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  • जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना

    जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया जिसमें पुलिस विभाग के अधिकारियों और जवानों ने विधि-विधान से अपने हथियारों की पूजा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान परंपरा के निर्वहन के साथ पुलिस बल के अनुशासन सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

    पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी अवसर पर पुलिस तथा सुरक्षा बल अपने हथियारों का पूजन कर अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में धार्मिक मान्यताओं और विभागीय अनुशासन का संगम देखने को मिला।

    पूजन के दौरान हथियारों की साफ-सफाई रखरखाव और सुरक्षित उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। पुलिस बल के लिए हथियार केवल सुरक्षा का साधन नहीं बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की रक्षा करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए जवानों को अपने उपकरणों की देखभाल के प्रति सजग रहने और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करने का संदेश दिया जाता है।

    कार्यक्रम में शामिल मंत्री राकेश सिंह और पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पुलिस विभाग की टीम और प्रदेशवासियों के लिए सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। आयोजन का उद्देश्य विजयादशमी की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ पुलिस बल में कर्तव्यनिष्ठा और एकजुटता की भावना को मजबूत करना भी रहा।

    विजयादशमी पर शस्त्र पूजन देश के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बल इस दिन अपने हथियारों तथा उपकरणों का पूजन करते हैं। यह आयोजन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाने और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति सतर्कता बनाए रखने का अवसर भी देता है। जबलपुर पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में भी धार्मिक आस्था और पुलिस अनुशासन दोनों का महत्व सामने आया। अधिकारियों और जवानों ने इस अवसर पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प दोहराया।

  • 27% OBC आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने उठाए कानूनी पैरवी पर सवाल, भाजपा ने पुराने फैसले को ठहराया जिम्मेदार

    27% OBC आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने उठाए कानूनी पैरवी पर सवाल, भाजपा ने पुराने फैसले को ठहराया जिम्मेदार


    जबलपुर। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। आरक्षण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने राज्य सरकार की कानूनी पैरवी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईकोर्ट में आरक्षण के समर्थन में जरूरी आंकड़े और तथ्य मजबूती से पेश नहीं किए गए। वहीं प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने ओबीसी आरक्षण के मामले में लोगों के साथ धोखा किया। दोनों नेताओं के बयानों के बाद प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
    शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर जबलपुर पहुंचे विवेक तन्खा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अध्यादेश के माध्यम से ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। हालांकि बाद में सरकार बदल गई और भाजपा सत्ता में आ गई। ऐसे में अध्यादेश और आरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का बचाव करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। तन्खा के मुताबिक किसी भी आरक्षण व्यवस्था को अदालत में मजबूती से साबित करने के लिए केवल राजनीतिक दावे पर्याप्त नहीं होते बल्कि उसके समर्थन में ठोस तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
    तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि नौ न्यायाधीशों की पीठ ने सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत रखने का सिद्धांत स्थापित किया था। इससे अधिक आरक्षण देने के लिए असाधारण परिस्थितियों को प्रमाणित करना आवश्यक होता है। इसके लिए सरकार को मात्रात्मक आंकड़े यानी क्वांटिफायबल डेटा प्रस्तुत करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार जरूरी आंकड़े प्रभावी ढंग से पेश नहीं कर पाई। यदि पर्याप्त तथ्य और आंकड़े अदालत के सामने रखे जाते तो संभव है कि मामले में अलग परिणाम सामने आता।
    वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि अब राज्य सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने का विकल्प मौजूद है। यदि सरकार ने विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी दायर की है तो यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। उनके अनुसार आरक्षण के पक्ष में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को ठोस तथ्यों के साथ अदालत में पैरवी करनी चाहिए। तन्खा ने यह भी कहा कि अध्यादेश का बचाव करने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की होती है क्योंकि संबंधित विभागों के पास ही जरूरी आंकड़े और प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध रहती है। राजनीतिक दल इस कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सकते हैं और सहयोग कर सकते हैं लेकिन सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
    दूसरी ओर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आरक्षण के मामले में जल्दबाजी की और पर्याप्त तैयारी के बिना विधेयक लाया। मंत्री के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश में विधेयक से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया है और इसी वजह से मौजूदा स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी वर्गों के साथ न्याय हो और आरक्षण से जुड़े मामले का कानूनी समाधान निकाला जाए।
    ओबीसी आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में अहम बना रहेगा। एक तरफ कांग्रेस सरकार की कानूनी पैरवी और आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रही है तो दूसरी तरफ भाजपा आरक्षण से जुड़े पुराने फैसलों और विधायी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगे की कानूनी कार्रवाई पर रहेगी। अदालत में पेश किए जाने वाले तथ्य और आंकड़े ही इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।