Tag: Railway

  • सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का प्रोविजनल डेटा जारी किया है। आंकड़ों में अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में कीमतों के रुझान में अंतर देखने को मिला। इंश्योरेंस और टेलीकॉम सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंकिंग और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सेवाओं के मूल्य सूचकांक में गिरावट आई। हवाई यात्री सेवाओं में सबसे तेज वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की जून तिमाही में इंश्योरेंस सर्विस प्राइस इंडेक्स 102.9 रहा। इसमें सालाना आधार पर 0.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बीमा सेवाओं की कीमतों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई। टेलीकॉम सर्विसेज प्राइस इंडेक्स 112.2 रहा और इसमें सालाना आधार पर 0.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सर्विस प्राइस इंडेक्स में इसके विपरीत गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में यह सूचकांक 89.9 रहा, जो सालाना आधार पर 1.32 प्रतिशत कम है। बैंकिंग सर्विस प्राइस इंडेक्स भी 100.9 पर रहा और इसमें सालाना आधार पर 3.35 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। हालांकि, बैंकिंग सर्विस कॉन्ट्रिब्यूशन इंडेक्स 134.8 रहा और इसमें सालाना आधार पर 6.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    पेंशन क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। मैनेजमेंट ऑफ पेंशन फंड्स सर्विस प्राइस इंडेक्स 113.3 रहा और इसमें सालाना आधार पर 5.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं की कीमतों में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले वृद्धि हुई है।

    हवाई यात्री सेवाओं में सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही में एयर पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 126.4 रहा, जो सालाना आधार पर 31.94 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि अन्य प्रमुख सेवा क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे हवाई यात्री सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बदलाव का पता चलता है।

    रेलवे सेवाओं के सूचकांक में भी सीमित बढ़ोतरी दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रेलवे सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.4 रहा और इसमें सालाना आधार पर 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रेलवे फ्रेट सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.3 रहा, जो सालाना आधार पर 0.10 प्रतिशत बढ़ा। वहीं रेलवे पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.5 रहा और इसमें 3.50 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

    सरकार के अनुसार सर्विस पीपीआई में सात प्रकार की सेवाओं को शामिल किया जाता है और इसका बेस ईयर 2022-23 निर्धारित है। हालांकि, इन सूचकांकों में सेवाओं के भारांक को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि यह पूरे सर्विस सेक्टर को कवर नहीं करते हैं। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के लिए सर्विस पीपीआई का अगला प्रोविजनल डेटा 25 नवंबर 2026 को जारी किया जाएगा।

  • रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    नई दिल्ली ।रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने गंभीर कमियां उजागर की हैं। रिपोर्ट में देश के कई गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के मानकों का पर्याप्त पालन नहीं होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान कुछ स्टेशनों के वाटर कूलर और नलों के पानी में ई-कोलाई तथा टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए।

    यह ऑडिट वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच देश के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और अन्य सुविधाओं को लेकर नियम और दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे, लेकिन कई क्षेत्रीय रेलवे जोन में इनका प्रभावी पालन नहीं हुआ।

    जांच में छह अलग-अलग रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराए जाने की बात सामने आई। जिन स्टेशनों के पानी के नमूनों की जांच हुई, उनमें भी कुछ स्थानों पर गुणवत्ता मानकों से जुड़ी गंभीर समस्याएं मिलीं।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कल्याण, लोनावाला और भिवंडी रोड जैसे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए नमूनों में ई-कोलाई की मौजूदगी पाई गई। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन तथा दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन के पेयजल नमूनों में भी ई-कोलाई पाया गया।

    पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन का पानी भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके अलावा अलग-अलग वर्षों में कई रेलवे जोन के अनेक स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे बैक्टीरिया दूषित जल की ओर संकेत करते हैं और इनके कारण संक्रमण तथा पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के शौचालयों और अन्य सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। यात्री सुविधाओं से संबंधित आंकड़ों के अनुसार 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। वहीं 403 स्टेशनों पर जरूरत के मुताबिक मूत्रालय और 201 स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुसार शौचालय उपलब्ध नहीं पाए गए।

    रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इनमें पेयजल, बैठने की व्यवस्था, शेड, शौचालय, पंखे, फुट ओवर ब्रिज और यात्री सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि ऑडिट में शामिल 512 स्टेशनों में से 458 पर ये सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं थीं या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि न्यू दिल्ली, हावड़ा, सियालदह, मुंबई सेंट्रल और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी कुछ आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थीं या उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी। इनमें सीटें, पंखे, वाटर कूलर, डस्टबिन और ट्रेन सूचना डिस्प्ले जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    कैग ने रेलवे प्रशासन को पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की जरूरत बताई है। साथ ही जल आपूर्ति तंत्र की नियमित निगरानी और पानी की गुणवत्ता की व्यवस्थित जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित पेयजल और निर्धारित मानकों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

  • ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ई दिल्ली । भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था, डिब्बों के रखरखाव और बायो-टॉयलेट प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक अर्थात कैग की नवीनतम रिपोर्ट में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन यात्रा के दौरान मिलने वाली ऑन-बोर्ड स्वच्छता सेवाओं से लगभग पचास प्रतिशत यात्री असंतुष्ट हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले यात्रियों को टॉयलेट में जलभराव, बदबू और सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष स्वच्छता और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन किया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन में कई खामियां देखी गई हैं। ऑडिट टीम को रेलवे प्रशासन द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट और पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि आवंटित बजट का कितना हिस्सा वास्तव में सफाई कार्यों पर व्यय किया गया।

    वित्तीय प्रक्रियाओं और ठेकेदारों के नियमन को लेकर भी रिपोर्ट में लापरवाही की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों पर लगाए गए जुर्माने या राशि कटौती का कोई केंद्रीय डेटाबेस या पारदर्शी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हालांकि रेलवे प्रशासन ने ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई का दावा किया, किंतु ऑडिट प्रक्रिया के दौरान इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य या वित्तीय विवरण जमा नहीं कराए जा सके।

    सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि चालीस प्रतिशत से अधिक रेल यात्रियों ने ट्रेनों के टॉयलेट में बदबू और पानी के भराव की समस्या पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, पचास प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं के सुचारू रूप से कार्य न करने की शिकायत की है। ट्रेन डिब्बों की अत्याधुनिक और स्वचालित धुलाई के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की गति भी अत्यंत धीमी पाई गई है।

    कैग की इस रिपोर्ट में झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख रेल मंडलों का भी संदर्भ देखने को मिलता है, जहां ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बजट स्वीकृत होने के पश्चात भी परियोजनाएं लंबित पाई गईं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रेल यात्रियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैग ने रेल मंत्रालय को वित्तीय पारदर्शिता और जमीनी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।

    विमानन और रेल सेवाओं के तुलनात्मक अध्ययन में यात्रियों की मूल सुविधाओं का ध्यान रखना सर्वोपरि माना गया है। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रेलवे प्रशासन ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने, ऑन-बोर्ड सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बायो-टॉयलेट के नियमित रख-रखाव के लिए नई कार्ययोजना लागू करेगा ताकि यात्रा के अनुभव में सुधार किया जा सके।

  • ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश

    ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश


    प्रयागराज।
    एसी (AC) श्रेणी में आधी सीट यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) (Reservation Against Cancellation -RAC) टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब पूरा बेडरोल किट (Bedroll kit.) उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने इस संबंध में चार अगस्त 2026 को एनसीआर समेत सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर अन्य सभी वातानुकूलित श्रेणियों में प्रत्येक आरएसी यात्री को अलग से संपूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है।

    रेलवे बोर्ड को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई ट्रेनों में आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल नहीं दिया जा रहा है या दो यात्रियों के बीच एक ही किट साझा कराई जा रही है। यात्रियों को अलग-अलग कंबल न मिलने पर वे परेशान होते थे। कभी कंबल तो कभी तकिया न मिलने की हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत की जा रही थी। लेकिन इसके बाद भी परेशानियां बंद नहीं हुईं।

    इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक आरएसी सीट पर सफर करने वालों को अन्य यात्रियों की तरह अलग से चादर, कंबल और बेडरोल की पूरी सुविधा दी जाए। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस आदेश के बाद प्रयागराज होकर गुजरने वाली सभी संबंधित एसी ट्रेनों में भी आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर भी रोक लगेगी।

    रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक तत्काल पहुंचाई जाए तथा इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आईआरसीटीसी सहित संबंधित विभागों को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के लागू होने से देशभर में एसी कोचों में आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी। अब उन्हें बेडरोल के लिए शिकायत करने की आवश्यकता नहीं होगी और यात्रा के दौरान अन्य यात्रियों के समान सुविधाएं मिल सकेंगी।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर सभी एसी श्रेणियों में यात्रा करने वाले प्रत्येक आरएसी यात्री को पूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा और उन्हें अन्य वैध यात्रियों के समान सुविधा मिलेगी। इसमें परेशानी आने पर यात्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए रेलवे की ओर से जानकारी साझा की जाएगी।

  • बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में रेलवे आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित खैराड़ा-मानिकपुर रेलवे दोहरीकरण परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करने तथा गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण दल में झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुरुद्ध कुमार, मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त प्रंजीव सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजीत यादव तथा प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता संजीत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

    संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीम ने खैराड़ा से मानिकपुर रेलखंड के अंतर्गत आने वाले खुरहंड, अतर्रा और बदौसा रेलवे स्टेशनों का दौरा किया। यहां रेलवे भवनों, प्लेटफॉर्मों, नई रेल लाइनों और अन्य निर्माणाधीन संरचनाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुधार संबंधी सुझाव दिए।

    निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना से जुड़े प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं और सभी गतिविधियां तय समयसीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य ही परियोजना की सफलता का आधार होगा।

    रेलवे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोहरीकरण कार्य पूरा होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुचारु और तेज होगा। वर्तमान में एकल लाइन होने के कारण कई स्थानों पर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है। दोहरीकरण के बाद ऐसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

    इस परियोजना के पूरा होने से यात्रियों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी गति मिलेगी। रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था में सुधार होगा और परिचालन अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकेगा। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलने की संभावना है।

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के परिवहन ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा, जबकि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्राप्त होगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निर्धारित समय में परियोजना पूरी होने के बाद यह रेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत उपलब्धि साबित होगा।

  • रेल यात्री अलर्ट! 1 मार्च से जनरल टिकट वाला UTS ऐप होगा बंद, इस नए ऐप से करें बुकिंग

    रेल यात्री अलर्ट! 1 मार्च से जनरल टिकट वाला UTS ऐप होगा बंद, इस नए ऐप से करें बुकिंग


    नई दिल्ली ।अगर आप रोजाना लोकल ट्रेन या अनरिजर्व्ड टिकट के लिए UTS on Mobile ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों को जानकारी दी है कि UTS on Mobile ऐप को 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद किया जा रहा है। यानी इस तारीख के बाद UTS ऐप से न तो टिकट कटेगा और न ही कोई दूसरी सुविधा मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते RailOne ऐप पर शिफ्ट हो जाएं, ताकि उनकी रोजमर्रा की यात्रा में कोई परेशानी न आए। RailOne एक नया ऐप है, जिसमें टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।

    आज के समय में लाखों यात्री रोज़ाना मोबाइल से टिकट बुक करते हैं। ऐसे में UTS ऐप का बंद होना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रेलवे का कहना है कि RailOne ऐप यात्रियों को पहले से ज्यादा आसान, तेज और भरोसेमंद अनुभव देगा। अगर आपने अब तक RailOne ऐप डाउनलोड नहीं किया है, तो आगे चलकर आपको टिकट लेने में दिक्कत हो सकती है।

    क्यों बंद हो रहा UTS on Mobile ऐप
    भारतीय रेलवे लगातार अपनी डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। UTS on Mobile ऐप पिछले कई सालों से अनरिजर्व्ड टिकट के लिए इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब रेलवे ने फैसला लिया है कि अलग-अलग ऐप की जगह एक ही ऑल-इन-वन ऐप दिया जाए।

    RailOne ऐप क्या है और इसमें क्या मिलेगा
    RailOne ऐप भारतीय रेलवे की नई डिजिटल पहल है। इस ऐप के जरिए यात्री एक ही जगह पर कई काम कर सकते हैं। RailOne ऐप से आप अनरिजर्व्ड टिकट ले सकते हैं, रिजर्व्ड टिकट से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं, यात्रा प्लान कर सकते हैं, ट्रेन से जुड़ी जरूरी सेवाएं पा सकते हैं। यानी अब टिकट बुकिंग के लिए अलग-अलग ऐप रखने की जरूरत नहीं होगी।

    कब से बंद होगा UTS ऐप
    रेलवे द्वारा जारी सूचना के मुताबिक UTS on Mobile ऐप 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद ऐप काम नहीं करेगा। टिकट बुकिंग के लिए केवल RailOne ऐप का ही इस्तेमाल करना होगा। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि आखिरी समय का इंतजार न करें।

    ऐसे डाउनलोड करें RailOne ऐप
    RailOne ऐप को डाउनलोड करना बेहद आसान है। Android यूजर्स Google Play Store से ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। iPhone यूजर्स Apple App Store से RailOne ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं। डाउनलोड के बाद अपने मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें और जरूरी जानकारी भरकर ऐप का इस्तेमाल शुरू करें।

  • ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज

    ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज


    भोपाल । भोपाल ट्रेन देरी से चलने पर यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करने की गलती न करें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें न तो पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा स्वीकार होगा। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यदि यात्री ट्रेन के लेट होने के कारण बिना रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए टिकट कैंसिल कर देते हैं तो वे मुआवजे से हाथ धो सकते हैं। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक अहम संदेश है जो ट्रेन के समय से लेट होने पर बिना सही प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं।

    क्या है पूरा मामला

    भोपाल के एक निवासी ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इस देरी के कारण यात्री की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई, क्योंकि उसे नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का कनेक्शन छूट गया। इस स्थिति में यात्री ने दोनों यात्रा टिकट कैंसिल करवा दिए। लेकिन, जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि सिर्फ ट्रेन की देरी के आधार पर टिकट कैंसिल करना और रिफंड की मांग करना सही नहीं है। यदि यात्री ने रेलवे द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, तो उसे पूरा रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा नहीं मिल सकता।

    उपभोक्ता आयोग का फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने यह कहा कि जब भी ट्रेन की देरी हो, तो यात्री को पहले रेलवे द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं और विकल्पों का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि मुआवजे के लिए आवेदन करना या ट्रेनों का अन्य विकल्प तलाशना। सिर्फ टिकट कैंसिल करके और बिना प्रक्रिया का पालन किए मुआवजे का दावा करना गलत है और यह न केवल यात्रियों के लिए बल्कि रेलवे के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यह फैसला यात्रियों को यह सिखाता है कि ट्रेन लेट होने पर घबराहट में कोई जल्दबाजी का कदम न उठाएं और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का नुकसान न हो।

  • वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगी पहली स्लीपर वंदे भारतकिराया क्या होगा

    वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगी पहली स्लीपर वंदे भारतकिराया क्या होगा


    नई दिल्ली । भारत की रेलवे यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यह ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगीजिससे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन एक आधुनिक और सुविधाजनक ट्रेन हैजिसे लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को और भी आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    उन्नत सुरक्षा और सुविधाएं

    इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टमऑटोमैटिक दरवाजेऔर उन्नत अग्नि सुरक्षा व्यवस्था जैसी विशेषताएं हैं। साथ हीसभी कोचों में सीसीटीवी निगरानी होगीजिससे सुरक्षा का स्तर बढ़ जाएगा। ट्रेन की सफाई भी एक महत्वपूर्ण पहलू हैऔर इसके लिए नियमित रूप से डिसइंफेक्टेंट स्प्रेयर का उपयोग किया जाएगाताकि उच्च स्वच्छता मानक बनाए जा सकें।

    यात्रियों के लिए बेहतर अनुभव

    यह ट्रेन 16 डिब्बों वाली होगीजिसमें कुल 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा हैहालांकि यह फिलहाल 120 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम के कई प्रमुख जिलों को कवर करेगीजिससे इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

    किराया

    वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के किराए की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई हैलेकिन अनुमान है कि यह सामान्य स्लीपर ट्रेन से कुछ ज्यादा हो सकता है। स्लीपर कोच के आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं को देखते हुएयात्रियों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है। हालांकियह ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा के लिए काफी सुविधाजनक होगी और यात्रियों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी।

    शुरुआत की तारीख

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 या 19 जनवरी को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन का निरीक्षण किया था और इसे भारतीय रेलवे के लिए एक “नए युग की शुरुआत” बताया था। यह ट्रेन एक तरह से भारतीय रेलवे के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती हैजो यात्रियों को न केवल आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगीबल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के मामले में भी एक नई मिसाल कायम करेगी।