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  • जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे अधिक असर राजौरी जिले में देखने को मिला, जहां अचानक आई बाढ़ और तेज बहाव ने भारी तबाही मचा दी। लगातार वर्षा के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया और बड़ी संख्या में लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के प्रयास जारी हैं।

    राजौरी जिले में धरहाल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया। तेज बहाव की चपेट में आकर 200 से अधिक वाहन बह गए या मलबे में दब गए। कई स्थानों पर सड़कें कीचड़ और मलबे से भर गईं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन एक-दूसरे के ऊपर फंस गए, जबकि कुछ पूरी तरह पानी में समा गए। इससे स्थानीय लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

    भारी बारिश के कारण शहर का प्रमुख बस स्टैंड भी बाढ़ की चपेट में आ गया। पूरे परिसर में पानी और मलबा भर जाने से उसकी पहचान तक मुश्किल हो गई। बस स्टैंड के आसपास का निचला इलाका पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी पानी घुस गया, जिसके कारण सामान खराब हो गया और व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ा।

    रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का असर स्पष्ट दिखाई दिया। कई घरों में पानी भर जाने से घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी वस्तुएं खराब हो गईं। कुछ मकानों को संरचनात्मक क्षति पहुंची, जबकि दो मकान पूरी तरह ढह गए। लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा और कई परिवारों ने ऊंचे इलाकों में अस्थायी रूप से शरण ली। जलभराव और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो गईं।

    लगातार बारिश के चलते जिले के कई हिस्सों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। नदियों और नालों के उफान पर होने से कई मार्गों पर आवाजाही मुश्किल हो गई। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं और जहां आवश्यकता है वहां राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर जलनिकासी और मलबा हटाने का कार्य भी शुरू किया गया है ताकि सामान्य स्थिति जल्द बहाल की जा सके।

    मौसम विभाग ने क्षेत्र में अगले 48 घंटे तक भारी वर्षा की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके मद्देनजर लोगों को नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है। आपदा की इस स्थिति ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के दौरान सतर्कता, मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था और समय पर राहत कार्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

  • राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के निकट मंगलवार को एक लैंडमाइन विस्फोट में भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) सहित चार जवान घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब सेना की एक टीम नौशेरा सेक्टर के अग्रिम क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है तथा घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार सेना की टुकड़ी राजौरी जिले के कलाल क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक एक बारूदी सुरंग सक्रिय हो गई और जोरदार विस्फोट हुआ। धमाके की चपेट में आने से एक जेसीओ समेत चार सैनिक घायल हो गए। विस्फोट की आवाज सुनते ही आसपास तैनात सुरक्षा बलों के जवान तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    घायल सैनिकों को प्राथमिक उपचार देने के बाद सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सेना ने अभी तक किसी जवान के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन चिकित्सा दल पूरी सतर्कता के साथ उपचार में जुटा हुआ है।

    प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह घटना किसी घुसपैठ या आतंकी गतिविधि से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं है, बल्कि पहले से बिछाई गई बारूदी सुरंग के अनजाने में सक्रिय हो जाने के कारण हुई। नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ रोकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के लिए बड़ी संख्या में लैंडमाइंस बिछाई जाती हैं। कई बार भारी बारिश, भूस्खलन या मिट्टी खिसकने के कारण ये सुरंगें अपनी निर्धारित जगह से हटकर अन्य स्थानों पर पहुंच जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

    सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि हालिया घटना भी संभवतः इसी प्रकार की परिस्थितियों का परिणाम हो सकती है। आशंका है कि बारिश और प्राकृतिक बदलावों के कारण लैंडमाइन अपनी मूल स्थिति से खिसक गई होगी और गश्त के दौरान किसी जवान का पैर पड़ने से विस्फोट हो गया। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा बलों ने इलाके में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास कोई अन्य सक्रिय बारूदी सुरंग या सुरक्षा जोखिम मौजूद न हो। गश्ती मार्गों की दोबारा जांच भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

    राजौरी और नौशेरा सेक्टर नियंत्रण रेखा के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाते हैं, जहां सेना नियमित रूप से निगरानी और गश्त करती है। सीमापार घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए यहां सुरक्षा उपाय लगातार मजबूत बनाए जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को प्राकृतिक और परिचालन संबंधी दोनों तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

    इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में तैनात सैनिकों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है। सेना की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

  • केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

    केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

    नई दिल्ली । जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं का सकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। युवा बेरोजगार और किसान अब स्थिर आय के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन को एक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं।

    तांडवाल-मुबारकपुरा क्षेत्र के निवासी एहतेशाम ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। इस उद्यम के माध्यम से अब उनकी मासिक आय लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच गई है।

    एहतेशाम के फार्म ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इस पहल से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ किस प्रकार जमीनी स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद कर सकती हैं।

    राजौरी के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. खालिद ने बताया कि मुर्गी पालन जिले में आजीविका का एक संभावित और लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लाभार्थियों को उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हो।

    डॉ. खालिद के अनुसार, विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ये युवा अपने घरों के पास स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं और पोल्ट्री फार्म उनके लिए स्थिर आय का स्रोत बन गया है। विभाग लगातार नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए सभी संभव साधन प्रदान कर रहा है।

    एहतेशाम ने बताया कि उनके पिता को इस योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने इसका आवेदन किया। पशुपालन विभाग ने उन्हें मुर्गियों के बच्चों के साथ प्रशिक्षण और लोन उपलब्ध कराए। पहले परिवार के लिए जीवन बहुत कठिन था और घर चलाने के लिए अक्सर कर्ज लेना पड़ता था।

    अब फार्म शुरू होने के बाद एहतेशाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका मासिक आय स्तर 50,000 से 60,000 रुपये तक है और उन्होंने पांच स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। यह स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक स्पष्ट उदाहरण है।

    राजौरी जिले में केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग की योजनाओं ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के साथ छोटे स्तर के व्यवसाय भी लाभदायक और टिकाऊ बन सकते हैं। इस सफलता ने स्थानीय युवाओं और किसानों में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी जगाई है।

    यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाएँ केवल लाभार्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके माध्यम से व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार सृजन करना इन योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य हैं।

    राजौरी के उदाहरण ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और विभागीय सहयोग के माध्यम से छोटे उद्यमी भी बड़े आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। मुर्गी पालन का यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।