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  • रणथंभौर एक्सप्रेस में धुआं उठते ही मची भगदड़: यात्री पटरियों पर कूदे, 10 मिनट बाद दूसरी ट्रेन पहुंची, मुरैना हादसे जैसी स्थिति बनी

    रणथंभौर एक्सप्रेस में धुआं उठते ही मची भगदड़: यात्री पटरियों पर कूदे, 10 मिनट बाद दूसरी ट्रेन पहुंची, मुरैना हादसे जैसी स्थिति बनी


    मध्यप्रदेश । रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र स्थित लूणी-रीछा स्टेशन के पास गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंदौर से जोधपुर जा रही रणथंभौर एक्सप्रेस के जनरल कोच के पहियों से अचानक धुआं निकलने लगा। सुबह करीब पौने 10 बजे हुई इस घटना ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान सहित ट्रेन से उतरकर पटरियों पर कूद पड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि जनरल कोच के पहियों से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ यात्रियों ने इसे आग लगने की घटना समझ लिया, जिसके बाद कोचों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते यात्री ट्रेन से बाहर निकलने लगे और कई लोग सीधे रेलवे ट्रैक पर उतर गए। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लूणी-रीछा स्टेशन पर रणथंभौर एक्सप्रेस का निर्धारित ठहराव नहीं है। अचानक सिग्नल रेड होने के कारण लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। इसी दौरान एक पहिए के हार्ड एक्सल पर ब्रेक शू जाम होकर चिपक गया, जिससे अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ और धुआं निकलने लगा। हालांकि यह तकनीकी खराबी थी और आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी अग्निशमन यंत्र लेकर मौके पर पहुंचे और तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से धुआं उठने की समस्या पर काबू पाया गया। करीब 20 मिनट तक ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही, जिसके बाद तकनीकी जांच पूरी कर उसे सुरक्षित आगे के लिए रवाना कर दिया गया।

    इस घटना के दौरान सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यात्रियों की अफरा-तफरी के बीच करीब 10 मिनट बाद कोटा-उज्जैन मेमू ट्रेन भी उसी स्टेशन पर पहुंच गई। सौभाग्य से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन हालात कुछ समय के लिए बेहद खतरनाक बन गए थे। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में बिना पुष्टि के पटरियों पर न उतरें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

    यह घटना हाल ही में मुरैना में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे की याद भी ताजा कर गई। 14 जून को खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद आग लगने की अफवाह फैल गई थी। घबराकर कई यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए थे, जहां दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे ने रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

    गौरतलब है कि इसी लूणी-रीछा क्षेत्र में पिछले महीने राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। ऐसे में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस बार रेलवे कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यात्रियों में भय और असुरक्षा की भावना जरूर देखने को मिली।

  • सासाराम स्टेशन पर बड़ा हादसा: जनरल बोगी में आग लगने से मची अफरा-तफरी, यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

    सासाराम स्टेशन पर बड़ा हादसा: जनरल बोगी में आग लगने से मची अफरा-तफरी, यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया


    नई दिल्ली ।  सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब सासाराम-आरा-पटना पैसेंजर ट्रेन की जनरल बोगी में अचानक आग लग गई। यह घटना प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर उस समय हुई जब ट्रेन अपने निर्धारित समय से रवाना होने की तैयारी में खड़ी थी और यात्री उसमें सवार होकर सफर शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अचानक बोगी से धुआं उठता देखा गया, जिसके बाद कुछ ही पलों में आग की तेज लपटें फैल गईं और पूरे कोच में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में बोगी के अंदर तेज जलने की गंध महसूस हुई, जिसे पहले यात्रियों ने गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन कुछ ही क्षणों में धुआं तेजी से फैलने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। जैसे ही आग की लपटें दिखाई दीं, यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़कर बाहर की ओर भागने लगे।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों, आरपीएफ और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और यात्रियों को तेजी से सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत कार्य के दौरान आसपास की बोगियों को भी खाली कराया गया ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने के लिए लगभग 20 से अधिक कर्मचारी लगातार प्रयासरत रहे। रेलवे की पाइपलाइन और दमकल की सहायता से दोनों ओर से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया गया। शुरुआती 30 मिनट में बाहरी हिस्से की आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया, लेकिन कोच के अंदर आग को पूरी तरह बुझाने में लगभग एक घंटे का समय लग गया। इस दौरान आग कई बार भड़कती रही, लेकिन कर्मचारियों ने स्थिति को नियंत्रित बनाए रखा।

    घटना के बाद संबंधित बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया और पूरे स्टेशन परिसर को खाली कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर प्रवेश भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी यात्री के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि रेलवे प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना की पूरी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

    इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन समय रहते की गई त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। यात्रियों की सूझबूझ और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता के कारण स्थिति नियंत्रण में आ सकी और एक बड़ा नुकसान होने से बच गया।

  • नागपुर रेलवे स्टेशन पर भटका मासूम बालक, रेलवे स्टाफ की तत्परता से चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा गया

    नागपुर रेलवे स्टेशन पर भटका मासूम बालक, रेलवे स्टाफ की तत्परता से चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा गया


    नागपुर । नागपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को एक संवेदनशील मामला सामने आया जब प्लेटफॉर्म पर एक आठ वर्षीय बालक संदिग्ध अवस्था में अकेला घूमता हुआ पाया गया। रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और तत्परता के चलते बच्चे को समय रहते सुरक्षित कर लिया गया और चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया।

    रेलवे सूत्रों के अनुसार यह बालक विदिशा का रहने वाला कुशल बताया जा रहा है जो नई दिल्ली से चेन्नई जा रही जीटी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12616 से नागपुर स्टेशन पर पहुंचा था। ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर रुकने के दौरान बच्चा अकेला उतरकर इधर उधर घूमता हुआ दिखाई दिया जिससे स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों को उस पर शक हुआ।

    इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात हेड टिकट परीक्षक विवेक व्यवहारे की नजर बच्चे पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझते हुए बच्चे से पूछताछ की और उसके अकेले होने की पुष्टि होने पर तत्काल रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी।

    रेलवे स्टाफ ने बिना देरी किए बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी गई जिसके बाद बालक को उनके सुपुर्द कर दिया गया। फिलहाल बच्चे से प्रारंभिक पूछताछ की जा रही है और उसके परिजनों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस घटना ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा और निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाओं में त्वरित कार्रवाई की जाती है।

    रेलवे प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चा ट्रेन में अकेला कैसे पहुंचा और उसके परिजन कहां हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संभव है कि यात्रा के दौरान बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया हो।

    फिलहाल बालक सुरक्षित है और उसे उचित देखभाल में रखा गया है। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान बच्चों पर विशेष ध्यान रखें ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि रेलवे स्टाफ की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से किसी भी बड़ी अनहोनी को रोका जा सकता है और समय रहते मानवता की मिसाल पेश की जा सकती है।

  • बैतूल में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आया अज्ञात व्यक्ति, सिर ट्रेन में फंसने से दर्दनाक मौत

    बैतूल में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आया अज्ञात व्यक्ति, सिर ट्रेन में फंसने से दर्दनाक मौत

    बैतूल।मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। आमला रेलवे स्टेशन के अंतर्गत परसोडा रेलवे ट्रैक पर राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में एक अज्ञात व्यक्ति आ गया। हादसे में मृतक का सिर इंजन में फंस गया और वह लगभग चार किलोमीटर तक ट्रेन के साथ आमला स्टेशन तक चला गया, जबकि उसका धड़ घटनास्थल पर ही ट्रैक पर पड़ा मिला।

    रेलवे सुरक्षा बल ने पहुंचकर किया निकासी का प्रयास
    हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल RPF मौके पर पहुंच गया। हालांकि, राजकीय रेल पुलिस और सिविल पुलिस करीब दो घंटे बाद ही घटना स्थल पर पहुँची, जिससे रेल व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए।रेलवे कर्मचारियों की मदद से इंजन में फंसे मृतक के सिर को बाहर निकाला गया। इस दर्दनाक घटना से आमला और आसपास के लोगों में शोक और चिंता व्याप्त है।

    घटना की जांच शुरू
    मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। रेलवे और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा ट्रेन के रफ्तार और व्यक्ति की अनदेखी का नतीजा माना जा रहा है।रेल यात्रियों और स्थानीय लोगों को इस ट्रैक के पास सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।