Tag: Rajkummar Rao

  • 2 घंटे 5 मिनट की Toaster: कहानी दमदार या फीकी? जानिए IMDb स्कोर

    2 घंटे 5 मिनट की Toaster: कहानी दमदार या फीकी? जानिए IMDb स्कोर

    नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई टोस्टर इस हफ्ते की चर्चित फिल्मों में जरूर शामिल है, लेकिन दर्शकों की उम्मीदों पर यह पूरी तरह खरी उतरती नहीं दिख रही। राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा जैसे दमदार कलाकारों के बावजूद फिल्म की कहानी और प्रस्तुति कई जगह कमजोर नजर आती है। 2 घंटे 5 मिनट लंबी यह डार्क कॉमेडी शुरुआत में दिलचस्प लगती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी रफ्तार ढीली पड़ जाती है, जिससे दर्शकों का जुड़ाव टूटने लगता है।
    कहानी में दम, लेकिन प्रस्तुति में कमी

    फिल्म की कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेहद कंजूस इंसान है। उसकी यही आदत उसे ऐसी स्थिति में फंसा देती है, जहां एक मामूली सा टोस्टर उसकी जिंदगी में तूफान ला देता है। प्लॉट में सस्पेंस और डार्क ह्यूमर की पूरी संभावना थी, लेकिन डायरेक्टर विवेक दासचौधरी इसे प्रभावी तरीके से पेश करने में चूक जाते हैं। कई सीन बेवजह खींचे हुए लगते हैं, जिससे फिल्म बोरियत पैदा करती है।

    एक्टिंग बनी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

    जहां कहानी कमजोर पड़ती है, वहीं कलाकारों की एक्टिंग फिल्म को संभालती नजर आती है। राजकुमार राव अपने किरदार में फिट बैठते हैं और उनकी कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। सान्या मल्होत्रा भी अपनी भूमिका में सहज लगती हैं। खास तौर पर अर्चना पूरन सिंह का किरदार फिल्म में जान डालता है और उनकी मौजूदगी कई सीन में हंसी ला देती है। वहीं फराह खान की छोटी लेकिन प्रभावी मौजूदगी भी फिल्म को थोड़ा मनोरंजक बनाती है।

    डार्क कॉमेडी का असर फीका

    डार्क कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जिसमें संतुलन बेहद जरूरी होता है—ह्यूमर और सस्पेंस दोनों का सही मेल होना चाहिए। लेकिन ‘टोस्टर’ इस संतुलन को बनाए रखने में नाकाम रहती है। फिल्म का दूसरा हाफ खासतौर पर कमजोर है और दर्शकों को बांधकर रखने में असफल साबित होता है।

    दर्शकों की राय: सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और रेडिट जैसे मंचों पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इसे बोरिंग बताया, तो कुछ ने डायलॉग और एक्टिंग की तारीफ की। कुल मिलाकर, यह फिल्म ‘वन टाइम वॉच’ की कैटेगरी में फिट बैठती है।

     IMDb रेटिंग ने भी किया निराश

    अगर रेटिंग की बात करें तो IMDb पर इस फिल्म को सिर्फ 5.3/10 की रेटिंग मिली है, जो इसकी कमजोर पकड़ को साफ दर्शाती है।

    अगर आप राजकुमार राव के फैन हैं या हल्की-फुल्की डार्क कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो ‘टोस्टर’ एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप एक दमदार कहानी और मजबूत सस्पेंस की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।

  • फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट

    फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की कई फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों के दिलों में जगह बनाई बल्कि अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से भी यादगार साबित हुईं। कम लोग जानते हैं कि इन फिल्मों के लीड एक्टर्स ने अपनी फीस तक नहीं ली और सिर्फ प्यार और जुनून के लिए काम किया। साल 2018 में रिलीज़ हुई फिल्म मंटो में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने किरदार में ऐसा दम दिखाया कि हर दर्शक उनकी अदाकारी का मुरीद हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवाजुद्दीन ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली थी? उन्होंने सिर्फ अपने किरदार में पूरी तरह डूबकर काम किया। इससे पहले भी नवाजुद्दीन ने हरामखोर जैसी फिल्मों में बिना फीस काम किया था जो उनके पेशेवर समर्पण की मिसाल है।

    वहीं फिल्म भाग मिल्खा भाग में सोनम कपूर ने अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इंडस्ट्री की टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार सोनम ने इस फिल्म के लिए भी फीस नहीं ली सिर्फ नाम के लिए 11 रुपये स्वीकार किए। फिल्म में उनके काम को क्रिटिक्स और दर्शकों ने दोनों ने सराहा। इस फिल्म में फरहान अख्तर ने भी लीड रोल निभाया और उन्होंने भी बिना किसी फीस के काम किया। फरहान की मेहनत और फिल्म की तकनीकी दक्षता ने इसे बॉक्स ऑफिस पर हिट बनाना सुनिश्चित किया।

    बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की बात करें तो संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक में उनके अभिनय को हर किसी ने सराहा। यह फिल्म आज भी आइकॉनिक मानी जाती है और कम लोग जानते हैं कि अमिताभ ने इसके लिए एक भी रुपया फीस नहीं लिया था। उनके समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी ने फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाई। सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ फिल्म ओम शांति ओम में दीपिका पादुकोण ने लीड रोल प्ले किया। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों ने बहुत सराहा लेकिन दीपिका ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली। उनकी मेहनत और स्क्रीन पर दमदार उपस्थिति ने फिल्म को और भी यादगार बना दिया।

    इसी तरह फिल्म ट्रैप्ड में राजकुमार राव ने एक लड़के का किरदार निभाया जो ऊंची और वीरान इमारत में फंस जाता है। राजकुमार ने इस चुनौतीपूर्ण रोल के लिए कोई भुगतान नहीं लिया। उनकी ईमानदार अदाकारी ने फिल्म के थ्रिल और सस्पेंस को और मजबूती दी। इन कहानियों से यह साबित होता है कि कभी-कभी सितारों का जुनून समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी पैसे से भी बड़ी होती है। इन फिल्मों ने दर्शकों के दिलों में अपने लिए खास जगह बनाई और यह साबित किया कि अच्छी कहानी बेहतरीन परफॉर्मेंस और एक्टर्स का समर्पण ही असली सफलता की कुंजी है।