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  • थिएटर से फिल्मों तक राकेश बेदी का सफर ‘धुरंधर’ ने फिर दिलाई नई पहचान…

    थिएटर से फिल्मों तक राकेश बेदी का सफर ‘धुरंधर’ ने फिर दिलाई नई पहचान…


    नई दिल्ली: अभिनय की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो हर दौर में अपनी अलग छाप छोड़ते हैं और उन्हीं में से एक हैं राकेश बेदी जो इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 में अपने किरदार जमील जमाली को लेकर जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनकी संवाद अदायगी का अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शक एक बार फिर उनके अभिनय के कायल हो गए हैं।

    दिल्ली के श्रीराम सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी उनके हुनर की मिसाल देता है। एक नाटक के दौरान अचानक बिजली चली गई तो दर्शकों में शोर मच गया लेकिन उसी अंधेरे में राकेश बेदी मंच पर आए और अपनी आवाज के जादू से दर्शकों को बांधे रखा। करीब बीस मिनट तक बिना रोशनी के उन्होंने ऐसा माहौल बना दिया कि जब बिजली लौटी तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह घटना उनके नैसर्गिक अभिनय कौशल को दर्शाती है।

    इंजीनियर बनने का सपना उनके पिता देखते थे लेकिन राकेश बेदी का मन बचपन से ही अभिनय में रमा हुआ था। उन्होंने आईआईटी दिल्ली की परीक्षा भी दी लेकिन कुछ ही मिनटों में परीक्षा हॉल छोड़ दिया क्योंकि उनका झुकाव कला की ओर था। इसके बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय की पढ़ाई की जहां उनके सहपाठी ओम पुरी जैसे दिग्गज रहे।

    थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राकेश बेदी ने धीरे-धीरे टेलीविजन और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। ये जो है जिंदगी, श्रीमान श्रीमती, यस बॉस और भाभी जी घर पर हैं जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

    फिल्मों में भी उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं लेकिन फिल्म चश्मे बद्दूर का ‘ओमी’ किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस फिल्म की निर्देशक सई परांजपे ने उन्हें सिर्फ उनकी चाल देखकर कास्ट किया था जो बाद में दर्शकों को खूब पसंद आई।

    हाल के दिनों में राकेश बेदी का नाम कुछ विवादों में भी आया लेकिन उन्होंने हमेशा बेबाकी से अपनी बात रखी। इसके बावजूद उनके काम की सराहना कम नहीं हुई और फिल्म धुरंधर 2 में उनके किरदार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह कितने बहुमुखी कलाकार हैं।

    अभिनय के अलावा राकेश बेदी को साहित्य और शायरी का भी शौक है। वह गजलें और नज्में लिखते हैं और अक्सर मुशायरों में हिस्सा लेते हैं। वह चार्ली चैपलिन से प्रेरित हैं और जॉनी वॉकर, संजीव कुमार और महमूद को अपना आदर्श मानते हैं।

    आज राकेश बेदी की कहानी यह बताती है कि अगर जुनून सच्चा हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं। इंजीनियरिंग की राह छोड़कर अभिनय को चुनने का उनका फैसला ही उन्हें उस मुकाम तक लेकर आया जहां आज उनका नाम सम्मान और प्रतिभा का पर्याय बन चुका है।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

    इंजीनियरिंग छोड़ अभिनय को चुना राकेश बेदी ने धुरंधर 2 में जमील जमाली बनकर फिर बटोरी सुर्खियां

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