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  • खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 26 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन शुरू किए। पार्टी ने सभी राज्यों के मुख्यालयों पर विरोध जताने का ऐलान किया है। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे का पुतला जलाकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

    यह विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे के भाषण से जुड़ा है। कार्यक्रम में भीड़ की ओर से आई एक आवाज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर खड़गे की टिप्पणी का वीडियो सामने आया। इसके बाद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने इसे व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

    भाजपा ने इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की वैचारिक स्थिति और हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तब तक पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा का सवाल जुड़ा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर वैचारिक रूप से कमजोर होने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार का जवाब देगी।

    जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है और वे करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास ठोस राजनीतिक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पहले राजनीतिक मर्यादा का महत्व था, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कटुता और गाली-गलौज की संस्कृति बढ़ी है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक बातें कहना राजनीतिक बहादुरी नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर व्यक्तिगत हमले और दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

    खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए नेताओं की नाराजगी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा ने माफी की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

  • मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने पर राजनाथ सिंह ने सवाल टाला, कारसेवकों पर गोलीबारी का भी उठा मुद्दा

    नई दिल्ली ।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता की। इस दौरान उनसे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने के संबंध में सवाल पूछा गया। राजनाथ सिंह ने इस सवाल पर विस्तार से कुछ कहने के बजाय संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी और बातचीत समाप्त करते हुए धन्यवाद कहा।

    प्रेस वार्ता के आखिरी कुछ मिनटों में एक पत्रकार ने राजनाथ सिंह से सवाल किया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले व्यक्ति को पद्म पुरस्कार क्यों दिया गया। उस समय रक्षा मंत्री प्रेस वार्ता समाप्त कर वहां से निकलने की तैयारी में थे। हालांकि, सवाल सुनने के बाद वह दोबारा बैठ गए और पूरी बात सुनी। उन्होंने अपने पास बैठे उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से एक मिनट रुकने के लिए कहा।

    इसके बाद मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से जुड़े सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा, “चलिए देखते हैं। उसके कई कारण थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।” उन्होंने पुरस्कार दिए जाने के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस तरह प्रेस वार्ता में उनसे पूछा गया सवाल संक्षिप्त जवाब के साथ समाप्त हो गया।

    दरअसल, इसी प्रेस वार्ता में राजनाथ सिंह ने वर्ष 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े तीन घटनाक्रमों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल, वर्ष 1984 में सिख समुदाय के लोगों के नरसंहार और वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाए जाने के मुद्दे का जिक्र किया।

    राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 1990 में रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले को समर्थन देकर सरकार बचाई गई थी। उनका यह बयान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में आया। इसी पृष्ठभूमि में मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने से संबंधित सवाल भी प्रेस वार्ता के दौरान उठा।

    वर्ष 2008 में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लेकर केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार संकट में आ गई थी। उस समय वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 22 जुलाई 2008 को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को समर्थन दिया।

    इस समर्थन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विश्वास मत हासिल करने में सफल रही।विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 275 मत पड़े थे, जबकि विपक्ष को 256 मत मिले थे। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थन को केंद्र सरकार बचाने में महत्वपूर्ण माना गया था।

    उस समय मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस नीत गठबंधन की सरकार को समर्थन देने के पीछे भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को देशहित में बताया था। उन्होंने कहा था कि तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें समझौते के देश के हित में होने की जानकारी दी थी। इसी आधार पर समाजवादी पार्टी ने सरकार का समर्थन किया था।

    मुलायम सिंह यादव को वर्ष 2023 में सार्वजनिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके बेटे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान ग्रहण किया था। अब लखनऊ में राजनाथ सिंह से इसी सम्मान को लेकर पूछे गए सवाल ने मुलायम सिंह यादव, कारसेवकों पर गोलीबारी के पुराने विवाद और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    नई दिल्ली ।देश में एसआईआर और चुनाव सुधारों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदलने के लिए अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार बदलना है।

    लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा को स्पष्ट करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग उसी तरह भारत में भी सत्ता बदलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर सरकार बदलने और दूसरे देशों से प्रेरणा लेने संबंधी बयान दिए जा रहे हैं।

    भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन को मौजूदा संघर्ष का उद्देश्य बताने से विपक्ष की मंशा सामने आती है। एसआईआर के मुद्दे पर दिए गए बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह आंदोलन केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए है या इसके पीछे सरकार बदलने का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य भी है।

    विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों के बाद हुई। इसमें प्रशांत भूषण के साथ सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुई थीं। प्रशांत भूषण ने कहा था कि यदि सरकार की कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई नागरिक समाज और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि वे ‘रिजीम चेंज’ चाहते हैं।

    इससे पहले 14 अक्टूबर को नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इसमें उन्होंने बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वहां धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ चल रही लड़ाई और भारत में युवाओं की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ किए जा रहे संघर्ष के बीच समानता है। उनके इस बयान को भी मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने की बात करता है। उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय भी सरकार नहीं बदली थी क्या। खेड़ा के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य आंदोलन और चुनावों के जरिए सत्ता परिवर्तन करना होता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना विपक्ष की राजनीतिक भूमिका का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार बदलने के लिए चुनावी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्त भारतीयों के बीच की लड़ाई बताया। साथ ही उन्होंने इसे संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच का संघर्ष करार दिया।

    ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल, बांग्लादेश के आंदोलन के संदर्भ और सरकार बदलने की मांग को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा नेता इन बयानों को अराजकता और सत्ता परिवर्तन की साजिश से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के जरिए सरकार बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

  • एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

    एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला


    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि बताया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य पदक सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सीमित संख्या में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, मेहनत और सामूहिक प्रयास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

    सोमवार को राजनाथ सिंह ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सैन्य खिलाड़ियों के दल से मुलाकात की और उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें सैन्य खिलाड़ियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 92 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। इनमें से खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर देश और सशस्त्र बलों का गौरव बढ़ाया।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। उन्होंने इस प्रदर्शन को भारतीय सशस्त्र बलों की खेल परंपरा, अनुशासन और मजबूत तैयारी का प्रमाण बताया। उन्होंने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ उन प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं कर सके। उनके मुताबिक, खेलों में भाग लेना, पूरी मेहनत से मुकाबला करना और अनुभव प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पदक नहीं जीत पाना हार का प्रतीक नहीं है। वास्तविक हार तब होती है, जब कोई प्रयास करना छोड़ देता है। खिलाड़ियों ने पूरी कोशिश की और देश का नाम रोशन किया।

    राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी समर्पण के साथ तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों में निरंतर सुधार करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

    रक्षा मंत्री ने मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आगे बढ़ाने, वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने में इस विंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को समय पर अवसर, व्यवस्थित प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए। मिशन ओलंपिक विंग सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों को भी महत्व दिया जाता है। कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना सैन्य खिलाड़ियों की विशेषता है। ये गुण खेल के मैदान में भी उनके काम आते हैं। सामूहिक प्रयास, दबाव में बेहतर प्रदर्शन और अनुशासित तैयारी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में मदद करते हैं।

    उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों और खेल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेष रूप से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 और उसके बाद के ओलंपिक चक्र के लिए तैयारियां अभी से मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाओं के जरिए उनके प्रदर्शन को अगले स्तर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। एशियाई खेलों में मिली सफलता को आगे बढ़ाते हुए सैन्य खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना लक्ष्य होना चाहिए, ताकि वे भविष्य में देश के लिए और अधिक पदक जीत सकें।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में विशेष धार्मिक और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए। काशी विश्वनाथ धाम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेताओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई। 11 हवन कुंडों पर आहुतियां दी गईं और बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक किया गया। नेताओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजन कर प्रधानमंत्री के लिए मंगलकामना की। वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

    जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा भी शुरू की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। यात्रा में बड़ी संख्या में युवा और बाइक सवार शामिल हुए हैं।

    वाराणसी और वडनगर को इस आयोजन में विशेष रूप से जोड़ा गया है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों स्थानों पर जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वडनगर से भी वाराणसी की दिशा में बाइक यात्रा रवाना की गई है। इस आयोजन के जरिए दोनों शहरों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान और बाइक यात्रा के अलावा सेवा गतिविधियों पर जोर दिया गया। वहीं गुजरात के वडनगर में भी पूजा-अर्चना और अन्य कार्यक्रम हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

    वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ धाम में पूजा हुई। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा संकल्प यात्रा को भी जोड़ा गया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए वाराणसी और वडनगर को एक साथ जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनके 76वें जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर देशभर में सेवा, रक्तदान, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। वाराणसी का कार्यक्रम इन्हीं आयोजनों की कड़ी में प्रमुख रहा, जहां पूजा-अर्चना के बाद सेवा संकल्प बाइक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।

  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की पहचान केवल युद्ध के मैदान में उनके साहस और पराक्रम से नहीं होती, बल्कि मानवीय सहायता, आपदा राहत और सेवा भावना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिक हमेशा लोगों की सहायता के लिए सबसे आगे रहते हैं। उनके अनुसार देश की सुरक्षा के साथ-साथ मानवता की सेवा भी भारतीय सेनाओं की मूल पहचान का हिस्सा है।

    रक्षा मंत्री ने लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में देश के पहले समर्पित ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ की स्थापना के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। सियाचिन की अत्यधिक बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों की भीषण गर्मी तक, जवानों को अनेक प्रकार की शारीरिक और चिकित्सीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि कठिन तैनाती के दौरान सैनिकों को संक्रामक रोगों, अत्यधिक गर्मी और ठंड से होने वाली चोटों, अधिक ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों, थकान, पोषण संबंधी समस्याओं, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जूझना पड़ता है। उनका विश्वास है कि नया विभाग इन परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा, जिससे सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरों जैसे नए जोखिम लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह विभाग इन उभरती चुनौतियों पर अनुसंधान और विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य चिकित्सा सेवाओं की प्रतिष्ठा केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में प्रमुख सैन्य योगदान देने वाले देशों में शामिल है। विदेशों में तैनात भारतीय सैन्य चिकित्सकों को भी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे अनुभवों के आधार पर विकसित होने वाला यह विभाग भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान देने में सक्षम होगा।

    उन्होंने कहा कि कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ लंबे समय से सैन्य चिकित्सा, अनुसंधान और अनुशासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के चिकित्सकों ने ‘ऑपरेशन विजय’ और कारगिल युद्ध जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। अब इसी संस्थान में स्थापित हो रहा ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूत करेगा।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला केवल आर्थिक और सामाजिक प्रगति नहीं होती, बल्कि उसकी सैन्य शक्ति और सैनिकों का मनोबल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है, तो उसके पीछे ऐसा मजबूत स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए जो हर परिस्थिति में उसका साथ दे। उनके अनुसार यह नया विभाग इसी विश्वास को और मजबूत करेगा तथा सशस्त्र बलों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।