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  • देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन

    देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन


    नई दिल्ली।
    देश में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी पड़ने से 27 जून तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) का कहना है कि इस बार अल नीनो के साथ इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole- IOD) भी न्यूट्रल स्थिति में है, जिससे मानसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना कम हो गई है. कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है. हालांकि IMD को उम्मीद है कि अगले महीने मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने पर कुछ सुधार संभव है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सूखे की आधिकारिक घोषणा जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही तो कई राज्यों में हालात गंभीर हो सकते हैं. अल नीनो की सक्रियता पहले से ही मानसून को कमजोर कर रही है और न्यूट्रल IOD के कारण उसे अतिरिक्त ताकत नहीं मिल रही. यही वजह है कि वैज्ञानिक पूरे मानसून सीजन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले कुछ सप्ताह खेती और जल संसाधनों दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले दो बड़े कारक अल नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) हैं. अल नीनो सक्रिय (El Nino Affect) होने पर सामान्य तौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है. यदि उसी समय पॉजिटिव IOD मौजूद हो तो वह बारिश की कमी की भरपाई करने में मदद करता है. लेकिन इस बार हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD की स्थिति बनी हुई है. इसका मतलब है कि यह मानसून को न तो मजबूत करेगा और न ही कमजोर, जिससे अल नीनो का असर ज्यादा प्रभावी दिखाई दे सकता है।

    1 जून से 27 जून के बीच देशभर में 43 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. कई राज्यों में हालात और ज्यादा खराब हैं. मेघालय में 82 प्रतिशत, गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत तक बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई है. मध्य प्रदेश में भी 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो खेती के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।

    देश के चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही है. मध्य भारत में सबसे अधिक 57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. इसके बाद पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में मानसून पहुंचने के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।

    दिल्ली में भी उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शनिवार को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन अधिक आर्द्रता के कारण ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्तर भारत में उमस और गर्मी का असर कुछ दिन और बना रह सकता है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी है और जुलाई में पूरे देश में मानसून के फैलने के बाद बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना है. हालांकि अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए विभाग ने पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश ही तय करेगी कि यह मानसून सामान्य रहेगा या फिर देश को सूखे जैसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

    फिलहाल वैज्ञानिक लगातार मौसम के वैश्विक संकेतकों पर नजर रख रहे हैं. यदि अल नीनो लंबे समय तक प्रभावी रहा और IOD न्यूट्रल ही बना रहा तो कई राज्यों में खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि अंतिम तस्वीर पूरे मानसून सीजन के समाप्त होने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल किसानों और आम लोगों दोनों की नजर अब जुलाई की बारिश पर टिकी हुई है।

  • 26 जून आज का मौसम अपडेट: 21 राज्यों में बारिश-आंधी का बड़ा अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की चेतावनी जारी

    26 जून आज का मौसम अपडेट: 21 राज्यों में बारिश-आंधी का बड़ा अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की चेतावनी जारी

    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से जारी भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम ने अब करवट लेना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने 26 जून के लिए व्यापक वर्षा, तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी वर्षा के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण के कई हिस्सों में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण वर्षा गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी। निचले वायुमंडलीय स्तरों पर बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में विकसित मौसमीय परिस्थितियां इस बदलाव की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इन प्रणालियों के प्रभाव से कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है।

    पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तराखंड सहित अनेक राज्यों में वर्षा गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के झोंके 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकते हैं। इसके चलते लोगों को खुले स्थानों, कमजोर संरचनाओं और बड़े पेड़ों के आसपास सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं और भारी बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। खेतों में काम करने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली गिरने की घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी अपनाने को कहा गया है।

    दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी मौसम के बदलने के संकेत हैं। यहां हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी वर्षा और आंधी का प्रभाव देखने को मिल सकता है। पूर्वी भारत के राज्यों में बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई गई है।

    राजस्थान और मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों के सक्रिय होने से कई जिलों में बारिश की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने का अनुमान है। इससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।

    पर्वतीय राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी मौसम सक्रिय रहने वाला है। इन क्षेत्रों में वर्षा के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है, क्योंकि कुछ स्थानों पर भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा गतिविधियों में यह वृद्धि मानसून के आगे बढ़ने का संकेत है। इससे देश के कई हिस्सों में लंबे समय से बनी गर्मी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। हालांकि जहां एक ओर बारिश राहत लेकर आएगी, वहीं दूसरी ओर तेज हवाएं, जलभराव और बिजली गिरने जैसी घटनाएं चुनौती भी बन सकती हैं। इसलिए नागरिकों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और आवश्यक सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका है। इसके अलावा नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सतना, सीधी, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून

    आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की घोषणा की जा चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा।

    इस बार सामान्य से कम बारिश के संकेत

    मौसम केंद्र (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच बारिश के मुकाबले 30 से 32 इंच तक वर्षा दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है।

    मानसून की देरी से बारिश में 50 प्रतिशत की कमी

    मानसून के विलंब से पहुंचने के कारण 24 जून तक प्रदेश में सूखे जैसे हालात बने रहे। एक जून से अब तक जहां औसतन 84.8 मिमी (3.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42 मिमी (1.6 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत प्रदेश के 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अधिकांश दिन सूखे गुजरने से प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 34.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

    मानसून में देरी बनी कम बारिश की बड़ी वजह

    प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में मानसून के आगमन की संभावना जताई है। आमतौर पर मानसून के जल्द सक्रिय होने पर तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी आती है।

    हालांकि पूरे जून माह में प्री-मानसूनी गतिविधियां जारी हैं, फिर भी पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इन जिलों में बारिश सामान्य से कम

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

    भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले रहे जहां औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्री-मानसून सक्रिय, कई जिलों में बरसे बादल

    सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार में करीब 2 इंच और भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला।

    पचमढ़ी रहा सबसे ठंडा, दतिया सबसे गर्म

    सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 32.9, सिवनी में 34.2, रायसेन में 35.4 और शाजापुर में 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़-नौगांव और नरसिंहपुर में भी तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का तापमान 34.7 डिग्री, उज्जैन 35 डिग्री, भोपाल 35.2 डिग्री, जबलपुर 36 डिग्री और ग्वालियर 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आज का मौसम: 4 जिलों में लू, 30 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, भोपाल, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर और झाबुआ में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रह सकता है।

  • इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश

    इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश


    नई दिल्ली।
    दक्षिण एशिया (South Asia), विशेषकर भारत (India) के लिए 2026 का मानसून (Monsoon) चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) (World Meteorological Organization -WMO). के अनुसार जून से सितंबर के बीच मानसूनी वर्षा (Monsoon Rain) औसत से कम रह सकती है, जबकि दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घावधि पूर्वानुमान में मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई है। ऐसे में कम बारिश और बढ़ती गर्मी का संयुक्त प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और आम जीवन पर व्यापक दबाव डाल सकता है। मानसून की कमी का सबसे अधिक असर मध्य भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में दिख सकता है, जहां वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है।


    कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना

    हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश संभव है, लेकिन पूरे क्षेत्र में वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है। दक्षिण एशिया में कुल सालाना वर्षा का लगभग 75 से 90 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होता है। ऐसे में इस अवधि में कमी का सीधा असर खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मानसून को लेकर अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान में बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए शुरुआती संकेत अनुकूल नहीं हैं।


    सूखे की आशंका के साथ बाढ़ का भी जोखिम

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 में मानसून का स्वरूप असंतुलित रह सकता है, जिसमें एक ओर लंबे सूखे दौर की संभावना है तो दूसरी ओर कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति बाढ़ का खतरा भी बढ़ा सकती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार दक्षिण एशिया में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। लगातार उच्च तापमान लू की घटनाओं को बढ़ा सकता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे। इसके साथ ही कूलिंग की मांग बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    अल नीनो रहेगा प्रभावी

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर का प्रभाव भी बना हुआ है। यह मार्च से मई के बीच का वह दौर होता है जब समुद्र और वायुमंडल में तेजी से बदलाव होते हैं, जिससे लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक नहीं रह पाते।

  • मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का असर, 20 जिलों में छाया घना कोहरा..

    मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का असर, 20 जिलों में छाया घना कोहरा..


    भोपाल। पिछले चार दिनों से मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवात की वजह से ओले और बारिश का सिलसिला चला। मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर और आसपास के 15 से अधिक जिलों में मौसम ने करवट बदली। कुछ जगह हल्की बारिश और ओले गिरे, तो कुछ जगह बस मौसम में बदलाव महसूस हुआ। बुधवार सुबह लगभग 20 जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर रहा। हालांकि आज बारिश या ओले का कोई अलर्ट नहीं है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में कोहरा छाया रहा।

    अगले दो दिन का मौसम
    5 फरवरी-ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में घना कोहरा रहेगा। भोपाल, गुना, अशोक नगर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, रायसेन, सीहोर, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर, देवास और आसपास के जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा।  6 फरवरी-अधिकांश जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा। इस दिन बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।

    मुरैना में बुधवार सुबह घना कोहरा छाया, जिससे दृश्यता लगभग 50 मीटर रह गई। ठंडी हवाओं के चलते तापमान में गिरावट आई; न्यूनतम 9 डिग्री और अधिकतम 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। फरवरी में पिछले पांच साल में इतना घना कोहरा कम ही देखा गया। एमपी के हिल स्टेशन पचमढ़ी में भी घना कोहरा और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट रही। मौसम सुहावना होने के चलते पर्यटक और स्थानीय लोग ठंडक का आनंद ले रहे हैं।

    भोपाल में हल्का कोहरा देखा गया, लेकिन तेज हवाओं की वजह से ठंडक बनी हुई है। सुबह और शाम को ठंडक अधिक महसूस हो रही है। ग्वालियर में मंगलवार की ओलावृष्टि के बाद बुधवार को घने कोहरे ने शहर को ढक लिया। सुबह 7 बजे तक सड़कें सुनसान रहीं और वाहन चालकों को हाई बीम लाइट जलाकर चलना पड़ा। रीवा में भी विजिबिलिटी 100 मीटर तक गिर गई। मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 5 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसका असर प्रदेश में नजर आएगा। 10 फरवरी तक मावठा गिरने की संभावना है।

    पिछले दिन मंगलवार को ग्वालियर, मंदसौर, भोपाल, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दतिया, मैहर, कटनी, मऊगंज, शिवपुरी, भिंड, राजगढ़, आगर-मालवा, गुना में मौसम में बदलाव देखा गया। कुछ जगह ओले और आकाशीय बिजली गिरी, तो कुछ जगह बारिश और आंधी रही।