Tag: Rajya Sabha elections 2026

  • प्रियंका चतुर्वेदी फिर जाएंगी राज्यसभा? उद्धव गुट की सांसद ने खुद बोलीं, 'मैं उसे लेकर कोई…'

    प्रियंका चतुर्वेदी फिर जाएंगी राज्यसभा? उद्धव गुट की सांसद ने खुद बोलीं, 'मैं उसे लेकर कोई…'


    नई दिल्‍ली। महाराष्ट्र में राज्यसभा की 7 सीटों पर चुनाव को लेकर सियासी गहमागहमी तेज हो गई है. उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. राज्यसभा में फिर से जाने के सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे लेकर खुद स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि जनता से मुझे भरपूर समर्थन मिला है. भविष्य में क्या होगा मैं उसे लेकर कोई कयास नहीं लगाना चाहती हूं लेकिन देश और जनता के हित में काम करती रहूंगी.

    पिछले 6 सालों में मैंने जनता के मुद्दों का उठाया- प्रियंका चतुर्वेदी

    शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि जनता ने मुझ पर जो विश्वास जताया है मुझे भरपूर समर्थन मिला है. पिछले छह वर्षों में मैंने कड़ी मेहनत की है जनता के मुद्दों को उठाया है. मेरी पार्टी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है जिसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी.”

    मैं हमेशा लोगों का शुक्रगुजार रहूंगी- प्रियंका चतुर्वेदी

    उन्होंने आगे कहा एक महिला जिनका राजनीति से कोई लेना देना नहीं था उनको राज्यसभा में आने का मौका मिला मैं इसके लिए हमेशा आभारी और शुक्रगुजार रहूंगी. आने वाले समय में क्या होगा क्या नहीं होगा मैं उसे लेकर कोई अनुमान नहीं लगाना चाहती हूं लेकिन ये जरूर कहूंगी कि देश और जनता के हित में काम करना जारी रखूंगी.”

    MVA से कौन जाएगा राज्यसभा?

    उद्धव ठाकरे की पार्टी एमवीए का हिस्सा है. विधायकों के आंकड़ों के हिसाब से MVA से एक ही सांसद राज्यसभा जा सकता है. वो नेता कौन होगा इसको लेकर अभी इस गठबंधन में तस्वीर साफ नहीं है.

    महाविकास आघाड़ी का गणित
    कांग्रेस 16 + राष्ट्रवादी शरद पवार गुट 10 + शिवसेना ठाकरे गुट 20 = 46
    छोटे सहयोगी दल सपा 2 + माकपा 1 = 3
    कुल = 49 विधायक
    49 ÷ 37 = 1.32
    अर्थात MVA का 1 सांसद निश्चित
    राज्यसभा को लेकर चुनावी कार्यक्रम
    बता दें कि 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा. नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च है. वहीं 6 मार्च को नामांकन पत्र की जांच होगी. जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च है. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी जबकि शाम पांच बजे से मतगणना होगी.

  • MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। यह बयान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में आया था। पत्र में आग्रह किया गया था कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाहिए। इस मांग के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई और सवाल उठने लगा कि क्या दिग्विजय सिंह एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे या नहीं।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया, “यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी का फैसला जो भी होगा, वह सर्वमान्य होगा। इतना जरूर मैं कह सकता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए नहीं जाएंगे, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास 64, बीएपी के पास 1 और भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं। इस हिसाब से राजनीतिक समीकरण, दलों की ताकत और उम्मीदवारों का चयन सभी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    राज्यसभा सीटों की इस लड़ाई में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से उम्मीदवार का चयन पार्टी की छवि और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद अब कांग्रेस के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सस्पेंस और रणनीति का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ भी मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव हमेशा पार्टी की भीतरी ताकत और प्रभाव को दिखाने का मौका होते हैं।

    इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामुदायिक समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। दिग्विजय सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर नए नेताओं के लिए अवसर और सियासी समीकरणों में बदलाव ला सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत को रोचक और रणनीतिक मोड़ दे दिया है, और अब सबकी निगाहें आगामी राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं।