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  • कन्नड़ राज्योत्सव पर बेंगलुरु-मुंबई को मिली नई सौगात, अश्विनी वैष्णव ने शुरू की वंदे भारत स्लीपर सेवा

    कन्नड़ राज्योत्सव पर बेंगलुरु-मुंबई को मिली नई सौगात, अश्विनी वैष्णव ने शुरू की वंदे भारत स्लीपर सेवा

    नई दिल्ली । कर्नाटक के स्थापना दिवस यानी कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल कनेक्टिविटी को नई सुविधा मिली है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (एसएमवीटी) से वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस नई ट्रेन सेवा का उद्देश्य देश के दो प्रमुख शहरों के बीच रात के समय यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इससे तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बेंगलुरु का संपर्क देश की वित्तीय राजधानी मुंबई से बेहतर होगा।

    उद्घाटन समारोह में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और एचडी कुमारस्वामी मौजूद रहे। इनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या, पी.सी. मोहन और सी.एन. मंजूनाथ तथा राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया और जगेश ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

    इस अवसर पर अश्विनी वैष्णव ने कर्नाटक और बेंगलुरु के लोगों को कन्नड़ राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर पर बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत की जा रही है। उनके अनुसार, यह देश की तीसरी वंदे भारत स्लीपर सेवा होगी। उन्होंने इस रेल सेवा को तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बेंगलुरु और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र मुंबई को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सुविधा बताया।

    रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन के निर्माण और डिजाइन में यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसमें यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए फीचर शामिल किए गए हैं। लोकोमोटिव पायलटों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा बर्थ पर आसानी से चढ़ने और उतरने के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। दिव्यांग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी ट्रेन में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

    वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में कुल 823 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। ट्रेन में 11 एसी थ्री-टियर कोच होंगे, जिनमें 611 यात्रियों के लिए जगह उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा चार एसी टू-टियर कोच में 188 यात्री सफर कर सकेंगे। ट्रेन में एक फर्स्ट एसी कोच भी होगा, जिसकी क्षमता 24 यात्रियों की होगी। इस तरह अलग-अलग श्रेणियों के यात्रियों को एक ही ट्रेन में यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    रेल राज्यमंत्री वी. सोमन्ना ने इस मौके पर केंद्र सरकार की रेलवे विकास योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कर्नाटक में रेलवे के विकास पर 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। उनके मुताबिक, देशभर में 14 हजार रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं, जिनमें 900 से अधिक ओवरब्रिज कर्नाटक में हैं। उन्होंने उत्तरी, मध्य और दक्षिणी कर्नाटक में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    दक्षिण पश्चिम रेलवे इस नई सेवा का संचालन और रखरखाव करेगा। इसके लिए ट्रेन को दो नंबर दिए गए हैं। ट्रेन संख्या 27652 बेंगलुरु के एसएमवीटी से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के बीच चलेगी, जबकि 27651 मुंबई से बेंगलुरु के लिए निर्धारित की गई है।

    बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली ट्रेन शाम 7 बजकर 45 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर सीएसएमटी पहुंचेगी। इस यात्रा में करीब 16 घंटे लगेंगे। वापसी में ट्रेन मुंबई से रात 8 बजकर 10 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन दोपहर बेंगलुरु पहुंचेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। बेंगलुरु से मुंबई की यात्रा सोमवार को और मुंबई से बेंगलुरु की वापसी मंगलवार को ट्रेन नहीं चलेगी। रातभर की इस रेल सेवा से दोनों शहरों के बीच यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी का विकल्प मिलेगा।

  • चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    नई दिल्ली । चीन ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में नया कदम उठाया है। चीन के शेडोंग प्रांत के लिनयी शहर से अफगानिस्तान के हैरातन के लिए पहली समर्पित मालगाड़ी रवाना की गई है। इस रेल सेवा को चीन और अफगानिस्तान के बीच जमीनी व्यापार बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। नया मार्ग पाकिस्तान, खासकर कराची बंदरगाह से होकर गुजरने वाले पारंपरिक ट्रांजिट रास्तों का विकल्प बन सकता है। इसके संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा हो रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मालगाड़ी में लगभग 80 लाख युआन यानी करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान लदा है। इसके लगभग 20 दिनों में उत्तरी अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत स्थित हैरातन ड्राई पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है। यह शेडोंग से हैरातन तक शुरू की गई पहली समर्पित रेल माल-ढुलाई सेवा बताई जा रही है, जो दोनों क्षेत्रों को सीधे जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

    इस खेप में लिनयी में निर्मित कपड़े, रासायनिक कच्चा माल, औजार और निर्माण मशीनरी शामिल हैं। चीन से रवाना होने के बाद मालगाड़ी कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर गुजरेगी। इसके बाद तेरमेज सीमा चौकी के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश करेगी और हैरातन पहुंचेगी। इस मार्ग के जरिए चीन को अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक जमीनी संपर्क उपलब्ध हो सकता है।

    अफगानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा देश है और वहां घरेलू रेल नेटवर्क का विस्तार सीमित है। ऐसे में क्षेत्रीय रेल संपर्क उसके लिए व्यापार और माल परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल उज्बेकिस्तान की सीमा से मजार-ए-शरीफ तक रेल संपर्क उपलब्ध है। इसके अलावा ईरान के साथ खाफ-हेरात रेलवे के माध्यम से संपर्क विकसित करने के प्रयास भी चल रहे हैं। नए रेल मार्ग से अफगानिस्तान के लिए आयातित सामान की आपूर्ति के विकल्प बढ़ सकते हैं।

    चीन की इस पहल को पाकिस्तान के रास्ते होने वाले व्यापार पर निर्भरता कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अब तक अफगानिस्तान के आयात का बड़ा हिस्सा कराची बंदरगाह से जुड़े पारंपरिक मार्गों के जरिए पहुंचता रहा है। नए गलियारे से चीन को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ी परियोजनाओं को स्थानीय विरोध और अपेक्षित लाभ से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अफगानिस्तान के साथ संपर्क बढ़ाना चीन की क्षेत्रीय व्यापार रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    इस घटनाक्रम का भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करता रहा है। चीन की अफगानिस्तान में बढ़ती आर्थिक मौजूदगी से क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि, नए रेल मार्ग के शुरू होने मात्र से भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर किसी निश्चित प्रभाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग में होने वाले बदलावों से स्पष्ट होगा।

    इससे पहले भी चीन के जिआंगसू प्रांत के हैमेन से मालगाड़ी अफगानिस्तान के हैरातन पहुंच चुकी है। उस खेप में 2,000 टन से अधिक सामान था, जिसका मूल्य 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा बताया गया था। कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर हुई उस यात्रा में 12 दिन लगे थे। इस मार्ग पर महीने में दो बार आने-जाने वाली सेवाएं शुरू करने की योजना भी बताई गई थी।

    नए गलियारे की व्यावसायिक सफलता परिवहन लागत, समय पर डिलीवरी और माल ढुलाई की गति पर निर्भर करेगी। चीनी अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे व्यापार सुगम होगा और खर्च घटेगा। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया मार्ग नियमित माल परिवहन में कितना उपयोगी साबित होता है और चीन-अफगानिस्तान व्यापार को किस हद तक विस्तार मिलता है।

  • ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 125 किमी रूट का 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा

    ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 125 किमी रूट का 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर काम किया जा रहा है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन गढ़वाल हिमालय के भीतर तक रेल नेटवर्क पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना पूरी होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक यात्रा करना आसान हो सकेगा। इससे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए भी यह रेल मार्ग उपयोगी साबित हो सकता है।

    इस परियोजना के तहत रेल लाइन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी और ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी। पहाड़ी इलाकों में रेल परिवहन का विस्तार होने से यात्रियों को सड़क मार्ग के अलावा एक अन्य विकल्प उपलब्ध होगा। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है। बेहतर परिवहन सुविधाएं स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी आवागमन को सुविधाजनक बना सकती हैं।

    परियोजना का प्रस्तावित अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह स्थान भारत-चीन सीमा से लगभग 123 किलोमीटर दूर है। हालांकि, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक नहीं जाती। इसका प्रमुख उद्देश्य गढ़वाल क्षेत्र के अंदरूनी हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ना और हिमालयी क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना है। इसके बावजूद सीमा के करीब स्थित क्षेत्रों तक पहुंच मजबूत करने के लिहाज से इस परियोजना का रणनीतिक महत्व भी है।

    इस रेल लाइन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका बड़ा सुरंग नेटवर्क है। पहाड़ी भूभाग और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परियोजना का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरने की योजना है। इसमें 28 मुख्य और एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं। इसके अलावा रेल मार्ग पर 57 बड़े और छोटे पुल भी शामिल हैं। सुरंगों और पुलों का निर्माण पहाड़ों के बीच रेल लाइन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि इस क्षेत्र में ऊंचाई, चट्टानों और जमीन की बनावट से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं।

    हिमालय में सुरंग निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कमजोर चट्टानों, भूजल और जमीन की स्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर पानी से भरी भूगर्भीय परतें खुदाई के काम को कठिन बना सकती हैं। कमजोर जमीन में खुदाई के दौरान बदलाव होने से सुरंग की दीवारों पर दबाव पड़ने का जोखिम भी रहता है। इसलिए निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों का आकलन करना और जरूरत के मुताबिक सुरंग को मजबूती देना महत्वपूर्ण होता है।

    इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुरंग निर्माण से पहले भूगर्भीय जांच की गई। टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम के इस्तेमाल से जुड़े फैसलों में भी जमीन और चट्टानों की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग स्थानों पर मौजूद भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुसार निर्माण तकनीक चुनना जरूरी है, ताकि काम को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

    भारत और चीन के बीच हिमालयी क्षेत्र में संवेदनशील सीमा होने के कारण बेहतर परिवहन नेटवर्क का महत्व बढ़ जाता है। ऊंचे पहाड़, प्रतिकूल मौसम और सीमित परिवहन सुविधाएं कई इलाकों तक पहुंच को कठिन बनाती हैं। ऐसे में सड़क, पुल और रेल संपर्क को मजबूत करना क्षेत्रीय आवागमन के लिए उपयोगी हो सकता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से यात्रियों, श्रमिकों और सामान की आवाजाही को सहारा मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर, यह परियोजना धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास के साथ हिमालयी क्षेत्र में परिवहन संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम है। रेल नेटवर्क के विस्तार से गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान हो सकती है, जबकि सुरंगों और पुलों का व्यापक निर्माण इस परियोजना की तकनीकी जटिलता और महत्व को दर्शाता है।

  • हिंगोली स्टेशन पर RPF पर मारपीट का आरोप, यात्रियों ने पटरी पर बैठकर रोकी जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस

    हिंगोली स्टेशन पर RPF पर मारपीट का आरोप, यात्रियों ने पटरी पर बैठकर रोकी जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के हिंगोली रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगने के बाद यात्रियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यात्रियों ने आरोप लगाया कि आरपीएफ कर्मियों ने एक युवक के साथ मारपीट की और उसे बचाने पहुंची महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया। घटना से नाराज यात्रियों ने जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस को स्टेशन पर रोक दिया। प्रदर्शन के कारण ट्रेन करीब दो घंटे तक प्रभावित रही। यात्रियों ने संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस के हस्तक्षेप और जांच का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, जिसके बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया।

    जानकारी के अनुसार, संबंधित यात्री नागपुर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। बताया गया है कि ये लोग डॉ. बी.आर. आंबेडकर के अनुयायी हैं और अकोला रेलवे स्टेशन से नांदेड़ जाने के लिए भगत की कोठी-काचेगुड़ा एक्सप्रेस में सवार हुए थे। यह ट्रेन संख्या 17606 है। यात्रा के दौरान वाशिम स्टेशन पार करने के बाद समूह के साथ चल रहा एक युवक गलती से सामान्य श्रेणी के डिब्बे के बजाय आरक्षित डिब्बे में पहुंच गया।

    यात्रियों का आरोप है कि युवक के आरक्षित डिब्बे में प्रवेश करने के बाद आरपीएफ कर्मियों और कुछ यात्रियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर युवक के साथ मारपीट की गई। उसके साथ यात्रा कर रही महिलाओं ने बीच-बचाव करते हुए युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें धक्का देकर पीछे हटाया गया। समूह के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    इस घटना के बाद यात्रियों में नाराजगी फैल गई। जब ट्रेन हिंगोली रेलवे स्टेशन पहुंची, तो विरोध कर रहे यात्री नीचे उतर गए और रेलवे ट्रैक पर जाकर इंजन के सामने बैठ गए। उन्होंने रेलवे प्रशासन और आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की तथा आरोपित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई। यात्रियों के पटरी पर बैठने के कारण ट्रेन का परिचालन रुक गया। इसके चलते निर्धारित यात्रा में देरी हुई और रेल संचालन भी प्रभावित हुआ।

    प्रदर्शन की सूचना मिलने पर हिंगोली नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यात्रियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत पर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यात्रियों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद रेलवे ट्रैक खाली कराया गया और जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस को आगे नांदेड़ की ओर रवाना किया गया। हालांकि, ट्रेन के रुकने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और अन्य रेल सेवाओं पर भी असर पड़ने की बात सामने आई।

    यह पूरा मामला आरक्षित डिब्बे में गलती से प्रवेश करने के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। यात्रियों ने आरपीएफ कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन घटना में शामिल सभी पक्षों के बयान और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यात्रियों की मुख्य मांग संबंधित कर्मियों के व्यवहार की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस की ओर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और रेल यातायात बहाल हो सका।

  • रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    नई दिल्ली ।भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यात्रा बीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब तक ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुक करने वाले यात्रियों को मामूली प्रीमियम पर यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता था, लेकिन रेलवे के आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्री इस सुविधा से बाहर थे। अब इस अंतर को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। दिए गए विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर 2026 से काउंटर से आरक्षित टिकट लेने वाले यात्रियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाने के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है।

    मौजूदा ऑनलाइन रेलवे यात्रा बीमा योजना की खास बात इसका कम प्रीमियम है। टिकट बुक करते समय यात्री केवल 45 पैसे देकर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्ध बीमा विकल्प और संबंधित शर्तों के अनुसार मिलती है। काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए प्रीमियम, बीमा चुनने की प्रक्रिया और दावा करने के विस्तृत नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आना जरूरी है। इसलिए फिलहाल यह मानना सही नहीं होगा कि प्रत्येक काउंटर टिकट पर बीमा अपने आप लागू हो चुका है।

    यात्रा बीमा का उद्देश्य ट्रेन दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों या उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। दुर्घटना में यात्री की मृत्यु होने या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर मौजूदा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जा सकता है। यह राशि दुर्घटना के परिणाम और बीमा पॉलिसी में निर्धारित शर्तों के आधार पर मिलती है।

    स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 7.5 लाख रुपये तक के बीमा कवर का प्रावधान है। वहीं, गंभीर रूप से घायल होने पर दो लाख रुपये और मामूली चोट लगने की स्थिति में 10,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है। हालांकि, इन सभी मामलों में वास्तविक भुगतान पॉलिसी की शर्तों, चोट की प्रकृति और संबंधित पात्रता पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को बीमा को हर प्रकार की दुर्घटना या परेशानी के लिए मिलने वाला सामान्य मुआवजा नहीं समझना चाहिए।

    काउंटर टिकट लेने वाले यात्रियों को भी बीमा सुविधा के दायरे में लाने का मुख्य उद्देश्य टिकट खरीदने के माध्यम के आधार पर होने वाले अंतर को समाप्त करना है। देश में बड़ी संख्या में यात्री अब भी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर से टिकट लेते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी, बुजुर्ग और ऐसे लोग शामिल हैं जो ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा का नियमित इस्तेमाल नहीं करते। नई व्यवस्था लागू होने पर इन यात्रियों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार यात्रा बीमा लेने का अवसर मिल सकेगा।
    इस बदलाव को लागू करने के लिए रेलवे को अपने यात्री आरक्षण सिस्टम यानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम में जरूरी तकनीकी और प्रक्रियागत संशोधन करने होंगे। काउंटर पर टिकट खरीदने के दौरान बीमा का विकल्प कैसे उपलब्ध कराया जाएगा, यात्रियों की सहमति किस तरह दर्ज होगी और पॉलिसी की जानकारी कैसे दी जाएगी, इन पहलुओं पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

    यात्रियों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि बीमा का लाभ लेने के लिए बुकिंग के समय नियमों और शर्तों की जानकारी रखना आवश्यक है। ऑनलाइन टिकट लेते समय बीमा का विकल्प चुनने के बाद पॉलिसी से संबंधित संदेश और दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। जहां लागू हो, वहां नामांकित व्यक्ति यानी नॉमिनी का विवरण भी सही भरना चाहिए। दुर्घटना की स्थिति में दावा करते समय ये जानकारियां उपयोगी हो सकती हैं।

    काउंटर से आरक्षित टिकट खरीदने वाले यात्रियों को नई व्यवस्था लागू होने के बाद रेलवे की आधिकारिक सूचना और बीमा पॉलिसी की शर्तें जांचनी चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा लिया गया है या नहीं और उसका प्रमाण उपलब्ध है। केवल टिकट खरीद लेने से बीमा कवर मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसका लाभ संबंधित नियमों और प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

  • 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    नई दिल्ली । दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कुछ रेल सेवाएं रद्द किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल प्रदर्शन की अनुमति देने के सवाल पर विचार नहीं कर रही, क्योंकि सुनवाई के दौरान कोई आयोजक उसके सामने उपस्थित नहीं हुआ। इस सुनवाई का मुख्य मुद्दा सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों से आम लोगों को होने वाली परेशानी रहा। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे कदम उठाने को कहा, जिनसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जरूरतों के साथ-साथ लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

    यह याचिका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने दाखिल की थी। इसमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कुछ ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने को कहा था। यह व्यवस्था 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू किए जाने और हालात सामान्य होने तक जारी रखने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि इस कदम का असर केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि रोजाना काम, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले नागरिकों पर भी पड़ सकता है।

    याचिका में जिन स्टेशनों का उल्लेख किया गया, उनमें सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी सहित कई स्टेशन शामिल बताए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने पर भी सवाल उठाया गया। इनमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का जिक्र किया गया। याचिका में मरीजों, विद्यार्थियों, यात्रियों और दूसरे नागरिकों को संभावित परेशानी का मुद्दा उठाया गया। साथ ही, दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया या हिरासत में लिया गया।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला रोकने, सेवाएं सामान्य करने और रद्द ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने का निर्देश देने की मांग की थी। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। याचिका में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने वाले लोगों को केवल इसी कारण रोकने से बचने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों के पास निजी वाहन हो सकते हैं, लेकिन अदालतों में काम करने वाले कई कर्मचारी मेट्रो से आते हैं। पीठ ने अधिकारियों से बैरिकेडिंग की जानकारी सार्वजनिक करने और लोगों को वैकल्पिक सड़कों के बारे में बताने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार लोगों को होने वाली असुविधा के मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेगी। उन्होंने दलील दी कि सुरक्षा संबंधी कदम सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पिछली एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 जून को प्रदर्शन की एक दिन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रदर्शन 17 दिनों तक चला और संसद की ओर जाने की कोशिश भी हुई। उनके अनुसार, उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर पाबंदी सीमित क्षेत्र में है और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई थीं। अदालत ने प्रदर्शन की अनुमति के सवाल पर विचार करने से इनकार करते हुए सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की परेशानी पर ध्यान केंद्रित रखा।

    सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और सीमित जगह को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, स्वच्छता और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाओं में समस्याएं पैदा हो सकती हैं और उनके अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मेट्रो, ट्रेन और सड़क परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता तथा कदम हालात के अनुरूप होने चाहिए। अदालत ने लोगों को यह स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत बताई कि कौन-सी सेवाएं कब उपलब्ध होंगी और किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों से बातचीत के बाद संतुलित कदम उठाए जाएंगे, यातायात का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश होगी और लोगों की सुविधा के लिए सलाह जारी की जाएगी।

  • सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    नई दिल्ली । राजधानी में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इस बदलाव का असर बिहार, मुंबई, हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।

    रेलवे प्रशासन के अनुसार, 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली ऐसी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें, जिन्हें 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचना था, उन्हें शुरुआती स्टेशन से ही रद्द करने का फैसला लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें। ट्रेनों के संचालन, रद्द होने और समय में बदलाव से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए रेलवन ऐप और एनटीईएस ऐप देखने को कहा गया है।

    दानापुर मंडल से संबंधित चार ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें गाड़ी संख्या 20801 मगध एक्सप्रेस शामिल है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को इस्लामपुर से दोपहर 3:30 बजे रवाना होने वाली थी और अगले दिन दोपहर 12 बजे नई दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय था। प्रदर्शन के मद्देनजर इस ट्रेन का परिचालन रद्द कर दिया गया है।

    गाड़ी संख्या 12309 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को राजेंद्र नगर से शाम 7:10 बजे चलने वाली थी और 10 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचती। इसके अलावा गाड़ी संख्या 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का संचालन भी नहीं होगा। यह ट्रेन राजेंद्र नगर से 9 अक्टूबर को शाम 7:20 बजे रवाना होकर 10 अक्टूबर को सुबह 7:55 बजे नई दिल्ली पहुंचने वाली थी।

    रद्द की गई चौथी ट्रेन गाड़ी संख्या 22361 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस है। इसका निर्धारित प्रस्थान समय 9 अक्टूबर को शाम 7:50 बजे था, जबकि नई दिल्ली पहुंचने का समय 10 अक्टूबर को दोपहर 1:10 बजे तय था। इन चारों ट्रेनों के रद्द होने से इनके निर्धारित समय पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    इस बीच, भोपाल होकर चलने वाली मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। गाड़ी संख्या 22221 को परिचालन संबंधी कारणों से 9 अक्टूबर को उसके शुरुआती स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई से ही रद्द किया गया है। भोपाल स्टेशन से इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा की योजना दोबारा बनाने और रेलवे की सूचना एवं पूछताछ सेवाओं से अपडेट जानकारी लेने की सलाह दी गई है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।

    पूर्वी रेलवे ने भी शुक्रवार के लिए हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी है। इनमें गाड़ी संख्या 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 12313 सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शामिल हैं। इस तरह दिल्ली आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को प्रस्थान से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचना जरूरी है। जिन यात्रियों ने इन ट्रेनों में टिकट बुक कराए हैं, उन्हें यात्रा से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करके ही स्टेशन के लिए निकलना चाहिए।

  • दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से रेल यातायात प्रभावित, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली कई ट्रेनें रद्द

    दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से रेल यातायात प्रभावित, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली कई ट्रेनें रद्द

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन का असर रेल यात्रियों की आवाजाही पर पड़ने की संभावना है। प्रदर्शन को देखते हुए रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। इससे शनिवार को दिल्ली पहुंचने की योजना बना रहे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। जिन लोगों ने 10 अक्टूबर के लिए ट्रेन का टिकट बुक कराया है, उन्हें घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

    रेलवे के मुताबिक, 10 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली कुछ ट्रेनें रद्द रहेंगी। इस फैसले के दायरे में ऐसी ट्रेनें भी शामिल हैं, जिन्हें शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचना था। ऐसे में दिल्ली आने वाले यात्रियों के लिए अपनी ट्रेन से संबंधित जानकारी पहले से प्राप्त करना जरूरी है। इससे उन्हें स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन रद्द होने या यात्रा कार्यक्रम में बदलाव के कारण होने वाली असुविधा से बचने में मदद मिल सकती है।

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित है। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास भीड़ बढ़ने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। रेलवे के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को संभावित परेशानियों से बचाने में मदद करना है। प्रदर्शन के दौरान संबंधित इलाकों में आवाजाही बढ़ने की आशंका के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया जा रहा है। इसके चलते दिल्ली में रेल यात्रियों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की संभावना बताई गई है। खासकर उन यात्रियों को अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचना है। ट्रेन रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। इसलिए स्टेशन के लिए रवाना होने से पहले ट्रेन की निर्धारित स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।

    यात्री अपनी ट्रेन के संचालन और रद्द होने से संबंधित जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। इन माध्यमों से यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित ट्रेन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है या उसे रद्द किया गया है। यात्रियों को केवल पुराने टिकट या पहले से तय समय पर निर्भर रहने के बजाय यात्रा से पहले उपलब्ध ताजा जानकारी जांचनी चाहिए। खासकर नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली ट्रेनों से सफर करने वाले लोगों को यह जांच कर लेनी चाहिए कि उनकी ट्रेन पर रद्दीकरण का असर पड़ा है या नहीं।

  • आरा जंक्शन पर महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां पटरी से उतरीं, यात्रियों में मची अफरातफरी, अप लाइन का परिचालन प्रभावित

    आरा जंक्शन पर महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां पटरी से उतरीं, यात्रियों में मची अफरातफरी, अप लाइन का परिचालन प्रभावित


    नई दिल्ली । बिहार के भोजपुर जिले में आरा स्टेशन पर बड़ा ट्रेन हादसा टल गया। यहां महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां बेपटरी हो गईं। अलीपुरद्वार जंक्शन-दिल्ली जाने वाली 15483 महानंदा एक्सप्रेस आरा जंक्शन पर करीब सवा चार बजे प्लेटफार्म नम्बर दो पर पहुंची थी। इसके बाद यहां से पं दीनदयाल उपाध्याय के रास्ते दिल्ली की ओर रवाना हुई।

    कुछ ही देर में महानंदा एक्सप्रेस के इंजन समेत तीन बोगियां अचानक पटरी से उतर गईं। इस हादसे के बाद रेलवे स्टाफ और ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि समस्या के कारण ट्रेन का सिग्नल सासाराम लाइन की ओर चले जाने की बात सामने आ रही है। इसके बाद इंजन समेत एसएलआर और एच-1 कोच पटरी से उतर गए।

    करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पटरी से उतरे तीनों कोच को दोबारा ट्रैक पर चढ़ा दिया गया है। हालांकि अप लाइन पर परिचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है।

    घटना के बाद रेलवे की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक व सिग्नल सिस्टम की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि सिग्नल सासाराम लाइन की ओर क्यों गया और इस कारण ट्रेन गलत दिशा में कैसे चली गई। हादसे के कारण रेल परिचालन प्रभावित होने की सूचना है। रेलवे की ओर से परिचालन को सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।

    यात्रियों में मची अफरातफरी

    सुबह-सुबह हुई घटना से ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। हालांकि, हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल तकनीकी टीम ट्रैक, सिग्नल और परिचालन व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

  • सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का प्रोविजनल डेटा जारी किया है। आंकड़ों में अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में कीमतों के रुझान में अंतर देखने को मिला। इंश्योरेंस और टेलीकॉम सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंकिंग और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सेवाओं के मूल्य सूचकांक में गिरावट आई। हवाई यात्री सेवाओं में सबसे तेज वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की जून तिमाही में इंश्योरेंस सर्विस प्राइस इंडेक्स 102.9 रहा। इसमें सालाना आधार पर 0.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बीमा सेवाओं की कीमतों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई। टेलीकॉम सर्विसेज प्राइस इंडेक्स 112.2 रहा और इसमें सालाना आधार पर 0.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सर्विस प्राइस इंडेक्स में इसके विपरीत गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में यह सूचकांक 89.9 रहा, जो सालाना आधार पर 1.32 प्रतिशत कम है। बैंकिंग सर्विस प्राइस इंडेक्स भी 100.9 पर रहा और इसमें सालाना आधार पर 3.35 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। हालांकि, बैंकिंग सर्विस कॉन्ट्रिब्यूशन इंडेक्स 134.8 रहा और इसमें सालाना आधार पर 6.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    पेंशन क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। मैनेजमेंट ऑफ पेंशन फंड्स सर्विस प्राइस इंडेक्स 113.3 रहा और इसमें सालाना आधार पर 5.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं की कीमतों में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले वृद्धि हुई है।

    हवाई यात्री सेवाओं में सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही में एयर पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 126.4 रहा, जो सालाना आधार पर 31.94 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि अन्य प्रमुख सेवा क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे हवाई यात्री सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बदलाव का पता चलता है।

    रेलवे सेवाओं के सूचकांक में भी सीमित बढ़ोतरी दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रेलवे सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.4 रहा और इसमें सालाना आधार पर 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रेलवे फ्रेट सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.3 रहा, जो सालाना आधार पर 0.10 प्रतिशत बढ़ा। वहीं रेलवे पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.5 रहा और इसमें 3.50 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

    सरकार के अनुसार सर्विस पीपीआई में सात प्रकार की सेवाओं को शामिल किया जाता है और इसका बेस ईयर 2022-23 निर्धारित है। हालांकि, इन सूचकांकों में सेवाओं के भारांक को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि यह पूरे सर्विस सेक्टर को कवर नहीं करते हैं। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के लिए सर्विस पीपीआई का अगला प्रोविजनल डेटा 25 नवंबर 2026 को जारी किया जाएगा।