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  • बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व

    बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व


    नई दिल्ली। खाटूश्यामजी के विश्वप्रसिद्ध मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने उत्तर पश्चिम रेलवे की कमाई में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। निर्जला एकादशी और द्वादशी के मेले के साथ-साथ वीकेंड की छुट्टियों के चलते रींगस रेलवे स्टेशन जंक्शन पर यात्रियों का अभूतपूर्व दबाव देखने को मिला। इसी अवधि में रेलवे को रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई है।

    रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में करीब 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ट्रेन से यात्रा की, जिससे रींगस स्टेशन को ₹1.25 करोड़ से अधिक की आय हुई है।

    ट्रेनों में भारी भीड़, यात्रियों की बढ़ी संख्या

    रींगस स्टेशन अधीक्षक बाबूलाल बाजिया के अनुसार, बाबा श्याम के दर्शन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि कई ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। रविवार को वीकेंड की वजह से भीड़ और बढ़ गई, जिससे आने वाले दिनों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

    सुरक्षा के लिए 160 जवान तैनात

    भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जीआरपी चौकी प्रभारी एएसआई मुकेश कुमार सैनी ने बताया कि स्टेशन परिसर में 100 आरपीएफ और 60 जीआरपी जवानों की तैनाती की गई है। इनमें महिला कर्मियों को भी शामिल किया गया है ताकि महिला यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इसके अलावा स्वयंसेवक भी व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं। जयपुर मंडल से सीनियर डीसीएम जगदीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम लगातार स्टेशन पर निगरानी बनाए हुए है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए यात्रियों के लिए अस्थायी शेल्टर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु धूप और लू से राहत पा रहे हैं।

    भीड़ नियंत्रण के लिए खास इंतजाम

    स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रूट तय किए गए हैं ताकि अव्यवस्था या भगदड़ जैसी स्थिति न बने। यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 21 टिकट काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 12 मैनुअल और 9 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) शामिल हैं।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये विशेष व्यवस्थाएं रविवार देर रात तक जारी रहेंगी ताकि वीकेंड की भीड़ को सुचारु रूप से संभाला जा सके।

    रींगस: खाटूधाम का मुख्य प्रवेश द्वार

    गौरतलब है कि खाटूश्यामजी कस्बे में फिलहाल कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रींगस जंक्शन ही प्रमुख पड़ाव है। यहां से खाटूधाम की दूरी लगभग 17 किलोमीटर है, जिसे यात्री सड़क मार्ग, निजी वाहनों, ई-रिक्शा या पैदल यात्रा के जरिए पूरा करते हैं।

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में खाटूश्यामजी से करीब 11 किलोमीटर दूर सुंदपुरा गांव में नया रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की है। इसके बाद भविष्य में भक्तों को खाटूधाम पहुंचने के लिए एक और नजदीकी विकल्प मिलेगा, जिससे रींगस स्टेशन पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

  • स्टेशन मास्टर बनेंगे हाईटेक, निर्णय क्षमता से लेकर यात्री सेवाओं तक होगा बड़ा बदलाव; अश्विनी वैष्णव ने दिए व्यापक सुधारों के संकेत

    स्टेशन मास्टर बनेंगे हाईटेक, निर्णय क्षमता से लेकर यात्री सेवाओं तक होगा बड़ा बदलाव; अश्विनी वैष्णव ने दिए व्यापक सुधारों के संकेत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे में परिचालन दक्षता बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्टेशन मास्टरों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे प्रशासन अब पारंपरिक प्रशिक्षण प्रणाली से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी क्रम में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्टेशन मास्टरों की कार्यक्षमता, प्रशिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक के दौरान रेलवे संचालन की बदलती जरूरतों और बढ़ती तकनीकी जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक आधुनिक और व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए वर्चुअल रियलिटी, उन्नत सिमुलेटर और डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे आधुनिक साधनों को प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल करने के प्रस्तावों पर विचार किया गया। माना जा रहा है कि इन तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों को वास्तविक परिस्थितियों जैसे अनुभव प्रदान किए जा सकेंगे, जिससे वे आपातकालीन स्थितियों और जटिल परिचालन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।

    रेलवे नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और यात्री संख्या के साथ-साथ माल परिवहन गतिविधियों में भी वृद्धि हो रही है। ऐसे में स्टेशन मास्टरों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक स्तर तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में पहल की जा रही है।

    समीक्षा बैठक में स्टेशन संचालन को डिजिटल बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। मोबाइल एप आधारित पेपरलेस वर्किंग सिस्टम और इंटीग्रेटेड स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, कार्य प्रक्रियाओं को तेज बनाना तथा यात्रियों से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।

    बैठक में स्टेशन मास्टरों को अधिक प्रशासनिक और परिचालन अधिकार प्रदान करने से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। रेलवे का मानना है कि स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान बिना अनावश्यक देरी के किया जा सकेगा। इसके अलावा स्टेशन की आधारभूत संरचना, कर्मचारी सुविधाओं, रेलवे कॉलोनियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।

    रेल मंत्रालय ने स्टेशन मास्टरों के कैरियर विकास और पदोन्नति के अवसरों को लेकर भी गंभीरता दिखाई है। चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि योग्य और अनुभवी अधिकारियों को प्रबंधन के उच्च पदों तक पहुंचने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। इससे कर्मचारियों में प्रेरणा बढ़ेगी और संगठनात्मक कार्य संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।

    उच्च यातायात वाले रेलखंडों और बहु-लाइन स्टेशनों पर अतिरिक्त स्टेशन मास्टरों की आवश्यकता का भी आकलन किया गया। बढ़ते रेल संचालन को देखते हुए कई स्थानों पर कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा रिक्त पदों को शीघ्र भरने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही स्टेशन मास्टरों के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि, सुरक्षा उपकरणों के उन्नयन और कार्यस्थल को अधिक सुविधाजनक बनाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर तकनीकी संसाधन, बढ़े हुए अधिकार और उन्नत कार्य वातावरण स्टेशन मास्टरों को अधिक सक्षम बनाएंगे। इससे न केवल रेलवे संचालन की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित, सुगम और संतोषजनक सेवाएं प्राप्त होंगी। आने वाले समय में यह पहल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

  • राजस्थान में रेलवे विकास को मिली रिकॉर्ड रफ्तार, 600 करोड़ से 10,228 करोड़ पहुंचा बजट, स्टेशनों और कनेक्टिविटी पर बड़ा फोकस

    राजस्थान में रेलवे विकास को मिली रिकॉर्ड रफ्तार, 600 करोड़ से 10,228 करोड़ पहुंचा बजट, स्टेशनों और कनेक्टिविटी पर बड़ा फोकस

    नई दिल्ली । राजस्थान में रेलवे और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े निवेश और नई परियोजनाओं पर जोर देने की बात कही है। राज्य में रेलवे सुविधाओं के विस्तार, स्टेशनों के आधुनिकीकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी राज्य को लाभ होगा।

    राजस्थान देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है और यहां रेलवे नेटवर्क का विस्तार लंबे समय से विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है। सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में रेलवे क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में कई गुना वृद्धि हुई है। इसका असर नई रेल परियोजनाओं, ट्रैक उन्नयन, स्टेशन विकास और यात्री सुविधाओं के विस्तार के रूप में दिखाई दे रहा है।

    राज्य के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों पर विभिन्न स्तरों पर आधुनिकीकरण का कार्य चल रहा है। कई स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने, लंबाई विस्तार, यात्री प्रतीक्षालय, शेड और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम तेज गति से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

    रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यक्रम के तहत राजस्थान के कई प्रमुख और मध्यम श्रेणी के स्टेशनों को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्टेशनों को आधुनिक डिज़ाइन, बेहतर यात्री सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं से लैस करने की योजना पर काम जारी है। इससे रेलवे परिसरों का स्वरूप बदलने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    रेल सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न शहरों को जोड़ने वाली नई ट्रेनों के संचालन और मौजूदा सेवाओं के विस्तार से यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिल सके।

    राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर भी सरकार विशेष रणनीति पर काम कर रही है। सीमा से जुड़े इलाकों में बेहतर रेलवे और परिवहन नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे स्थानीय निवासियों को लाभ मिलने के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी क्षेत्र की मजबूती बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत बुनियादी ढांचा आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को गति देता है।

    रेलवे विकास के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में भी राजस्थान को नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। इससे युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल प्राप्त करने और भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होने में मदद मिलेगी।

    डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के तहत डेटा सेंटर और तकनीकी निवेश को भी बढ़ावा देने की योजना है। इससे राजस्थान में तकनीकी उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा और नए निवेश आकर्षित होने की संभावना बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे, डिजिटल तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे में समानांतर निवेश राज्य के समग्र विकास को नई दिशा दे सकता है।

    आने वाले वर्षों में यदि घोषित परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं तो राजस्थान परिवहन, तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। बढ़ता निवेश, आधुनिक सुविधाएं और नई तकनीकों पर फोकस राज्य के विकास मॉडल को नई गति देने की क्षमता रखते हैं।

  • 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल

    नई दिल्ली । देश में एलपीजी आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। गैस आधारित कुकिंग पर निर्भरता कम करते हुए अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर बड़े स्तर पर बिजली से संचालित इंडक्शन कुकिंग सिस्टम को अपनाया जा रहा है।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण भोजन तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सेवाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसके लिए वैकल्पिक कुकिंग मॉडल लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत खाना गैस की बजाय इंडक्शन स्टोव और अन्य विद्युत उपकरणों की मदद से तैयार किया जा रहा है।

    भारतीय रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराता है। देशभर में संचालित बड़ी संख्या में ट्रेनों में खानपान सेवाएं दी जाती हैं और प्रतिदिन लगभग 17 लाख यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। इतने बड़े स्तर की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निरंतर ईंधन आपूर्ति आवश्यक होती है। एलपीजी संकट के बीच रेलवे ने समय रहते वैकल्पिक उपायों को लागू कर परिचालन पर असर पड़ने से बचाने की कोशिश की है।

    रेलवे प्रशासन ने बताया कि एलएचबी पैंट्री कारों में पहले से मौजूद आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं और बेहतर विद्युत प्रणाली को देखते हुए वहां इंडक्शन आधारित खाना पकाने की अनुमति दी गई है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रमुख ट्रेनों में उपयोग किए जाने वाले एलएचबी कोच इस तकनीक के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। इसके कारण चलती ट्रेनों में भी सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भोजन तैयार किया जा सकेगा।

    केवल ट्रेनों तक ही नहीं, बल्कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी बिजली आधारित कुकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न स्टेशन परिसरों में स्थापित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को इंडक्शन कुकर तथा माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भोजन उत्पादन क्षमता बनाए रखने के साथ-साथ गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

    रेलवे से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में रेलवे की बड़ी भोजन उत्पादन प्रणाली स्थायी रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल की ओर बढ़ सकती है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आने वाले समय में लगभग 60 प्रतिशत भोजन तैयारी बिजली आधारित तकनीक पर स्थानांतरित की जा सकती है। इससे ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण होगा और ईंधन आपूर्ति संबंधी जोखिम भी कम होंगे।

    रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था के लिए देशभर में संचालित क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य भोजन उत्पादन केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने के कारण रेलवे ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय भी मजबूत किया है ताकि आवश्यक गैस सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन आधारित कुकिंग न केवल आपूर्ति संकट के समय उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है, बल्कि यह ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता के लिहाज से भी लाभकारी है। रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य की चुनौतियों के बीच सार्वजनिक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • यात्रियों को ट्रेनों में मिलेगी मुफ्त चाय-नाश्ता, खाना व अन्य सुविधाएं… रेलवे ला रहा नई स्कीम

    यात्रियों को ट्रेनों में मिलेगी मुफ्त चाय-नाश्ता, खाना व अन्य सुविधाएं… रेलवे ला रहा नई स्कीम

    Rail

    नई दिल्ली। रेलवे (Railway) यात्रियों (Passengers) को ट्रेनों में मुफ्त चाय-नाश्ता, खाना, नीचे की बर्थ, लग्जरी लॉउंज जैसी विशेष सुविधाएं देगा। यह कदम बजट एयरलाइंस (Budget Airlines) की ओर आकर्षित हो रहे यात्रियों को अपने साथ बनाए रखने की रणानीतिक दूरगामी सोच है। रेलवे लॉयलिटी प्रोग्राम (Railway Loyalty Programme) शुरू करने जा रहा है। इसमें अक्सर ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को प्रति किमी. के हिसाब से रिवॉर्ड प्वाइंट्स दिए जाएंगे। इन्हें वह खानपान से लेकर किराये में कहीं भी कैश करा सकेंगे।

    रेलवे बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आईआरसीटीसी पोर्टल को डिजिटल वॉलेट की तरह अपडेट किया जाएगा। यात्री जितनी लंबी दूरी तय करेगा, उतने अधिक रेल प्वाइंट्स उसे मिलेंगे। प्वाइंट्स यात्री के आधार-लिंक्ड आईआरसीटीसी खाते में जमा होंगे, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश शून्य रहेगी। प्वाइंट्स को कैश की तरह प्रयोग किया जा सकेगा। इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अप्रैल से वंदे भारत व तेजस एक्सप्रेस प्रीमियम ट्रेनों में शुरू किया जा सकता है। सफल होने के बाद सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में लागू किया जाएगा।

    रेलवे का दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लॉयल्टी प्रोग्राम होगा। इसमें 7000 से अधिक रेलवे स्टेशन, साढ़े तीन हजार किमी. दूरी की ट्रेनें और प्रतिदिन तीन करोड़ यात्रियों को शामिल किया जाएगा।


    रिवॉर्ड प्वाइंट्स के कई लाभ

    यात्री को टिकट बुकिंग के समय बेस किराये में छूट मिलेगी। या प्वाइंट्स के आधार पर पूरी टिकट मुफ्त में मिलेगी। सफर के दौरान रेलवे स्टेशन के लग्जरी लाउंज में भी मुफ्त आराम कर सकेंगे। ई-कैटरिंग से ऑर्डर कर ट्रेन में पसंद का मुफ्त भोजन मंगा सकेंगे। थर्ड एसी से सेकेंड एसी और सेकेंड एसी से फर्स्ट एसी में टिकट अपग्रेड करने की सुविधा मिलेगी।


    बजट एयरलाइंस चुनौती

    लॉयलिटी प्रोगाम बजट एयरलाइंस से मिल रही चुनौती के बीच रेलवे के लिए वरदान साबित होगा। छोटी दूरी की फ्लाइट्स और लग्जरी बसों की ओर बढ़ते यात्रियों को वापस ट्रेनों में लाया जा सकेगा। इसके अलावा ऑफ सीजन बुकिंग के दौरान रेलवे प्वाइंट्स की वैल्यू बढ़ा सकती है, ताकि सीटें खाली न रहें।

  • मप्र को नई रेल और रेल सुविधाओं की मिल रही है निरंतर सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मप्र को नई रेल और रेल सुविधाओं की मिल रही है निरंतर सौगात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश को नई रेलों और रेल सुविधाओं की निरंतर सौगात मिल रही है। राजधानी भोपाल से ऊर्जा राजधानी सिंगरौली तक सप्ताह के सातों दिन सीधी रेल की सुविधा प्रारंभ हो रही है, जो मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के यात्रियों के लिये भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार की रात भोपाल के मुख्य रेलवे स्टेशन से भोपाल-धनबाद-चौपन एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन सीधी-सिंगरौली तक, तीन दिन धनबाद तक और एक दिन चौपन तक जाएगी। इस ट्रेन का रूट बीना-सागर-मुड़वारा होकर रहेगा।


    प्रदेश में निरंतर बढ़ रही रेल सुविधाएं, नई रेल भविष्य के विकास का नया रास्ता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कैबिनेट ने जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। इसके पहले मध्य प्रदेश को इंदौर-मनमाड रेल लाइन सहित सिंहस्थ के दृष्टिगत अनेक सौगातें मिली हैं। वंदे भारत और मेट्रो ट्रेन की स्पीड भी बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में विदेशों की तरह आधुनिक रेल सुविधाएं विकसित हो रही हैं। रेल बजट में भी 24 गुना अधिक बजट मिला है। छह अमृत भारत स्टेशन कटनी साउथ, नर्मदापुरम ओरछा, सिवनी शाजापुर और श्रीधाम के पुनर्विकास का कार्य हो रहा है। प्रदेश के 80 स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है। करीब पौने तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं का लाभ यात्रियों को दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज के दिन को भी यादगार बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के पिछड़े माने गये सीधी-सिंगरौली क्षेत्र को भोपाल से प्रतिदिन की रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल रहा है। यह ट्रेन सातों दिन चलेगी, भले गंतव्य तीन हों। यह युक्ति और बुद्धि का खेल ही नहीं बल्कि भविष्य के विकास का नया रास्ता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नई ट्रेन से राज्यों के पर्यटन विकास में सहयोग मिलेगा। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। धनबाद तक जाने वाली त्रि-साप्ताहिक ट्रेन 30 स्टेशनों को और चौपन तक जाने वाली साप्ताहिक ट्रेन 15 प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी। व्यापार, खनन और उद्योग क्षेत्र को नई गति मिलेगी।


    रेल लाइन का दोहरीकरण विकास में होगा सहायक, महाकौशल क्षेत्र का महत्व बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि जबलपुर से गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण के व्यापक फायदों की चर्चा करें तो पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दृष्टि से प्रभाव दिखाई देंगे। वन क्षेत्र जहां कभी नक्सलवाद का ग्रहण लगा था, वहां सुगम यातायात सुविधा से विकास को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि एक समय नक्सलवादियों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सरेआम हत्या कर लोकतंत्र को लजाया था। अनेक वर्ष ऐसी घटनाओं पर सभी मौन रहते थे। प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छा शक्ति से दरिंदगों से निपटने का कार्य किया गया है। मध्य प्रदेश में केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्धारित डेड लाइन के पहले नक्सली समाप्त किये गये। महाकौशल क्षेत्र का महत्व दिनोंदिन बढ़ता जायेगा।

    बहुप्रतिक्षित थी भोपाल से सीधी-सिंगरौली के लिये सीधी रेल सुविधा: वैष्णव

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात से भोपाल से सीधी-सिंगरौली क्षेत्र तक रेल सुविधा की मांग चल रही थी। मध्य प्रदेश में रेल सुविधाओं का विस्तार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्य प्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिये निरंतर ध्यान आकर्षित करते हैं। आने वाले समय में मध्य प्रदेश की तीव्र औद्योगिक विकास में नई रेल सुविधाएं उपयोगी सिद्ध होंगी, जहां 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की इंदौर-मनमाड रेल लाइन अर्थव्यवस्था बदलेगी, वहीं 5200 करोड़ लागत से जबलपुर-गोदिंया रेल लाइन का दोहरीकरण कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जल प्रपात और अन्य स्थानों के पर्यटन महत्व में वृद्धि करेगा। नागरिकों को समृद्धि का भरपूर लाभ मिलेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी के विजन से फ्रेट कॉरिडोर का क्रियान्वयन
    केन्द्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि दानकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 2 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई का रेल प्रोजेक्ट है जो पश्चिम बंगाल से गुजरात को जोड़ेगा। इस वर्ष के बजट के बाद इस पर तेजी से कार्य प्रारंभ हो गया है। देश का पश्चिम क्षेत्र भी मध्य प्रदेश से बेहतर कनेक्ट होगा, यह प्रधानमंत्री जी का विजन है। हजीरा सहित अन्य पोर्ट विकसित होंगे। नये पोर्ट भी बनेंगे। औद्योगिक प्रगति की दृष्टि से मध्य प्रदेश के उद्योगों को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। मध्य प्रदेश इस प्रोजेक्ट से लाभांवित होगा। आयात-निर्यात भी आसान होगा।

    वैष्णव ने कहा कि मालगाड़ियों की गति बढ़ाने, मौजूदा लाइनों से भीड़ कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने के उद्देश्य से क्रियान्वित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट पर वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव से विस्तृत चर्चा के लिये मध्य प्रदेश आयेंगे। रेल मंत्री ने मध्य प्रदेश के लिये उपयोगी करीब 48 हजार करोड़ लागत की रेल परियोजनाओं की जानकारी भी दी।

    कार्यक्रम को भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा व राजेन्द्र शुक्ल, राज्य मंत्री कृष्णा गौर ल राधा सिंह, सांसद राजेश मिश्रा, विधायक कुंवर सिंह टेकाम, शरद कोल, विश्वमित्र पाठक, भोपाल के अनेक जनप्रतिनिधि और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रारंभ में भोपाल रेल मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल प्रबंधक पंकज त्यागी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और सभी अतिथियों का स्वागत किया।

  • रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में किया बदलाव… कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ी

    रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में किया बदलाव… कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ी


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने तत्काल टिकट बुकिंग की प्रक्रिया (Tatkal Ticket Booking Process) को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अपनी तकनीक और नियमों को पूरी तरह अपडेट कर दिया है। पिछले कई वर्षों से यात्रियों की शिकायत थी कि बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में टिकट खत्म हो जाते हैं। रेलवे का दावा है कि नए सिस्टम (New Systems) से अब वास्तविक यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

    नए नियमों के तहत अब केवल पूरी तरह सत्यापित IRCTC अकाउंट से ही तत्काल टिकट बुक किए जा सकेंगे। अब यात्रियों को अपना IRCTC अकाउंट आधार कार्ड से लिंक करना होगा। बिना वेरिफिकेशन वाले या अधूरे प्रोफाइल वाले अकाउंट्स को तत्काल विंडो के दौरान ब्लॉक कर दिया जाएगा। बुकिंग के समय यात्री को वही पहचान विवरण देना होगा जो उसके आधार या सरकारी आईडी से जुड़ा है। इससे फर्जी नामों से टिकट बुक करने और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

    रेलवे ने इस बार तकनीक के मोर्चे पर भी बड़े बदलाव किए हैं। बुकिंग के शुरुआती मिनटों में ऑटो-फिल टूल्स और स्क्रिप्ट्स को रोकने के लिए ‘सोफिस्टिकेटेड टेक्निकल फिल्टर्स’ लगाए गए हैं। इससे अब सॉफ्टवेयर के जरिए पलक झपकते ही टिकट उड़ा लेना मुमकिन नहीं होगा। यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत पेमेंट फेल होने की रहती थी। नए सिस्टम में पेमेंट गेटवे को और अधिक फास्ट और सुरक्षित बनाया गया है, जिससे आखिरी स्टेप पर टिकट कैंसिल होने का डर कम होगा।

    तत्काल विंडो खुलते ही शुरुआती समय में एजेंटों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। उनके लिए नए प्रतिबंध और ट्रैकिंग टूल्स लागू किए गए हैं ताकि आम जनता को प्राथमिकता मिल सके।


    यात्रियों के लिए क्या बदला?

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि आपका प्रोफाइल पहले से अपडेटेड और आधार से लिंक है, तो आपको कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना पिछले वर्षों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बुकिंग समय से पहले अपना इंटरनेट कनेक्शन और प्रोफाइल की स्थिति जांच लें।

    2026 के ये नए नियम रेलवे बुकिंग में पारदर्शिता बहाल करने और सिस्टम पर लोगों का भरोसा फिर से जगाने की एक कोशिश है। तकनीकी सुधार और अनिवार्य पहचान सत्यापन के माध्यम से रेलवे ने दलालों और सॉफ्टवेयर के अवैध इस्तेमाल पर सीधा हमला किया है।

  • इतने घंटे पहले ट्रेन के कंफर्म टिकट को रद्द कराने पर नहीं मिलेगा रिफंड… रेलवे ने बदला नियम

    इतने घंटे पहले ट्रेन के कंफर्म टिकट को रद्द कराने पर नहीं मिलेगा रिफंड… रेलवे ने बदला नियम


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपने नियमों में बड़े बदलाव (Big changes) किए हैं। इसके मुताबिक अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस (Vande Bharat Sleeper Express) और अमृत भारत (Amrit Bharat) 2 ट्रेनों के यात्री अगर निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से पहले, अपने कंफर्म टिकट (Confirmed Ticket) रद्द करते हैं तो उन्हें एक भी पैसा वापस नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, इन ट्रेनों के टिकट रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा, बशर्ते कि ‘कंफर्म’ टिकट 72 घंटे से पहले रद्द किए जाएं।

    मंत्रालय ने रेल यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया है और वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के साथ-साथ अमृत भारत 2 ट्रेनों के लिए सख्त नियमों को अधिसूचित किया है। अधिसूचना के अनुसार, ‘‘अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो कोई रकम वापस नहीं दी जाएगी।’’ वहीं अन्य ट्रेनों के मामले में, अगर कंफर्म टिकट निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे से कम समय पहले रद्द किए जाते हैं, तो रिफंड के पात्र नहीं होंगे।

    अधिसूचना के मुताबिक, ‘‘अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से पहले टिकट रद्द किया जाता है, तो रद्द करने का शुल्क किराए का 25 प्रतिशत होगा। वहीं अगर ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 72 घंटे से लेकर आठ घंटे पहले तक टिकट रद्द किया जाता है तो इसका शुल्क किराये का 50 प्रतिशत होगा।’’ अन्य ट्रेनों के लिए, अगर कंफर्म टिकट को निर्धारित प्रस्थान समय से 48 घंटे से 12 घंटे पहले रद्द किया जाता है तो किराये का 25 प्रतिशत नहीं लौटाया जाता है, जबकि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 12 घंटे से 4 घंटे पहले टिकट रद्द किया जाता है तो 50 प्रतिशत शुल्क लागू होता है।

    संशोधित नियमों के बारे में बताते हुए रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि टिकट कंफर्म होने के बाद, इसे रद्द करने का न्यूनतम शुल्क टिकट की कीमत का 25 प्रतिशत है और यह अवधि के आधार पर 100 प्रतिशत तक जा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत 2 में, अन्य ट्रेनों के विपरीत, प्रत्येक यात्री को एक निश्चित बर्थ की गारंटी दी जाती है। अन्य ट्रेनों में, अगर छह सदस्यों के एक परिवार को केवल तीन निश्चित बर्थ (सीट) मिलती हैं, तो शेष तीन सदस्यों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है और उन्हें अन्य परिवार के सदस्यों के साथ बर्थ साझा करनी पड़ती है। वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत 2 में, ऐसे परिवार को या तो छह निश्चित बर्थ मिलेंगी या एक भी नहीं।’’

    अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 2026 में शुरू होने वाली अमृत भारत ट्रेन का नाम अमृत भारत 2 रखा गया है और ये आरक्षण और रद्द करने के नियम उन पर भी लागू होंगे। इससे पहले रेलवे द्वारा 15 जनवरी 2025 को जारी एक परिपत्र में कहा गया था कि जनवरी 2026 या उसके बाद शुरू की जाने वाली अमृत भारत ट्रेन को अमृत भारत 2 के नाम से जाना जाएगा।

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।

  • नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत

    नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत


    नई दिल्ली । नया साल 2026 आपके लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों और राहतों के साथ आ रहा है। इन बदलावों से आम आदमी की जिंदगी में राहत मिलेगी खासकर सीएनजी और पीएनजी के दामों में कटौती रेलवे रिजर्वेशन में नए नियम और राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए राहत।
    सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती
    1 जनवरी 2026 से संपीडित प्राकृतिक गैस CNG और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस PNG के दामों में कटौती हो सकती है। सीएनजी की कीमतें दो से ढाई रुपये तक घट सकती हैं जबकि पीएनजी के दाम में करीब दो रुपये तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड PNGRB ने गैस के परिवहन शुल्क को सरल और तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है। पहले यह शुल्क दूरी के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा गया था अब इसे दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इससे 40 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और 312 भौगोलिक क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।यह परिवर्तन गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आएगा और उनकी जीवनशैली को और भी किफायती बनाएगा।
    रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव
    रेलवे बोर्ड ने रिजर्वेशन चार्ट बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट 10 से 12 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों को यह जानने में आसानी होगी कि उनका टिकट कंफर्म हुआ है या नहीं खासकर दूरदराज क्षेत्रों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बहुत सहूलियतपूर्ण रहेगा। पहले ट्रेन खुलने से चार घंटे पहले रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था अब सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक की ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट एक दिन पहले रात 8 बजे तैयार किया जाएगा। यह बदलाव यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा खासकर यात्रा की प्लानिंग को लेकर।
    NPS निवेशकों के लिए राहत
    पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब गैर सरकारी NPS खाताधारकों को पेंशन प्लान एन्युटी में सिर्फ 20 फीसदी राशि निवेश करनी होगी। शेष 80 फीसदी राशि को एकमुश्त या किश्तों में निकाला जा सकेगा। यह नियम 15 साल NPS में निवेश करने वालों और 60 वर्ष की उम्र पार करने या रिटायर होने वाले निवेशकों के लिए लागू होगा। पहले के नियमों के तहत निवेशक को 40 फीसदी राशि पेंशन प्लान में डालने की बाध्यता थी लेकिन अब 20 फीसदी राशि से काम चल जाएगा।
    इसके अलावा 8 लाख रुपये तक की कुल राशि पर पूरी निकासी की अनुमति दी जाएगी। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुराने नियम लागू रहेंगे। 2026 का नया साल देशवासियों के लिए खुशखबरी लेकर आ रहा है। गैस की कीमतों में कमी रेलवे के रिजर्वेशन चार्ट में बदलाव और NPS निवेशकों के लिए नए नियम ये सभी बदलाव आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होंगे। इस साल का आगमन नए अवसर और सस्ती सेवाओं के साथ होगा जिससे लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा।