Tag: Rajesh Khanna

  • राजेश खन्ना–अंजू ब्रेकअप की अनसुनी दास्तान, सीक्रेट पार्टी बनी रिश्ते के टूटने की वजह

    राजेश खन्ना–अंजू ब्रेकअप की अनसुनी दास्तान, सीक्रेट पार्टी बनी रिश्ते के टूटने की वजह


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की निजी जिंदगी हमेशा से ही चर्चा और गॉसिप का हिस्सा रही है। उनकी और अभिनेत्री अंजू महेंद्रू की सात साल लंबी रिलेशनशिप एक वक्त पर फिल्मी दुनिया की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती थी लेकिन यह रिश्ता जितनी तेजी से जुड़ा उतनी ही नाटकीय परिस्थितियों में टूट भी गया।

    कई किताबों और रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र मिलता है कि उनके रिश्ते में दरार की सबसे बड़ी वजह एक सीक्रेट पार्टी बनी थी जो खंडाला में आयोजित की गई थी। कहा जाता है कि राजेश खन्ना ने यह पार्टी अपने बेहद करीबी दोस्तों के लिए रखी थी जिसमें अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे। खास बात यह थी कि इस पार्टी के बारे में अंजू महेंद्रू को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

    जानकारी के मुताबिक यह आयोजन बेहद निजी रखा गया था और राजेश खन्ना ने अपने स्टाफ तक को सख्त हिदायत दी थी कि इसकी भनक बाहर न जाए। लेकिन किसी तरह अंजू महेंद्रू को इस पार्टी के बारे में पता चल गया और वह सीधे खंडाला पहुंच गईं। बताया जाता है कि जब वह वहां पहुंचीं तब तक पार्टी को तुरंत एक दूसरे होटल में शिफ्ट कर दिया गया था ताकि स्थिति को संभाला जा सके।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों के रिश्ते में गहरी खाई पैदा कर दी। अंजू महेंद्रू बेहद आहत होकर वापस लौट गईं और इसके बाद उनके और राजेश खन्ना के बीच दूरी बढ़ती चली गई। कहा जाता है कि इसी दौरान राजेश खन्ना का झुकाव डिंपल कपाड़िया की ओर बढ़ने लगा था जिससे रिश्ते की स्थिति और भी जटिल हो गई।

    घटनाओं के बाद यह भी बताया जाता है कि अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गई थी। अंजू की नाराजगी इतनी गहरी थी कि उन्होंने काका के प्रति कठोर रुख अपनाया और संपर्क तोड़ने का फैसला कर लिया। वहीं दूसरी ओर राजेश खन्ना ने भी इस रिश्ते से आगे बढ़ने का मन बना लिया था।

    इसी दौर में राजेश खन्ना ने डिंपल कपाड़िया से शादी का फैसला किया जिसने पूरे फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया। उनकी शादी साल 1973 में हुई और इसके बाद वह एक नई पारिवारिक जिंदगी में प्रवेश कर गए। हालांकि यह रिश्ता भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सका और 1982 में दोनों अलग हो गए।

    इस पूरी कहानी को आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित और भावनात्मक किस्सों में से एक माना जाता है जहां एक सीक्रेट पार्टी ने एक लंबी प्रेम कहानी का अंत कर दिया और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नई कहानी की शुरुआत कर दी।

  • शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे।

    किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया

    फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था।

    ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’

    ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी।

    एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल

    फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था।

    15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।

  • ‘जब रफी साहब की आवाज ने बदल दी राजेश खन्ना की जिद्द’: एक गाने ने रच दिया था इतिहास

    ‘जब रफी साहब की आवाज ने बदल दी राजेश खन्ना की जिद्द’: एक गाने ने रच दिया था इतिहास


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार राजेश खन्ना अपने करियर के चरम पर थे। उस समय उनके कई हिट गाने किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड हो रहे थे। राजेश खन्ना को यह विश्वास था कि किशोर कुमार उनकी सफलता की “लकी आवाज” हैं। लेकिन फिल्म ‘दो रास्ते’ के एक गाने को लेकर स्थिति बदल गई, जब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने अलग राय रखी।

    मखमली आवाज की तलाश और रफी की एंट्री
    म्यूजिक डायरेक्टर्स का मानना था कि इस खास गाने के लिए एक ऐसी आवाज चाहिए जो नरम, भावपूर्ण और रूहानी हो। इसी कारण उन्होंने मोहम्मद रफी को चुना। राजेश खन्ना इसके खिलाफ थे और उन्होंने किशोर कुमार की आवाज की जिद्द रखी, लेकिन संगीतकारों ने स्पष्ट कहा कि इस गाने के साथ सिर्फ रफी साहब ही न्याय कर सकते हैं।

    स्टूडियो में हुआ वो जादू जिसने सब बदल दिया
    जब मोहम्मद रफी ने स्टूडियो में “रेशमी जुल्फें” गाया, तो पूरा माहौल बदल गया। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। रिकॉर्डिंग सुनने के बाद खुद राजेश खन्ना भी इस गाने के फैन बन गए। कहा जाता है कि इसी पल उन्होंने स्वीकार किया कि यह गाना सिर्फ रफी साहब की आवाज में ही सही लग सकता है।

    फिल्म, कास्ट और दिलचस्प किस्से
    फिल्म के लिए पहले संजय खान को अप्रोच किया गया था, लेकिन बाद में यह रोल संजय खान से हटकर राजेश खन्ना को मिला। फिल्म में मुमताज पहली बार बतौर लीड ए-ग्रेड अभिनेत्री नजर आईं और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

    रफी की विरासत और दीवानगी
    मोहम्मद रफी की आवाज का जादू ऐसा था कि संगीतकारों से लेकर दर्शकों तक हर कोई उनके गीतों का दीवाना था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम संस्कार में भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

    यह किस्सा सिर्फ एक गाने का नहीं, बल्कि उस दौर की संगीत परंपरा और कलाकारों की समझ का प्रतीक है, जहां सही आवाज और सही भाव ही किसी गीत को अमर बना देते थे। “रेशमी जुल्फें” ने न सिर्फ राजेश खन्ना की सोच बदली, बल्कि मोहम्मद रफी की गायकी को एक और ऐतिहासिक ऊंचाई दी

  • फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक और अभिनेता Kishore Kumar अपने शानदार गीतों के साथ-साथ अपनी अनोखी आदतों और मजाकिया स्वभाव के लिए भी खूब पहचाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकार और फिल्मकार अक्सर उनके अलग अंदाज और अप्रत्याशित व्यवहार के बारे में बातें करते रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा एक बड़ी फिल्म से जुड़ा है, जिसने बाद में हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बनाई।

    दोस्ती और दुविधा के बीच फंसे थे किशोर कुमार

    उस दौर में मशहूर फिल्म निर्देशक Hrishikesh Mukherjee और किशोर कुमार के बीच गहरी दोस्ती थी। निर्देशक अपनी नई फिल्म के लिए ऐसे कलाकार की तलाश में थे जो मुख्य किरदार को जीवंत बना सके। उनकी पसंद किशोर कुमार थे और वे चाहते थे कि वही फिल्म के नायक बनें। लेकिन दूसरी तरफ किशोर कुमार इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं थे। परेशानी यह थी कि गहरी दोस्ती के कारण वह सीधे तौर पर मना भी नहीं कर पा रहे थे।

    फिल्म से बचने के लिए अपनाया अनोखा तरीका
    काफी सोच-विचार के बाद किशोर कुमार ने एक अलग रास्ता चुना। फिल्म शुरू होने से पहले जब उन्हें लुक और कॉस्ट्यूम को लेकर चर्चा के लिए बुलाया गया तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर चौंक गए। वह पूरी तरह गंजे होकर पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वह पूरे ऑफिस में घूमते हुए मजाकिया अंदाज में नाचते और गाते रहे। उनका यह रूप देखकर सभी हैरान रह गए।

    एक फैसले ने बदल दी पूरी कहानी
    निर्देशक के लिए यह दृश्य अप्रत्याशित था। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए जिस छवि की कल्पना की गई थी, उसके विपरीत किशोर कुमार का यह अंदाज था। आखिरकार बात इतनी आगे बढ़ी कि उन्हें फिल्म से अलग कर दिया गया। बाद में उसी किरदार के लिए दूसरे कलाकार को चुना गया और फिल्म ने आगे चलकर बड़ी सफलता हासिल की।

    फिल्म इतिहास का यादगार अध्याय
    बाद में यह फिल्म बनी Anand, जिसमें मुख्य भूमिका Rajesh Khanna ने निभाई और उनके साथ Amitabh Bachchan भी नजर आए। फिल्म की कहानी और अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।

    इस घटना ने यह भी साबित किया कि किशोर कुमार केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि उनका जीवन अनोखे और दिलचस्प किस्सों से भी भरा हुआ था, जिनकी चर्चा आज भी उतनी ही दिलचस्पी से होती है।

  • मौसमी चटर्जी के पुराने इंटरव्यू से उठे सवाल, फिल्मी रिश्तों की सच्चाई पर बहस तेज

    मौसमी चटर्जी के पुराने इंटरव्यू से उठे सवाल, फिल्मी रिश्तों की सच्चाई पर बहस तेज

    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक बार फिर उस दौर की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जब राजेश खन्ना को देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार माना जाता था। इस बार चर्चा की वजह उनके फिल्मी काम नहीं, बल्कि अभिनेत्री मौसमी चटर्जी के पुराने बयान हैं, जो एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इन बयानों ने न केवल राजेश खन्ना की छवि पर बहस छेड़ दी है, बल्कि उस समय के फिल्मी माहौल और स्टारडम की संस्कृति को भी नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया है।

    मौसमी चटर्जी ने अपने करियर के दौरान कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया था और उनके अनुभव हमेशा से बेबाक और स्पष्ट रहे हैं। अपने पुराने इंटरव्यू में उन्होंने राजेश खन्ना के व्यवहार और उनके स्टारडम के अंदाज को लेकर कई टिप्पणियां की थीं, जिनमें उन्होंने उनके व्यक्तित्व को उस दौर की फिल्मी दुनिया से अलग और प्रभावशाली बताया था। उनके अनुसार, राजेश खन्ना का स्टारडम बेहद मजबूत था, लेकिन उनके आसपास का माहौल हमेशा उनकी लोकप्रियता के इर्द-गिर्द घूमता रहता था।

    इस बयान में उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि फिल्मी सेट पर काम करने का तरीका आज के समय से बिल्कुल अलग था। उस दौर में कलाकारों का व्यवहार, उनकी टीम और उनके साथ काम करने वाले लोगों के बीच का रिश्ता भी स्टारडम से काफी प्रभावित होता था। कई बार यह माहौल बेहद व्यक्तिगत और अनौपचारिक हो जाता था, जहां हर कलाकार का अपना अलग प्रभाव होता था।

    मौसमी चटर्जी ने यह भी साझा किया था कि उस समय वह हिंदी भाषा में पूरी तरह सहज नहीं थीं, जिससे कई बार हल्की-फुल्की बातचीत और मजाक में गलतफहमियां भी पैदा होती थीं। उनके अनुसार, फिल्मी दुनिया में कई बातें गंभीर नहीं होती थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें अलग तरीके से देखा जाने लगता है। यही वजह है कि पुराने बयान आज फिर नई बहस का कारण बन रहे हैं।

    राजेश खन्ना को लेकर उन्होंने उस दौर की स्टारडम संस्कृति की तुलना भी की थी, जहां कुछ कलाकार अपनी लोकप्रियता को अलग तरीके से संभालते थे। उनके अनुसार, हर अभिनेता का व्यवहार और कार्यशैली अलग होती थी, जो उनके व्यक्तित्व और सफलता को दर्शाती थी। इसी वजह से फिल्मी दुनिया में अलग-अलग अनुभव सामने आते थे।

    राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के ऐसे सितारे रहे हैं, जिनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी। उनके नाम से ही फिल्में हिट हो जाती थीं और दर्शकों के बीच उनकी दीवानगी अलग ही स्तर पर थी। वहीं मौसमी चटर्जी ने भी अपने लंबे करियर में कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर फिल्मी दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    आज जब यह पुराना बयान फिर चर्चा में आया है, तो फिल्मी इतिहास को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। लोग उस दौर की स्टारडम संस्कृति, कलाकारों के व्यवहार और फिल्म सेट के माहौल को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं। यह मामला अब केवल एक टिप्पणी नहीं रह गया, बल्कि बॉलीवुड के सुनहरे दौर को समझने का एक नया दृष्टिकोण बन गया है।

  • संघर्ष से सुपरस्टार तक: राजेश खन्ना के घर AC ठीक करने पहुंचे थे इरफान खान

    संघर्ष से सुपरस्टार तक: राजेश खन्ना के घर AC ठीक करने पहुंचे थे इरफान खान


    नई दिल्ली | भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता इरफान खान की कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मनिर्माण की एक प्रेरणादायक दास्तान है। 29 अप्रैल 2020 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें और जीवन से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

    एक समय ऐसा भी था जब इरफान खान फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। इसी दौरान उन्हें एक ऐसा मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि वह सुपरस्टार राजेश खन्ना के घर एयर कंडीशनर (AC) ठीक करने गए थे।

    राजेश खन्ना के घर काम करते हुए इरफान ने पहली बार यह महसूस किया कि फिल्मी दुनिया और स्टारडम कितना अलग और आकर्षक हो सकता है। उसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि अगर वह कोई हुनर सीख लें, तो अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

    इरफान ने अपने शुरुआती दिनों में कई छोटे-मोटे काम किए। जयपुर लौटने के बाद भी उन्होंने मेहनत जारी रखी, लेकिन जीवन आसान नहीं था। उन्होंने यह भी महसूस किया कि केवल पैसा कमाना ही जीवन का लक्ष्य नहीं हो सकता, बल्कि कुछ बड़ा हासिल करना जरूरी है।

    धीरे-धीरे उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने दूरदर्शन से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने कई प्रसिद्ध टीवी सीरियल्स जैसे श्रीकांत, भारत एक खोज, चाणक्य, चंद्रकांता और बनेगी अपनी बात में काम किया।

    बड़े पर्दे पर उन्होंने फिल्म सलाम बॉम्बे से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाई। बाद में पान सिंह तोमर जैसी फिल्मों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।

    हालांकि, मार्च 2018 में उन्हें एक गंभीर बीमारी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला, जिसके बाद उन्होंने दो साल तक संघर्ष किया। अंततः 2020 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

    इरफान खान की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से कोई भी इंसान साधारण जीवन से असाधारण मुकाम तक पहुंच सकता है।

  • एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को 'करिश्मा-करीना' के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत!

    एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को 'करिश्मा-करीना' के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत!


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां रहीं जिन्होंने कम समय में ही अपनी मजबूत पहचान बना ली थी। इन्हीं में से एक नाम बबीता का है, जिन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। 20 अप्रैल 1947 को कराची में जन्मी बबीता का बचपन फिल्मी माहौल में ही बीता, क्योंकि उनके परिवार का संबंध पहले से ही सिनेमा जगत से था। इसी कारण बहुत कम उम्र में उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया और शुरुआती दौर से ही अपनी प्रतिभा का परिचय देने लगीं।

    बबीता ने अपने करियर में उस दौर के बड़े सितारों के साथ काम किया और कई चर्चित फिल्मों का हिस्सा बनीं। उन्होंने राजेश खन्ना, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन साझा की और अपनी भूमिकाओं से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनके किरदारों में रोमांस, पारिवारिक भावनाएं और हल्की कॉमेडी का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता था, जिससे वे उस समय की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उनकी अभिनय शैली सहज और प्रभावशाली मानी जाती थी, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दी।

    फिल्मी करियर के दौरान बबीता ने कई सफल फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी जगह मजबूत की। हालांकि उनका यह सफर अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी। करियर के चरम पर पहुंचने के बाद उनकी निजी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जिसने उनके पेशेवर जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

    उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी मुलाकात रणधीर कपूर से हुई। दोनों ने एक साथ काम किया और यहीं से उनके रिश्ते की शुरुआत हुई। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के बाद बबीता ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला किया और अपने परिवार को प्राथमिकता दी। उस समय पारिवारिक परंपराओं और व्यक्तिगत निर्णयों के चलते उन्होंने अभिनय की दुनिया को छोड़ दिया।

    शादी के बाद उनका जीवन पूरी तरह परिवार केंद्रित हो गया। समय के साथ कपूर परिवार को आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि रणधीर कपूर का करियर अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। ऐसे समय में बबीता ने परिवार को संभालने और घर की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार को स्थिर बनाए रखा।

    बबीता की सबसे बड़ी भूमिका उनकी बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान के जीवन में देखी जाती है। दोनों बेटियां आगे चलकर हिंदी सिनेमा की बड़ी और सफल अभिनेत्रियां बनीं। उनकी परवरिश और मार्गदर्शन में बबीता का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्होंने अपनी बेटियों को सही दिशा दी और उन्हें आत्मनिर्भर और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    बबीता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे कई बार व्यक्तिगत फैसले और त्याग भी छिपे होते हैं। उन्होंने अपने करियर को छोड़कर परिवार को प्राथमिकता दी और अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

  • सफलता के शिखर पर पहुंचकर कैसे बिखर गया सात साल पुराना प्रेम, फिल्म के सेट पर हुए झगड़े ने बिगाड़ी केमिस्ट्री

    सफलता के शिखर पर पहुंचकर कैसे बिखर गया सात साल पुराना प्रेम, फिल्म के सेट पर हुए झगड़े ने बिगाड़ी केमिस्ट्री


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का फिल्मी सफर जितना शानदार रहा, उनकी निजी जिंदगी और उससे जुड़े किस्से भी उतने ही चर्चा में रहे। राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू के सात साल लंबे प्रेम संबंधों की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जिसमें प्यार और ग्लैमर के साथ-साथ कड़वाहट और विवादों का भी तड़का लगा। एक दौर वह भी आया जब इस चर्चित जोड़ी के बीच का तनाव फिल्म के सेट तक पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री पूरी तरह फेल साबित हुई और दर्शकों ने इस रीयल लाइफ कपल को पर्दे पर सिरे से नकार दिया।

    राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू का रिश्ता थिएटर के दिनों से शुरू हुआ था और दोनों के बीच एक गहरा जुड़ाव था। साल 1969 में जब फिल्म बंधन की घोषणा हुई, तो पहली बार इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर एक साथ देखने के लिए प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह था। फिल्म के निर्माण के दौरान दोनों के निजी संबंधों के कारण काफी चर्चाएं हुईं, लेकिन सेट पर जो हुआ वह पेशेवर रूप से काफी चिंताजनक था। बताया जाता है कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर भयंकर झगड़ा हो गया, जिसका सीधा असर उनके काम पर पड़ा। राजेश खन्ना ने खुद बाद में एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि सेट पर उन दोनों का व्यवहार एक-दूसरे के प्रति बेहद खराब था। जब राजेश अपनी लाइनें बोलते थे तो अंजू मुंह फेर लेती थीं और जब अंजू के संवाद की बारी आती थी तो राजेश भी वैसा ही असहयोग करते थे।

    तनाव और खींचतान के बीच पूरी हुई इस फिल्म ने एक कड़वा सच उजागर कर दिया। हालांकि फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही, लेकिन दर्शकों को राजेश और अंजू की जोड़ी में वह कशिश नजर नहीं आई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। दिलचस्प बात यह रही कि प्रशंसकों ने मुख्य नायिका के बजाय फिल्म की सह-कलाकार मुमताज और राजेश खन्ना के दृश्यों पर अधिक प्यार बरसाया, जिससे यह साफ हो गया कि असल जिंदगी की यह जोड़ी पर्दे पर जादू चलाने में नाकाम रही है। इसी के बाद से राजेश खन्ना के करियर का ग्राफ तेजी से बढ़ा और अन्य सफल फिल्मों के बाद वे देश के पहले सुपरस्टार बन गए, जिसने उनके निजी रिश्तों के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।

    सुपरस्टार बनने के बाद राजेश खन्ना के व्यस्त शेड्यूल और उनके स्वभाव में आए बदलावों ने इस रिश्ते में दरार को और गहरा कर दिया। एक ओर जहां सार्वजनिक चर्चाओं में अंजू महेंद्रू की पहचान केवल सुपरस्टार की प्रेमिका के रूप में सिमटने लगी, वहीं दूसरी ओर वैचारिक मतभेदों ने भी जन्म ले लिया। अंजू के अनुसार, राजेश खन्ना के जीवन में सफलता के साथ बढ़ते प्रभाव ने उनके बीच की सहजता को खत्म कर दिया था। अंजू ने यह भी साझा किया था कि राजेश को उनका मॉडलिंग करना पसंद नहीं था और उनके कहने पर उन्होंने कई पेशेवर समझौते भी किए, लेकिन फिर भी यह रिश्ता टूटने से नहीं बच सका। अंततः सात साल का यह सफर उस वक्त एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुआ जब राजेश खन्ना ने विवाह का फैसला लिया और फिल्म जगत के इस सबसे चर्चित प्रेम अध्याय का दुखद अंत हो गया।

  • जब मास्टर राजू के लिए अमिताभ बच्चन को करना पड़ता था घंटों इंतज़ार: 'उस वक्त मेरे पास उनसे ज्यादा काम था'

    जब मास्टर राजू के लिए अमिताभ बच्चन को करना पड़ता था घंटों इंतज़ार: 'उस वक्त मेरे पास उनसे ज्यादा काम था'


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे बहुत कम कलाकार हुए हैं जिनके लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को इंतजार करना पड़ा हो। लेकिन 70 के दशक के मशहूर चाइल्ड आर्टिस्ट राजू श्रेष्ठा जिन्हें दुनिया मास्टर राजू’ के नाम से जानती है एक ऐसे ही कलाकार थे। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मास्टर राजू ने अपने सुनहरे दौर को याद करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा था जब उनके पास अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा फिल्में और काम हुआ करता था।

    फिल्म फरार’ के सेट का एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए मास्टर राजू ने बताया कि अमिताभ बच्चन हमेशा से ही समय के बहुत पाबंद रहे हैं। वह सेट पर वक्त से पहले पहुँच जाते थे लेकिन चूंकि मास्टर राजू उस दौर में हर तीसरी फिल्म का हिस्सा होते थे इसलिए उनके पास समय की भारी कमी रहती थी। राजू ने बताया “मुझे यह कहते हुए हंसी आती है लेकिन उस वक्त अमित जी के पास मुझसे कम काम था। शूटिंग के दौरान मेकर्स मेरे शॉट्स को प्राथमिकता देते थे क्योंकि मुझे अगले शूट के लिए तीन घंटे में निकलना होता था। ऐसे में अमित जी के क्लोज-अप्स पहले ले लिए जाते थे और फिर उन्हें एक तरफ बैठकर तब तक इंतजार करना पड़ता था जब तक मेरे सीन्स पूरे न हो जाएं।”

    इतना ही नहीं मास्टर राजू ने अपनी मां और बिग बी से जुड़ा एक और दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने बताया कि फरार’ के सेट पर लंच के दौरान उनकी मां ने अमिताभ बच्चन को डांट लगा दी थी। दरअसल एक सीन के लिए अमित जी के हाथ पर नकली घाव बनाया गया था जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। राजू की मां ने सफाई को लेकर सख्त होते हुए बिग बी से कह दिया था कि वह इसे कवर करें क्योंकि पास में ही सब खाना खा रहे थे।

    मास्टर राजू ने उस दौर के अन्य सुपरस्टार्स पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि उस समय सेट पर देरी से आना एक फैशन’ बन गया था। राजेश खन्ना विनोद खन्ना संजीव कुमार और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारे अक्सर देरी से पहुँचते थे लेकिन पूरी फिल्म इंडस्ट्री में केवल अमिताभ बच्चन ही इकलौते ऐसे अभिनेता थे जो हमेशा अनुशासन में रहते थे। मास्टर राजू का यह बयान उस दौर की याद दिलाता है जब एक बाल कलाकार की व्यस्तता ने बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे को भी कतार में खड़ा कर दिया था।