Tag: Rajwada Indore

  • राजवाड़ा में गूंजा मालवा का रंग, विदेशी मेहमानों ने किया लोकनृत्य

    राजवाड़ा में गूंजा मालवा का रंग, विदेशी मेहमानों ने किया लोकनृत्य


    मध्यप्रदेश। इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन शहर की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण विकास मॉडल ने विदेशी प्रतिनिधियों का दिल जीत लिया। बुधवार सुबह 20 देशों से आए प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा पहुंचकर इंदौर की समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास को करीब से जाना। इस दौरान विदेशी मेहमानों ने न केवल शहर की ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया, बल्कि मालवा की लोक संस्कृति और कृषि उत्पादों का भी अनुभव किया।

    राजवाड़ा पहुंचने पर प्रतिनिधियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। होलकरकालीन इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व और इंदौर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी इतिहासकार जफर अंसारी ने दी। उन्होंने मेहमानों को राजवाड़ा के स्थापत्य, होलकर राजवंश के योगदान और शहर की सांस्कृतिक विरासत के बारे में विस्तार से बताया। विदेशी प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक भवन की वास्तुकला और उसकी भव्यता की सराहना की।

    इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार पहुंचा, जहां मध्यप्रदेश की कृषि, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्यमिता और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। यहां विदेशी मेहमानों का मालवी परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जिससे वे बेहद उत्साहित नजर आए।

    ग्रामीण हाट में जनजातीय और लोक कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। ढोल-मांदल और लोकधुनों की गूंज के बीच कई विदेशी प्रतिनिधि स्वयं को रोक नहीं सके और कलाकारों के साथ मंच पर थिरकते दिखाई दिए। मालवा की संस्कृति से उनका यह जुड़ाव सम्मेलन का सबसे आकर्षक दृश्य बन गया। विदेशी मेहमानों ने लोकनृत्य की लय और उत्साह की खुलकर सराहना की।

    प्रतिनिधियों ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया। बुरहानपुर के केले से बने उत्पाद, बालाघाट का जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल, रीवा के प्रसिद्ध आम, झाबुआ की पारंपरिक फसलें और अन्य कृषि उत्पादों ने उनका ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से मध्यप्रदेश के आमों का स्वाद विदेशी प्रतिनिधियों को खूब पसंद आया। उन्होंने आमों की गुणवत्ता, मिठास और सुगंध की प्रशंसा करते हुए इसे प्रदेश की विशेष पहचान बताया।

    मृगनयनी के स्टॉल पर प्रदर्शित चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्रों ने भी मेहमानों को प्रभावित किया। इसके अलावा प्राकृतिक शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद, हर्बल सामग्री और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को भी खूब सराहना मिली। प्रतिनिधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता के प्रयासों की प्रशंसा की।

    ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के माध्यम से मध्यप्रदेश ने दुनिया के सामने अपनी कृषि क्षमता, प्राकृतिक खेती के मॉडल, ग्रामीण नवाचार और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। विदेशी प्रतिनिधियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया कि प्रदेश न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि संस्कृति और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज

    इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज


    इंदौर। इंदौर शहर में लगातार बढ़ रही पानी की समस्या को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शहर की कई कॉलोनियों और बस्तियों में पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं, और टैंकरों के जरिए भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    कांग्रेस ने मंगलवार को राजबाड़ा पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन शाम 5 बजे से शुरू होगा, जिसमें कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल होंगे। इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के साथ-साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे।

    कांग्रेस का आरोप है कि शहर में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन नगर निगम और महापौर की ओर से इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। इसी कारण जनता को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महापौर के इस्तीफे की मांग करेगी। चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया है कि वर्तमान महापौर शहर की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की जनता “त्राहिमाम” कर रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं।

    प्रदर्शन की रूपरेखा के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ता राजबाड़ा पर धरना देंगे, नारेबाजी करेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध जताएंगे। इसके बाद यह प्रदर्शन नगर निगम कार्यालय की ओर बढ़ेगा, जहां प्रतीकात्मक रूप से खाली मटके फोड़े जाएंगे। यह कदम पानी संकट और प्रशासन की कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जा रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल शुरुआत है और यदि जल समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और भी व्यापक किया जाएगा। उनका आरोप है कि शहर में बढ़ती आबादी के अनुरूप जल प्रबंधन व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, जिसके कारण यह संकट लगातार गहराता जा रहा है।

    इधर, प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, लेकिन शहर में पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए यह मुद्दा पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में राजबाड़ा पर होने वाला यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर इंदौर में पानी संकट अब सिर्फ जनसमस्या नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • टीम इंडिया की जीत से इंदौर-उज्जैन झूमे: राजवाड़ा से टॉवर चौक तक तिरंगा, आतिशबाजी और जश्न की गूंज

    टीम इंडिया की जीत से इंदौर-उज्जैन झूमे: राजवाड़ा से टॉवर चौक तक तिरंगा, आतिशबाजी और जश्न की गूंज


    नई दिल्ली । टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत ने मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन में उत्साह की लहर दौड़ा दी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए टी20 फाइनल में भारत की शानदार जीत के बाद दोनों शहरों में देर रात तक जश्न का माहौल बना रहा। क्रिकेट प्रेमियों ने सड़कों पर उतरकर तिरंगा लहराया आतिशबाजी की और ढोल ताशों की थाप पर नाचते गाते अपनी खुशी का इजहार किया।

    इंदौर में जीत की खुशी का सबसे बड़ा नजारा शहर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला। जैसे ही मैच खत्म हुआ और भारत की जीत की घोषणा हुई बड़ी संख्या में युवा और क्रिकेट प्रेमी राजवाड़ा पहुंच गए। हाथों में तिरंगा लिए युवाओं की टोलियां भारत माता की जय और इंडिया इंडिया के नारों के साथ सड़कों पर उतर आईं। पूरे क्षेत्र में पटाखों की गूंज सुनाई देने लगी और आसमान रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। कई स्थानों पर लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर इस ऐतिहासिक जीत की खुशी साझा की। ढोल ताशों की धुन पर युवा देर रात तक नाचते रहे और शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

    इधर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी रविवार का दिन खुशियों की त्रिवेणी लेकर आया। सुबह से ही शहर में रंगपंचमी का उल्लास छाया हुआ था वहीं दोपहर में नारी शक्ति सम्मान के कार्यक्रमों ने उत्सव के माहौल को और भी खास बना दिया। दिनभर के उत्सव के बाद रात को असली रोमांच तब शुरू हुआ जब टीम इंडिया ने फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को करारी शिकस्त दी।

    जैसे जैसे भारतीय टीम जीत के करीब पहुंचती गई वैसे वैसे शहरवासियों की धड़कनें भी तेज होती गईं। मैच खत्म होने से पहले ही उज्जैन के टॉवर चौक पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। जैसे ही भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों के बड़े अंतर से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप पर कब्जा जमाया वैसे ही पूरा शहर खुशी से झूम उठा। टॉवर चौक पर हजारों लोग इकट्ठा हो गए और जमकर आतिशबाजी की। पूरा आसमान दूधिया रोशनी और पटाखों की चमक से जगमगा उठा जिससे माहौल दीपावली जैसा दिखाई देने लगा।

    लोगों ने भारत माता की जय इंडिया इंडिया और बूम बूम बुमराह के नारों से माहौल को गुंजायमान कर दिया। युवाओं ने तिरंगा लहराते हुए सड़कों पर जुलूस निकाले और देर रात तक जीत का जश्न मनाया। शहरवासियों का कहना था कि एक ही दिन में रंगपंचमी का उत्सव नारी शक्ति का सम्मान और टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाना किसी यादगार संयोग से कम नहीं है।

    क्रिकेट प्रेमियों ने इस जीत को भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि टीम इंडिया ने खिताब का सफल बचाव कर देश को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दी है। यही कारण है कि इंदौर और उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में जीत की यह खुशी देर रात तक सड़कों पर दिखाई देती रही और हर तरफ तिरंगा आतिशबाजी और देशभक्ति के नारों की गूंज सुनाई देती रही।