Tag: Raja Bhoj Sailing Championship

  • भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP

    भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP


    भोपाल । भोपाल के बड़े तालाब पर छह दिनों तक चली राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का रविवार को भव्य समापन हुआ। बोट क्लब पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए और विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया जबकि नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और अलग अलग वर्गों में कुल 110 रेस के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भोपाल में बड़े तालाब की लहरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने शहर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। भोपाल में इससे पहले भी राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप में देशभर के 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं।
    समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक एक स्टेडियम विकसित किया जाए। इन स्टेडियमों के साथ अलग अलग खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है ताकि गांव और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए संतोष और खुशी की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत को प्रदेश की बढ़ती खेल उपलब्धियों का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति 16वें या 17वें स्थान के आसपास थी लेकिन अब प्रदेश तीसरे स्थान तक पहुंच चुका है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और खेल सुविधाओं के विस्तार को दिया। उनका कहना था कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उपलब्धियों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 18 खेलों के लिए 11 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। सरकार का जोर केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके प्रशिक्षण शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कोचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों के करियर और भविष्य की चिंता करना भी जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेलों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

    प्रतियोगिता के दौरान बड़े तालाब की लहरों पर खिलाड़ियों ने संतुलन गति और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। अलग अलग वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राष्ट्रीय रैंकिंग से जुड़ी इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मजबूत करने में मददगार माना जा रहा है।

    NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की उपविजेता टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल रहे। NSS भोपाल के मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है और सरकार इसका उपयोग खेल के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भोपाल में खेल संग्रहालय विकसित करने का आग्रह किया ताकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने बड़े तालाब में शिकारा संचालन को भी पर्यटन विकास से जोड़ने की बात कही।

    समारोह में मुख्यमंत्री ने जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता यामिनी मौर्य समेत विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े को भी सम्मान मिला। जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों का भी सम्मान किया गया।

    मध्यप्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में भोपाल की झीलों की अहम भूमिका है। राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी जहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप जैसे आयोजन इस बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा स्तर तक खेल सुविधाएं बढ़ाने की योजना पर जोर दिए जाने से आने वाले समय में प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी नई खेल प्रतिभाओं के सामने आने की उम्मीद है।

  • भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता

    भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता


    भोपाल  भोपाल की पहचान बड़े तालाब और उसकी खूबसूरत लहरों से भी जुड़ी है और अब यही झील देश के उभरते हुए सेलिंग खिलाड़ियों के लिए बड़े मंच के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का समापन रविवार को भोपाल के बोट क्लब में होगा। सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल होंगे। प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

    11 से 16 अगस्त तक आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की रेस के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग तय की जाएगी। यह रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बेहतर रैंकिंग के आधार पर उन्हें आगे राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर मिल सकते हैं।

    चैंपियनशिप में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल यानी NSS ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। गोवा की टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला ने हिस्सा लिया। NSS भोपाल के खिलाड़ियों को मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा का मार्गदर्शन मिला।

    प्रतियोगिता के दौरान अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अलग-अलग वर्गों में नाविकों ने हवा की दिशा और गति के साथ तालमेल बैठाते हुए अपनी तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। सेलिंग में केवल गति ही निर्णायक नहीं होती बल्कि हवा को समझना नाव को सही दिशा में मोड़ना और बदलती परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी खिलाड़ी की सफलता में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह रही कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। भोपाल में राष्ट्रीय स्तर की सेलिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन पहले भी होता रहा है और बड़े तालाब को इस खेल के लिए अनुकूल माना जाता है।

    भोपाल धीरे-धीरे वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। शहर की प्राकृतिक झीलें सेलिंग के साथ रोइंग कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में की गई थी। यहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    अकादमी से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब तक अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक जीतने का दावा किया गया है। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। ऐसे में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आई है।

    समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों के सम्मान के साथ प्रतियोगिता की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। इसके साथ ही भोपाल की झीलों को वाटर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी नई मजबूती मिल सकती है। देशभर से आए खिलाड़ियों की भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भोपाल की झीलें सिर्फ शहर की खूबसूरती नहीं बल्कि खेल प्रतिभाओं को उड़ान देने वाला मजबूत मैदान भी बन सकती हैं।