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  • रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार

    रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की महारैली आयोजित की जा रही है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में 19 विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा बताते हुए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई करार दिया है।

    रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। इसमें प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इसके बाद सभी प्रमुख नेताओं के मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च करने की योजना बनाई गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोगों से इस मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग कनॉट प्लेस पहुंचकर उनके साथ पैदल चलें या सीधे रामलीला मैदान आएं, लेकिन कार्यक्रम में जरूर शामिल हों।

    रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा विपक्षी नेताओं की ओर से किया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों के आने का है। मंच, कुर्सियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण मैदान में 30 से 40 हजार लोगों के बैठने की क्षमता रहने की बात सामने आई है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर निगरानी की व्यवस्था की है।

    कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं ने रैली को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया। सांसद सुखदेव सिंह भगत ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और उनके आने से होटल, दुकान तथा खानपान से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बताया कि निर्धारित समय से पहले ही सुबह 9 बजे से कार्यकर्ताओं का मैदान में पहुंचना शुरू हो गया था। प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने भी तैयारियों का जायजा लिया।

    टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति के हित के लिए नहीं, बल्कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को जनता के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर नेताओं को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। सीपीआई सांसद पी. संतोष ने भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया।

    दूसरी ओर, भाजपा और एनडीए नेताओं ने रैली के आयोजन तथा विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। भाजपा की दिल्ली इकाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर जारी कर INDIA ब्लॉक की रैली को निशाना बनाया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष की आदत बन गई है। केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी के नेतृत्व और रैली पर टिप्पणी करते हुए इसे लोकतंत्र तथा संविधान का मजाक बताया।

    बिहार में जेडीयू महासचिव श्याम रजक ने 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को खोखला बताया। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी रैली के मुद्दों तथा समय पर सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष पर व्यापारियों को परेशान करने और लोगों को रैली में लाने के लिए पैसे देने का आरोप लगाया।

    रैली के समय को लेकर व्यापारियों की चिंताओं पर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई। शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने कहा कि त्योहारों के दौरान राजनीतिक आयोजनों से कारोबार प्रभावित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी आरोप लगाया कि रैली से व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इस तरह SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर आयोजित महारैली में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के साथ भाजपा और एनडीए के विरोधी बयान भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे।

  • ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक

    ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक


    नई दिल्ली ।बिहार में इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम और रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने विपक्षी गठबंधन के इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए इसे निराधार और तर्कहीन आंदोलन बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतंत्र के नाम पर ऐसा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार ने भी विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और उसकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

    गुरु प्रकाश ने कहा कि इंडिया गठबंधन का प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम कोई मॉक पार्लियामेंट नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का मजाक है। उनके मुताबिक, विपक्ष झूठ और निराधार दावों के आधार पर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है और संविधान पीठ भी संबंधित विषय को संवैधानिक बता चुकी है। ऐसे में इस मुद्दे पर आंदोलन करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बनता।

    भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल की कमी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में न तो समन्वय दिखाई देता है और न ही सहयोग की भावना है। उनके अनुसार, प्रस्तावित रैली राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन की हठधर्मिता का परिणाम है। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन के नेताओं के बीच एकराय का अभाव नजर आता है।

    रैली की प्रस्तावित तारीख एक नवंबर को लेकर भी गुरु प्रकाश ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तारीख सिख समुदाय के इतिहास से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक, वर्ष 1984 में दिल्ली में सिख समुदाय की महिलाओं और अन्य लोगों के साथ हुई घटनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ऐतिहासिक संवेदनशीलता के बावजूद इसी दिन कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर देना विपक्ष की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

    इंडिया गठबंधन की रैली को यूट्यूबर ध्रुव राठी का समर्थन मिलने के सवाल पर भी गुरु प्रकाश ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ध्रुव राठी, नेहा बोरा और अन्य लोगों की विचारधारा को लेकर सवाल उठाए। गुरु प्रकाश ने कहा कि जनता को यह समझना चाहिए कि इन लोगों की वैचारिक पृष्ठभूमि क्या है। उन्होंने नेहा बोरा के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वह विपक्षी गठबंधन की रैली के मंच पर दिखाई देती हैं, तो इससे गठबंधन की संवैधानिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठेंगे।

    गुरु प्रकाश ने शरजील इमाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह भारतीय संविधान को फासीवादी दस्तावेज बताते रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के समर्थन को लेकर इंडिया गठबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के प्रति विपक्षी गठबंधन की निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    दूसरी ओर, जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने भी इंडिया गठबंधन की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावों का उल्लेख करते हुए पूछा कि वहां विपक्षी गठबंधन की एकजुटता कहां दिखाई दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन की वास्तविक राजनीतिक स्थिति उसके अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और आपसी तालमेल से स्पष्ट होती है।

    नीरज कुमार ने संसद के स्थान पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को संसद में बैठकर काम करने के लिए चुनती है। ऐसे में विपक्ष को संसद के बाहर समानांतर आयोजन करने के बजाय अपनी मांगों को सदन में उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री विपक्ष की सहमति से संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में विपक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी वास्तविक मांग क्या है।

    नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर देश में राजनीतिक अराजकता का माहौल तैयार करना चाहता है। इस दौरान उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जेडीयू के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से सरदार पटेल के सम्मान में प्रतियोगिता आयोजित की गई है। उन्होंने देशी रियासतों के एकीकरण, प्रशासनिक ढांचे के निर्माण और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने में पटेल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

  • राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को फटकार लगाई। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या याचिका दाखिल करने का उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता और दलील में पर्याप्त दम भी नहीं है।

    सुनवाई के दौरान वकील ने राहुल गांधी के एक हालिया बयान का हवाला दिया। उनका दावा था कि राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसी बयान के आधार पर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की।

    इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल से सलाह ली गई है। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को उठाने का उद्देश्य मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि वह मामले की सुनवाई की मांग के पीछे प्रस्तुत आधार की पर्याप्तता को लेकर संतुष्ट नहीं थी।

    यह विवाद राहुल गांधी की संपत्ति की जांच से संबंधित उस मामले से जुड़ा है, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मई 2026 में सीबीआई और ईडी को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग भी की थी।

    अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता, सीबीआई और ईडी से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश भी दिया था। इस रोक के कारण हाई कोर्ट के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई पर अंतरिम स्थिति बनी हुई है।

    मामले की शुरुआत कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। उन्होंने राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर कई आरोप लगाए थे। शिकायत में लगाए गए आरोपों और संपत्ति की जांच से संबंधित मांगों के आधार पर यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा।

    राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। अब सुनवाई के दौरान याचिका को सूचीबद्ध कराने की मांग और उसके समर्थन में दिए गए तर्क चर्चा में रहे।

    संपत्ति से जुड़े आरोपों के मामले में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

  • सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को राहत, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हुए बरी

    सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को राहत, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हुए बरी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को मानहानि के एक पुराने मामले में बरी कर दिया है। यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़ा था। अदालत के फैसले से राहुल गांधी को कानूनी राहत मिली है। फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई। कार्यकर्ताओं ने ढोल बजाकर और नाचकर फैसले का स्वागत किया।

    यह मामला वर्ष 2018 में बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी की ओर से दिए गए कथित बयान से संबंधित था। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी विजय मिश्रा ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय विजय मिश्रा भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष थे। शिकायतकर्ता का कहना था कि राहुल गांधी के बयान से उन्हें ठेस पहुंची थी। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को अदालत में पेश होने के लिए भी कहा गया था। सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 16 दिसंबर 2023 को उन्हें पेश होने का निर्देश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी अदालत पहुंचे। फरवरी 2024 में अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। उस समय राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए खुद को निर्दोष कहा था। इसके बाद मामले में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ती रही।

    सुनवाई के दौरान शिकायत से जुड़े पक्षों की गवाही और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद मामले में अंतिम बहस हुई। राहुल गांधी के वकील ने अदालत में दलील दी कि शिकायतकर्ता पक्ष उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रहा। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर राहुल गांधी को राहत दिए जाने की मांग की।

    अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राहुल गांधी को बरी कर दिया। इस फैसले के साथ अमित शाह पर कथित टिप्पणी को लेकर वर्ष 2018 में शुरू हुई मानहानि की कानूनी कार्यवाही में उन्हें राहत मिली। शिकायतकर्ता पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका, यह बात राहुल गांधी के वकील ने अदालत में अपनी दलील के रूप में रखी थी।

    फैसले की जानकारी सामने आने के बाद अदालत के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्साह जाहिर किया। उन्होंने ढोल बजाए और नाचकर अपनी खुशी व्यक्त की। राहुल गांधी को मिली राहत के बाद कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल दिखाई दिया।

    यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ी शिकायतों और उनसे संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के संदर्भ में भी चर्चा में रहा। वर्ष 2018 में दर्ज शिकायत के बाद मामले की सुनवाई कई चरणों से गुजरी। दिसंबर 2023 में अदालत में पेशी का निर्देश, फरवरी 2024 में जमानत और उसके बाद जारी सुनवाई इस प्रक्रिया के प्रमुख पड़ाव रहे।

    सुल्तानपुर की विशेष अदालत का ताजा फैसला राहुल गांधी के लिए इस मानहानि मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है। अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहत और खुशी जताई, जबकि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं हो सके।

  • पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ करार दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेता को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश करती है, लेकिन इसके लिए देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटती। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका, संसद की कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि जब दुनिया नई वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, उस समय कुछ लोग भारत में अव्यवस्था की स्थिति पैदा करने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सामने एक मजबूत और स्थिर भारत की तस्वीर प्रस्तुत की जानी चाहिए, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं और बाहरी हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

    राहुल गांधी पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक साल में श्रीहरिकोटा से जितने रॉकेट प्रक्षेपित नहीं होते, उससे अधिक बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती है। उनके इस बयान को राहुल गांधी को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने के प्रयासों पर कटाक्ष के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी आखिर कब तक अपने नेता को आगे बढ़ाने के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।

    प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को आशंका है कि यदि संसद में दूसरे नेताओं को पर्याप्त अवसर मिला, तो वे भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस अपने राजनीतिक मंच पर केवल एक नेता को प्रमुखता देना चाहती है। उन्होंने इसे विपक्ष के युवा सांसदों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से पार्टी के भीतर अन्य नेताओं को अपनी क्षमता दिखाने के अवसर सीमित हो सकते हैं।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को ‘परजीवी’ भी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए लगातार अपने नेतृत्व को केंद्र में रखती है। हालांकि, ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थीं और इनके जरिए उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री के बयान के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की तुलना ऐसी मछली से की, जो सत्ता से बाहर रहने पर पानी के बिना तड़पती है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस का रवैया लूट-खसोट और समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाला रहा है। उन्होंने पार्टी पर भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने का आरोप भी लगाया।

    त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक रिकॉर्ड उपलब्धियों से जुड़ा है, जबकि राहुल गांधी का रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए समस्याएं पैदा करने वाला रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ देश के संवैधानिक ढांचे को भी जोखिम में डाल दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को देश और उनकी अपनी पार्टी, दोनों के लिए पहेली बताया।

    प्रधानमंत्री मोदी और सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणियों से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री का ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाला तंज और विदेशों में भारत की छवि को लेकर लगाए गए आरोप इस राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, इन बयानों के जवाब में कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

  • राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश के जरिए पिछले एक महीने के दौरान अपने दौरों, मुलाकातों और उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग से लेकर छात्रों की समस्याओं और बालाघाट के आदिवासी परिवारों की परेशानियों पर अपनी बात रखी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, संस्थाओं की जवाबदेही और निष्पक्ष परीक्षाओं से जुड़े सवाल भी उठाए।

    राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां युवाओं के साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। छात्रों ने सत्य निकेतन की घटना, शिक्षा बजट में कटौती, छात्रावासों की कमी और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे सामने रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    अपने संदेश में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि इनके नेतृत्व में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों का संस्थानों पर प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि व्यवस्था को सवाल पूछने वाले छात्रों के बजाय अंधसमर्थक चाहिए। ये टिप्पणियां राहुल गांधी के राजनीतिक आरोपों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं का हिस्सा थीं।

    राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी छात्रों से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों की खराब स्थिति और वहां लागू कड़े नियमों को लेकर उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। उनके अनुसार, इसके बाद छात्रावास में रहने के लिए निर्धारित आयु सीमा से संबंधित नियम वापस ले लिया गया। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के प्रति समर्थन भी जताया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग की। यह मुद्दा प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े कानूनी तथा प्रशासनिक फैसलों के बीच महत्वपूर्ण बना हुआ है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में इस मांग को प्रमुखता से उठाया और राज्य सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

    उन्होंने बालाघाट के दौरे के दौरान आदिवासी परिवारों से हुई मुलाकात को भी याद किया। राहुल गांधी ने उन परिवारों की पीड़ा का जिक्र किया, जिन्होंने कुपोषण और गंभीर बीमारियों के कारण अपने छोटे बच्चों को खो दिया था। उन्होंने कहा कि कुछ दुख इतने गहरे होते हैं कि उन्हें शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक, इस दौरे का उद्देश्य पीड़ित परिवारों की बातें सुनना और उनके दुख में सहभागी बनना था।

    राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाते हुए दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 लोगों में से 728 लोगों का मतदान का अधिकार छिन गया। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े सवालों के रूप में पेश किया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की।

    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, बैठक में आम नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा पर चर्चा हुई। इसके अलावा उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में दिशा समिति की बैठक और विकास कार्यों की समीक्षा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात तथा दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की जानकारी भी साझा की।

  • बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान

    बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस हादसे से प्रभावित परिवारों के साथ सरकार खड़ी है। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस घटना में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    चिराग पासवान ने कहा कि पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा रहना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम रद्द करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कदम सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, ऐसी दुखद घटना के समय प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने और उनकी पीड़ा को समझने की जरूरत है।

    इस दौरान चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद राहुल गांधी की गोवा में बड़ी रैली प्रस्तावित है। चिराग ने इस स्थिति का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें भी इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यह टिप्पणी उन्होंने बंगाल हादसे के संदर्भ में की।

    चिराग पासवान ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने से जुड़े सवाल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी व्यक्ति का भारत आकर विरोध प्रदर्शन करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, सरकार ने इस मामले में उचित कदम उठाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं और ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

    बिहार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के उस बयान पर भी चिराग पासवान ने आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि हत्याएं होती रहती हैं। चिराग ने कहा कि किसी भी घटना का होना शर्म की बात है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को लेकर इस प्रकार की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि वे ऐसी घटनाओं को सामान्य बताने वाले दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं।

    बिहार की राजनीति से जुड़े सवालों पर भी चिराग पासवान ने अपनी बात रखी। राघोपुर में हुए नाव हादसे को लेकर तेजस्वी यादव की ओर से सरकार पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में चिराग ने कहा कि वह जिम्मेदारी लेते हैं, क्योंकि वे उस क्षेत्र के सांसद हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े मामले पर जवाबदेही की बात कही।

    विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के विधायक अनंत सिंह द्वारा अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार का विरोध किए जाने के सवाल पर चिराग ने कहा कि वह किसी दूसरी पार्टी के आंतरिक मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने चुनाव परिणाम को लेकर विश्वास जताया। उनका कहना था कि जिस तरह विधानसभा चुनाव में परिणाम सामने आए थे, उसी तर्ज पर विधान परिषद चुनाव में भी नतीजे आएंगे और उनका गठबंधन सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा।

    पश्चिम बंगाल की भगदड़ से लेकर बिहार के हादसों और राजनीतिक घटनाक्रम तक, चिराग पासवान ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके बयानों में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना, सार्वजनिक घटनाओं पर जवाबदेही और राजनीतिक विरोधियों की टिप्पणियों पर सवाल प्रमुख रहे।

  • मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

    राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

    विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
    इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

    मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने और दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है। इस दौरान चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की बात कही गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ न्यायपालिका तक पहुंचाने की तैयारी में है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से मिलने का फैसला किया है। इसके लिए विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। इस बैठक में चुनाव आयोग के हालिया फैसलों, प्रशासनिक पाबंदियों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को सामने रखने की योजना है। गठबंधन का उद्देश्य इन मुद्दों को न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करना है। हालांकि, प्रस्तावित मुलाकात के दौरान किन बिंदुओं पर चर्चा होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    विपक्षी गठबंधन ने सोमवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया जाएगा। विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संविधान की रक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन में विभिन्न विपक्षी नेता और युवा भी शामिल हो सकते हैं। राजधानी में प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

    इससे पहले INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ संसद भवन से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला था। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेता शामिल हुए थे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर धरना दिया। विपक्ष ने इस दौरान चुनावी व्यवस्था से संबंधित अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

    इसके बाद विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। अब मुख्य न्यायाधीश से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक अभियान के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इस विरोध का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।

    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल किसी एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा है कि प्रशासनिक दबाव या पुलिस कार्रवाई से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात और मार्च के जरिए INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर अपना विरोध आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता देश में अशांति और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा कि ‘अर्बन नक्सल’ सोच रखने वाले लोगों के इरादे सफल नहीं होंगे। उन्होंने इस पूरे मामले को देश की शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए विपक्ष की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।

    नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश को भय के माहौल से बाहर निकालने और आतंकवाद तथा नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रयास किए गए हैं। उनके मुताबिक, इन प्रयासों के बावजूद कुछ लोग देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं के बयानों और उनकी भाषा पर भी सवाल उठाए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं की भाषा पर देश के युवा नजर रख रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई।

    भाजपा अध्यक्ष ने देश के 140 करोड़ नागरिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग शांति और स्थिरता चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के युवा अपनी संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े हुए हैं। नितिन नवीन के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर इन संस्थाओं और पदों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    नितिन नवीन ने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में दिए गए विवरण का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष विरोध कर रहा है। इस राजनीतिक विवाद में भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन और उसके रुख को देश की स्थिरता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

    विपक्ष की ओर से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की भाषा और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके रवैये पर सवाल उठाए। इस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद ने भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।