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  • संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने जताया विरोध, सहमति की कोशिशों के बीच फिर लौटी बैठक

    संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने जताया विरोध, सहमति की कोशिशों के बीच फिर लौटी बैठक

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट कर दिया। हालांकि यह विरोध अधिक देर तक नहीं चला और बातचीत के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में लौट आए। इस घटनाक्रम ने मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही सदन के भीतर संभावित राजनीतिक टकराव के संकेत दे दिए हैं।

    संसद भवन परिसर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों के बीच संवाद स्थापित करना और विधायी कार्यों को लेकर सहमति बनाना था। लेकिन बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद विपक्ष ने बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और विरोध स्वरूप बाहर निकल गया।

    विपक्ष का कहना था कि जिन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अलग राजनीतिक समूह का दावा किया है, उन्हें अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। साथ ही उनके खिलाफ दायर अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें सर्वदलीय बैठक में अलग इकाई के रूप में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया, लेकिन बाद में संवाद की आवश्यकता को देखते हुए सभी दल फिर से बैठक में शामिल हो गए। बैठक के दौरान सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। साथ ही आगामी सत्र के दौरान प्रस्तावित विधेयकों, विधायी कार्यक्रम और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए सभी पक्षों से सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।

    इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि हाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हुई है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति मिलने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। विपक्ष का तर्क है कि अलग बैठने की अनुमति और किसी नए समूह को औपचारिक मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं। इसी कारण सर्वदलीय बैठक में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। इसी तरह अन्य दलों से जुड़े कुछ बागी सांसदों की संसदीय स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन के समक्ष रख सकती है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में सामने आया यह विवाद संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद बैठक में सभी दलों की वापसी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि संवाद की प्रक्रिया को जारी रखने और संसदीय कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर

    स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर


    नई दिल्ली । भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और अब सरकार का फोकस केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उनकी रोकथाम पर भी समान रूप से दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि बीते वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर सुलभ किफायती आधुनिक और जनकेंद्रित बनी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है जिससे देश वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। इसके अलावा प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना से भी आगे निकल चुका है और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मेडिकल शिक्षा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। आज भारत जीन चिकित्सा परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों का स्वदेशी समाधान तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में उपयोगी सीएआर टी सेल थेरेपी का दुनिया का सबसे सस्ता संस्करण भारत ने विकसित किया है जिससे यह उपचार अब आम लोगों की पहुंच में भी आ रहा है।

    रक्षा मंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक नैनो दवा विकसित की है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन दशक बाद देश में पेनिसिलिन जी का उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है। इसी वर्ष भारत ने निमोनिया के इलाज में उपयोगी पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन भी विकसित की है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बताया कि देशभर में 19 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं जबकि आयुष्मान भारत योजना के जरिए करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। पिछले बारह वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों ने आम नागरिकों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है जो हर नागरिक के लिए सुलभ किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने अंगदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की भी है ताकि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो सकें।

    उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जीन संपादन कृत्रिम जीव विज्ञान और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय कर रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों को लगातार नई तकनीकों और शोध से खुद को अपडेट रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें बल्कि सेवा समर्पण और संवेदनशीलता के साथ समाज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के युद्धक बेड़े में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरी के शामिल होने के साथ भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल समुद्र के माध्यम से अपनी रणनीतिक दिशा तय करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में समुद्री क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और वैश्विक समुद्री उपस्थिति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।

    विशाखापट्टनम में आयोजित कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरी एक आधुनिक ब्लू-वाटर स्टील्थ फ्रिगेट है, जो तटीय क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गहरे समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान संचालित करने में सक्षम है। यह युद्धपोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार कर रही है।

    आईएनएस महेंद्रगिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट है। यह परियोजना भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। युद्धपोत को आधुनिक हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियारों और उन्नत रक्षा उपकरणों से लैस किया गया है। इसके कारण यह समुद्र, आकाश और पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम माना जाता है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक सैन्य शक्ति की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में आधुनिक तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके प्रशिक्षित सैनिकों, मजबूत सैन्य ढांचे और विश्वसनीय रक्षा क्षमता से ही तय होगी।

    उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत भविष्य की तकनीकों में निवेश के साथ-साथ अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार मजबूत बना रहा है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक हैं। इतिहास यह प्रमाणित करता है कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति की उपेक्षा की, उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसलिए संतुलित रक्षा रणनीति ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे प्रभावी आधार बन सकती है।

    रक्षा मंत्री ने हाल के सुरक्षा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने समय-समय पर यह साबित किया है कि देश की आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की सैन्य क्षमताएं मिलकर प्रभावी परिणाम देने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगी। आईएनएस महेंद्रगिरी का नौसेना में शामिल होना आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारत लगातार अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाते हुए ऐसी सैन्य क्षमताओं का विकास कर रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक समुद्री संतुलन में भी उसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

  • 1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर वैश्विक विश्वास का मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उनके अनुसार यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की नीतियों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को रक्षा विनिर्माण में निवेश और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है और निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसकी सफलता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि समय के साथ यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम देने में सफल रही। रक्षा उत्पादन के साथ-साथ मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, डिजिटल अवसंरचना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी देश ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति के आधार पर विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरकार आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के साथ उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विनिर्माण क्षमता तैयार हो सके।

    राजनाथ सिंह ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और इसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में स्वदेशी 5जी नेटवर्क के विस्तार और 6जी तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

    उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन सुधारों ने भारत की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा दी है तथा देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।

  • भारतीय सेनाओं को मिलेगी नई ताकत, रक्षा खरीद परिषद ने 52 हजार करोड़ रुपये के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों को दी मंजूरी

    भारतीय सेनाओं को मिलेगी नई ताकत, रक्षा खरीद परिषद ने 52 हजार करोड़ रुपये के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्ध क्षमता, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को आधुनिक तकनीक से और अधिक सशक्त बनाना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए सेनाओं को नवीनतम रक्षा प्रणालियों से लैस करना आवश्यक माना गया है। इसी उद्देश्य से कई उन्नत हथियार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई है, जिससे भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य तैयारियों को मजबूती मिलेगी।

    स्वीकृत प्रस्तावों में एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम ‘आकाश तरंग’ प्रमुख है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान समय में ड्रोन आधारित खतरों में लगातार वृद्धि को देखते हुए इस तरह की प्रणाली को भारतीय सुरक्षा ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रक्षा खरीद परिषद ने मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह हल्की और अत्यधिक प्रभावी मिसाइल प्रणाली युद्धक्षेत्र में टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध सैनिकों की क्षमता को मजबूत करेगी। इसके अलावा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली तथा वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम को भी स्वीकृति मिली है। इन प्रणालियों से हवाई खतरों के विरुद्ध बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।

    बैठक में टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई। यह तकनीक युद्ध के दौरान टैंकों पर होने वाले मिसाइल या रॉकेट हमलों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। इससे बख्तरबंद वाहनों की सुरक्षा और युद्धक्षेत्र में उनकी संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

    रक्षा खरीद परिषद ने जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली के अधिग्रहण को भी स्वीकृति दी है। यह आधुनिक ड्रोन तकनीक लक्ष्य की पहचान कर सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है। भविष्य के युद्धों में ड्रोन आधारित हथियारों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इस प्रणाली को भारतीय सेनाओं की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता में व्यापक सुधार होगा। सीमा सुरक्षा, हवाई रक्षा, निगरानी, टैंक सुरक्षा और सटीक हमले जैसी क्षमताओं को नई तकनीक का मजबूत समर्थन मिलेगा। साथ ही आधुनिक युद्ध की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप भारतीय सेना की तैयारी भी और बेहतर होगी।

    रक्षा क्षेत्र में यह निर्णय भारत की दीर्घकालिक सैन्य आधुनिकीकरण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। नई रक्षा प्रणालियों के शामिल होने से न केवल देश की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सशस्त्र बल अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बन सकेंगे।

  • भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, ड्रोन, मिसाइलें और निगरानी उपकरण शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

    टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में दिए गए बयान पर सियासी विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर सदन में दी गई जानकारी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बताया है।

    कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे यह संदेश गया कि अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। उनका कहना है कि बाद में आधिकारिक जानकारी में छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई, जिससे संसद में दिए गए बयान पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि सदन के समक्ष तथ्यों से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई है तो यह संसदीय परंपराओं और विशेषाधिकारों का गंभीर मामला है। पार्टी ने इसे संसद को गुमराह करने का मामला बताते हुए नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर संसद को सटीक और पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। कांग्रेस का दावा है कि बाद में सार्वजनिक हुई आधिकारिक जानकारी में पांच सेना के जवानों और एक वायुसेना कर्मी के शहीद होने की पुष्टि हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि यह तथ्य पहले से उपलब्ध थे, तो संसद में उनका उल्लेख न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री के भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, मंत्री का बयान उन दावों के जवाब में था जिनमें अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय का कहना है कि पूरे भाषण को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि उनके वक्तव्य का आशय अलग था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद अभियान के दौरान हुए सैन्य बलिदान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि शहीदों के सम्मान और अभियान से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

    ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता, संसदीय जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और सरकार की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए जवानों की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की और संसद में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और शहीदों को पूरा सम्मान पहले ही दिया जा चुका था।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राष्ट्रीय समर स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि जुलाई 2025 में संसद के भीतर रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि अब सामने आए तथ्यों से उस बयान पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि सैन्य अभियान के दौरान जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, तो इसकी जानकारी संसद और देश के सामने समय पर रखी जानी चाहिए थी। पार्टी ने रक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करने के साथ उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की भी बात कही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और सरकार से शहीदों के परिवारों के प्रति सार्वजनिक रूप से संवेदना और स्पष्टीकरण देने की मांग भी दोहराई है।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है। सरकार का कहना है कि संसद में दिया गया बयान विशेष संदर्भ में था और उसका संबंध उन दावों से था जिनमें भारतीय लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही थी। सरकार के अनुसार रक्षा मंत्री का आशय यह था कि अभियान के दौरान किसी भी पायलट की जान नहीं गई और किसी विमान को दुश्मन के कब्जे में नहीं जाने दिया गया। इसलिए बयान की गलत व्याख्या कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी कई जानकारियां राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से तत्काल सार्वजनिक नहीं की जातीं। उसके अनुसार ऑपरेशन से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं का समय से पहले खुलासा करना सुरक्षा हितों के विपरीत हो सकता है। सरकार का कहना है कि शहीद सैनिकों का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया और संबंधित परिवारों को सभी औपचारिक सम्मान प्रदान किए गए थे।

    इस पूरे विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य गोपनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि सैन्य रणनीति और परिचालन संबंधी गोपनीयता अलग विषय है, लेकिन शहीदों की जानकारी और संसद को दी जाने वाली सूचना में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं सरकार का तर्क है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का सार्वजनिक समय और स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाता है।

    फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस्तीफे की मांग पर कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल रक्षा मंत्री के बयान तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों की सूचना नीति और संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर राजनीतिक और संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।

  • कृषि महोत्सव के लिए रायसेन रवाना हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया आत्मीय स्वागत

    कृषि महोत्सव के लिए रायसेन रवाना हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया आत्मीय स्वागत


    भोपाल । भोपाल के स्टेट हैंगर पर शनिवार का दिन खास गरिमा और राजनीतिक ऊर्जा से भरपूर नजर आया जब डॉ. मोहन यादव ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी कर प्रदेश की मेहमाननवाजी की परंपरा को सजीव कर दिया यह अवसर केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें प्रदेश और केंद्र के बीच समन्वय और विकास की झलक भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल ट्रांजिट विजिट पर पहुंचे थे जहां से उन्हें रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए रवाना होना था स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पुष्प गुच्छ भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर उनका आत्मीय स्वागत किया साथ ही उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया इस दौरान वातावरण में आत्मीयता और गरिमा का संतुलित संगम देखने को मिला

    अल्प विश्राम के पश्चात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए जहां कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को नई तकनीक और नवाचार से जोड़ने की पहल की जा रही है यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

    इस अवसर पर प्रदेश के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे जिनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग राज्य मंत्री कृष्णा गौर भोपाल सांसद आलोक शर्मा विधायक विष्णु खत्री महापौर मालती राय और जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति शामिल रहे सभी ने रक्षा मंत्री का पुष्प भेंट कर स्वागत किया जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई

    भोपाल का यह दृश्य केवल एक स्वागत समारोह नहीं बल्कि राजनीतिक समन्वय और विकासात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक बन गया जहां केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल की मजबूत तस्वीर उभर कर सामने आई रायसेन में होने वाला कृषि महोत्सव इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है जो किसानों को सशक्त बनाने और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

  • राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा

    राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा


    पुणे/अयोध्या। प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता पर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का संघर्ष एक ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सूचना क्रांति और सोशल मीडिया का बोलबाला है लेकिन राम मंदिर आंदोलन उस समय सफल हुआ जब ये आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।इसका कारण यह था कि आंदोलन का संदेश सीधे लोगों के दिलों में गूँज रहा था।साध्वी ऋतंभरा ने मानवीय इच्छाशक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा काम राम जी के कार्य के लिए समर्पित है। मानवीय संकल्प में पर्वतों को उखाड़ फेंकने और पत्थर को पानी में बदल देने की शक्ति होती है बशर्ते वह आत्मसंयम और चरित्र की प्रमाणिकता पर आधारित हो।

    राष्ट्र की मजबूती चरित्र और एकजुटता में

    साध्वी ने समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित समाज क्या हासिल कर सकता है। उनके अनुसार किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक संपदा में नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और आंतरिक विभाजनों को दूर करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने दमितों और वंचितों की रक्षा के लिए समाज से आगे आने का आह्वान भी किया। अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ का उल्लास: 29 दिसंबर से शुरू होंगे कार्यक्रम एक ओर जहाँ साध्वी ऋतंभरा ने आंदोलन की वैचारिक विजय को रेखांकित किया वहीं दूसरी ओर अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के पांच दिवसीय भव्य आयोजन की रूपरेखा जारी कर दी गई है।

    आयोजन की मुख्य विशेषताएं

    प्रारंभ: राम मंदिर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र के अनुसार समारोह की शुरुआत 29 दिसंबर से होगी।मुख्य अतिथि: 31 दिसंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करेंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में नियमित रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन होगा।समय: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेंगे।यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद के महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है जिसमें देश भर से श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।