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  • भारतीय रेलवे में तकनीकी सुधारों से सुरक्षा और दक्षता के नए मानक स्थापित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    भारतीय रेलवे में तकनीकी सुधारों से सुरक्षा और दक्षता के नए मानक स्थापित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय रेलवे लगातार सुधार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपने संचालन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर सुरक्षा, संचालन और यात्री सुविधा पर दिखाई दे रहा है।

    प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में रेलवे क्षेत्र में हुए सुधारों और नीतिगत बदलावों पर प्रकाश डाला, जिनके तहत तकनीक आधारित प्रणालियों को अपनाया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना और यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को बेहतर करना रहा है।

    सरकारी स्तर पर बताया गया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों यात्रियों के लिए जीवनरेखा की तरह है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रेल यात्रा करते हैं, जिनमें छात्र, नौकरीपेशा लोग, प्रवासी मजदूर और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। ऐसे में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    पिछले वर्षों में रेलवे सुरक्षा को लेकर ‘सेफ्टी फर्स्ट’ की नीति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत तकनीकी निगरानी, बेहतर रखरखाव व्यवस्था और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली को बढ़ावा दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और दुर्घटनाओं की संभावना को घटाना रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पहले की तुलना में अब दुर्घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है। इसी अवधि में दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि में भी कमी आई है।

    इसके अलावा प्रति किलोमीटर दुर्घटना दर में भी सुधार देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि रेलवे का समग्र संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हुआ है। यह सुधार तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब रेल संचालन और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से भी इस बात पर जोर दिया गया कि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसमें लगातार निवेश और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह प्रणाली भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और अधिक सक्षम बन सके।

    इस पूरे परिवर्तन को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में और अधिक सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर संकेत करता है।

  • सरकार का बड़ा फैसला, रेलवे विकास के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी

    सरकार का बड़ा फैसला, रेलवे विकास के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक को आधुनिक बनाने और संचालन को सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 765 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य लाइन क्षमता बढ़ाना, माल और यात्री ट्रेनों की गति में सुधार करना और नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों में आधुनिक संचार प्रणाली विकसित करना है। इनमें दो व्यस्त कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम का अपग्रेड और वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा एवं मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार शामिल है।
     केंद्र सरकार ने रेलवे संचालन, मालगाड़ी क्षमता, यात्री ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए 765 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से भारतीय रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक और भरोसेमंद होगा।

    विशेष रूप से, ईस्ट कोस्ट रेलवे के दुव्वाडा-विशाखापत्तनम- विजयनगरम सेक्शन में 106 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा, जिससे मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा। रेल मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है।

    तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा सुधार में बड़ा कदम
    साउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के अंतर्गत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस रूट को भी 1×25 केवी से 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। यह मुंबई–चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके सुधार से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी, यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिलेगी।

    इसी के साथ, वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। लगभग 1,000 किलोमीटर क्षेत्र में बिछाई जाने वाली इस फाइबर केबल से एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोकने वाली सुरक्षा प्रणाली है, जो रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार करेगी।

    सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल माल और यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि रेलवे संचालन अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बन जाएगा। आधुनिक संचार नेटवर्क और उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम के माध्यम से भारत की रेलवे संरचना को भविष्य के लिए और मजबूत बनाया जा रहा है।