Tag: railway project
-

रेलवे ट्रैक के लिए ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चोरल के जंगलों में वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंता
इंदौर । इंदौर के चोरल जंगलों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। सिमरोल से चोरल होते हुए बड़वाह तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे और वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस परियोजना के कारण ढाई लाख से अधिक छोटे बड़े पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में चोरल के जंगलों के पर्यावरणीय महत्व को सामने रखा। दलील दी गई कि ये जंगल इंदौर और मालवा क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। निमाड़ की ओर से आने वाली गर्म हवाओं को रोकने में भी इन जंगलों का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही भूजल स्तर में गिरावट और बारिश के प्राकृतिक चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई गई।याचिका में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले पांच वर्षों से गर्मियों के दौरान इंदौर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे हालात में यदि ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होती है तो मालवा और निमाड़ के पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। अदालत में रेलवे ट्रैक के डिजाइन में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पहले के डिजाइन में लगभग 40 से 50 हजार पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान था लेकिन बाद में डिजाइन बदलने से पेड़ों की कटाई का दायरा काफी बढ़ गया।सुनवाई के दौरान रेलवे ट्रैक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। रेलवे की ओर से ढलान अधिक होने और सिमरोल से बड़वाह तक यात्रा में 30 से 40 मिनट अतिरिक्त लगने जैसी व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिए जाने की बात अदालत में रखी गई। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या वास्तव में परियोजना के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना जरूरी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी।याचिकाकर्ता ने चोरल जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। अदालत में पेश दलीलों के मुताबिक क्षेत्र में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा चीतल सांभर लोमड़ी मोर और जंगली खरगोश जैसे वन्यजीव भी यहां पाए जाते हैं। आशंका जताई गई कि जंगलों का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि क्षेत्र में लगभग 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां दुर्लभ होती जा रही हैं और सलाई जैसे पेड़ों का दायरा भी घट रहा है।सुनवाई के दौरान जस्टिस विनय सराफ ने जबलपुर खंडपीठ के एक पुराने आदेश का उल्लेख किया। उस मामले में जंगलों की कटाई पर रोक लगाते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक छंटाई की अनुमति दी गई थी। इसी संदर्भ में चोरल जंगलों के मामले में भी पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कराने के साथ ही वानिकी वन्यजीव पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। फिलहाल हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से प्रस्तावित कटाई पर विराम लग गया है। अब रेलवे और वन विभाग के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी। -

इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद
इंदौर। इंदौर और धार के बीच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत 17 साल के लंबे इंतजार के बाद 2026 में पहली बार ट्रेन चलने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2008 में किया गया था और इसके बाद से ही इस पर काम जारी था। अब रेलवे विभाग का दावा है कि मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकिनिर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखते हुए इसे लेकर कुछ संशय भी बना हुआ हैऔर हो सकता है कि इस योजना में छह महीने की और देरी हो।इस परियोजना के तहत कुल 204.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही हैजो इंदौर से दाहोद तक फैली हुई है। इस परियोजना के हिस्से के तौर पर इंदौर से टीही 21 किमी और दाहोद से कटवारा 11.30 किमी खंड का निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। इस रूट पर ट्रेन सेवा की शुरुआत से न केवल इंदौर और धार के बीच यात्रा का समय घटेगाबल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र धार में पहली बार रेलवे सेवा का लाभ भी मिलेगा।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।
इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।
हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।