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  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन के मौके पर भाई या बहन के लिए उपहार खरीदना अगर आखिरी समय तक टल गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्विक कॉमर्स सेवाओं के जरिए घर बैठे कुछ ही समय में कई तरह के गिफ्टिंग विकल्प तलाशे जा सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक से लेकर ब्यूटी, ग्रूमिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान तक कई विकल्प अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध हो सकते हैं।

    आखिरी समय में गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले सबसे जरूरी बात अपने इलाके में उपलब्धता देखना है। संबंधित ऐप खोलकर लोकेशन दर्ज करने के बाद यह जांचना चाहिए कि चुना हुआ सामान आसपास के स्टोर में मौजूद है या नहीं। इसके साथ ही ऐप पर दिखाई जा रही अनुमानित डिलीवरी अवधि को भी देखना जरूरी है।

    Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रक्षाबंधन के लिए कई तरह के छोटे और तुरंत दिए जा सकने वाले उपहार मिल सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक के अलावा स्नैक्स, ब्यूटी तथा पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद भी विकल्प हो सकते हैं। भाई या बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामान चुनना आखिरी समय में भी बेहतर गिफ्ट तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।

    Zepto पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में गिफ्टिंग से जुड़े कई उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। चॉकलेट और दूसरे खाद्य उत्पादों के अलावा परफ्यूम, ब्यूटी तथा ग्रूमिंग से जुड़े सामान और रोजाना काम आने वाले उत्पादों को भी उपहार के तौर पर चुना जा सकता है। हालांकि हर इलाके में हर उत्पाद उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

    Swiggy Instamart भी आखिरी समय में गिफ्ट तलाशने वालों के लिए एक विकल्प हो सकता है। यहां उपलब्धता के आधार पर चॉकलेट, मिठाई, फूल, स्नैक्स और अन्य छोटे गिफ्टिंग आइटम देखे जा सकते हैं। भाई या बहन की पसंद की अलग-अलग चीजें एक साथ मंगाकर छोटा सा गिफ्ट कॉम्बिनेशन भी तैयार किया जा सकता है।

    हालांकि क्विक डिलीवरी का मतलब यह नहीं है कि हर ऑर्डर निश्चित रूप से 15 मिनट में पहुंच जाएगा। डिलीवरी का समय ग्राहक की लोकेशन, आसपास उपलब्ध स्टॉक, ऑर्डर की संख्या और उस समय की स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर ऑर्डर की संख्या बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से अधिक देरी भी हो सकती है।

    इसीलिए ऑर्डर करने से पहले अनुमानित डिलीवरी समय जरूर जांचना चाहिए। यदि राखी बांधने या परिवार के साथ मिलने का समय बेहद करीब है, तो ऐसा सामान चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी उपलब्धता स्पष्ट हो और जिसकी अनुमानित डिलीवरी निर्धारित समय से पहले दिखाई दे रही हो।

    गिफ्ट चुनने में ज्यादा समय नहीं है तो चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक आसान विकल्प हो सकते हैं। इनके अलावा परफ्यूम, स्किन केयर, ग्रूमिंग उत्पाद, कॉफी और स्नैक कॉम्बो या भाई-बहन की पसंद का कोई छोटा उपयोगी सामान भी चुना जा सकता है। बजट के अनुसार एक से अधिक छोटी चीजों को मिलाकर व्यक्तिगत गिफ्ट तैयार किया जा सकता है।

    रक्षाबंधन पर आखिरी समय में खरीदारी करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दबाजी में केवल डिलीवरी स्पीड देखकर ऑर्डर करना नहीं, बल्कि उपलब्धता, कीमत और अनुमानित डिलीवरी समय की जांच करना है। सही विकल्प चुनकर कम समय में भी भाई या बहन के लिए उपयोगी और पसंद आने वाला उपहार मंगाया जा सकता है।

  • रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व माना जाता है। समय के साथ इस त्योहार पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z अब केवल चॉकलेट, मिठाई, कपड़े या गैजेट देने के बजाय ऐसे उपहारों पर विचार कर रही है, जिनका लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके। इसी बदलाव के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के एक नए और उपयोगी उपहार के रूप में देखा जा रहा है।

    बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उपहारों पर त्योहार के दौरान कुछ हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित समय तक ही रहता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा ऐसा वित्तीय सुरक्षा साधन हो सकता है, जो बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक बोझ कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि युवा वर्ग त्योहार के उपहार को भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

    इस बदलाव को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति रक्षाबंधन पर करीब 7,000 रुपये चॉकलेट, मिठाई या किसी अन्य उपहार पर खर्च करता है, तो यह राशि कुछ समय बाद पूरी तरह खर्च हो जाती है। वहीं इसी स्तर के खर्च को उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर इस्तेमाल करने पर भाई या बहन के लिए स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा तैयार की जा सकती है।

    बताया गया है कि लगभग 7,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में परिस्थितियों और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शहर, बीमा कंपनी, कवरेज, पॉलिसी की शर्तों और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसके लाभ, सीमाएं, प्रतीक्षा अवधि और बहिष्करण को समझना जरूरी है।

    मासिक हिसाब से देखें तो 7,000 रुपये का सालाना खर्च 600 रुपये से भी कम बैठता है। युवा उपभोक्ताओं के लिए यह राशि नियमित छोटे खर्चों के मुकाबले कम या समान हो सकती है। इसी सोच के कारण हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमा उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के लिए जिम्मेदारी और आर्थिक सुरक्षा के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने, जांच, दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर अचानक दबाव डाल सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्चों का भुगतान बीमा के माध्यम से किया जा सकता है।

    हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बीमा राशि, नेटवर्क अस्पताल, कमरे के किराये की सीमा, सह-भुगतान, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े नियम और क्लेम प्रक्रिया जैसी बातों की जानकारी लेना जरूरी है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी हमेशा सबसे बेहतर विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

    रक्षाबंधन के अवसर पर उपहारों का यह बदलता स्वरूप बताता है कि युवा पीढ़ी भावनात्मक रिश्तों के साथ वित्तीय योजना को भी महत्व दे रही है। चॉकलेट या मिठाई जैसे पारंपरिक उपहार अपनी जगह कायम हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जैसा विकल्प लंबे समय की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला उपहार बन सकता है। सही पॉलिसी और पर्याप्त कवरेज का चुनाव भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा की भावना को आर्थिक रूप भी दे सकता है।

  • रक्षाबंधन ऐड की ट्रोलिंग पर कृति सेनन का जवाब, बोलीं संस्कृति और परंपरा कपड़ों की नेकलाइन से तय नहीं होती

    रक्षाबंधन ऐड की ट्रोलिंग पर कृति सेनन का जवाब, बोलीं संस्कृति और परंपरा कपड़ों की नेकलाइन से तय नहीं होती


    नई दिल्ली । 
    अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच चर्चा में हैं। एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन कैंपेन में उनके पहनावे को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए। आलोचकों ने विज्ञापन में उनके आधुनिक आउटफिट को पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में अनुपयुक्त बताया। अब कृति सेनन ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    कृति ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि त्योहारों की वास्तविक भावना किसी व्यक्ति के कपड़ों से नहीं, बल्कि परंपराओं के प्रति उसकी भावनाओं और उनके महत्व से जुड़ी होती है। उन्होंने रक्षाबंधन को सुरक्षा, स्नेह और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए अपने और अपनी बहन के रिश्ते का भी जिक्र किया।

    अभिनेत्री ने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सेहत, खुशी तथा लंबी उम्र की कामना करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह भावना उनके पालतू कुत्तों तक भी जुड़ी हुई है, क्योंकि वे भी परिवार का हिस्सा हैं। इस तरह उन्होंने रक्षाबंधन के रिश्ते को केवल भाई-बहन तक सीमित न मानने की बात रखी।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह बताना बंद होना चाहिए कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उनके मुताबिक समय के साथ पारंपरिक और एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी किसी महिला के संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों के आधार पर आंकने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृति और परंपरा व्यक्ति की भावनाओं और मूल्यों में होती है, केवल कपड़ों की नेकलाइन में नहीं। कृति की इस प्रतिक्रिया को उनके विज्ञापन को लेकर चल रही सोशल मीडिया बहस का सीधा जवाब माना जा रहा है।

    विवाद की शुरुआत उस रक्षाबंधन कैंपेन के सामने आने के बाद हुई, जिसमें कृति ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट वाले आधुनिक-परंपरागत लुक में दिखाई दी थीं। विज्ञापन में रक्षाबंधन के उत्सव को पालतू जानवरों के साथ भी जोड़ा गया है। कैंपेन में कृति पहले अपने भाई के साथ त्योहार मनाती हैं और बाद में अपने पालतू कुत्ते को राखी बांधती नजर आती हैं।

    विज्ञापन जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कृति के पहनावे को लेकर आपत्ति जताई। कुछ टिप्पणियों में उनके ब्लाउज की तुलना ब्रा या बिकिनी से की गई और रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के लिए इस तरह के परिधान को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद विज्ञापन के उद्देश्य के साथ-साथ अभिनेत्री के लुक को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।

    इस मामले में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने महिलाओं के पास उपलब्ध अलग-अलग तरह के परिधानों का उल्लेख करते हुए कृति के विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए लुक पर सवाल उठाया था। हालांकि कृति सेनन ने कंगना की प्रतिक्रिया का नाम लेकर कोई जवाब नहीं दिया है।

    पूरे विवाद के बीच कृति ने अपनी बात महिलाओं की पसंद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्योहार की भावना पर केंद्रित रखी है। उनका कहना है कि किसी महिला के पहनावे को उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। विज्ञापन को लेकर उठी बहस ने रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहारों की आधुनिक प्रस्तुति और बदलते फैशन को लेकर चर्चा को भी सामने ला दिया है।

  • कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन पर टिप्पणी करते हुए उसमें दिखाई गई ड्रेसिंग को लेकर सवाल उठाया है। कृति सेनन का यह विज्ञापन एक ज्वैलरी ब्रांड से जुड़ा है और इसमें रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हुए उन्हें दिखाया गया है।

    विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन की ड्रेस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने इसे विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा माना। इसी बीच कंगना रनौत ने भी इस विवाद पर अपनी राय सार्वजनिक की।

    कृति सेनन विज्ञापन में इंडो-वेस्टर्न अंदाज के परिधान में नजर आती हैं। विज्ञापन की थीम रक्षाबंधन से जुड़ी है और इसमें भाई-बहन के रिश्ते को त्योहार के संदर्भ में दिखाया गया है। हालांकि, कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और विज्ञापन का यह हिस्सा लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं वैश्विक फैशन को अपनाती हैं और उनके पास पारंपरिक भारतीय परिधानों से लेकर आधुनिक कपड़ों तक कई विकल्प मौजूद हैं।

    इसी संदर्भ में कंगना ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे पहनावे का इस्तेमाल क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल करते हुए पूछा कि जब महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो इस तरह के परिधान को ही क्यों चुना गया।

    कंगना ने अपनी टिप्पणी में यह भी संकेत दिया कि विज्ञापन को जानबूझकर असामान्य तरीके से तैयार किया गया हो सकता है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद कृति सेनन का विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कृति सेनन की ओर से कंगना की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

    रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा तथा सम्मान का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। त्योहार के इसी भाव को ध्यान में रखते हुए कंपनियां हर साल आभूषण, कपड़े, मिठाई और अन्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापन तैयार करती हैं।

    सेलिब्रिटी विज्ञापनों में पहनावे और प्रस्तुति को लेकर विवाद नया नहीं है। कई बार किसी विज्ञापन की थीम, ड्रेसिंग या विजुअल प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं और कुछ ही समय में विज्ञापन व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।

    कृति सेनन के मामले में भी यही देखने को मिला। एक तरफ विज्ञापन की रचनात्मकता और फैशन प्रस्तुति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। कंगना की टिप्पणी ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

    कंगना रनौत पहले भी फिल्म, फैशन, सामाजिक विषयों और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उनके बयानों पर अक्सर समर्थन और आलोचना दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस बार भी उनकी टिप्पणी के बाद कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र विज्ञापन में कृति सेनन की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना के बीच तालमेल का सवाल है। कृति की ओर से इस टिप्पणी पर कोई स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन के लुक पर यूजर्स ने उठाए सवाल, कुछ प्रशंसकों ने ट्रोलिंग को बताया अनावश्यक विवाद

    रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन के लुक पर यूजर्स ने उठाए सवाल, कुछ प्रशंसकों ने ट्रोलिंग को बताया अनावश्यक विवाद


    नई दिल्ली । 
    बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपने एक नए रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। एक ज्वेलरी ब्रांड के लिए बनाए गए इस विज्ञापन में कृति को रक्षाबंधन के मौके पर अपने छोटे भाई और पालतू डॉग के साथ नजर आते दिखाया गया है। विज्ञापन सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने अभिनेत्री के पहनावे और विज्ञापन की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं।

    विज्ञापन में कृति सेनन सफेद रंग के लहंगा-चोली में दिखाई देती हैं। उन्होंने अपने लुक को हल्के मेकअप और सीमित ज्वेलरी के साथ पूरा किया है। विज्ञापन की कहानी में वह सबसे पहले अपने पालतू डॉग को राखी बांधती नजर आती हैं और इसके बाद भाई के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाती दिखाई देती हैं।

    सोशल मीडिया पर विज्ञापन के सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने कृति के आउटफिट को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा अधिक पारंपरिक होना चाहिए था। कुछ टिप्पणियों में उनके कपड़ों को जरूरत से ज्यादा रिवीलिंग बताया गया और इसी आधार पर विज्ञापन की आलोचना की गई।

    कुछ यूजर्स ने कृति के लुक की तुलना ब्रा से करते हुए भी टिप्पणी की। एक वर्ग ने सवाल उठाया कि परिवार के साथ रक्षाबंधन मनाने के दृश्य में इस तरह का पहनावा क्यों चुना गया। वहीं कुछ लोगों ने विज्ञापन में भाई को राखी बांधने से पहले पालतू डॉग को राखी बांधने के दृश्य पर भी प्रतिक्रिया दी।

    हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाएं एकतरफा नहीं रहीं। कृति सेनन के कुछ प्रशंसकों ने अभिनेत्री का बचाव किया और कपड़ों को लेकर की जा रही टिप्पणियों को अनावश्यक ट्रोलिंग बताया। समर्थकों का कहना है कि विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा व्यक्तिगत शैली और ब्रांड की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा है तथा इसे लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करना उचित नहीं है।

    एक यूजर ने कृति का बचाव करते हुए कहा कि विज्ञापन में दिखाए गए परिधान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। वहीं कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में भी लोगों ने कहा कि त्योहार की भावना को केवल पहनावे के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। इस तरह विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग विचार सामने आए हैं।

    रक्षाबंधन भारत में भाई-बहन के रिश्ते और आपसी स्नेह से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इसी वजह से त्योहार आधारित विज्ञापनों में पारंपरिक प्रतीकों और पारिवारिक भावनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है। कृति के विज्ञापन को लेकर हुई बहस भी इसी सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से जुड़ती दिखाई दे रही है।

    काम की बात करें तो कृति सेनन हाल में शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना के साथ फिल्म कॉकटेल 2 में नजर आई थीं। फिल्म में उनकी भूमिका और अभिनय को दर्शकों से प्रतिक्रिया मिली। अब प्रशंसकों की नजर उनके आगामी प्रोजेक्ट्स पर है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा ने अभिनेत्री को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

  • रक्षाबंधन 2026 पर राखी खरीदते समय रखें डिजाइन का ध्यान, जानिए भगवान की तस्वीर से काले धागे तक क्या मान्यताएं हैं

    रक्षाबंधन 2026 पर राखी खरीदते समय रखें डिजाइन का ध्यान, जानिए भगवान की तस्वीर से काले धागे तक क्या मान्यताएं हैं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में राखी को केवल धागा नहीं माना जाता, बल्कि इसके रंग, डिजाइन और उस पर बने प्रतीकों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

    राखी खरीदते समय बाजार में कई तरह के डिजाइन देखने को मिलते हैं। इनमें देवी-देवताओं की तस्वीर वाली राखी, ॐ और स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्नों वाली राखी, सूती या रेशमी धागे की राखी के अलावा बच्चों के लिए कार्टून और आधुनिक डिजाइन भी शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन सभी का महत्व एक जैसा नहीं माना जाता।

    भगवान गणेश, भगवान कृष्ण या भगवान हनुमान की तस्वीर वाली राखी को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी राखी भाई के जीवन में ईश्वर की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक बन सकती है। हालांकि धार्मिक चित्र वाली राखी को रक्षाबंधन के बाद सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है और उसे इधर-उधर फेंकने से बचने की परंपरा बताई जाती है।

    ॐ और स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्नों वाली राखी को भी धार्मिक दृष्टि से सकारात्मक माना जाता है। इन प्रतीकों का संबंध मंगल, शांति और समृद्धि से जोड़ा जाता है। ऐसी राखी चुनने वाले लोग इसकी पवित्रता और साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं। धार्मिक प्रतीकों वाली वस्तुओं को सम्मान के साथ रखने की परंपरा भी भारतीय संस्कृति में रही है।

    साधारण सूती या रेशमी धागे की राखी को सबसे पारंपरिक विकल्पों में माना जाता है। इसमें किसी विशेष सजावट की जरूरत नहीं होती और यह भाई-बहन के स्नेह तथा रिश्ते की सरलता का प्रतीक मानी जाती है। पारंपरिक रूप से सादे और पवित्र धागे को रक्षाबंधन की भावना से जोड़ा जाता है।

    बच्चों के बीच कार्टून और फैंसी राखियों का चलन काफी बढ़ा है। अलग-अलग पात्रों और आकर्षक आकृतियों वाली ऐसी राखियां बच्चों को पसंद आती हैं। हालांकि धार्मिक दृष्टि से इनका कोई विशेष महत्व नहीं माना जाता। इन्हें मुख्य रूप से पसंद और सुविधा के आधार पर चुना जा सकता है।

    इवल आई यानी नजर से बचाने वाले प्रतीक वाली राखियों को लेकर भी अलग-अलग धारणाएं हैं। आधुनिक मान्यताओं में इसे बुरी नजर से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पारंपरिक वैदिक मान्यताओं में इसका कोई अनिवार्य धार्मिक महत्व नहीं है। इसलिए इसे न पूरी तरह शुभ माना जाता है और न ही अशुभ।

    काली राखी को लेकर कुछ धार्मिक मान्यताओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसी तरह टूटी, खंडित या बहुत नुकीली डिजाइन वाली राखी से बचने की बात कही जाती है। राखी बांधते समय उसके टूट जाने को भी कुछ परंपराओं में अपशकुन माना जाता है। प्लास्टिक से बनी राखियों को लेकर भी पारंपरिक पसंद कम बताई जाती है।

    हालांकि राखी के शुभ या अशुभ प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ये बातें मुख्य रूप से धार्मिक विश्वास, ज्योतिषीय मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित हैं। इसलिए राखी चुनते समय भाई-बहन के रिश्ते की भावना, पसंद और सुविधा को प्राथमिकता देना सबसे महत्वपूर्ण है।

  • DA Hike News: केंद्रीय कर्मचारियों के जुलाई डीए में 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना, रक्षाबंधन पर घोषणा पर नजर

    DA Hike News: केंद्रीय कर्मचारियों के जुलाई डीए में 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना, रक्षाबंधन पर घोषणा पर नजर

    नई दिल्ली । केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है। सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच संभावित वृद्धि को लेकर चर्चा तेज है। मौजूदा संकेतों के आधार पर महंगाई भत्ते में 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में सामान्य तौर पर साल में दो बार संशोधन किया जाता है। पहला संशोधन जनवरी से और दूसरा जुलाई से प्रभावी माना जाता है। जनवरी वाले संशोधन की घोषणा आमतौर पर वर्ष की शुरुआत के बाद होती है, जबकि जुलाई वाले संशोधन का फैसला बाद के महीनों में सामने आता है।

    इस बार कर्मचारियों की नजर रक्षाबंधन के अवसर पर भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सितंबर की शुरुआत में महंगाई भत्ते की घोषणा करना चाहती है, तो अगस्त के अंत में इसकी जानकारी दी जा सकती है। हालांकि रक्षाबंधन के दिन ही घोषणा होने की बात अभी निश्चित नहीं है और इसे केवल संभावना के तौर पर देखा जा रहा है।

    महंगाई भत्ते में संशोधन का फैसला केंद्र सरकार की कैबिनेट मंजूरी के बाद होता है। इसके लिए महंगाई और उपभोक्ता कीमतों से जुड़े आंकड़ों को आधार बनाया जाता है। महंगाई भत्ते का उद्देश्य कर्मचारियों की आय पर बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित करना है।

    मौजूदा व्यवस्था सातवें वेतन आयोग के तहत जारी है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने तक केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में महंगाई भत्ते से संबंधित संशोधन इसी व्यवस्था के अनुसार होते रहेंगे। इसलिए जुलाई 2026 के संशोधन को लेकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है।

    इस वर्ष पहले संशोधन में महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके बाद महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया था। अब जुलाई के लिए संभावित संशोधन में भी 2 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना बताई जा रही है। कुछ आकलनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के रुझानों को देखते हुए 3 प्रतिशत वृद्धि की संभावना भी जताई गई है।

    यदि सरकार 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मूल वेतन का 63 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं 2 प्रतिशत की वृद्धि होने पर यह 62 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम प्रतिशत और लागू होने की तारीख का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

    कर्मचारी संगठनों की ओर से भी सरकार से महंगाई भत्ते की घोषणा जल्द करने की मांग की जा रही है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि त्योहारों के मौसम में कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्तों से जुड़े निर्णय मिलने से उन्हें आर्थिक राहत मिल सकती है।

    रक्षाबंधन और ओणम जैसे त्योहारों को देखते हुए कुछ कर्मचारी संगठनों ने वेतन समय से पहले जारी करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यदि सितंबर में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की योजना है, तो अगस्त के अंत तक इसकी घोषणा की जा सकती है।

    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। संभावित 2 से 3 प्रतिशत वृद्धि की चर्चा के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कैबिनेट कब निर्णय लेती है और संशोधन को किस तारीख से लागू किया जाता है। घोषणा होने के बाद कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते के साथ बकाया राशि के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • इस राखी पुराने गिफ्ट से हटकर बहन की पसंद के अनुसार चुनें स्मार्टवॉच, ज्वेलरी, सेल्फ केयर और पर्सनलाइज्ड तोहफे

    इस राखी पुराने गिफ्ट से हटकर बहन की पसंद के अनुसार चुनें स्मार्टवॉच, ज्वेलरी, सेल्फ केयर और पर्सनलाइज्ड तोहफे


    नई दिल्ली । 
    रक्षाबंधन भाई और बहन के रिश्ते को खास तरीके से मनाने वाला त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी खुशी के लिए उपहार देता है। हर साल एक जैसे कपड़े, चॉकलेट या सामान्य गिफ्ट देने के बजाय इस बार बहन की पसंद, जरूरत और जीवनशैली को ध्यान में रखकर कुछ अलग चुना जा सकता है। ऐसा तोहफा ज्यादा खास होता है, जिसका इस्तेमाल वह रोजमर्रा की जिंदगी में भी कर सके।

    अगर आपकी बहन तकनीक और फिटनेस में दिलचस्पी रखती है, तो स्मार्टवॉच अच्छा विकल्प हो सकती है। बाजार में अलग-अलग फीचर और बजट के अनुसार कई विकल्प मिलते हैं। गिफ्ट खरीदते समय उसकी जरूरत और पसंद को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

    स्टाइल पसंद करने वाली बहन के लिए हैंडबैग उपयोगी और आकर्षक तोहफा हो सकता है। ऑफिस, कॉलेज या रोजाना इस्तेमाल के लिए बैग चुनते समय उसके पसंदीदा रंग, आकार और डिजाइन का ध्यान रखा जा सकता है। ऐसा बैग उसके काम भी आएगा और उसकी पसंद से भी मेल खाएगा।

    स्किन केयर में रुचि रखने वाली बहन को उसकी जरूरत के अनुसार स्किन केयर किट दी जा सकती है। इसमें उसके नियमित इस्तेमाल वाले उत्पाद शामिल किए जा सकते हैं। किसी भी प्रोडक्ट का चुनाव करते समय उसकी पसंद और त्वचा से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    परफ्यूम भी रक्षाबंधन पर दिया जाने वाला क्लासिक गिफ्ट है। अगर आपको बहन की पसंदीदा खुशबू या सुगंध की श्रेणी मालूम है, तो उसके लिए सही परफ्यूम चुनना आसान हो सकता है। पसंद की खुशबू वाला उपहार व्यक्तिगत एहसास भी देता है।

    ज्वेलरी का छोटा और सलीकेदार पीस भी बहन के लिए यादगार तोहफा बन सकता है। ईयररिंग्स, ब्रेसलेट, पेंडेंट या अन्य हल्की ज्वेलरी उसकी पसंद के अनुसार चुनी जा सकती है। रोजाना पहनने वाली डिजाइन चुनने से गिफ्ट का इस्तेमाल भी अधिक हो सकता है।

    अगर बहन संगीत सुनती है या रोजाना यात्रा करती है, तो वायरलेस ईयरबड्स उसके लिए उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। इस तरह का गिफ्ट मनोरंजन के साथ रोजमर्रा की जरूरत को भी पूरा करता है। खरीदते समय उसके फोन और इस्तेमाल की आदतों के अनुरूप विकल्प चुनना बेहतर रहेगा।

    किताब पढ़ने की शौकीन बहन के लिए उसकी पसंद के लेखक या विषय से जुड़ी किताब दी जा सकती है। इसके साथ अपने हाथ से लिखा छोटा संदेश जोड़ने से यह सामान्य गिफ्ट के बजाय व्यक्तिगत यादगार बन सकता है।

    पर्सनलाइज्ड गिफ्ट भी भाई बहन के रिश्ते के लिए खास विकल्प है। फोटो फ्रेम, कस्टम मग, नाम वाली एक्सेसरी या पुरानी यादों से तैयार किया गया छोटा बॉक्स भावनात्मक महत्व रख सकता है।

    सेल्फ केयर पसंद करने वाली बहन के लिए एक छोटा गिफ्ट बॉक्स तैयार किया जा सकता है। इसमें सुगंधित मोमबत्ती, आई मास्क और आराम से जुड़े सामान्य सामान शामिल किए जा सकते हैं। वहीं अगर आप कोई वस्तु नहीं देना चाहते तो उसके साथ पसंदीदा जगह पर डिनर, फिल्म, कैफे या शॉपिंग का प्लान भी बना सकते हैं।

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट की कीमत से ज्यादा उसकी भावना और उपयोगिता मायने रखती है। बहन की पसंद को समझकर चुना गया छोटा सा उपहार भी रिश्ते में अपनापन बढ़ा सकता है। इसलिए इस बार केवल महंगा गिफ्ट चुनने के बजाय ऐसा तोहफा दें, जो उसकी जरूरत और व्यक्तित्व दोनों से जुड़ा हो।

  • रक्षाबंधन मेहंदी डिजाइन, भाई के नाम वाली मेहंदी, भाई बहन मेहंदी डिजाइन, राखी मोटिफ मेहंदी, सिंपल अरेबिक मेहंदी

    रक्षाबंधन मेहंदी डिजाइन, भाई के नाम वाली मेहंदी, भाई बहन मेहंदी डिजाइन, राखी मोटिफ मेहंदी, सिंपल अरेबिक मेहंदी


    नई दिल्ली । 
    रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते की मिठास, अपनापन और प्रेम को खास तरीके से मनाने का अवसर होता है। इस दिन राखी बांधने के साथ सजने संवरने की भी खास तैयारी की जाती है। सावन के मौसम में मेहंदी का रंग त्योहार की रौनक को और बढ़ा देता है। अगर आप इस रक्षाबंधन पर हाथों में ऐसी मेहंदी लगाना चाहती हैं, जो खूबसूरत होने के साथ त्योहार की भावना को भी दर्शाए, तो कुछ खास डिजाइन आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

    भाई के नाम वाली मेहंदी रक्षाबंधन के लिए सबसे खास और भावनात्मक डिजाइन में शामिल की जा सकती है। हथेली के बीच में भाई, भैया या कोई प्यारा संदेश लिखकर उसके चारों ओर फूल और पत्तियों की बेल बनाई जा सकती है। इस डिजाइन को बहुत ज्यादा भरने की जरूरत नहीं होती। हल्की और साफ पैटर्न के साथ यह मेहंदी आकर्षक दिखाई देती है।

    भाई बहन थीम वाली मेहंदी भी इस मौके पर काफी खूबसूरत लगती है। हथेली पर भाई बहन की छोटी सी आकृति या राखी बांधने का दृश्य बनाया जा सकता है। इस तरह की डिजाइन रक्षाबंधन के रिश्ते को सीधे तौर पर प्रदर्शित करती है और सामान्य मेहंदी से अलग दिखाई देती है। जिन लोगों को थीम आधारित डिजाइन पसंद हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

    राखी मोटिफ वाली मेहंदी भी इस बार हाथों पर सजाई जा सकती है। हथेली के बीच में राखी का डिजाइन बनाकर उसके चारों ओर छोटे फूल, पत्तियां और बिंदुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस डिजाइन में रक्षाबंधन की पहचान साफ नजर आती है और इसे अपनी पसंद के अनुसार छोटा या बड़ा रखा जा सकता है।

    अगर आपको ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद नहीं है तो फ्लोरल अरेबिक डिजाइन बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें फूलों और बेलों को तिरछे पैटर्न में सजाया जाता है और हथेली का कुछ हिस्सा खाली रखा जाता है। इससे हाथों को हल्का, आधुनिक और सलीकेदार लुक मिलता है। यह डिजाइन पारंपरिक और आधुनिक अंदाज का संतुलन भी बनाती है।

    मंडला और जाली पैटर्न वाली मेहंदी उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो कम समय में सुंदर डिजाइन चाहती हैं। हथेली के बीच में छोटा मंडला बनाकर उंगलियों पर जाली, पत्तियों या डॉट पैटर्न जोड़ा जा सकता है। यह डिजाइन ज्यादा जटिल नहीं होती और साफ-सुथरे तरीके से बनाई जाए तो काफी आकर्षक दिखाई देती है।

    अगर आपके पास मेहंदी लगाने के लिए ज्यादा समय नहीं है तो केवल उंगलियों और कलाई पर डिजाइन बनवाना भी अच्छा विकल्प है। फिंगर टिप मेहंदी में छोटी बेल, फूल, डॉट्स या ज्यामितीय पैटर्न बनाए जा सकते हैं। यह मिनिमल डिजाइन पारंपरिक त्योहार के साथ आधुनिक लुक भी देती है।

    रक्षाबंधन पर मेहंदी का चुनाव करते समय अपने कपड़ों, आभूषणों और पसंद को ध्यान में रखा जा सकता है। भारी पारंपरिक पोशाक के साथ भरी हुई डिजाइन और हल्के या आधुनिक परिधान के साथ अरेबिक या मिनिमल मेहंदी अच्छी लग सकती है। भाई के नाम या राखी मोटिफ वाली डिजाइन त्योहार की थीम को और खास बना सकती है। सबसे जरूरी है कि डिजाइन ऐसी हो जिसे आसानी से संभाला जा सके और आपके पूरे रक्षाबंधन लुक के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाए।