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  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान तापमान में उतार चढ़ाव नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इन दिनों वायरल बुखार सर्दी जुकाम खांसी गले में खराश सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर को तापमान के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

    वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचना चाहिए। गीले कपड़े तुरंत बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहतर होता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और आसपास की खाली जगहों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।

  • बारिश के मौसम में यात्रा पर निकलने से पहले जरूर अपनाएं ये जरूरी सावधानियां सही योजना बनाएगी सफर सुरक्षित और यादगार

    बारिश के मौसम में यात्रा पर निकलने से पहले जरूर अपनाएं ये जरूरी सावधानियां सही योजना बनाएगी सफर सुरक्षित और यादगार


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम अपने साथ हरियाली ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सुंदरता लेकर आता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस मौसम में घूमने का प्लान बनाते हैं। हालांकि बारिश के दौरान यात्रा करना जितना रोमांचक होता है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। थोड़ी सी लापरवाही पूरे सफर का मजा खराब कर सकती है। इसलिए यदि आप बारिश के मौसम में कहीं जाने की योजना बना रहे हैं तो पहले से सही तैयारी करना बेहद जरूरी है।

    यात्रा शुरू करने से पहले सबसे पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देखें। जिस स्थान पर जाने की योजना बना रहे हैं वहां भारी बारिश बाढ़ भूस्खलन या तेज हवाओं की चेतावनी तो नहीं है इसकी जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। यदि मौसम लगातार खराब रहने की संभावना हो तो यात्रा की तारीख बदलना ही समझदारी होगी। सुरक्षा हमेशा किसी भी यात्रा से अधिक महत्वपूर्ण होती है।

    सफर के दौरान अपने साथ जरूरी सामान व्यवस्थित तरीके से रखें। वाटरप्रूफ बैग या बैग कवर का इस्तेमाल करें ताकि मोबाइल लैपटॉप कैमरा और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रहें। छाता रेनकोट अतिरिक्त कपड़े तौलिया और प्लास्टिक पाउच जैसी चीजें साथ रखना हमेशा लाभदायक होता है। मोबाइल फोन के लिए वाटरप्रूफ कवर भी उपयोगी साबित हो सकता है।

    यदि आप सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे हैं तो वाहन की पूरी जांच पहले ही कर लें। ब्रेक टायर वाइपर हेडलाइट और इंडिकेटर सही स्थिति में होने चाहिए। ईंधन भी पर्याप्त मात्रा में रखें क्योंकि बारिश के दौरान कई बार लंबा जाम लग सकता है। तेज बारिश में अधिक गति से वाहन चलाने से बचें और पर्याप्त दूरी बनाकर ड्राइव करें। जलभराव वाली सड़कों पर बिना गहराई जाने वाहन उतारना खतरनाक हो सकता है।

    पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशासन की सलाह का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने से बचें। यदि यात्रा के दौरान मौसम अचानक खराब हो जाए तो सुरक्षित स्थान पर रुकना ही बेहतर विकल्प है।

    यात्रा के समय स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। अपने साथ प्राथमिक उपचार किट आवश्यक दवाइयां सैनिटाइजर और पीने का साफ पानी जरूर रखें। बारिश के मौसम में संक्रमण और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है इसलिए बाहर का अस्वच्छ भोजन खाने से बचें और गर्म ताजा भोजन को प्राथमिकता दें।

    ऑनलाइन टिकट होटल बुकिंग और जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल तथा प्रिंट दोनों प्रतियां अपने पास रखें। परिवार या करीबी लोगों को अपनी यात्रा की जानकारी देना भी सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा कदम माना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और हेल्पलाइन नंबर अपने मोबाइल में पहले से सुरक्षित रखें।

    बारिश का मौसम प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेने का बेहतरीन समय होता है लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता और सही योजना सबसे जरूरी है। यदि मौसम की जानकारी समय पर ली जाए आवश्यक तैयारियां पूरी हों और यात्रा के दौरान सावधानी बरती जाए तो मानसून का सफर न केवल सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकता है। थोड़ी सी समझदारी और पहले से की गई तैयारी आपको हर मुश्किल से बचाते हुए यात्रा का पूरा आनंद लेने का अवसर देती है।

  • मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने गंदा पानी जमा होने और मच्छरों के तेजी से पनपने के कारण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया टाइफाइड वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे पहले साफ और सुरक्षित पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं क्योंकि दूषित पानी से टाइफाइड हेपेटाइटिस ए और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाहर खुले में मिलने वाले पेय पदार्थों और बर्फ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

    बारिश के मौसम में ताजा और गर्म भोजन खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें तथा भोजन बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

    मच्छरों से बचाव भी मानसून में बेहद जरूरी है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि यही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल होता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी फायदेमंद रहता है।

    बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनकर नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक नमी रहने से सर्दी जुकाम फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि गीले जूते और मोजे संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। मौसमी फल हरी सब्जियां दालें और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नियमित व्यायाम या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद भी शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है।

    यदि तेज बुखार लगातार सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

    बरसात का मौसम आनंद और राहत लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छता संतुलित खानपान और समय पर सावधानी अपनाकर आप मानसून का भरपूर आनंद ले सकते हैं और खुद को कई मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

  • बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक

    बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी पसीना धूल मिट्टी और बैक्टीरिया त्वचा पर जमा होकर कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इस मौसम में ऑयली स्किन वाले लोगों को मुंहासों की परेशानी बढ़ सकती है जबकि संवेदनशील त्वचा वालों को एलर्जी खुजली और फंगल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में मानसून के दौरान नियमित और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में सबसे पहले चेहरे की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करने से त्वचा पर जमा गंदगी अतिरिक्त तेल और बैक्टीरिया हट जाते हैं। बार बार चेहरा धोने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी कम हो सकती है।

    कई लोग मानसून में मॉइस्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं लेकिन यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बारिश के मौसम में भी त्वचा को नमी की जरूरत होती है। इसलिए हल्का और नॉन ऑयली मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा हाइड्रेट रहे और चिपचिपाहट भी महसूस न हो।

    बारिश के दिनों में धूप कम दिखाई देती है लेकिन अल्ट्रावॉयलेट किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंचती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलना चाहिए। कम से कम एसपीएफ तीस वाला सनस्क्रीन त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है।

    मानसून में पसीना अधिक आने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ जाती है। सप्ताह में एक या दो बार हल्के स्क्रब से त्वचा की सफाई करना लाभदायक माना जाता है। हालांकि अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देता है। तली भुनी और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन कम करने से मुंहासों की समस्या भी कम हो सकती है।

    यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और हाथ पैर धो लें तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसलिए जल्द से जल्द सूखे और साफ कपड़े पहनना बेहतर होता है।

    मेकअप का इस्तेमाल करने वालों को मानसून में हल्के और वाटरप्रूफ उत्पाद चुनने चाहिए। रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाकर त्वचा की सफाई करना जरूरी है ताकि रोमछिद्र बंद न हों और त्वचा स्वस्थ बनी रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से बारिश के मौसम में भी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और संक्रमण मुक्त रखा जा सकता है। यदि लगातार खुजली लालपन दाने या फंगल संक्रमण जैसी समस्या बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय

    मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है लेकिन अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है जबकि दूषित पानी और गंदगी बैक्टीरिया तथा वायरस के फैलाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान साफ सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

    मानसून में सबसे अधिक फैलने वाली बीमारियों में डेंगू प्रमुख है। यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द और शरीर तथा जोड़ों में तेज दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें तथा पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।

    मलेरिया भी बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाली इस बीमारी में ठंड लगकर बुखार आना पसीना आना कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शाम के समय मच्छरों से बचाव और साफ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    चिकनगुनिया भी मच्छरों के जरिए फैलने वाला संक्रमण है जिसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में असहनीय दर्द हो सकता है। नियमित सफाई और मच्छरों की रोकथाम इसके बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    बारिश में दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफाइड का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार बुखार पेट दर्द कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके प्रमुख संकेत हैं। हमेशा स्वच्छ पानी पिएं और खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।

    हेपेटाइटिस ए भी गंदे पानी और दूषित भोजन से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें आंखों और त्वचा का पीला पड़ना भूख कम लगना थकान और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। भोजन और पानी की स्वच्छता इसका सबसे प्रभावी बचाव है।

    गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट का संक्रमण भी मानसून में आम हो जाता है। दूषित भोजन या पानी के कारण दस्त उल्टी पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी की समस्या हो सकती है। ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाना तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना जरूरी है।

    मौसम में अचानक बदलाव के कारण सर्दी जुकाम और फ्लू के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। नाक बहना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। नियमित हाथ धोना पर्याप्त नींद लेना संतुलित आहार और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना संक्रमण से बचने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं ताजा भोजन करें और बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर सतर्कता ही स्वस्थ मानसून की सबसे बड़ी कुंजी है।