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  • बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए

    बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए


    भोपाल । भोपाल में बारिश के साथ जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आ गई है। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जलभराव वाले 35 स्थानों को चिह्नित कर नगर निगम पीडब्ल्यूडी और दूसरी संबंधित एजेंसियों को इनकी सूची भेजी थी। इन जगहों पर जलभराव की वजह तलाशने के साथ जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने 17 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया। कहीं नालों की सफाई और मरम्मत कराई गई तो कहीं सड़क का लेवल ठीक किया गया। कुछ स्थानों पर गड्ढे भरने और सीसी रोड बनाने का काम भी किया गया। लेकिन इस बार बारिश ने इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।

    बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।

    इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।

    ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।

    बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

    ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 4.2 इंच वर्षा नर्मदापुरम में रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल सहित कई शहरों में पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले 24 से 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम के अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच तथा खरगोन में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर सहित कई जिलों में भी तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला।

    लगातार बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद एक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में खेत पानी से लबालब भर गए हैं। कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर मजबूत हो गया है। प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र, लगातार बादलों की मौजूदगी और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी बारिश को लगातार बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी वर्षा हो रही है।

    बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। सुबह और रात के समय मौसम काफी सुहावना हो गया है तथा लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वातावरण में सापेक्षिक आर्द्रता 75 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है और वर्षा की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यही हवाएं समुद्र से नमी लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंच रही हैं और मानसून को लगातार मजबूत बनाए हुए हैं।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल तथा आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच अब मौसम कुछ राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा और कहीं भी अत्यधिक वर्षा की संभावना नहीं है। हालांकि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी क्योंकि अगले सप्ताह एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के साथ ही कई जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसी वजह से ग्यारह जुलाई से तेरह जुलाई तक अधिकांश जिलों में रुक रुक कर हल्की बारिश होने का अनुमान है। शनिवार को भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी जिलों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। चौदह जुलाई से कई जिलों में फिर तेज बारिश की संभावना बन रही है। यदि नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेज बारिश का रुकना खरीफ फसलों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया था जिससे फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब हल्की बारिश और मौसम में संतुलन रहने से फसलों को बेहतर बढ़वार मिलने की उम्मीद है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक लगभग नौ दशमलव पांच इंच बारिश हो चुकी है जो सामान्य से अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है जबकि पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    प्रदेश के लगभग तीस जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास हरदा उज्जैन रतलाम राजगढ़ सीहोर शाजापुर ग्वालियर गुना खंडवा खरगोन और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। वहीं अनूपपुर बालाघाट जबलपुर कटनी रीवा सतना सागर और शहडोल सहित कई जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है।

    देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है जहां अब तक करीब अठारह इंच पानी गिर चुका है। वहीं इंदौर और सीहोर में चौदह इंच से अधिक तथा भोपाल में तेरह इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर आलीराजपुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल लगभग सवा दो इंच वर्षा हुई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसूनी महीना माना जाता है क्योंकि सामान्य तौर पर पूरे सीजन की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में अगले कुछ दिनों का मौसम किसानों और आम लोगों दोनों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।

  • शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम

    शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम


    इंदौर  इंदौर में मानसून की दस्तक के बावजूद बारिश की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है। जून का महीना समाप्ति की ओर है लेकिन अब तक शहर में करीब 4 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। अच्छी बारिश का आखिरी दौर 24 जून को देखने को मिला था जब शहर के अलग अलग हिस्सों में आधा इंच से लेकर करीब 2 इंच तक पानी बरसा था। इसके बाद मौसम में लगातार बदलाव तो देखने को मिला लेकिन तेज बारिश नहीं हो सकी।

    पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद आसमान में बादल छा रहे हैं और बारिश जैसे हालात बन रहे हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी या रिमझिम तक ही मौसम सीमित रह गया। मंगलवार सुबह भी धूप और बादलों की आवाजाही का सिलसिला जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार शाम के समय हल्की बारिश होने की संभावना है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

    कम बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले सात दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है जो सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है। वहीं रात का तापमान भी लगातार 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण दिन में उमस और रात में गर्मी लोगों को परेशान कर रही है।

    इस वर्ष 24 जून को मध्य प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था और इंदौर सहित प्रदेश के 15 जिलों में इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह आगे बढ़ने के बजाय एक क्षेत्र में ही ठहर गया। इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दोबारा सक्रिय होकर आगे बढ़ने के बाद ही व्यापक वर्षा का दौर शुरू होगा।

    बारिश की कमी का असर केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के उत्तरी क्षेत्रों खासकर ग्वालियर चंबल सागर और रीवा संभाग में भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। इन इलाकों में भी लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

    यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून के महीने में इंदौर में तापमान में अच्छी गिरावट देखने को मिलती रही है और औसतन पर्याप्त वर्षा भी दर्ज होती रही है। पिछले वर्ष जून में शहर में लगभग साढ़े पांच इंच बारिश हुई थी जबकि वर्ष 1980 में जून के महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना था। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में करीब 5 इंच बारिश दर्ज की गई थी जो आज भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि मानसून सक्रिय होता है तो बारिश की रफ्तार तेज हो सकती है। फिलहाल शहरवासियों को हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

  • मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: बालाघाट और डिंडौरी में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर में धूप

    मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: बालाघाट और डिंडौरी में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर में धूप


    मध्य प्रदेश में मंगलवार को भी मौसम ने अपना मूड बदला रखा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। बालाघाट, मंडला, अनूपपुर, सिवनी और डिंडौरी में पानी गिरने की संभावना जताई गई है। दक्षिणी हिस्से में लो प्रेशर एरिया सक्रिय होने के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं, राजधानी भोपाल और इंदौर में धूप खिली रहेगी, जिससे मौसम में स्थानीय अंतर बना हुआ है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में लो प्रेशर एरिया एक्टिव है। इसके साथ ही दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में दो ट्रफ भी सक्रिय हैं। इन सक्रियताओं के चलते प्रदेश के इन हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है और लोगों को पानी गिरने की संभावना के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    सोमवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिली थी। दोपहर में जबलपुर, सीधी और रीवा में बारिश हुई, जबकि रात में ग्वालियर, सीधी, सिंगरौली, सागर, मऊगंज, मुरैना, बड़वानी, रीवा, धार, खरगोन, दमोह और दतिया में गरज-चमक के साथ पानी गिरा।

    बारिश के चलते प्रदेश में दिन का तापमान भी गिरा है। वहीं, रात का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक दर्ज किया गया। रविवार और सोमवार की रात के आंकड़ों के अनुसार पचमढ़ी में सबसे कम 11.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मंदसौर में रात का तापमान 11.7 डिग्री और राजगढ़ में 12.4 डिग्री दर्ज हुआ।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में धूप खिलने से स्थानीय लोगों को हल्की गर्मी का अनुभव हो सकता है।

    इस प्रकार, मध्य प्रदेश में मंगलवार को मौसम ने बारिश और धूप दोनों का मिश्रित प्रभाव दिखाया। प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश की संभावना के बीच राजधानी और पश्चिमी शहरों में धूप का आनंद लिया जा सकेगा, जबकि तापमान में गिरावट और बढ़त के कारण दिन और रात का अंतर स्पष्ट रूप से महसूस होगा।