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  • पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित वीरभूमि में बुधवार सुबह श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। सुबह से ही परिसर में श्रद्धा और भावनाओं का माहौल देखने को मिला, जहां लोग शांत वातावरण में पूर्व प्रधानमंत्री को नमन करते नजर आए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वीरभूमि पहुंचकर राजीव गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान पूरा वातावरण गंभीर और भावुक बना रहा, जबकि कार्यकर्ताओं की भी भारी मौजूदगी देखने को मिली।

    कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखा गया था। श्रद्धांजलि समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे और सभी ने राजीव गांधी के राजनीतिक जीवन और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। नेताओं ने उन्हें आधुनिक भारत की सोच रखने वाला दूरदर्शी नेता बताया और उनके कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को भी स्मरण किया।

    इस अवसर पर पार्टी की ओर से देशभर में भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कई जगह सामाजिक गतिविधियां जैसे रक्तदान शिविर और पौधारोपण कार्यक्रम भी शामिल रहे। राजधानी दिल्ली में वीरभूमि के बाहर सुबह से ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही। लोग फूल लेकर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।

    राजीव गांधी का निधन 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान हुआ था। उस दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने माला पहनाने के बहाने उनके करीब आकर विस्फोट कर दिया था, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी। यह घटना देश के इतिहास में एक अत्यंत दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने पूरे राष्ट्र को शोक में डुबो दिया था।

    तब से हर वर्ष 21 मई को कांग्रेस पार्टी और उनके समर्थक राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को याद करते हैं। 35 वर्ष बाद भी यह दिन उनके राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के लिए किए गए कार्यों को स्मरण करने का अवसर बन गया है, जहां नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर उन्हें नमन करते हैं।

  • मुल्लिवैक्काल पोस्ट पर तमिलनाडु में सियासी घमासान: Vijay के बयान से गरमाई राजनीति, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

    मुल्लिवैक्काल पोस्ट पर तमिलनाडु में सियासी घमासान: Vijay के बयान से गरमाई राजनीति, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री Vijay द्वारा मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस को लेकर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे ने अब राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।

    मुल्लिवैक्काल पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
    यह विवाद 18 मई को तब शुरू हुआ जब 2009 के मुल्लिवैक्काल घटनाक्रम की याद में सीएम विजय ने एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने श्रीलंकाई तमिल समुदाय के अधिकारों और पीड़ितों को याद करते हुए एकजुटता की बात कही। इसी पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग व्याख्याएं सामने आने लगीं।

    भाजपा का कांग्रेस पर हमला
    भाजपा नेता Amit Malviya ने इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पोस्ट लिट्टे प्रमुख Velupillai Prabhakaran को अप्रत्यक्ष श्रद्धांजलि जैसा है, जिनकी संगठन पर पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की हत्या का आरोप है। भाजपा ने कांग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और इसे गंभीर राजनीतिक मुद्दा बताया।

    टीवीके की सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने बयान जारी कर सफाई दी। पार्टी ने कहा कि सीएम के संदेश का उद्देश्य किसी भी संगठन या नेता को समर्थन देना नहीं था, बल्कि 2009 में मारे गए हजारों निर्दोष तमिल नागरिकों को श्रद्धांजलि देना था। टीवीके ने यह भी स्पष्ट किया कि पोस्ट में कहीं भी प्रभाकरण का नाम नहीं लिया गया था।

    मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस का संदर्भ
    टीवीके के अनुसार, 18 मई को दुनियाभर में बसे श्रीलंकाई तमिल समुदाय द्वारा ‘मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसमें युद्ध में मारे गए आम नागरिकों को याद किया जाता है। पार्टी ने कहा कि यह संदेश केवल उन्हीं पीड़ितों की स्मृति में था।

    राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ा
    इस पूरे मामले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें भाजपा, कांग्रेस और टीवीके के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आगे इसके और तूल पकड़ने की संभावना है।

  • इंदिरा गांधी चाहती थीं कपूर परिवार से रिश्ता, राजीव गांधी के लिए देखी थी राज कपूर की बेटी

    इंदिरा गांधी चाहती थीं कपूर परिवार से रिश्ता, राजीव गांधी के लिए देखी थी राज कपूर की बेटी

    नई दिल्ली ।  फिल्म कलाकार और नेताओं के बीच दोस्ती और रिश्तेदारी का रिश्ता आम बात है। लेकिन क्या आप कपूर परिवार और गांधी परिवार की दोस्ती के बारे में जानते हैं? ये 60 के दशक के कुछ आखिरी सालों की बात है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राज कपूर के बीच दोस्ती और सम्मान का रिश्ता हुआ करता था। इंदिरा गांधी इस रिश्ते को इतना सम्मान देतीं थीं कि वो राजकपूर की बड़ी बेटी ऋतू कपूर को अपने घर की बहू बनाना चाहती थीं।
    बेटे राजीव गांधी की शादी राज कपूर की बेटी के साथ चाहती थीं इंदिरा
    सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई ने अपनी किताब ‘नेता अभिनेता: बॉलीवुड स्टार पॉवर इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में इंदिरा गांधी की इस ख्वाहिश का ज़िक्र किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया कि राज कपूर और इंदिरा गांधी के परिवार के बीच दोस्ती का रिश्ता था। लेकिन इंदिरा गांधी इस रिश्ते को रिश्तेदारी में बदलना चाहती थीं। वो बेटे राजीव गांधी की शादी राज कपूर की बड़ी बेटी ऋतू कपूर से करवाना चाहती थीं।

    ऋतू कपूर को बहू बनाना चाहती थीं इंदिरा गांधी
    रशीद किदवई ने अपनी किताब में आगे लिखा है कि इंदिरा गांधी को बॉलीवुड की बहू की तलाश नहीं थी और ना ही वो स्टार पॉवर से प्रभावित थीं। उनके मन में बस कपूर परिवार के लिए सम्मान और प्यार था। इसलिए वो दोस्ती रिश्तेदारी में बदलना चाहती थी। लेकिन ऋतू कपूर, इंदिरा गांधी की बहू नहीं बन सकी। इसकी वजह राजीव गांधी की जिंदगी में सोनिया की एंट्री थी।

    राजीव गांधी ने की सोनिया से शादी
    राजीव गांधी जब ब्रिटेन में अपनी पढ़ाई पूरी करने गए थे तब उनकी मुलाकात सोनिया गांधी से हुई। दोनों में प्यार हुआ और फरवरी 1968 में सोनिया और राजीव ने शादी कर ली। इस शादी के बाद हैदराबाद हाउस में ग्रैंड पार्टी रखी गई थी जिसमें राजीव के स्कूल और कॉलेज के दोस्त शामिल हुए। दूसरी तरफ 1969 में राज कपूर ने अपनी बेटी ऋतू कपूर की शादी उद्योगपति राजन नंदा से हो गई।
    कपूर परिवार
    राज कपूर ने अपने तीनों बेटों रंधीर, ऋषि और राजीव कपूर फिल्मों की राह दिखाई। तीनों बेटों ने सालों तक ऑडियंस को एंटरटेन किया। शानदार फिल्मों में काम किया। लेकिन सफल सिर्फ ऋषि कपूर ही हुए। वहीं एक्टर की दोनों बेटियां ऋतू और रीमा फिल्मों से दूर रही। शादी के बाद बच्चों और फिर ग्पोता-पोतियों में जीवन बीता। आज राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर, राजीव कपूर और बेटी ऋतू नंदा इस दुनिया में नहीं रहे। रणबीर कपूर फिल्मों में एक्टिव हैं। करिश्मा और करीना कपूर ने फिल्मों में अपनी कागा पहचान बनाई।