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  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संसद किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश की जनता की संस्था है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से सदन में सार्थक बहस और संवाद के जरिए मुद्दे उठाने की अपील की।

    रिजिजू ने संसद की कार्यवाही बाधित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नकाल को रोकना, मंत्रियों की बात नहीं सुनना और चर्चा के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। उनका कहना था कि एक तरफ विपक्ष सदन में चर्चा नहीं होने की शिकायत करता है और दूसरी तरफ जब विस्तृत बहस का अवसर दिया जाता है तो उसे स्वीकार नहीं करता।

    संसदीय कार्य मंत्री ने मॉनसून सत्र की कार्यवाही के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक लोकसभा निर्धारित समय का करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा लगभग 33 प्रतिशत ही चल सकी। बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। रिजिजू ने कहा कि संसद में जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा होना जरूरी है और लगातार हंगामे से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

    रिजिजू ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने और सवालों के जवाब देने का प्रस्ताव रखा था। रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब चर्चा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा हो तो उसे अस्वीकार करने के बाद संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होने की शिकायत करना उचित नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की संसदीय उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत रही। रिजिजू ने कहा कि संसद में लंबी बहस के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने वाले नेता को सदन में पर्याप्त समय नहीं मिलने की शिकायत नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों का उल्लेख करते हुए भी उन पर निशाना साधा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विदेशों में भारतीय लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाने के बजाय संसद के भीतर जवाबदेही और चर्चा की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का रास्ता हंगामा नहीं, बल्कि संवाद और तथ्य आधारित बहस है।

    रिजिजू ने राहुल गांधी के हालिया पितृसत्ता संबंधी बयान को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्तात्मक सोच पर बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच की आलोचना की थी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने पूछा कि कांग्रेस और राहुल गांधी हिंदू परंपराओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक महिलाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि समाज को बांटने के बजाय बेटियों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। दोनों नेताओं के बयानों से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..

    राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..


    नई दिल्ली । 
    वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक रुख, उनके बयानों और विदेश दौरों को लेकर कई सवाल उठाए और कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का सबसे प्रमुख चेहरा राहुल गांधी हैं, लेकिन उनके बयानों से युवाओं को स्पष्ट दिशा मिलने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जगह उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं।

    वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार देश की आलोचना करता है, उससे वंदे मातरम् और भारत माता के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे पर निशाना साधने की कोशिश की।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो वहां दिए जाने वाले उनके बयानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विदेशों में दिए गए कुछ बयानों से भारत के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है और इससे देश की छवि प्रभावित होने का आरोप लगाया।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की मानसिक स्थिति और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ऐसा है कि या तो वह बहुत फ्रस्ट्रेट हैं या मानसिक तनाव में हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक स्तर पर पहले भी विवाद का विषय रहा है। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी को पॉलिटिकल जोकर तक करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा है। गिरिराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है।

    वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसी वजह से इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    गिरिराज सिंह के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह विवाद केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि राहुल गांधी की राजनीति, उनके बयानों और देश से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

  • अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में अपनी गंभीर और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले राहुल बोस का व्यक्तित्व केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। अभिनेता, फिल्म निर्माता, अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी के रूप में उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर एक बहुआयामी पहचान बनाई है। 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे राहुल बोस ने अपने जीवन की दिशा केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रखी, बल्कि खेल और सामाजिक सरोकारों को भी बराबर महत्व दिया।

    राहुल बोस की शुरुआती शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। बचपन में उनकी मां ने उन्हें बॉक्सिंग और रग्बी जैसे खेलों से परिचित कराया। इसी दौरान उन्होंने क्रिकेट का प्रशिक्षण भी लिया और बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। हालांकि आगे चलकर रग्बी उनका सबसे बड़ा जुनून बन गया और उन्होंने इसी खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया।

    वर्ष 1998 से 2009 तक राहुल बोस भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का हिस्सा रहे और लगभग 11 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने अपने फिल्मी काम और खेल के बीच संतुलन बनाए रखा। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी रग्बी प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अनुसार तय की, जिससे दोनों क्षेत्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

    रग्बी से उनका जुड़ाव खिलाड़ी के रूप में ही समाप्त नहीं हुआ। बाद के वर्षों में उन्होंने खेल के विकास के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाली। भारतीय महिला रग्बी टीम की उपलब्धियों और देश में खेल को नई पहचान मिलने के दौर में उन्होंने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इस भूमिका में उन्होंने खेल के विस्तार और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय योगदान दिया।

    अभिनय की दुनिया में राहुल बोस ने बचपन में स्कूल के एक नाटक से शुरुआत की थी। बाद में विज्ञापन क्षेत्र में कॉपीराइटर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। पहली ही प्रमुख फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने अभिनय को पूर्णकालिक पेशा बना लिया। उन्होंने हमेशा ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता दी जिनमें मजबूत कहानी, सामाजिक संदेश और सशक्त अभिनय की गुंजाइश हो। यही कारण रहा कि उन्होंने समानांतर सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों की सराहना हासिल की।

    राहुल बोस ने निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी पहली निर्देशित फिल्म को सीमित संसाधनों के बावजूद पूरा किया गया और बाद में उन्होंने एक ऐसी प्रेरणादायक जीवनी पर आधारित फिल्म बनाई, जिसमें कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारतीय बालिका की उपलब्धि को पर्दे पर प्रस्तुत किया गया। उनके निर्देशन में भी सामाजिक संवेदनशीलता और प्रेरक विषयों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

    सिनेमा और खेल के साथ-साथ समाज सेवा राहुल बोस के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान राहत कार्यों में भाग लेने के बाद उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए स्थायी रूप से काम करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक सामाजिक संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से दूरदराज और संसाधनों से वंचित क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हजारों शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने जैसे अभियान भी संचालित किए गए हैं। अभिनय, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाकर राहुल बोस ने यह साबित किया है कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने से भी मापी जाती है।

  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई


    नई दिल्ली।
    पप्पू यादव (Pappu Yadav) के समर्थन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी उतर पड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political vendetta) की भावना से की गई है। उन्होंने कहा कि NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है और अब डराया धमकाया जा रहा है। शुक्रवार को देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।

    राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पटना में नीट की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो वही पुराना भाजपा-राजग मॉडल सामने आ गया कि मामले को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।

    राहुल ने कहा, ‘इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही मांगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।’

    उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक भयावह साजिश एवं खतरनाक चलन की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आंखें मूंदकर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी बोलीं- अत्याचार के साथ खड़ी बीजेपी

    पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव के प्रति एकजुटता प्रकट की और आरोप लगाया कि भाजपा एवं उसके सहयोगी दल अत्याचार के साथ खड़े हुए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है।’ प्रियंका ने कहा, ‘प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?’

    उन्होंने कहा कि हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है कि वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।

  • राजनीति का सुखद पल… शरद पवार के घर डिनर में राहुल, अजित, अडानी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी हुए शामिल

    राजनीति का सुखद पल… शरद पवार के घर डिनर में राहुल, अजित, अडानी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी हुए शामिल


    नई दिल्ली।
    राजधानी दिल्ली (Capital Delhi) में राजनीतिक गलियारों की शाम बुधवार बेहद ख़ास रही. एनसीपी–एसपी प्रमुख शरद पवार (NCP-SP chief Sharad Pawar) के आवास पर दलगत सीमाओं से परे कई नेता डिनर के लिए जुटे. इस डिनर में देश के उद्योगपति भी नज़र आए. यह मुलाकात उनके 85वें जन्मदिन (85th Birthday) से ठीक एक दिन पहले हुई और माहौल पूरी तरह निजी रहा.

    शरद पवार एक दिग्गज नेता हैं, जो लंबे समय से सियासत करते आ रहे हैं और उनके डिनर आयोजन में मौजूद नेताओं की लिस्ट ने इसे और ख़ास बना दिया. इस डिनर आयोजन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हुए. सबसे ज्यादा ध्यान इस आयोजन में उद्योगपति गौतम अडानी की मौजूदगी ने खींचा, क्योंकि राजनीति और व्यापार के ऐसे मेलजोल के मौके कम देखने को मिलते हैं.

    इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी शामिल हुए. प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद यह पहला मौका होगा जब मुख्यमंत्री रेड्डी किसी बड़े राजनीतिक आयोजन में दिखे। एक और दिलचस्प दृश्य देखने मिला कि शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार भी इस डिनर में शामिल दिखाई दिए. अजित पवार के इस आयोजन में शामिल होना दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों के व्यक्तिगत रिश्ते राजनीति की सीमाओं से परे चलते हैं।

    शरद पवार ने छह दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहकर लगभग हर दल के नेताओं से मजबूत संबंध बनाए हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने न केवल एडमिनिस्ट्रेटिव क्षमता दिखाई, बल्कि अपनी राजनीतिक समझ के कारण सम्मान भी हासिल किया।