शामिल करे। इससे पहले ऐसी संभावनाएं जताई जा रही थीं कि भारत करीब 36 से 40 Su-57 विमानों की खरीद पर विचार कर सकता है। हालांकि, अब भारत की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दे रही हैं।

    भारतीय रक्षा मंत्रालय की ओर से संकेत दिया गया है कि फिलहाल Su-57 को लेकर कोई सक्रिय खरीद योजना नहीं है। भारत अपने मौजूदा Su-30MKI लड़ाकू विमानों को और अधिक आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रहा है। Su-30MKI भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का प्रमुख हिस्सा रहा है। इन विमानों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई तकनीकी सुधार और अपग्रेड की योजनाएं बनाई जा रही हैं।

    इसके साथ ही भारत फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। राफेल पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है और इसकी क्षमता को देखते हुए भारत इसे एक भरोसेमंद विकल्प मान रहा है। राफेल अपनी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, लंबी दूरी के हथियारों और बहुउद्देश्यीय क्षमता के लिए जाना जाता है। इससे वायुसेना को अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर ऑपरेशनल क्षमता मिलती है।

    हालांकि राफेल और Su-57 अलग-अलग श्रेणी के लड़ाकू विमान हैं। राफेल को 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक विमान माना जाता है, जबकि Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। Su-57 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम रडार पहचान क्षमता और आंतरिक हथियार भंडारण प्रणाली है। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को शामिल किया जा सकता है, जिससे यह बड़े रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।

    भारत की रक्षा योजना में अब स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA परियोजना को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। यह भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भविष्य में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत लंबे समय में अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम को मजबूत करना चाहता है।

    रक्षा क्षेत्र में बदलती जरूरतों और रणनीतिक प्राथमिकताओं के बीच भारत का ध्यान अब संतुलित विकल्पों पर है। एक ओर जहां राफेल जैसे आधुनिक और युद्ध में परखे गए विमानों को शामिल करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर Su-30MKI अपग्रेड और AMCA जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में Su-57 की खरीद पर फिलहाल विराम लगना भारत की बदलती रक्षा नीति का संकेत माना जा रहा है।

  • राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता रहा है, लेकिन राफेल लड़ाकू विमान से जुड़ी उन्नत तकनीकों के हस्तांतरण का मुद्दा अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 बहुउद्देश्यीय राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि विमान के सोर्स कोड और रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के विषय पर सहमति बनने में अभी समय लग सकता है।

    भारत लंबे समय से ऐसी तकनीकी पहुंच चाहता है, जिससे भविष्य में राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों और नई प्रणालियों का एकीकरण स्वतंत्र रूप से किया जा सके। इसी उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय विमान के इंटरफेस डेटा और आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त करने पर जोर दे रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को घरेलू तकनीक के साथ राफेल प्लेटफॉर्म को बेहतर ढंग से अनुकूलित करने में मदद मिल सकती है।

    जानकारी के अनुसार, भारत ने इस वर्ष मई में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा था। अब फ्रांस की ओर से उसके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जवाब मिलने के बाद दोनों पक्ष कीमत, तकनीकी सहयोग, उत्पादन व्यवस्था और अन्य व्यावसायिक शर्तों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। प्रस्तावित समझौते में देश के भीतर बड़े पैमाने पर विनिर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।

    बताया जा रहा है कि प्रस्तावित परियोजना में अधिकांश निर्माण कार्य भारत में ही किए जाने की योजना है। इसके तहत स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को गति देने और आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय उद्योग को जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

    हालांकि तकनीकी स्तर पर दो प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। पहली चुनौती राफेल में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक एईएसए रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की है। इन अधिकारों के कारण भारत को रडार प्रणाली में स्वतंत्र बदलाव या नई क्षमताओं के समावेश में सीमाएं आ सकती हैं। दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण चुनौती विमान के सोर्स कोड तक पहुंच की है, जिसे फ्रांस अत्यंत संवेदनशील रणनीतिक तकनीक मानता है।

    राफेल का सोर्स कोड विमान के मिशन कंप्यूटर, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और कई महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों का आधार माना जाता है। यही कारण है कि इस तकनीक को फ्रांस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में देखता है और इसके पूर्ण हस्तांतरण को लेकर सावधानी बरत रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तकनीक साझा करने का निर्णय केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं से भी जुड़ा होता है।

    भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में अस्त्र जैसी स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, रुद्रम जैसी एंटी-रेडिएशन मिसाइलों तथा अन्य घरेलू हथियार प्रणालियों को राफेल में आसानी से एकीकृत करने की आवश्यकता होगी। यदि आवश्यक तकनीकी पहुंच उपलब्ध नहीं होती है तो प्रत्येक बड़े उन्नयन या एकीकरण के लिए मूल निर्माता पर निर्भरता बनी रह सकती है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए बातचीत आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। आने वाले दौर की वार्ताओं में तकनीकी सहयोग, उत्पादन साझेदारी और संचालन संबंधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती रहेगा। यदि इन मुद्दों पर सहमति बनती है तो यह समझौता भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई दिशा दे सकता है।

  • ऑपरेशन सिंदूर ने खोली पाकिस्तान की पोल: भारत की सटीक स्ट्राइक से उजागर हुई बड़ी रणनीतिक कमजोरी

    ऑपरेशन सिंदूर ने खोली पाकिस्तान की पोल: भारत की सटीक स्ट्राइक से उजागर हुई बड़ी रणनीतिक कमजोरी



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव और रणनीतिक क्षमता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के ऑपरेशन Operation Sindoor के दौरान भारत ने लंबी दूरी की मिसाइलों और आधुनिक लड़ाकू विमानों की मदद से पाकिस्तान के कई आतंरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे उसकी रक्षा व्यवस्था की कमजोरियां उजागर हुईं।

    इन हमलों में पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से लेकर दक्षिणी हिस्से तक कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकाने शामिल बताए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने इन कार्रवाइयों में अपनी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता का इस्तेमाल किया, यानी अपने हवाई क्षेत्र के भीतर रहते हुए ही सटीक हमले किए गए, जिससे जोखिम काफी कम रहा।

    विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान का भौगोलिक ढांचा उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है, क्योंकि देश का आकार अपेक्षाकृत संकरा होने की वजह से उसका लगभग पूरा क्षेत्र आधुनिक मिसाइलों की रेंज में आ जाता है। यही कारण है कि रणनीतिक गहराई (strategic depth) की कमी उसे लगातार चुनौती देती है।

    इस दौरान भारतीय हथियार प्रणालियों जैसे लंबी दूरी की मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता को भी प्रमुख रूप से रेखांकित किया गया, जिनमें BrahMos missile और आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क शामिल हैं, जिन्हें डीप स्ट्राइक क्षमता के लिए अहम माना जाता है।

    रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि भूगोल और तकनीक का संयोजन भी निर्णायक भूमिका निभाता है। पाकिस्तान की समुद्री और स्थल दोनों सीमाओं की खुली संरचना उसे रणनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बनाती है।

    कुल मिलाकर, यह स्थिति बताती है कि बदलते युद्ध परिदृश्य में पारंपरिक सुरक्षा अवधारणाएं कमजोर पड़ रही हैं और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाले हथियार भविष्य की सैन्य रणनीति को पूरी तरह बदल रहे हैं।

  • ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद

    ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद



    नई दिल्ली। चीन की ओर से एक बार फिर अपने लड़ाकू विमान J-10CE को लेकर नए दावे सामने आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सैन्य और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के आसपास चीनी मीडिया और कुछ आधिकारिक चैनलों ने इस फाइटर जेट से जुड़ा एक नया वीडियो और अपग्रेड की जानकारी साझा की है।

    दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने मल्टी-रोल फाइटर जेट Chengdu J-10CE में तकनीकी सुधार किए हैं, जिसमें इसके हथियार सिस्टम और कॉम्बैट क्षमता को और उन्नत बनाने की बात कही गई है। इसके साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स में लंबी दूरी की मिसाइल PL-15 का भी जिक्र किया गया है, जिसे इस विमान की ताकत के रूप में पेश किया जा रहा है।

    चीनी मीडिया ने अपने प्रसारण में यह भी दावा दोहराया है कि J-10C/CE का उपयोग हाल के संघर्षों में किया गया था और इससे दुश्मन के विमानों को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र और पुष्ट प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, और कई विशेषज्ञ इन्हें प्रचार (propaganda) का हिस्सा मानते हैं।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चीन अपने इस विमान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सीमित देशों को छोड़कर इसे बड़े स्तर पर कोई नया खरीदार नहीं मिला है। पाकिस्तान इस विमान का प्रमुख उपयोगकर्ता बताया जाता है।

    इसी बीच चीनी रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि J-10CE के नए वर्जन में कई सुधार किए जा रहे हैं ताकि इसकी मल्टी-डोमेन कॉम्बैट क्षमता और बढ़ सके, जिसमें हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्य पर हमले की क्षमता शामिल है।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल तकनीकी अपग्रेड का नहीं बल्कि वैश्विक हथियार बाजार और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां दावों और वास्तविकता के बीच अंतर को लेकर लगातार बहस जारी है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    जैसलमेर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर HAL Prachand प्रचंड में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराने वाली रही। राष्ट्रपति इससे पहले वर्ष 2023 में सुखोई Su-30MKI और 2025 में डसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं।

    यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया।

    उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।

    राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।