चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
चड्ढा बोले- यह कोई लिपिकीय गलती नहीं
मोहाली से पंजीकृत अपने वोटर आईडी का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ के तौर पर किसने चिह्नित किया और इसकी पुष्टि किसने की, इन सभी प्रक्रियाओं में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक प्रक्रिया में राज्य के कर्मचारी और अधिकारी जुड़े हैं। चड्ढा के मुताबिक चुनावी ड्यूटी के बाद अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का नियंत्रण रहता है और इसी प्रशासनिक दबाव के जरिए उनके खिलाफ राजनीतिक बदला लिया जा रहा है।
‘AAP छोड़ने वाले नेताओं को बनाया जा रहा निशाना’
चड्ढा ने आरोप लगाया कि उनके और अन्य नेताओं के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से पार्टी नेतृत्व बौखलाया हुआ है। उनका कहना है कि जो नेता चुप रहने को तैयार नहीं हैं, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे पूर्व आप सांसदों और नेताओं को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है।
SIR की गाइडलाइन का भी दिया हवाला
राघव चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए ‘संरक्षित सूची’ का प्रावधान है। उनके मुताबिक इसमें सांसदों, विधायकों और न्यायाधीशों जैसे जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।
चड्ढा का दावा है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का नाम डेटाबेस में फ्लैग भी होता है, तब भी उसे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल रखा जाना चाहिए, ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि में जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकें। उनका आरोप है कि वर्तमान सांसद होने के बावजूद उनके मामले में इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया।
अंतिम सूची अक्टूबर में होगी जारी
चड्ढा ने कहा कि अभी यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है और अंतिम सूची अक्टूबर 2026 में जारी होगी। उन्होंने बताया कि SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के जरिए वह अपना नाम दोबारा सही कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
SIR के तहत पंजाब में अब तक 20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह पुनरीक्षण से पहले राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 9.7% है। चड्ढा भी हटाए गए नामों में शामिल हैं।
AAP का पलटवार- SIR में राज्य सरकार का कोई दखल नहीं
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग यानी ECI कराता है। पार्टी के मुताबिक मतदाता सूची में किसका नाम जोड़ा या हटाया जाएगा, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
AAP ने दावा किया कि चड्ढा दिल्ली में रह रहे हैं और पंजाब में नहीं। ऐसे में पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखना या उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कराना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी। पार्टी ने कहा कि इसके लिए पंजाब सरकार या AAP को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
AAP का दावा- दिल्ली में बैकडेट से वोट बनवाने की कोशिश
AAP ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंद्र नगर से बैकडेट प्रक्रिया के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यदि किसी तरह की गैरकानूनी या बैकडेट एंट्री कराई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। AAP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी बैकडेट एंट्री में मदद की है तो पार्टी मामले को उसके अंजाम तक पहुंचाएगी।
2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे, अप्रैल 2026 में BJP में शामिल हुए
राघव चड्ढा वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली।
चुनाव आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अभी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे 12 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।









