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  • मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज

    मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर आने पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने वाले नेता को भविष्य में बैठक में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सीहोर में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना कर रहे विधायक कमलेश्वर डोडियार को एक व्यक्ति ने टोक दिया। वहीं रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का उद्योगपति इलॉन मस्क को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रियों द्वारा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जब रीवा में मीडिया ने उनसे बैठक की चर्चाओं को लेकर सवाल किए तो वे नाराज दिखाई दिए। शुक्ल ने साफ कहा कि कोर ग्रुप की बैठक में हुई बातें बाहर पहुंचाने वाला व्यक्ति भविष्य में उस बैठक में बैठने लायक नहीं रहेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर गोपनीय जानकारी बाहर जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि किसने जानकारी साझा की है इस बारे में कोई नाम सामने नहीं आया है।

    इसी बीच सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। रतलाम जिले के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि शिवराज मुख्यमंत्री रहे हैं और आदिवासियों को पट्टे देने का अधिकार उनके पास था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मामा उनके सुख-दुख के साथी हैं और इस समय आदिवासियों का साथ दे रहे हैं।

    इसके बाद विधायक के बयान का रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बुरा आदमी नहीं कहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव से हजार गुना अच्छे थे। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद विरोध जारी है और प्रभावित लोग जमीन के अधिकारों तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

    रीवा में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान भी सुर्खियों में रहा। एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इलॉन मस्क को लेकर तीखी टिप्पणी की। सांसद ने कहा कि वे मस्क को दो घूंसे मारकर भगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को कोई झुका नहीं सकता। सांसद ने यह भी कहा कि मस्क को भारत में अनुमति तभी मिलेगी जब वे प्रधानमंत्री की शर्तें मानेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके बयान पर तंज कसा तो कुछ ने इसे सुर्खियां बटोरने वाला बयान बताया।

    इन राजनीतिक घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी उनकी मौजूदा शक्तियां कम कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं और उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में भाजपा की आंतरिक बैठकों की गोपनीयता से लेकर आदिवासी मुद्दे और नेताओं के तीखे बयानों तक कई विषय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों और घटनाओं पर पार्टी तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस

    नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 18 महीनों के दौरान नशे के कारोबार में शामिल 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इस अवधि में गांजा और कोरेक्स से लेकर हेरोइन स्मैक ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इनकी कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये बताई गई है। वहीं नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी जब्त किया गया है। अब प्रशासन का जोर नशे के कारोबार को रोकने के साथ इसकी लत से पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी रहेगा।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नशीले पदार्थों के उत्पादन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

    बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने पिछले 18 महीनों की कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक इस दौरान 5535 किलो 931 ग्राम गांजा और 97 हजार 665 शीशी कोरेक्स जब्त की गई। इसके अलावा 4 लाख 13 हजार 310 नशीली टैबलेट और कैप्सूल बरामद किए गए। पुलिस ने अफीम के 450 हरे पौधों के साथ 123.6 ग्राम हेरोइन 206.54 ग्राम स्मैक 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स भी जब्त की है। जब्त नशीले पदार्थों की कुल कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

    नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने 181 दोपहिया और 131 चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों की कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये बताई गई है। अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर कार्रवाई करना भी इस नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    रीवा संभाग में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। पिछले 18 महीनों में इस संबंध में 11 हजार 998 मामले दर्ज किए गए और 12 हजार 199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 35 हजार 890 लीटर अवैध देशी शराब और 22 हजार 807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। जब्त शराब की कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये बताई गई है। उप मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए।

    राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि विंध्य क्षेत्र में कृषि उद्योग व्यापार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में युवाओं का नशे की गिरफ्त में आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने और पीड़ितों को उपचार के साथ पुनर्वास की सुविधा देने पर जोर दिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि इसी सप्ताह नशे की लत से पीड़ित 50 लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराने की योजना है। कोरेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा।

    बैठक में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन की कोशिश है कि नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ लोगों को नशे से बाहर निकालने के लिए उपचार और जागरूकता पर भी काम किया जाए।

  • भोपाल संभाग के युवाओं की रीवा यात्रा शुरू मुकुंदपुर सफारी से पुरवा प्रपात तक देखेंगे पर्यटन की खूबसूरती

    भोपाल संभाग के युवाओं की रीवा यात्रा शुरू मुकुंदपुर सफारी से पुरवा प्रपात तक देखेंगे पर्यटन की खूबसूरती


    भोपाल । भोपाल से रीवा की यात्रा पर निकले युवाओं के दल को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा मध्यप्रदेश सरकार की मां तुझे सलाम योजना के तहत आयोजित की गई है। दो दिवसीय इस भ्रमण के दौरान भोपाल संभाग के युवा रीवा जिले के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को करीब से जानेंगे। इस यात्रा का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से किया गया है। दल में भोपाल के साथ सीहोर रायसेन विदिशा और राजगढ़ जिले के युवा शामिल हैं। यात्रा का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों और उनकी सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विशेषताओं से परिचित कराना है।

    युवाओं को रीवा भ्रमण के दौरान महामृत्युंजय मंदिर संग्रहालय मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पुरवा प्रपात और बसामन मामा गौ अभ्यारण्य जैसे स्थानों पर ले जाया जाएगा। इन स्थलों के माध्यम से युवाओं को रीवा की धार्मिक परंपरा प्राकृतिक संपदा वन्यजीव और स्थानीय पर्यटन की विविधता को समझने का अवसर मिलेगा। रीवा संभाग लंबे समय से अपने जलप्रपात जंगलों और ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसी वजह से क्षेत्र में पर्यटन को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।

    यात्रा को रवाना करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश और विशेष रूप से विंध्य क्षेत्र में पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। रीवा संभाग प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध है। यहां मौजूद वन जलप्रपात धार्मिक स्थल और वन्यजीव क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने मैहर चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों के साथ मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पन्ना नेशनल पार्क संजय टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय दुबरी अभ्यारण्य का भी उल्लेख किया। ऐसे पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं और कनेक्टिविटी के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।

    रीवा में पर्यटन को बढ़ावा देने में बेहतर कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा सड़क और रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही हवाई संपर्क में भी सुधार हुआ है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटकों के लिए रीवा पहुंचना आसान हो रहा है और आसपास के पर्यटन स्थलों को भी एक साथ देखने की संभावना बढ़ रही है। सप्ताहांत में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।

    उप मुख्यमंत्री ने रीवा के 750 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट का भी जिक्र किया। उन्होंने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में गौवंश के संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उनके मुताबिक ऐसे प्रयास पर्यटन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़े हैं।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विकास में युवा पीढ़ी की भागीदारी महत्वपूर्ण है। यात्रा के माध्यम से युवाओं को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। संभागीय खेल अधिकारी एमके धौलपुरी के अनुसार दो दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में युवाओं को रीवा के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी भी रही।

  • तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज

    तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज


    भोपाल । मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत के बाद स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21 हजार 500 रुपए प्रतिमाह करने पर सहमति बनी है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक में इस मुद्दे पर सकारात्मक समाधान निकला। हालांकि बढ़ी हुई राशि कब से लागू होगी और इसके लिए औपचारिक आदेश कब जारी होगा इसकी स्थिति सरकारी आदेश के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में आंदोलन ने उस समय बड़ा रूप ले लिया था जब डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड को 14 हजार 337 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की थी। डॉक्टरों का कहना था कि मौजूदा राशि उनके काम के बोझ और बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी कम है।

    आंदोलन के दौरान सोमवार को हमीदिया अस्पताल के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। डॉक्टरों के मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद कुछ इंटर्न डॉक्टरों के घायल होने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर मेडिकल संगठनों और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई थी। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश दिए गए।

    इसके बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन को और तेज कर दिया। भोपाल में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया गया और कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने और पुलिस कार्रवाई के मामले में लिखित तौर पर ठोस कदम नहीं उठाती तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े इंटर्न्स ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया।

    इसी बीच बुधवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत में स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के इलाज का मुद्दा भी उठाया गया। बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    बैठक में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का भरोसा दिया। शुरुआती जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी दी गई है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के लिए जांच टीम भी बनाई गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को भी यह भरोसा मिला कि पुलिस कार्रवाई के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

    बैठक के दौरान प्रदर्शन में घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों के उपचार को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से घायल छात्रों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। JUDA और MTA प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा अब 21 हजार 500 रुपए के स्टाइपेंड पर बनी सहमति है। इंटर्न डॉक्टर भले ही 30 हजार रुपए की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए पर सहमति बनने से आंदोलन खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल गया है। अब निगाहें औपचारिक आदेश पर हैं क्योंकि आदेश जारी होने के बाद ही नई राशि के लागू होने की तारीख और दूसरी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच टकराव के बाद बातचीत से निकला यह समाधान चिकित्सा छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

  • सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन

    सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले कई दिनों से चल रहा MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे इंटर्न डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध मंगलवार को बातचीत के बाद खत्म हो गया। मंत्रालय में हुई अहम बैठक के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद निकले इस समाधान को इंटर्न डॉक्टरों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ मंत्रालय में अहम बैठक हुई। इस बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन यानी JUDA और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी MTA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बन गई और आखिरकार 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड तय किया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

    बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों को 18,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में लंबे समय तक काम करने की जिम्मेदारी को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत हुई। अंततः सरकार ने अपने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दी और इसी पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।

    इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई जिसके बाद समाधान का रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। JUDA और MTA के प्रतिनिधियों ने भी बैठक के बाद सकारात्मक बातचीत पर संतोष जताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलना महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का भी आभार व्यक्त किया।

    बैठक में केवल स्टाइपेंड का मुद्दा ही नहीं बल्कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम भी गठित की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज का भरोसा भी दिया है।

    दरअसल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन के कारण कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। हालात उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया जिसके बाद डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी।

    अब 21,500 रुपये स्टाइपेंड पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। यह फैसला न केवल इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती का समाधान साबित हुआ है। आने वाले दिनों में इंटर्न डॉक्टरों के ड्यूटी पर लौटने के साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।

  • कल्पना की मौत पर नहीं थम रहा कांग्रेस का आक्रोश: अभय मिश्रा आज मंत्रालय के सामने देंगे मौन धरना, राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग

    कल्पना की मौत पर नहीं थम रहा कांग्रेस का आक्रोश: अभय मिश्रा आज मंत्रालय के सामने देंगे मौन धरना, राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग


    भोपाल । रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा बुधवार को राजधानी भोपाल में मंत्रालय यानी वल्लभ भवन के सामने मौन धरने पर बैठेंगे। विधायक सुबह 11 बजे से धरना देकर रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी स्मारक अस्पताल में हुई इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाएंगे। कांग्रेस विधायक ने इस मामले में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग भी की है जिससे यह मामला अब सीधे सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही से जुड़ गया है।

    कल्पना मिश्रा की मौत 26 अगस्त की रात रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी। वह प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं लेकिन इलाज के दौरान उनकी और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि मौत की वास्तविक वजह और किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय होगी लेकिन घटना के बाद सामने आए वीडियो और परिजनों के आरोपों ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया।

    मामला उस समय और गंभीर हो गया जब कल्पना मिश्रा का मौत से कुछ घंटे पहले का वीडियो सामने आया। वीडियो में वह महिला वार्ड से बाहर निकलकर रोते हुए मदद मांगती नजर आई और इलाज को लेकर अपनी आशंका जाहिर करते हुए परिजनों से गुहार लगाती दिखाई दी। इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल और तेज हो गए। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कल्पना की बिगड़ती हालत पर ध्यान देने और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतका के पिता ने जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। परिवार ने इलाज के दौरान कथित तौर पर 30 हजार रुपए की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया है जिसकी जांच होना जरूरी है।

    मामले में सरकार और चिकित्सा प्रशासन की ओर से शुरुआती कार्रवाई भी की गई है। दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को भी पद से हटाया गया जबकि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल को रीवा से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। उनकी जगह सतना मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग को रीवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह अधीक्षक सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है।

    सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को इलाज से जुड़े दस्तावेजों चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और संबंधित स्टाफ के बयान की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद मृतका के पिता रामशरण मिश्रा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।

    इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी रीवा में धरने में शामिल होकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जच्चा बच्चा की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने में देरी हो रही है।

    अब कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा का भोपाल में मंत्रालय के सामने मौन धरना इस आंदोलन को नई राजनीतिक धार देने वाला माना जा रहा है। इससे पहले मंगलवार को युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जिसके बाद कांग्रेस ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर है क्योंकि पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर अपना दबाव लगातार बढ़ा रही है।

  • मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन

    मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा शहर में चल रही जल प्रदाय योजना और सीवरेज सिस्टम के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्रालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कार्यों की प्रगति गुणवत्ता समय सीमा और वित्तीय प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय में हर हाल में पूरी हों।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का सीधा संबंध आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से है इसलिए कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े लंबित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि ओवरहेड वाटर टैंक का निर्माण और जल वितरण नेटवर्क का विस्तार आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूरा किया जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि यदि समय पर यह कार्य पूरे नहीं हुए तो नागरिकों को असुविधा होगी और सरकार की मंशा भी प्रभावित होगी।

    बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए ताकि हर चरण पर प्रगति का आकलन किया जा सके और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी गुणवत्ता और प्रभाव भी नजर आना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों के दौरान आमजन को होने वाली असुविधाओं पर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को इस तरह चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से किया जाए जिससे शहरवासियों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो। साथ ही सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

    सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी स्वच्छता और जन स्वास्थ्य के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के निर्माण कार्य को भी समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जिन्होंने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की जानकारी दी।

    उप मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि उन्हें तय समय में पूरा कर नागरिकों को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मॉनिटरिंग और जवाबदेही में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

    यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अब शहरी विकास परियोजनाओं में गति और गुणवत्ता दोनों पर बराबर ध्यान दे रही है और जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • उपमुख्यमंत्री शुक्ल की बड़ी समीक्षा बैठक रीवा में बुनियादी ढांचे पर जोर

    उपमुख्यमंत्री शुक्ल की बड़ी समीक्षा बैठक रीवा में बुनियादी ढांचे पर जोर


    भोपाल । मध्यप्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा जिले के लोक निर्माण विभाग से जुड़े प्रस्तावित सड़क एवं आधारभूत संरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

    बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अंतिम रूप देकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनता को जल्द सुविधाओं का लाभ मिल सके।

    समीक्षा में सबसे प्रमुख प्रस्ताव रीवा शहर में कमिश्नर बंगला से ढेकहा तिराहे तक बनने वाला 700 करोड़ रुपए की लागत का फ्लाईओवर रहा। यह फ्लाईओवर शहर के बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे शहर में आवागमन अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

    इसके साथ ही लक्ष्मण बाग से कुठुलिया मार्ग में बिछिया नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य पर भी चर्चा की गई। इस परियोजना से लक्ष्मण बाग, कुठुलिया मार्ग और संस्कृत विश्वविद्यालय तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने यह भी निर्देश दिए कि इस परियोजना में रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण को भी शामिल किया जाए, ताकि यह क्षेत्र न केवल आवागमन के लिहाज से बल्कि पर्यटन और शहरी सौंदर्य के दृष्टिकोण से भी विकसित हो सके।

    अधिकारियों ने बैठक में प्रस्तावित कार्यों की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की। सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से रीवा में शहरी विकास और यातायात व्यवस्था को एक नई दिशा दी जा सके।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला चिकित्सा छात्रों को समय पर मिलेगा छात्रवृत्ति लाभ

    एमपी सरकार का बड़ा फैसला चिकित्सा छात्रों को समय पर मिलेगा छात्रवृत्ति लाभ


    भोपाल । मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं के लाभ समय पर उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी पात्र छात्रों को उनकी योजनागत राशि समय पर और बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराई जाए।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की देरी या प्रशासनिक अड़चन का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए तथा यदि कोई तकनीकी समस्या आती है तो उसका तुरंत समाधान किया जाए।

    समीक्षा के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही संबल योजना और मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतर्गत दिए जा रहे लाभों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।

    बैठक में वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा शिक्षा के छात्र अपनी पढ़ाई बिना आर्थिक बाधा के जारी रख सकें और उन्हें समय पर सरकारी सहायता मिलती रहे।

  • विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल । भोपाल में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विंध्य क्षेत्र में चल रही सड़क फ्लाइओवर और पुल-पुलिया निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सुदृढ़ और प्रभावी अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग नियमित और प्रभावी रूप से की जाए ताकि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण हो सके।

    बैठक में रीवा फ्लाइओवर संस्कृत विश्वविद्यालय लक्ष्मण बाग के समीप प्रस्तावित एप्रोच रोड मऊगंज बायपास और मऊगंज–पटेरा औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क सहित अन्य प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति प्रगति और शेष कार्य पर विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन कार्यों में अंतर्विभागीय समन्वय की आवश्यकता है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र हल किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर की स्वीकृतियों भूमि संबंधी मुद्दों तकनीकी अड़चनों और मैदानी समस्याओं की पहचान कर त्वरित और यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    उन्होंने क्षेत्र के औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत अधोसंरचना की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। बेहतर सड़क संपर्क और परिवहन सुविधाएं निवेश आकर्षित करने में सहायक होंगी जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उप मुख्यमंत्री ने अधोसंरचनात्मक विकास को शासन की प्राथमिकताओं में शामिल बताया और कहा कि सभी परियोजनाओं का समयबद्ध पूर्ण होना विंध्य क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की प्रगति नियमित रूप से रिपोर्ट की जाए और किसी भी बाधा को तुरंत दूर किया जाए।

    बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह सहित संबंधित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधिकारियों से कहा कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता से न केवल जनता को लाभ मिलेगा बल्कि क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार विंध्य क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। अधोसंरचना परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना इस प्रयास का अहम हिस्सा है और यह क्षेत्र की दीर्घकालीन प्रगति सुनिश्चित करेगा।