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  • भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में वकील और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब जांच और कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद राजन अहिरवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा है।

    राजन अहिरवार ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उनकी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को दूर रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक उनकी बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाई। प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना मोबाइल फ्लाइट मोड पर रखा था और सुबह वीडियो पोस्ट कर अपनी बात सार्वजनिक की।

    विवाद के मामले में अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर पुलिस की तरफ से भी राकेश रावल के खिलाफ सरकारी काम में रुकावट डालने, बदसलूकी और मारपीट के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

    विवाद के बाद डीसीपी जोन-1 ने थाना प्रभारी राजन अहिरवार के साथ कॉन्स्टेबल यश लखेरा और आरक्षक रामस्वरूप को निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद जहांगीराबाद थाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर हरि किशन लोहिया को सौंपी गई है। पुलिस विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच जारी है।

    मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार रात वकील जहांगीराबाद थाने में देर रात करीब तीन बजे तक प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद बुधवार को भी अधिवक्ताओं ने कोर्ट चौराहे पर प्रदर्शन किया और रास्ते बंद कर दिए।

    विवाद की शुरुआत 22 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के दौरान खटलापुरा इलाके में हुई बताई गई है। आरक्षक हरि ओम वर्मा की शिकायत के अनुसार, उस समय उनकी ड्यूटी इलाके में लगाई गई थी। इसी दौरान एक लाल रंग की कार वहां पहुंची। आरक्षक ने चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कार सड़क पर खड़ी कर दी गई।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों और अधिवक्ता राकेश रावल के बीच बहस हुई। आरक्षक हरि ओम वर्मा ने आरोप लगाया कि राकेश रावल ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और धमकी भी दी। आरक्षक के अनुसार, घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और इसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    दूसरी ओर अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

    निलंबन के बाद थाना प्रभारी राजन अहिरवार की ओर से सामने आए वीडियो ने मामले को एक और मोड़ दिया है। उन्होंने अपनी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को अलग रखने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचने में कमी का दावा किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है और इसी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन पर बनेगी बड़ी गैंगस्टर फिल्म, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी मचाएगी धमाल

    दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन पर बनेगी बड़ी गैंगस्टर फिल्म, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी मचाएगी धमाल

    नई दिल्ली ।रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद अब बॉलीवुड में गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड की कहानियों को लेकर हलचल बढ़ गई है। इसी कड़ी में राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए साथ आए हैं। दोनों की यह फिल्म मुंबई अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर आधारित होगी और इसकी कहानी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के अलगाव के दौर से जुड़ी होगी। फिल्म को ‘धुरंधर’ से भी बड़े स्तर का प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।

    राम गोपाल वर्मा गैंगस्टर ड्रामा फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जबकि मोहित सूरी अपनी फिल्मों में रोमांस, इमोशन और संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। इस प्रोजेक्ट में दोनों निर्देशकों की अलग-अलग शैली का मेल देखने को मिल सकता है। राम गोपाल वर्मा ने मोहित सूरी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस फिल्म की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि दोनों अगली फिल्म के लिए साथ काम कर रहे हैं और यह पूरी तरह गैंगस्टर ड्रामा होगी।

    फिल्म की कहानी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के अलग होने की घटनाओं के इर्द-गिर्द रखी गई है। राम गोपाल वर्मा के मुताबिक उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है, जबकि मोहित सूरी इसका निर्देशन करेंगे। उन्होंने कहा कि मोहित ने स्क्रिप्ट को एक अलग स्तर पर पहुंचाया है। कहानी में अंडरवर्ल्ड के साथ भारतीय खुफिया एजेंसियों की भूमिका को भी दिखाने की बात कही गई है। फिल्म की पृष्ठभूमि में 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया है।

    राम गोपाल वर्मा ने फिल्म के स्वरूप को लेकर कहा है कि इसमें गैंग वॉर के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। किरदारों की कहानी, संगीत और एक्शन पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है। उनके मुताबिक मोहित सूरी ने कहानी को अपने अंदाज में पेश किया है और किरदारों के भावनात्मक पक्ष को मजबूत बनाया है।

    राम गोपाल वर्मा ने यह भी कहा कि मोहित सूरी के विजन को देखने के बाद उन्हें विश्वास है कि फिल्म बड़े स्तर पर दर्शकों के सामने आएगी। उन्होंने इसकी तुलना अपनी फिल्म ‘सत्या’ से करते हुए कहा कि यह कहानी जमीन से जुड़ी होगी और भावनात्मक स्तर पर भी प्रभाव छोड़ने की कोशिश करेगी। हालांकि, फिल्म की स्टारकास्ट और रिलीज डेट को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस प्रोजेक्ट की घोषणा ऐसे समय हुई है जब ‘धुरंधर’ और उसके दूसरे भाग को दर्शकों से बड़ी प्रतिक्रिया मिलने की बात कही जा रही है। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली इन फिल्मों में संजय दत्त, अक्षय खन्ना, सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए हैं। अंडरवर्ल्ड और गैंग वॉर की पृष्ठभूमि वाली फिल्मों की बढ़ती चर्चा के बीच राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी का यह प्रोजेक्ट खासा ध्यान खींच रहा है।

    अब फिल्म की कहानी, कलाकारों और निर्माण से जुड़ी बाकी जानकारी का इंतजार है। दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के दौर की घटनाओं को बड़े पर्दे पर किस तरह पेश किया जाता है, यह फिल्म की सबसे अहम खासियतों में से एक हो सकती है। वहीं, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी इस गैंगस्टर ड्रामा को किस तरह का सिनेमाई रूप देती है, इस पर भी दर्शकों की नजर रहेगी।

  • NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    नई दिल्ली ।भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) पवित्रन राजन के रणनीतिक अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। NATO से जुड़े हाइब्रिड वॉरफेयर पर तैयार एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में दोनों अधिकारियों के काम का कम से कम 10 बार उल्लेख किया गया है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसे भारतीय रणनीतिक सोच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

    डीएस हुड्डा नॉर्दर्न आर्मी के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। हुड्डा और पवित्रन राजन ने मिलकर ‘बियॉन्ड द काइनेटिक: डीकंस्ट्रक्टिंग वॉरफेयर इन द सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ नाम से एक पेपर तैयार किया था। यह पेपर जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च की ओर से प्रकाशित किया गया था।

    जनरल वीके सिंह ने दोनों अधिकारियों के काम को हाइब्रिड, कॉग्निटिव और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना महत्वपूर्ण है और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    हुड्डा और राजन के अध्ययन का मुख्य विषय आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति है। उनके अनुसार युद्ध अब केवल आमने-सामने के सैन्य संघर्ष या भौतिक लक्ष्यों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ऐसा भी बन गया है, जिसे उन्होंने ‘सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ यानी STCB के रूप में समझाया है।

    इस अवधारणा में सूचना, तकनीक और लोगों की सोच के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों अधिकारियों के अध्ययन के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली सूचनाएं उनकी राय और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। इसका रणनीतिक प्रभाव युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के प्रभाव जैसा हो सकता है।

    पेपर में कॉग्निटिव वॉरफेयर को आधुनिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें कहा गया कि विरोधी सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रवाह को प्रभावित कर पहले से मौजूद सामाजिक विभाजन और सूचना की कमी का फायदा उठा सकते हैं। उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के घटनाओं को देखने और फैसले लेने के तरीके को प्रभावित करना भी हो सकता है।

    अध्ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार AI की मदद से गलत सूचना फैलाने वाले अभियान ज्यादा सटीक और बड़े स्तर पर चलाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत या सामाजिक कमजोरियों को ध्यान में रखकर संदेश तैयार करना भी संभव हो सकता है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता, मजबूत संस्थानों, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल के जरिए मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    NATO से जुड़े प्रकाशन में हुड्डा और राजन के पेपर का उल्लेख विशेष रूप से ‘AI एंड कॉग्निटिव वॉरफेयर’ अध्याय में किया गया। इस अध्याय में कॉग्निटिव वॉरफेयर और OODA लूप पर चर्चा की गई है। OODA का अर्थ ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट है, जिसके जरिए सैन्य कमांडर किसी स्थिति को समझकर निर्णय लेते हैं और कार्रवाई करते हैं।

    प्रकाशन में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में तकनीक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है। यूक्रेन द्वारा स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट कम्युनिकेशन व्यवस्था के इस्तेमाल और Clearview AI के जरिए रूसी सैनिकों की पहचान से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

    पावर-ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की समीक्षा वाले हिस्से में भी कॉग्निटिव वॉरफेयर, गलत सूचना, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन और AI से पैदा होने वाली अव्यवस्था को जनता के भरोसे तथा निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। दोनों अधिकारियों का जनवरी 2026 का पेपर इस प्रकाशन की संदर्भ सूची में भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।