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  • बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां

    बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने से कई तरह के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। गंदा पानी दूषित भोजन और मच्छरों की बढ़ती संख्या बरसात के दिनों में परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखना जरूरी हो जाता है। रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर बारिश के मौसम में बीमार पड़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।

    बरसात में सबसे पहले साफ पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। बारिश के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। अगर पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर या उचित Water Purification Method से सुरक्षित करने के बाद इस्तेमाल करना बेहतर होता है। बाहर से मिलने वाले ऐसे पेय पदार्थों से भी सावधानी रखना जरूरी है जिनकी साफ सफाई को लेकर भरोसा न हो।

    खाने को लेकर भी बरसात में विशेष सावधानी जरूरी है। सड़क किनारे खुले में रखे खाद्य पदार्थ धूल और गंदगी के संपर्क में आ सकते हैं। नमी और गर्म वातावरण में कुछ खाद्य पदार्थ जल्दी खराब भी हो सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें और लंबे समय तक बाहर रखा हुआ खाना खाने से बचें।

    बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ना भी आम समस्या है। घर के आसपास गमले कूलर की ट्रे बाल्टी छत और दूसरी जगहों पर पानी जमा न होने दें। पानी जमा होने पर मच्छरों को पनपने का मौका मिल सकता है। घर के आसपास नियमित रूप से सफाई करना और जहां जरूरी हो वहां मच्छररोधी उपाय अपनाना मददगार हो सकता है। सोते समय मच्छरदानी या अन्य सुरक्षित उपायों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    गीले कपड़े और लंबे समय तक नमी में रहने से भी बचना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद शरीर और कपड़ों को जल्द से जल्द सुखाना बेहतर होता है। पैरों को खास तौर पर सूखा रखना जरूरी है क्योंकि लगातार गीले जूते या मोजे पहनने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। बाहर से लौटने के बाद हाथ पैर साफ पानी से धोना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

    बरसात में घर की सफाई पर भी ध्यान दें। सीलन और गंदगी वाली जगहों को साफ रखें तथा कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी आने दें। घर के आसपास नालियों में पानी रुकने या कचरा जमा होने की स्थिति हो तो उसे साफ कराने की कोशिश करें। बच्चों और बुजुर्गों को गंदे पानी या कीचड़ वाली जगहों से दूर रखना भी जरूरी है।

    अगर बारिश के मौसम में लगातार बुखार उल्टी दस्त सांस लेने में परेशानी त्वचा पर असामान्य लक्षण या कोई अन्य गंभीर समस्या दिखाई दे तो इसे सामान्य मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहता है। खासकर तेज बुखार या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षणों में समय पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    कुल मिलाकर बरसात में स्वस्थ रहने के लिए साफ पानी सुरक्षित भोजन मच्छरों से बचाव व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास की सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी बारिश के मौसम को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद कर सकती है।

  • बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है और हरियाली के साथ वातावरण को खुशनुमा बना देता है लेकिन इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी होता है। बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सर्दी खांसी बुखार पेट से जुड़ी परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ साथ खुद की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। सही खानपान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इस मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है।

    बरसात के मौसम में सबसे पहले साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि जमा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। बारिश में बाहर से आने के बाद गीले कपड़ों को तुरंत बदल देना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से त्वचा में खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि मानसून में पैरों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। बाहर से आने के बाद हाथ और पैरों को अच्छी तरह धोने की आदत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    इस मौसम में खानपान का भी विशेष महत्व होता है। बाहर का खुला और लंबे समय से रखा हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। बारिश के दिनों में ताजा और घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। भोजन में फल सब्जियां दाल और अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिल सके। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है क्योंकि कई लोग ठंडे मौसम में पानी कम पीने लगते हैं। शरीर को हाइड्रेट रखना सेहत के लिए हर मौसम में जरूरी है। पीने के पानी और खाने की स्वच्छता का ध्यान रखना भी इस मौसम में महत्वपूर्ण होता है।

    मानसून में त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ी हुई नमी के कारण त्वचा चिपचिपी हो सकती है और कुछ लोगों को पिंपल्स या रैशेज की परेशानी हो सकती है। इसलिए चेहरे और शरीर को साफ रखना जरूरी है। त्वचा पर बहुत ज्यादा भारी उत्पादों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के और उपयुक्त उत्पादों का चयन किया जा सकता है। किसी भी नई स्किन प्रोडक्ट से एलर्जी या जलन महसूस होने पर उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए। हल्की एक्सरसाइज योग या घर पर स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। अगर बाहर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर ही कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना बेहतर हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सेल्फ केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए।

    बारिश में भीगने का आनंद लेना गलत नहीं है लेकिन लंबे समय तक गीले रहने से बचना चाहिए। अगर बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचकर जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें और शरीर को गर्म और आरामदायक रखें। किसी भी तरह के लगातार बुखार तेज कमजोरी सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मानसून में छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है बल्कि पूरे मौसम का आनंद भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त पानी अच्छी नींद और सक्रिय दिनचर्या ही बरसात के मौसम में खुद की बेहतर देखभाल का सबसे आसान तरीका है।

  • मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित

    मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, सही खानपान और साफ-सफाई से रहें सर्दी-खांसी से सुरक्षित


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं यह बच्चों की सेहत के लिए कई चुनौतियां भी साथ लाता है। इस मौसम में तापमान और नमी में लगातार बदलाव होने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सर्दी जुकाम खांसी बुखार वायरल संक्रमण और गले की परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती इसलिए उन्हें विशेष देखभाल और सही दिनचर्या की जरूरत होती है।

    मानसून के दौरान बच्चों को भीगने से बचाना सबसे जरूरी है। यदि बच्चा बारिश में भीग जाए तो घर पहुंचते ही उसके गीले कपड़े बदल दें और शरीर को अच्छी तरह सुखाकर साफ और सूखे कपड़े पहनाएं। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से शरीर का तापमान कम हो सकता है जिससे सर्दी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    इस मौसम में बच्चों के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। ताजा और घर का बना पौष्टिक भोजन ही खिलाएं। मौसमी फल हरी सब्जियां दाल दूध दही और प्रोटीन से भरपूर आहार बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा ठंडी चीजें आइसक्रीम कोल्ड ड्रिंक या बाहर का खुला और तला हुआ भोजन देने से बचें क्योंकि इससे गले में संक्रमण और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

    बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना भी जरूरी है। कई बार बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद आवश्यक होता है। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिलाएं ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम हो सके।

    साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बच्चों को बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। खाने से पहले और शौचालय के बाद हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। उनके खिलौनों कपड़ों और आसपास के वातावरण को भी नियमित रूप से साफ रखें।

    यदि मौसम ठंडा हो तो बच्चों को हल्के लेकिन आरामदायक गर्म कपड़े पहनाएं। रात में सोते समय शरीर ढका रहे इसका ध्यान रखें। कमरे में नमी ज्यादा होने पर उचित वेंटिलेशन बनाए रखें ताकि फफूंद और बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो।

    बच्चों की पर्याप्त नींद भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। समय पर सोना और पर्याप्त आराम करना शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है। साथ ही हल्की शारीरिक गतिविधियां और घर के अंदर खेलने के अवसर भी बच्चों को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    अगर बच्चे को लगातार बुखार तेज खांसी सांस लेने में तकलीफ या बार बार उल्टी जैसी परेशानी हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    बरसात का मौसम सावधानी और सही देखभाल का मौसम है। यदि माता पिता बच्चों के खानपान साफ सफाई कपड़ों और दिनचर्या पर थोड़ा अतिरिक्त ध्यान दें तो सर्दी जुकाम और वायरल संक्रमण जैसी अधिकांश मौसमी बीमारियों से आसानी से बचाव किया जा सकता है। छोटी छोटी आदतें ही बच्चों को पूरे मानसून में स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार बनती हैं।

  • बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर

    बारिश के मौसम में ये फल जरूर करें अपनी डाइट में शामिल संक्रमण से बचेंगे और शरीर रहेगा ऊर्जा से भरपूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं जिससे सर्दी जुकाम वायरल बुखार और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय संतुलित आहार और सही फलों का सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि मानसून के दौरान ऐसे फल खाएं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखें।

    सेब बरसात के मौसम में सबसे सुरक्षित और लाभकारी फलों में गिना जाता है। इसमें फाइबर एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देते हैं। रोज एक सेब का सेवन शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

    अनार भी मानसून के लिए बेहतरीन फल माना जाता है। इसमें आयरन विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं जो खून की कमी दूर करने के साथ इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक होते हैं। अनार का नियमित सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

    नाशपाती भी इस मौसम में अच्छा विकल्प है। इसमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। यह कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है।

    पपीता भी मानसून के दौरान खाने योग्य फलों में शामिल है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा यह विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है जो त्वचा और आंखों के साथ इम्युनिटी के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

    केला भी इस मौसम में ऊर्जा देने वाला फल है। इसमें पोटैशियम और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। यदि बरसात के दिनों में कमजोरी महसूस हो रही हो तो केला एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

    जामुन और आलूबुखारा जैसे मौसमी फल भी सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन भरपूर होते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि इन फलों को खाने से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना बेहद जरूरी है।

    बरसात के मौसम में कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में नहीं रखने चाहिए। सड़क किनारे बिकने वाले पहले से कटे फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। फल हमेशा ताजे खरीदें और घर लाकर अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इस मौसम में अत्यधिक खट्टे या बहुत ज्यादा पके हुए फलों का सेवन सीमित मात्रा में करें यदि आपको पेट की कोई समस्या रहती है। जिन लोगों को मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारी है उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही फलों का चुनाव करना चाहिए।

    बरसात के दिनों में सही फल सही मात्रा में और स्वच्छ तरीके से खाने की आदत न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है बल्कि मौसम बदलने के कारण होने वाली कई बीमारियों से भी बचाव करने में मदद करती है। यदि संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए तो मानसून का मौसम पूरी तरह स्वस्थ और आनंददायक बनाया जा सकता है।