Tag: Raghav Chadha

  • AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल

    AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल



    नई दिल्ली। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह ED की टीम ने चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लगभग 10 घंटे लंबी पूछताछ की गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली ले जाया गया।

    ED के अनुसार यह मामला करीब 157.12 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, शेल कंपनियों और GST इनपुट क्रेडिट धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात दिखाकर अवैध तरीके से धन की हेराफेरी की और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई।

    ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और कई अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 17 अप्रैल को की गई छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

    एजेंसी का दावा है कि 157 करोड़ रुपये के घोषित एक्सपोर्ट में से बड़ी राशि UAE की दो कंपनियों के जरिए घूमाकर वापस भारत लाई गई, जिससे FEMA और GST नियमों के उल्लंघन का संदेह गहराया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED ने आगे की पूछताछ दिल्ली में करने की बात कही है।

    इधर गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का इस्तेमाल पार्टी को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की गई है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

    फिलहाल संजीव अरोड़ा ED की हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

  • राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार

    राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार


    नई दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी (AAP) से हाल ही में नाता तोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब अपनी पुरानी पार्टी और पंजाब सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। सांसद चड्ढा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे राष्ट्रपति भवन द्वारा मंजूर कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह अहम मुलाकात 5 मई को सुबह 10:40 बजे होगी। इस दौरान राघव चड्ढा के साथ तीन अन्य सांसद भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने हाल ही में AAP का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
    क्या है मुलाकात का मुख्य एजेंडा?

    समाचार एजेंसी के हवाले से लिखा है कि इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को पंजाब की भगवंत मान सरकार की कथित ‘बदले की राजनीति’ से अवगत कराना है। राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों का आरोप है कि पंजाब सरकार अपनी शक्तियों और सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग कर रही है। उनका दावा है कि जिन नेताओं ने हाल ही में AAP से इस्तीफा देकर BJP के साथ विलय किया है, पंजाब सरकार अब उन्हें जानबूझकर ‘टार्गेट’ कर रही है और उन पर अनुचित कार्रवाई कर रही है। इस मुलाकात में ये सांसद राष्ट्रपति से पंजाब सरकार की इन कथित दमनकारी नीतियों और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
    आप छोड़ भाजपा में गए राघव चड्ढा

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में राजनीतिक घमासान चरम पर है। 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत सात AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय का ऐलान किया था। इनमें छह पंजाब से चुने गए सांसद शामिल हैं। AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जबकि चड्ढा गुट ने पंजाब सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

    AAP छोड़ने वालों में राघव चड्ढा के अलावा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी तथा स्वाति मालीवाल शामिल हैं। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि AAP मूल सिद्धांतों से भटक गई है। दो-तिहाई बहुमत होने के कारण इन सांसदों का भाजपा में विलय राज्‍यसभा सभापति ने स्वीकार भी कर लिया है।
    संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा

    बता दें कि आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सूत्रों ने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

    हालांकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है।

    पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।

    दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी (आप) की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी।
  • राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    नई दिल्ली। राज्यसभा की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे सत्ता समीकरण को प्रभावित कर दिया है। सदन में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है और इसका सीधा असर राजनीतिक ताकतों के संतुलन पर पड़ा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में Raghav Chadha का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उनके राजनीतिक कदम और उससे जुड़े बदलावों के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सीधा फायदा मिला है।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों के दलगत बदलाव और विलय की प्रक्रिया के बाद सदन में सीटों का गणित बदल गया है। इस बदलाव के बाद सत्ता पक्ष की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है।

    राज्यसभा में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां बहुमत का सीधा असर कानून निर्माण और बड़े विधायी फैसलों पर पड़ता है। अब बदले हुए समीकरण के बाद सत्ता पक्ष बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच गया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बदलाव आने वाले समय में संसद की कार्यवाही और महत्वपूर्ण बिलों पर असर डाल सकते हैं। खासकर उन मुद्दों पर जहां दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, वहां अब स्थिति पहले से ज्यादा अनुकूल दिखाई दे रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जहां इसे सत्ता पक्ष की बड़ी रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे अपने लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति मान रहा है।

  • राघव चड्ढा के फैसले से AAP में असंतोष उजागर, पार्टी संरचना और नेतृत्व शैली पर उठे गंभीर सवाल..

    राघव चड्ढा के फैसले से AAP में असंतोष उजागर, पार्टी संरचना और नेतृत्व शैली पर उठे गंभीर सवाल..

    नई दिल्ली में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक बदल गया जब आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से पार्टी के सक्रिय चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा का यह कदम कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी अप्रत्याशित माना जा रहा है।

    सूत्रों और सामने आई जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के पीछे कई आंतरिक कारण माने जा रहे हैं। सबसे पहला कारण संगठन के मूल विचारों से दूरी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस उद्देश्य और सिद्धांतों के आधार पर पार्टी का गठन हुआ था, उसमें समय के साथ बदलाव आया है और यही बदलाव कई वरिष्ठ नेताओं को असहज कर रहा था। राघव चड्ढा का मानना है कि संगठन अपने शुरुआती लक्ष्य से भटकता नजर आ रहा था, जिससे लंबे समय से जुड़े नेताओं में असंतोष बढ़ता गया।

    दूसरे कारण के रूप में पार्टी संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर असंतोष सामने आया है। कई नेताओं का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की भूमिका को धीरे धीरे कम किया गया, जिससे संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ। इससे पार्टी के भीतर एक अलग तरह की असहजता पैदा होने लगी थी, जो समय के साथ और गहरी होती चली गई।

    तीसरा कारण नेतृत्व शैली और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव बताया जा रहा है। संगठन के भीतर हाल के वर्षों में लिए गए कई निर्णयों को लेकर असहमति बढ़ी और कई नेताओं को यह महसूस होने लगा कि उनकी राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से पार्टी के भीतर संवाद की कमी और दूरी बढ़ने लगी।

    चौथा कारण व्यक्तिगत राजनीतिक दिशा से जुड़ा माना जा रहा है। युवा नेतृत्व के तौर पर राघव चड्ढा को लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनके सामने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प और अवसर भी उभर रहे थे, जिसने उनके निर्णय को प्रभावित किया।

    पांचवां कारण पार्टी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान और अलगाव की स्थिति को बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से यह संकेत मिल रहे थे कि संगठन में एकजुटता की कमी बढ़ रही है और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि कई नेता धीरे धीरे अपने रास्ते अलग करने की दिशा में बढ़ने लगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में गहन चर्चा को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग इसे संगठनात्मक पुनर्गठन का परिणाम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे नेतृत्व और कार्यशैली में बदलाव की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय का राजनीतिक संतुलन और पार्टी की रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

  • राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें

    राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच चल रहे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें उनके अगले कदम पर लगी हैं। हाल ही में चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक रील ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है।

    सोशल मीडिया पर की रील शेयर


    चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक रील शेयर की जिसे seedhathok नाम के यूजर रिहान ने बनाया था। रील में सुझाव दिया गया कि चड्ढा को अपनी खुद की पार्टी बनानी चाहिए जिससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। वीडियो में सीधे चड्ढा को संबोधित करते हुए कहा गया कि जेन-जी पार्टी या कोई अन्य उपयुक्त नाम से नई पार्टी शुरू करना युवाओं का समर्थन पाने का सही तरीका होगा।

    दूसरी पार्टी में शामिल होने का खतरा

    वीडियो में यह भी कहा गया कि अगर चड्ढा किसी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें वर्तमान समर्थन नहीं मिलेगा और जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि चड्ढा ने रील शेयर की लेकिन अभी तक उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की कि वे क्या कदम उठाएंगे।

    AAP ने उठाए कठोर कदम
    करीब एक हफ्ते पहले AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। इसके साथ ही उन्हें संसद में पार्टी के कोटे से बोलने की अनुमति भी नहीं मिली।

    पार्टी के आरोपों की लंबी सूची

    AAP ने चड्ढा पर कई आरोप लगाए हैं:- बीजेपी के प्रति नरम रुख: पार्टी का कहना है कि चड्ढा ने संसद में पार्टी का समय हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत जैसे मामूली मुद्दों के लिए इस्तेमाल किया।
    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग: चड्ढा ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
    अतिशी के सवाल: AAP नेता अतिशी ने चड्ढा से पूछा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी या लोकतंत्र पर हो रहे सवालों पर बोलने में क्यों डरते हैं।
    केजरीवाल की गिरफ्तारी पर गैरमौजूदगी: ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

    चड्ढा का जवाब और किताब के जरिए संदेश

    चड्ढा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उन्हें चुप कर रही है। उन्होंने बताया कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिलता है वे जनता के मुद्दों को उठाते हैं। साथ ही सोमवार को उन्होंने अमेरिकी लेखक रॉबर्ट ग्रीन की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा किसी ने मुझे इस हफ्ते एक किताब गिफ्ट की मैंने चैप्टर 1 पलटा नेवर आउटशाइन द मास्टर’। कुछ किताबें उसी समय पर आती हैं जब उन्हें आना होता है।

  • क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    नई दिल्ली। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

    इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा

    दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

    क्या बीजेपी में शामिल होंगे?

    इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

    क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट?

    राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है।

    कब जा सकती है सदस्यता?

    संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है—

    यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे।
    यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे।

    अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं।

    पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

    2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था।

    अंतिम फैसला किसके पास?

    किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है।

    सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा

    सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है।
    कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।

  • राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले

    राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ यानी जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो मतदाताओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए।

    शून्यकाल के दौरान बोलते हुए चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाता को चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार है, उसी तरह अगर नेता काम नहीं करता तो उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ मतदाताओं को सशक्त बनाएगी और नेताओं को जवाबदेह बनाएगी।”

    ‘राइट टू रिकॉल’ क्या है?
    राघव चड्ढा ने इसे एक ऐसी प्रक्रिया बताया है जिसमें वोटर किसी चुने हुए नेता को उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार रखते हैं। आसान शब्दों में, अगर जनता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं है, तो वह उसे जल्दी हटाने का विकल्प रख सकती है।

    राष्ट्रपति और जज हैं हटाए जा सकते हैं, नेताओं को क्यों नहीं?
    चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में पहले ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए महाभियोग की व्यवस्था है। सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। ऐसे में निर्वाचित नेताओं के लिए भी सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के जरिए हटाने की सुविधा होना चाहिए।

    दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपाय
    सांसद ने कहा कि ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत करेगा, इसे नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 35-40% मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी हों। नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके। इस तरह काम करने वाले नेताओं को पार्टी टिकट देंगी और लोकतंत्र मजबूत होगा।

    किन देशों में लागू है?
    राघव चड्ढा के अनुसार, दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में यह व्यवस्था मौजूद है। उदाहरण- अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान। इसके अलावा भारत में यह व्यवस्था कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में लागू है।

  • राघव चड्ढा बने Blinkit डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स की मेहनत और हक़ के लिए किया असरदार प्रदर्शन

    राघव चड्ढा बने Blinkit डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स की मेहनत और हक़ के लिए किया असरदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में हैं। वजह है उनका एक वीडियो, जिसमें वह Blinkit के डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म पहनकर स्कूटी से सामान डिलीवर करते नजर आ रहे हैं। एक सांसद का इस तरह सड़कों पर उतरकर डिलीवरी करना लोगों को चौंका रहा है और यही वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

    दरअसल, राघव चड्ढा ने यह कदम किसी ब्रांड प्रमोशन के लिए नहीं, बल्कि एक खास सामाजिक संदेश देने के लिए उठाया। उन्होंने खुद Blinkit डिलीवरी पार्टनर की तरह तैयार होकर स्कूटी चलाई और ग्राहकों तक सामान पहुंचाया, ताकि गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी वर्कर्स की मेहनत, संघर्ष और चुनौतियों को लोग करीब से समझ सकें।

    https://x.com/raghav_chadha/status/2010585064737001647?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2010585064737001647%7Ctwgr%5Ee049355dcf70984a5d0e15354faecd71da5e61cc%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.aajtak.in%2Ftrending%2Fstory%2Fraghav-chadha-wears-blinkit-delivery-boy-tshirt-gig-workers-viral-rttw-dskc-2436928-2026-01-12

    राघव चड्ढा का कहना है कि आज क्विक डिलीवरी ऐप्स के दौर में डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का भारी दबाव होता है। तेज धूप, बारिश, ठंड और ट्रैफिक के बीच ये लोग समय पर डिलीवरी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कम कमाई, ज्यादा तनाव और सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। 10 मिनट की डिलीवरी के पीछे किसी इंसान की थकान और जोखिम छिपा होता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    Blinkit डिलीवरी बॉय की तरह सड़कों पर उतरना राघव चड्ढा का एक प्रतीकात्मक कदम था।

    इसके जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि डिलीवरी पार्टनर सिर्फ किसी ऐप का हिस्सा नहीं, बल्कि मेहनतकश लोग हैं, जिनके लिए बेहतर नियम, बीमा, सुरक्षा और सम्मान बेहद जरूरी है। उनका यह अंदाज आम नेताओं से अलग नजर आया और इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच पाया।

    सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने राघव चड्ढा की तारीफ करते हुए कहा कि नेताओं को जमीनी हकीकत समझने के लिए ऐसे कदम उठाने चाहिए।

    कुछ लोगों ने इसे गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों की आवाज बताने वाला मजबूत सोशल मैसेज कहा। वहीं, कुछ यूजर्स ने सवाल भी उठाए कि क्या यह पूरी तरह नियमों के तहत किया गया था या सिर्फ प्रतीकात्मक वीडियो था।

    कुल मिलाकर, Blinkit डिलीवरी बॉय बनकर सामान पहुंचाना राघव चड्ढा का एक अलग लेकिन असरदार तरीका रहा, जिसने गिग वर्कर्स की मेहनत और उनकी समस्याओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।