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  • भाकियू की महापंचायत में उमड़ा किसानों का हुजूम, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचे किसान, राकेश टिकैत भी शामिल

    भाकियू की महापंचायत में उमड़ा किसानों का हुजूम, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचे किसान, राकेश टिकैत भी शामिल


    मेरठ। किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की महापंचायत मेरठ मंडलायुक्त कार्यालय के बाहर कमिश्नरी पार्क में शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ महापंचायत में पहुंचे हैं। इससे आसपास के रास्तों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग गई हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मंच पर पहुंच चुके हैं और किसानों को संबोधित कर रहे हैं।

    आरती के साथ शुरू हुई
    महापंचायत
    महापंचायत की शुरुआत भगवान श्रीगणेश और मां सरस्वती की आरती के साथ हुई। इसके बाद रागिनी अंदाज में भगवान का आगमन कराया गया। धीरे-धीरे किसानों की संख्या बढ़ती गई और कमिश्नरी पार्क में भीड़ जुटने लगी।

    सिख समाज ने बांटा हलवा
    महापंचायत में पहुंचे सिख समाज के किसानों ने सेवा करते हुए हलवा बांटा। किसानों और वहां मौजूद लोगों को हलवा वितरित किया गया। इस दौरान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी देखने को मिली।

    ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गद्दे और खाने का सामान भी लाए
    महापंचायत में शामिल होने के लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंचे। कई किसान अपने साथ कुर्सियां, गद्दे और खाने-पीने का सामान भी लेकर आए हैं। कमिश्नरी पार्क की ओर जाने वाले रास्तों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

    बिजली, खाद और गन्ने के भुगतान समेत कई मुद्दे
    राकेश टिकैत मंच से किसानों को संबोधित कर रहे हैं। महापंचायत में किसान बिजली, खाद, चीनी की महंगाई और गन्ने के भुगतान समेत कई समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

    भाकियू के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर 21 जुलाई को अपर मंडलायुक्त अमित कुमार को मांग पत्र सौंपा गया था। संगठन का कहना है कि मांग पत्र दिए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते अब महापंचायत के जरिए किसानों की मांगें अधिकारियों के सामने रखी जा रही हैं।

    मांगें नहीं मानीं तो जेल भरो आंदोलन
    भाकियू पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि यदि किसानों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ऐसे में महापंचायत को किसानों के आर-पार की लड़ाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    कमिश्नरी क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन
    महापंचायत को देखते हुए कमिश्नरी चौराहे और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था बदली गई है। सुबह 10:30 बजे से शाम 6 बजे तक कमिश्नरी चौराहे से कुटी चौराहे के बीच सामान्य वाहनों का आवागमन बंद रखा गया है। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।

  • महापंचायत में राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान, किसानों के हितों पर समझौता नहीं करने की दी चेतावनी

    महापंचायत में राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान, किसानों के हितों पर समझौता नहीं करने की दी चेतावनी


    नई दिल्ली । किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर गाजियाबाद में सोमवार को माहौल उस समय गर्म हो गया जब किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait ने एक महापंचायत का आयोजन किया। इस पंचायत में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी देखने को मिली, जहां कई स्थानीय और क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। किसानों की ओर से भूमि अधिग्रहण, मुआवजा विवाद और हाल के घटनाक्रमों को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। पंचायत के दौरान शुरुआत से ही आंदोलनकारी रुख दिखाई दिया और प्रशासन पर मांगों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

    महापंचायत के दौरान किसानों की ओर से प्रशासन को सीमित समय का अल्टीमेटम दिया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और बातचीत का दौर शुरू हुआ। हालात को देखते हुए कई विभागों से जुड़े अधिकारी भी चर्चा प्रक्रिया में शामिल हुए। बैठक के दौरान किसान नेताओं ने विभिन्न मामलों को गंभीरता से उठाया और कई मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। लंबे समय तक चली बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।

    इस दौरान राकेश टिकैत ने एक मामले में कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मंच से अपनी बात रखते हुए प्रशासन के सामने खुली चुनौती पेश की और अपने तेवर साफ कर दिए। पंचायत में मौजूद किसानों ने भी उनके समर्थन में जोरदार आवाज उठाई। किसान नेताओं की सख्त रणनीति और एकजुटता के कारण प्रशासन बेहद सतर्क नजर आया। माहौल को शांत बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे।

    महापंचायत के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों के अलावा अन्य जनहित विषयों पर भी चर्चा की गई। बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर भी नाराजगी जताई गई। साथ ही युवाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर भी चिंता व्यक्त की गई। किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण और किसान वर्ग से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इन विषयों पर गंभीर पहल की आवश्यकता है। सभा में मौजूद लोगों ने भी इन मुद्दों पर अपनी सहमति जाहिर की।

    कई घंटों तक चले संवाद के बाद स्थिति में कुछ नरमी देखने को मिली। बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आगे भी चर्चा जारी रखने की सहमति जताई। प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए कि किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। वहीं किसान पक्ष ने भी कहा कि उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है, लेकिन किसानों के हितों से जुड़े मामलों पर वे पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। महापंचायत ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि किसान संगठनों की आवाज और जमीनी पकड़ अभी भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखती है।