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  • विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद

    विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात चर्चा में रही जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से विंध्य विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल ने सौजन्य भेंट की

    मंत्रालय में हुई इस मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने डॉ पटेल को उनके नए दायित्व के लिए आत्मीय बधाई और शुभकामनाएं दी इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण साबित होगी और उनसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा है

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने डॉ पटेल के उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के बल पर विंध्य क्षेत्र में विकास कार्यों को नई दिशा देंगे उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना और हर क्षेत्र को समान रूप से विकसित करना है जिसमें विंध्य अंचल की भूमिका बेहद अहम है

    डॉ अजय सिंह पटेल ने भी इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे उन्होंने विंध्य क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में ठोस काम किया जाएगा

    विंध्य विकास प्राधिकरण क्षेत्र के विकास के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण संस्था है जिसका उद्देश्य विंध्य अंचल में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और विकास योजनाओं को गति देना है इस संस्था के माध्यम से क्षेत्र में सड़कों जल संसाधनों शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं लागू की जाती हैं

    इस मुलाकात को विंध्य क्षेत्र के विकास के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है जहां सरकार और प्राधिकरण मिलकर क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस नई जिम्मेदारी के साथ विंध्य क्षेत्र में विकास की रफ्तार किस तरह आगे बढ़ती है

  • जल गंगा संवर्धन अभियान से शहडोल में जल क्रांति ,पुराने तालाब और स्रोतों को मिल रहा नया जीवन

    जल गंगा संवर्धन अभियान से शहडोल में जल क्रांति ,पुराने तालाब और स्रोतों को मिल रहा नया जीवन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान एक बड़े जनआंदोलन के रूप में उभरता नजर आ रहा है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू इस पहल का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों में जल के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है यही कारण है कि यह अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का उदाहरण बन चुका है

    जिले में इस अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों कुओं और जल संरचनाओं की साफ सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि वर्षा जल का बेहतर संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए प्रशासन के अनुसार यह पहल आने वाले समय में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

    कलेक्टर डॉ केदार सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम प्रजापति के निर्देशन में जिले की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है जल गंगा अभियान के तहत तालाबों की सफाई शोक पिट निर्माण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य जल संरक्षण गतिविधियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है

    आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले में 5613 कार्य स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 1006 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 2834 कार्य अभी प्रगति पर हैं खेत तालाब निर्माण के तहत 3217 कार्य स्वीकृत हुए हैं जिनमें 722 पूर्ण और 1902 प्रगतिरत हैं ब्यौहारी बुढार गोहपारू जयसिंहनगर और सोहागपुर जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर काम हो रहा है जिससे ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है

    इसके अलावा डगवेल रिचार्जिंग अमृत सरोवर जल संरक्षण और वाटरशेड से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के 105 कार्यों में से 53 पूरे हो चुके हैं जो इस अभियान की गति को दर्शाते हैं

    नगरीय निकायों में भी जल संरक्षण को लेकर विशेष पहल की जा रही है जहां जल ग्रहण संरचनाओं का निर्माण नाले नालियों की सफाई और सौंदर्यीकरण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और प्याऊ की स्थापना जैसे कार्य पूरे किए जा चुके हैं यह प्रयास न केवल जल संरक्षण में मदद करेंगे बल्कि शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को भी मजबूत बनाएंगे

    उद्यानिकी विभाग द्वारा फलदार पौधों का रोपण और सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार पर काम किया जा रहा है वहीं जन अभियान परिषद द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है प्रभात फेरियां जल चौपाल कलश यात्राएं और वृक्ष पूजन जैसे कार्यक्रमों ने इस पहल को सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है

    कुल मिलाकर शहडोल में चल रहा यह अभियान एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है जहां प्रशासन और जनता मिलकर जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में यह क्षेत्र जल संकट से काफी हद तक उबर सकता है और अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है

  • पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

    छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।

  • जल गंगा संवर्धन अभियान को गति, प्रशासन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    जल गंगा संवर्धन अभियान को गति, प्रशासन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जल संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सभी शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है।

    उन्होंने जिले के सभी एसडीएम जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर निकायों के सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो वर्षा जल संचयन के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों को अपनाया जाए ताकि अधिकतम जल संरक्षण किया जा सके।

    कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था केवल औपचारिकता न रह जाए बल्कि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों या अधिकारियों द्वारा इस कार्य में लापरवाही बरती जाएगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने के प्रयास करें और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाएं। उन्होंने कहा कि जल संकट की समस्या को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि सामूहिक सहभागिता से ही प्रभावी रूप से हल किया जा सकता है।

    उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए नवाचारों को अपनाने पर भी जोर दिया। वर्षा जल संचयन तालाबों का पुनर्जीवन जल स्रोतों का संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

    कलेक्टर ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी विभाग मिलकर इस दिशा में समन्वित प्रयास करें।

    इस सख्त रुख के साथ बैतूल जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहल न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल: मुख्यमंत्री मोहन यादव

    19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल: मुख्यमंत्री मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि जल है तो कल है का कोई विकल्प नहीं है और पानी की हर बूंद बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और जल आत्मनिर्भरता से ही प्रदेश को समृद्ध बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार 19 मार्च से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू करने जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 100 दिवसीय अभियान भारतीय नववर्ष प्रतिपदा गुढ़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन में Shipra River के तट से राज्य स्तरीय रूप में शुरू होगा। यह अभियान 30 जून तक चलेगा जिसमें पूरे प्रदेश में जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े व्यापक कार्य किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए गांव-गांव में लोगों को वर्षा जल संरक्षण भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायतों स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न सरकारी विभागों की साझेदारी से यह अभियान जल संवर्धन की नई मिसाल बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तालाब कुएं और बावड़ियों की परंपरा सदियों पुरानी है। सरकार इस परंपरा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के साथ फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रही है। अभियान के तहत नई जल संरचनाओं का निर्माण करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे श्रमदान कर गांवों में तालाबों और कुओं की सफाई करें घरों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था बनाएं और जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे तो मध्यप्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू किए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के पहले चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया था। इनमें तालाब कुएं बावड़ियां नहरें और सूखी नदियों के पुनर्जीवन जैसे कार्य शामिल थे जिससे कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार हुआ और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिला।

    वहीं वर्ष 2025 में अभियान के दूसरे चरण में भी बड़े पैमाने पर कार्य हुए। इस दौरान 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है जबकि 64 हजार 395 जल संरचनाओं पर काम अभी जारी है। इनमें खेत तालाब चेक डैम स्टॉप डैम और अन्य जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।